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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सहस्त्रधारा रोड के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक हटाई; सरकार को पेड़ लगाने का निर्देश दिया
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मसूरी की ओर जाने वाले सहस्त्रधारा मार्ग में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए '2057 पेड़ों की संख्या' को प्रस्तावित काटने की अनुमति दे दी।चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ ने इस कदम को रोकने के लिए याचिकाकर्ता द्वारा दायर स्थगन आवेदन में राहत से इनकार करते हुए कहा,"किस सड़क को विकसित या विस्तारित किया जाना चाहिए, यह नीतिगत निर्णय का मामला है। न तो याचिकाकर्ता को यह दावा करने का निहित अधिकार है कि प्रतिवादी को एक नीति तैयार करनी चाहिए जो वह उचित समझे...
यदि निर्धारिती क्रिप्टो करेंसी अकाउंट स्टेटमेंट जमा करने में विफल रहता है तो पुनर्मूल्यांकन नोटिस को चुनौती नहीं दी जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि यदि निर्धारिती क्रिप्टो करंसी अकाउंट के लेनदेन का ब्योरा आयकर विभाग को जमा करने में विफल रहता है तो पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) नोटिस को चुनौती नहीं दी जा सकती।जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने कहा कि क्रिप्टो करंसी में व्यापार का सत्यापन करने के लिए केवल बैंक लेनदेन पर्याप्त नहीं हैं। निर्धारिती को विभाग के समक्ष संबंधित लेज़र स्टेटमेंट प्रस्तुत करना चाहिए था, जो यह प्रमाणित करता हो कि उसने क्रिप्टो करेंसी के व्यापार शुरु किया था...
गुजरात हाईकोर्ट ने बलात्कार की एफआईआर दर्ज न करने पर पुलिस इंस्पेक्टर के खिलाफ अवमानना कार्रवाई से इनकार किया
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में संज्ञेय अपराध के बारे में सूचना प्राप्त होने पर एफआईआर दर्ज करने के लिए ललिता कुमार बनाम यूपी राज्य में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करने में कथित रूप से विफल रहने के लिए पुलिस इंस्पेक्टर के खिलाफ अवमानना याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।चीफ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष शास्त्री की पीठ ने कहा:"न केवल प्रतिवादी के खिलाफ बल्कि प्रभारी पुलिस अधिकारी और एक दूसरे के सह-आरोपी के खिलाफ भी शिकायत दर्ज की गई। इस तरह, ऐसा प्रतीत होता है कि आवेदक की शिकायत...
दिल्ली हाईकोर्ट ने बीसीआई को न्यूनतम बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे लॉ कॉलेज का औचक दौरा करने के लिए विशेष टीमों का गठन करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को निर्देश दिया कि वह उन लॉ कॉलेजों का औचक दौरा करने के लिए विशेष विशेषज्ञ टीमों का गठन करे, जहां न्यूनतम बुनियादी ढांचे और पर्याप्त सुविधाओं की कमी है।जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने कहा कि इस तरह के निरीक्षण के एक महीने के भीतर लॉ कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी।कोर्ट ने कहा,"अगर इस तरह के निरीक्षण पर किसी भी कॉलेज में न्यूनतम आधारभूत सुविधाओं की कमी पाई जाती है तो बीसीआई को ऐसे कॉलेजों को बंद करने के लिए...
कर्मचारी निर्धारित समय सीमा या लाभों की स्वीकृति के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के लिए किए गए आवेदन को वापस नहीं ले सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने कहा कि एक बार कर्मचारियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के तहत लाभों को स्वीकार कर लिया है, तो कर्मचारियों के लिए योजना को चुनौती देने के लिए खुला नहीं है।कोर्ट ने कहा कि वे राशि वापस लेने के बाद भी यह तर्क नहीं दे सकते कि उन्हें अपनी रोजगार सेवाओं को जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए।इस सिद्धांत को दोहराते हुए, जस्टिस बीरेन वैष्णव ने लेबर के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें अदालत ने पाया था कि कर्मचारियों ने वीआरएस के लिए अपने आवेदन...
मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज की ओर से रिजल्ट में देरी के खिलाफ आठ लॉ छात्रों ने हाईकोर्ट का रुख किया
मुंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई (जीएलसी) के आठ छात्रों ने अपने अंतिम सेमेस्टर के रिजल्ट घोषित करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) के समक्ष एक रिट याचिका दायर की है।एडवोकेट अजिंक्य उडाने के माध्यम से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि याचिकाकर्ताओं के परिणाम बाकी छात्रों के साथ घोषित नहीं किए गए। याचिका के अनुसार, मुंबई विश्वविद्यालय के अन्य चौंसठ छात्रों को भी इसी तरह के मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है।याचिका में कहा गया है,"रिजल्ट को समय पर घोषित करने में...
राज्य द्वारा संचालित स्कूल विभिन्न कक्षाओं में प्रवेश के लिए पात्रता मानदंड निर्धारित कर सकते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार के तहत आने वाले स्कूलों सहित हर स्कूल को अपने लिए निर्धारित मानकों को बनाए रखने की स्वतंत्रता और स्वायत्तता है।जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने कहा कि विभिन्न कक्षाओं में प्रवेश के लिए पात्रता मानदंड निर्धारित करना मनमाना या अवैध नहीं कहा जा सकता और उक्त विवेक उस स्कूल या किसी अन्य प्राधिकरण के पास है जिसके तहत स्कूल स्थित है।अदालत दिल्ली सरकार द्वारा 27 जुलाई, 2022 को जारी सर्कुलर की वैधता को चुनौती देने वाली नाबालिग लड़की के पिता द्वारा दायर याचिका पर विचार कर रही...
सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को हाईकोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत करने का प्रस्ताव| इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने न्यायिक कार्य से दूर रहने का फैसला लिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कुछ वकीलों को हाईकोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत करने के प्रस्ताव के विरोध में आज और कल दोपहर के भोजन के बाद न्यायिक से दूर रहने का फैसला किया है, जो कथित तौर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस नहीं कर रहे हैं।इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आज एक अधिसूचना जारी की गई जिसमें बताया गया कि उसने न्यायिक कार्य से दूर रहने का फैसला किया है और इस संबंध में अदालत से सहयोग मांगा है।यह अधिसूचना अवध बार एसोसिएशन, लखनऊ द्वारा 2 दिनों के लिए न्यायिक कार्य...
हाईकोर्ट की पुनर्विचार की शक्ति कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के प्रावधानों द्वारा परिचालित नहीं: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि हाईकोर्ट कर्मचारी मुआवजा अधिनियम जैसे कानून से बंधा नहीं है, बल्कि यह संविधान से बंधा है और इसलिए 1923 के अधिनियम में निहित अधिकार क्षेत्र की सीमाएं हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर लागू नहीं होती है।जस्टिस संजय धर की पीठ एक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता-अपीलकर्ताओं ने कोर्ट द्वारा पारित निर्णय और आदेश पर पुनर्विचार की मांग की थी, जिसमें कर्मकार मुआवजा अधिनियम, 1923 (सहायक श्रम आयुक्त), जम्मू के तहत आयुक्त...
अदालतों में मुकदमों की बाढ़, बेतुकी याचिकाओं के लिए समय नहीं, राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रासंगिक तथ्यों को छुपाने पर 25 लाख का जुर्माना लगाया
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि कोई भी नागरिक, जिसके अधिकारों का किसी भी प्राधिकरण या किसी व्यक्ति द्वारा उल्लंघन किया गया है, उसके पास अदालतों में जाकर उपचार पाने का अधिकार है, हालांकि, महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाकर ऐसे अधिकार का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।अदालत ने कहा कि वादी जो किसी भी फोरम के समक्ष कोई मामला दायर करता है, उसे साफ हाथों से आना होता है और उसे अदालत के समक्ष पूरे तथ्यों का खुलासा करना होता है। जस्टिस अशोक कुमार गौड़ ने याचिकाकर्ता को राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण...
अनुच्छेद 227 | साक्ष्य का पुनर्मूल्यांकन और खुद के निष्कर्षों को केवल इसलिए प्रतिस्थापित करना कि दूसरा दृष्टिकोण संभव है, उचित नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने दोहराया कि हाईकोर्ट के लिए यह उचित नहीं कि वह संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए साक्ष्य का पुनर्मूल्यांकन करे और इस प्रकार खुद के विचारों को निचली अदालतों द्वारा व्यक्त किए विचारों के स्थान पर केवल इस आधार पर प्रतिस्थापित करे कि दूसरा या वैकल्पिक दृष्टिकोण संभव है।जस्टिस कृष्ण राम महापात्र की पीठ याचिका, जिसमें सबूतों के पुनर्मूल्यांकन की मांग की गई थी, को खारिज़ करते हुए कहा, "यह न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत मामले पर विचार कर रहा है।...
एनडीपीएस एक्ट | जब्त किए गए प्रतिबंधित पदार्थ की मात्रा निर्धारित करते समय न्यूट्रल पदार्थ के वजन को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा कि यदि जब्त की गई प्रतिबंधित सामग्री नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के प्रावधानों के अंतर्गत आती है, तो जब्त की गई मात्रा की प्रकृति का निर्धारण करते समय न्यूट्रल पदार्थ के वजन को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, चाहे वह छोटी मात्रा, वाणिज्यिक हो।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अमित शर्मा की खंडपीठ एक याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें अधिनियम के तहत एक मादक पदार्थ के न्यूनतम प्रतिशत से संबंधित मुद्दे के संबंध में एकल न्यायाधीश की पीठ...
जिरह के दरमियान पूछे गए प्रश्नों की प्रासंगिकता दलीलों और प्रतिद्वंद्वी स्टैंड से संबंधित, न कि ऐसे स्टैंड की मेरिट सेः दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि जबकि यह जांच हो रही हो कि कोई विशेष प्रश्न, जिसे पक्ष गवाह के समक्ष रखना चाहता है, वह प्रासंगिक है या अप्रासंगिक, प्रतिद्वंद्वी स्टैंड की मेरिट एक भौतिक विचार नहीं हो सकती।जस्टिस सी हरि शंकर ने कहा, "प्रासंगिकता या अप्रासंगिकता का निर्णय, जिस प्रश्न को पूछा जा रहा है, उसे पार्टियों की दलीलों और प्रतिद्वंद्वी स्टैंड के विपरीत रखकर किया जाना है, न कि ऐसे स्टैंड की मेरिट के संबंध में....।"मौजूदा कार्यवाही बेदखली की एक याचिका के संबंध में पैदा हुई थी, जिसे दिल्ली...
2018 के ट्वीट्स का मामला| अन्य ट्वीट्स के विश्लेषण के लिए अभी भी ज़ुबैर के उपकरण की जांच हो रही है: दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया
दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के उपकरणों का फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, रोहिणी में विश्लेषण किया जा रहा है। उन्हें 2018 के एक ट्वीट के संबंध में जब्त किया गया था। विश्लेषण पूरा होने के बाद वह निचली अदालत से संपर्क कर उन्हें सुपरदारी पर वापस पा सकते हैं।पुलिस ने बताया कि जब्त किए गए उपकरणों से मोहम्मद जुबैर द्वारा किए गए 2018 के ट्वीट और "इसी तरह के अन्य ट्वीट्स" के संबंध में डेटा को रिकवर किया जाना है और उनका विश्लेषण किया जाना...
हाईकोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव 2022 के आयोजन के लिए डीयू को ईवीएम उपलब्ध कराने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) को 28 सितंबर को होने वाले दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) चुनाव 2022 के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) प्रदान करने का निर्देश दिया।जस्टिस संजीव नरूला ने कहा कि मतदान के समय ईवीएम के संचालन के लिए प्रतिनियुक्त डीयू के कर्मचारियों को डीएचसीबीए द्वारा पूर्ण शिष्टाचार प्रदान किया जाएगा।कोर्ट ने यह भी कहा कि डीएचसीबीए चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि डीयू के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को किसी भी अप्रिय घटना या परिस्थितियों का सामना न करना...
जमीयत उलमा-ए-हिंद ने वक्फ अधिनियम के उल्लंघन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया
सामाजिक धार्मिक संगठन जमीयत उलमा-ए-हिंद ने वक्फ अधिनियम, 1995 के विभिन्न प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता और एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने नोटिस जारी किया और प्रतिवादियों से अभियोग आवेदन में जवाब मांगा, जबकि मामले को 4 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया, जो पहले से तय तारीख है।कोर्ट ने सेंट्रल वक्फ काउंसिल...
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म, यौन पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा के लिए POCSO न्यायालयों को निर्देश जारी किए
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में विशेष पॉक्सो अदालतों को कई निर्देश जारी किए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जांच या मुकदमे के दरमियान पीड़ित बच्चे की पहचान का खुलासा न हो सके।जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376 और पोक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत एक आरोपी को बरी करने के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से दायर अपील पर विचार करते हुए ये निर्देश जारी किए।अभियुक्त के पक्ष में बरी करने के आदेश को बरकरार रखते हुए, अदालत ने मामले में निचली...
[पेंशन] घाटे में चल रहे सांविधिक संगठनों के कर्मचारी लाभ कमाने वाले निगमों के कर्मचारियों के साथ समानता की तलाश नहीं कर सकते: त्रिपुरा हाईकोर्ट
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने हाल ही में देखा कि वैधानिक संगठनों के कर्मचारी अधिकार के रूप में पेंशन लाभ का दावा नहीं कर सकते, जैसा कि कुछ निगमों को प्रदान किया गया है, जो राज्य सरकार से एकमुश्त समर्थन के साथ अपना स्वयं का धन उत्पन्न करने में सक्षम हैं।जस्टिस अरिंदम लोध ने त्रिपुरा सड़क परिवहन निगम, त्रिपुरा चाय विकास निगम, त्रिपुरा पुनर्वास और वृक्षारोपण निगम, त्रिपुरा हथकरघा और हस्तशिल्प विकास निगम, त्रिपुरा अनुसूचित जनजाति, सहकारी विकास निगम, त्रिपुरा लघु उद्योग निगम, त्रिपुरा जूट मिल्स, त्रिपुरा...
दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO मामले में खराब आचरण पर एसएचओ के निलंबन की सिफारिश करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने कालकाजी पुलिस स्टेशन के एसएचओ (State House Officer) को निलंबित करने की सिफारिश करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। इसके साथ ही यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के तहत दर्ज मामले में पीड़िता को पेश न करने पर उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की।जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने 25 नवंबर तक आदेश पर रोक लगा दी, यह देखते हुए कि निलंबन का आदेश अनुशासनात्मक प्राधिकरण के क्षेत्र में आता है और संबंधित एसएचओ को अवसर दिए बिना इसकी सिफारिश की...
दिल्ली हाईकोर्ट ने एफसीआरए के तहत अभियोजन शुरू होने से पहले अपराधों की कंपाउंडिंग के लिए केंद्र की 2013 की अधिसूचना की वैधता बरकरार रखी
दिल्ली हाईकोर्ट ने 26 अप्रैल, 2013 की गृह मंत्रालय की अधिसूचना की वैधता बरकरार रखी, जिसमें विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 की धारा 41(1) के तहत जारी किसी भी अभियोजन की संस्था से पहले अपराधों को कम करने के लिए सक्षम अधिकारियों को निर्दिष्ट किया गया है।उक्त प्रावधान में कहा गया कि एफसीआरए अधिनियम के तहत दंडनीय कोई भी अपराध, जो केवल कारावास से दंडनीय अपराध नहीं है, किसी भी अभियोजन की संस्था से पहले ऐसे अधिकारियों द्वारा और ऐसी रकम के लिए कंपाउंड किया जा सकता है, जो केंद्र सरकार द्वारा जारी...

















![[पेंशन] घाटे में चल रहे सांविधिक संगठनों के कर्मचारी लाभ कमाने वाले निगमों के कर्मचारियों के साथ समानता की तलाश नहीं कर सकते: त्रिपुरा हाईकोर्ट [पेंशन] घाटे में चल रहे सांविधिक संगठनों के कर्मचारी लाभ कमाने वाले निगमों के कर्मचारियों के साथ समानता की तलाश नहीं कर सकते: त्रिपुरा हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/09/16/500x300_435292-tripurahighcourt.jpg)

