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शादी के झूठे वादे का बलात्कार के अपराध को आकर्षित करने के लिए यौन क्रिया में शामिल होने के महिला के फैसले से सीधा संबंध होना चाहिए: कर्नाटक हाईकोर्ट
शादी के झूठे वादे का बलात्कार के अपराध को आकर्षित करने के लिए यौन क्रिया में शामिल होने के महिला के फैसले से सीधा संबंध होना चाहिए: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि शादी का झूठा वादा तत्काल प्रासंगिकता का होना चाहिए या बलात्कार के अपराध को आकर्षित करने के लिए यौन क्रिया में शामिल होने के महिला के फैसले से सीधा संबंध होना चाहिए।जस्टिस हेमंत चंदनगौदर की एकल पीठ ने शिवू उर्फ ​​शिव कुमार द्वारा दायर एक याचिका की अनुमति देते हुए और धारा 417, 376, 313, 341, 354, 509, 09, 506 आईपीसी सहपठित धारा 34 और एससी और एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(xi) के तहत दंडनीय अपराधों के तहत लंबित मामले को खारिज करते हुए यह टिप्पणी...

न्यायनिर्णयन प्राधिकारी के निर्णय पर केवल इसलिए संदेह नहीं किया जा सकता क्योंकि यह सरकारी अंग है, पूर्वाग्रह को इंगित करने वाले विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक: कर्नाटक हाईकोर्ट
न्यायनिर्णयन प्राधिकारी के निर्णय पर केवल इसलिए संदेह नहीं किया जा सकता क्योंकि यह सरकारी अंग है, पूर्वाग्रह को इंगित करने वाले विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना है कि यह इंगित करने के लिए विश्वसनीय सबूत होना चाहिए कि आपत्तियों पर ‌निर्णय कर रहा प्राधिकारी पक्षपाती है और निर्णय पर केवल इसलिए सवाल नहीं उठाया जा सकता है क्योंकि अधिकारी सरकार का अंग है।कार्यवाहक चीफ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस जेएम खाजी की खंडपीठ ने सिंगल जज द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती देने वाली फिलिप्स इंडिया लिमिटेड द्वारा दायर एक इंट्रा-कोर्ट अपील को खारिज करते हुए अवलोकन किया, जिसके द्वारा निविदाओं को रद्द करने की मांग वाली रिट याचिका का निपटारा अपीलीय...

NDPS Act: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अभियोजन की कहानी मनगढ़त और फर्जी बताने वाले ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, ट्रायल कोर्ट ने कहा था- साक्ष्य मे विसंगतियां हैं
NDPS Act: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अभियोजन की कहानी 'मनगढ़त और फर्जी' बताने वाले ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, ट्रायल कोर्ट ने कहा था- साक्ष्य मे विसंगतियां हैं

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) ने एनडीपीएस अधिनियम (NDPS Act) की धारा 20 के तहत दर्ज मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ चंडीगढ़ के यूटी प्रशासन द्वारा दायर अपील पर विचार करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सही कहा है कि अभियोजन पक्ष के गवाह विश्वसनीय नहीं हैं और मुहर, नमूने, दस्तावेज आदि से छेड़छाड़ की गई है।ट्रायल कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी कि रिकॉर्ड पर साक्ष्य पुलिस स्टेशन में बैठकर तैयार किए गए प्रतीत होते हैं और अभियोजन की कहानी 'मनगढ़ंत' और 'नकली' है।फैसले को...

राज्य उन शिक्षकों को वेतन देने के लिए बाध्य नहीं जिनकी नियुक्ति शुरू से ही शून्य है: केरल हाईकोर्ट
राज्य उन शिक्षकों को वेतन देने के लिए बाध्य नहीं जिनकी नियुक्ति शुरू से ही शून्य है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि राज्य सरकार केरल शिक्षा नियमों और केरल शिक्षा अधिनियम के उल्लंघन में नियुक्त शिक्षकों को वेतन देने के लिए बाध्य नहीं है।जस्टिस पी.बी. सुरेश कुमार और जस्टिस सीएस सुधा ने कहा कि यदि नियुक्ति कानून की अवहेलना करती है तो यह जिम्मेदार प्रबंधक और सरकार पर शिक्षक को वेतन देने का कोई दायित्व नहीं है।कोर्ट ने कहा,"यदि शिक्षकों को वेतन देने के लिए निर्देश जारी किए जाते हैं, जिनकी नियुक्तियां शुरू से ही शून्य हैं तो यह उन लोगों के लिए प्रीमियम देने के समान होगा...

केरल हाईकोर्ट
लाइसेंस के बिना ड्राइविंग करने वाले व्यक्ति को पता है कि उसके कृत्य से मौत हो सकती है: केरल हाईकोर्ट ने धारा 304 के तहत दोषसिद्धी को 304A IPC के तहत संशोधित करने से इनकार किया

केरल हाईकोर्ट ने माना कि जब अभियुक्त को यह जानकारी है कि उसने जो कार्य किया है, उससे किसी की मृत्यु संभव है और यह जानने के बाद भी वह कार्य करता है और उसके परिणामस्वरूप किसी की मृत्यु हो जाती है, यह धारा 304 भाग II आईपीसी के अंतर्गत आएगा।जस्टिस ए बधारुद्दीन ने धारा 304 ए और धारा 304 भाग II आईपीसी के तहत आने वाले अपराधों के बीच अंतर करते हुए कहा कि जब इरादा या ज्ञान कृत्य की प्रत्यक्ष प्रेरक शक्ति है, आईपीसी की धारा 304 ए को सदोष मानवहत्य के लिए गंभीर और अधिक गंभीर आरोप के लिए जगह बनानी...

दिल्ली हाईकोर्ट
कृपाण पहनने वाले उम्मीदवारों को रिपोर्टिंग समय से एक घंटे पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने के लिए अग्रिम सूचना दी जानी चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट ने डीएसएसएसबी को निर्देश दिए

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कृपाण पहनने वाले उम्मीदवारों को रिपोर्टिंग समय से एक घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचने के लिए अग्रिम सूचना दी जानी।अदालत ने निर्देश दिया कि नोटिस काफी पहले दिया जाना चाहिए ताकि उन्हें कोई परेशानी न हो।जस्टिस रेखा पल्ली ने एक सिख महिला को कारा (Kara) पहनने के कारण डीएसएसएसबी द्वारा आयोजित परीक्षा में बैठने से इनकार करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश...

बॉलीवुड ड्रग्स जांच: एनसीबी ने जमा किया ड्राफ्ट चार्ज, आरोपी ने सुशांत सिंह राजपूत को अत्यधिक नशा करने के लिए उकसाया
बॉलीवुड ड्रग्स जांच: एनसीबी ने जमा किया ड्राफ्ट चार्ज, आरोपी ने सुशांत सिंह राजपूत को "अत्यधिक नशा करने" के लिए उकसाया

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने दावा किया कि अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोइक और अन्य लोगों ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को अत्यधिक मादक पदार्थों की लत लगाने में मदद की और उसे नशा करने के लिए उकसाया।विशेष एनडीपीएस अदालत के समक्ष दायर ड्राफ्ट चार्ज में एनसीबी ने चक्रवर्ती और 34 अन्य पर बॉलीवुड में विभिन्न ड्रग्स की खरीद, बिक्री, परिवहन और वितरण के लिए आपराधिक साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है।एनसीबी ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग मामले की जांच की है।एनसीबी ने...

दिल्ली हाईकोर्ट
[वैवाहिक विवाद] पूरे परिवार के खिलाफ मनगढ़ंत आरोपों को अनुमति देने से कानून की प्रक्रिया का और दुरुपयोग हो सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया है कि वैवाहिक विवादों में पूरे परिवार के खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगाने से कानून की प्रक्रिया का और अधिक दुरुपयोग हो सकता है।जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने कहा, "यदि वैवाहिक विवादों और मतभेदों के दौरान पूरे परिवार के खिलाफ गढ़े गए सर्वव्यापी आरोपों द्वारा झूठे आरोप लगाने की अनुमति दी जाती है, तो इससे कानून की प्रक्रिया का और अधिक दुरुपयोग हो सकता है और यह गंभीर रूप धारण कर सकता है।"कोर्ट ने आईपीसी की धारा 182, 192, 195, 203, 389, 420, 469, 470, 471, 500, 120बी और 34 के तहत...

केंद्र सरकार ने गैर-अधिसूचित खानाबदोश जनजातियों को देश की मुख्यधारा में लाने के लिए कदम उठाए हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
केंद्र सरकार ने गैर-अधिसूचित खानाबदोश जनजातियों को देश की मुख्यधारा में लाने के लिए कदम उठाए हैं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया कि केंद्र सरकार द्वारा गैर-अधिसूचित खानाबदोश जनजातियों को देश की मुख्यधारा में लाने के लिए कदम उठाए गए हैं।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने उस जनहित याचिका का निपटारा किया, जिसमें उचित योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी ताकि गैर-अधिसूचित खानाबदोश और अर्ध-घुमंतू जनजातियों के प्रत्येक सदस्य को भारत के संविधान में गारंटीकृत मौलिक अधिकार प्राप्त हो।याचिकाकर्ता का यह मामला था कि गैर-अधिसूचित घुमंतू जनजाति,...

गुजरात हाईकोर्ट
जमीयत उलमा-ए-हिंद ने गुजरात के स्कूलों में भगवद गीता की अनिवार्य शिक्षा के खिलाफ जनहित याचिका दायर की, गुजरात हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा

गुजरात हाईकोर्ट ने जमीयत उलमा-ए-हिंद की याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में राज्य सरकार के एक प्रस्ताव को चुनौती दी गई थी, जिसमें स्कूलों में भगवद गीता को प्रार्थना कार्यक्रम के रूप में शामिल किया गया है और इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा जनहित याचिका में राज्य के शिक्षा विभाग द्वारा पारित प्रस्ताव को चुनौती दी गई है जिसमें श्रीमद्भगवद गीता के मूल्यों और सिद्धांतों / उपदेशों को शैक्षणिक वर्ष 2022-23 से कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों को प्रार्थना...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जगद्गुरु परमहंस की धर्मदंड और भगवा वस्त्र के साथ ताजमहल में प्रवेश की मांग वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जगद्गुरु परमहंस की 'धर्मदंड' और 'भगवा वस्त्र' के साथ ताजमहल में प्रवेश की मांग वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को जगद्गुरु परमहंस आचार्य द्वारा आगरा ताजमहल परिसर में धर्मदंड (लकड़ी से बने) के साथ 'भगवा वस्त्र' पहनकर प्रवेश करने की अनुमति मांगने वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा।जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मामले को 5 सितंबर को आगे की सुनवाई के लिए पोस्ट करते हुए भारत संघ और राज्य सरकार से चार सप्ताह के समय में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।याचिका के बारे में संक्षेपजगद्गुरु परमहंस आचार्य (याचिकाकर्ता नंबर एक)...

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम तब आकर्षित नहीं होता जब अपराध इस इरादे से नहीं किया गया हो कि पीड़ित एक विशेष जाति की है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम तब आकर्षित नहीं होता जब अपराध इस इरादे से नहीं किया गया हो कि पीड़ित एक विशेष जाति की है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जज जस्टिस सुब्बा रेड्डी सत्ती की सिंगल जज बेंच ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420, 376 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के धारा 3 (2) (V), 3 (1)(w), 3(1)(r)(s), 3(2)(v), 3(2) (va) के तहत दंडनीय अपराधों के आरोपी को जमानत दे दी।पीठ ने कहा कि जब कथित अपराध इस इरादे से नहीं किया जाता है कि पीड़ित किसी विशेष जाति से संबंधित है, तो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधान आकर्षित नहीं होंगे।वास्तविक शिकायतकर्ता...

क्या राइफल एसोसिएशन के सदस्यों को एक बार में दो से अधिक बंदूकें रखने की अनुमति दी जा सकती है? दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
क्या राइफल एसोसिएशन के सदस्यों को एक बार में दो से अधिक बंदूकें रखने की अनुमति दी जा सकती है? दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने उस रिट याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है जिसमें सवाल उठाया गया है कि क्या राइफल एसोसिएशन के सदस्य को एक समय में दो से अधिक बंदूकें रखने की अनुमति है।जॉइन्ट पुलिस कमिश्नर लाइसेंसिंग, दिल्ली के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका के मद्देनजर जस्टिस यशवंत वर्मा के समक्ष यह प्रश्न सुनवाई के लिए लाा गया। इसमें एसोसिएशन के सदस्य को आर्म्स (संशोधन) एक्ट, 2019 के अनुसार तीन बंदूकों में से एक को वापस करने का निर्देश दिए जाने की मांग की गई है।संक्षेप में मामले के तथ्य यह हैं कि...

आरोपी से पुलिस थाने में हाजिरी दर्ज करने को कहना महज औपचारिकता नहीं, जांच अधिकारी के लिए जांच करने का मौका है: बॉम्बे हाईकोर्ट
आरोपी से पुलिस थाने में हाजिरी दर्ज करने को कहना महज औपचारिकता नहीं, जांच अधिकारी के लिए जांच करने का मौका है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने कहा कि किसी आरोपी पर अदालत द्वारा लगाई गई "पुलिस उपस्थिति" की शर्त केवल औपचारिकता नहीं है। पुलिस द्वारा उचित जांच के लिए इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।जस्टिस एस जी मेहरे ने आपराधिक धमकी और खतरनाक हथियारों से चोट के मामले में अग्रिम जमानत की मांग को लेकर दायर आवेदन की अनुमति देते हुए उक्त टिप्पणी की।न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन यह समझाने में विफल रहा कि पुलिस ने हथियार क्यों नहीं बरामद किया जब आरोपी अदालत के अंतरिम संरक्षण के तहत पुलिस थाने में उपस्थित था।अदालत...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
पीसी एक्ट तहत लोक सेवक पर मुकदमा चलाने की मंजूरी ना हो तो अभियोजन एजेंसी समान तथ्यों पर अन्य दंड कानूनों के तहत चालान दायर नहीं कर सकती: जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्र‌ियों की जांच करने के बाद जब एक बार इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि आरोपी लोक सेवक के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है और वह राय सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकार की जाती है, तब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत अपराधों को छोड़कर और अन्य दंड प्रावधानों के तहत अपराधों को केवल चालान तक सीमित करके आरोपी लोक सेवक के खिलाफ तथ्यों के एक ही सेट पर चालान दायर करने का विकल्प जांच एजेंसी के पास नहीं...

नाबालिग को कुत्तों ने नोंच कर मार डाला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवजा देने का प्रस्ताव दिया, लखनऊ नगर निगम से जवाब मांगा
नाबालिग को कुत्तों ने नोंच कर मार डाला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवजा देने का प्रस्ताव दिया, लखनऊ नगर निगम से जवाब मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ में 20 से अधिक आवारा कुत्तों द्वारा हमला किए जाने के बाद आठ वर्षीय लड़के की मौत हो गई और उसकी बहन गंभीर रूप से घायल हो जाने की घटना से संबंधित स्वत: संज्ञान मामले पर सुनवाई करते हुए लखनऊ नगर निगम को हलफनामा फाइल करने के लिए कहा गया। इस हलफनामा में कोर्ट ने नगर निगम को यह बताने के लिए कहा है कि मृत बच्चे के परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवज़ा क्यों नहीं दिया जा सकता।जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने लखनऊ नगर निगम को सड़क पर कुत्तों से...

झारखंड हाईकोर्ट
स्कूल परिसर में नाबालिग छात्र का शव : झारखंड हाईकोर्ट ने 2016 के मर्डर केस की सीबीआई को पुन: जांच' करने का निर्देश दिया

झारखंड हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह सातवीं कक्षा के एक छात्र की 2016 की हत्या के मामले की पुन: जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित कर दी। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने जोर देकर कहा कि अदालत असाधारण स्थिति में एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच का निर्देश दे सकती है। कोर्ट ने आदेश में कहा," ऐसे मामले में जहां एक 16 साल के बच्चे की स्कूल परिसर में हत्या कर दी गई है और एक गरीब पिता न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि यह स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुन: जांच का मामला...