मुख्य सुर्खियां
योग्य पत्नी का नौकरी करने की इच्छा व्यक्त करना क्रूरता नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि काम करने की इच्छा व्यक्त करने वाली पत्नी को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत क्रूरता नहीं माना जाता।जस्टिस अतुल चंदुरकर और जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के की डिवीजन बेंच फैमिली कोर्ट के पति को तलाक देने से इनकार करने के खिलाफ अपील पर इस आधार पर सुनवाई कर रही थी कि क्रूरता साबित नहीं होती।पति का तर्क था कि उसकी पत्नी नौकरी करने की इच्छा जाहिर कर शादी के बाद से ही उससे झगड़ रही है और उसे प्रताड़ित कर रही है। आरोप लगाया गया कि उसने उसे परेशान करना जारी रखा और अंततः...
सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत फोरम संपत्ति के स्वामित्व के दावों पर फैसला नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया कि माता-पिता और सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007) के तहत मंच या प्राधिकरण पक्षकारों के नागरिक और संपत्ति अधिकारों से संबंधित मुद्दों के संबंध में निर्णय नहीं ले सकते और न ही ट्रायल कर सकते हैं।जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा कि संपत्ति में स्वामित्व के दावे के संबंध में प्रश्न अधिनियम के तहत कार्यवाही में विचार या निर्णय का विषय नहीं बन सकता।कोर्ट ने 26 सितंबर को पारित आदेश में कहा,"2007 अधिनियम...
पीठासीन जज को सीआरपीसी धारा 432(2) के तहत सजा से माफी पर अपनी राय में पर्याप्त कारण बताना आवश्यक: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि सजा देने वाली अदालत के पीठासीन अधिकारी को माफी के आवेदन पर राय देते समय पर्याप्त कारण बताना चाहिए। जस्टिस संजय के अग्रवाल की पीठ ने कहा कि सजा देने वाली अदालत के पीठासीन अधिकारी की राय में अपर्याप्त कारण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 (2) की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करेंगे।अदालत ने कहा कि धारा 432 (2) सीआरपीसी का उद्देश्य कार्यकारी को सभी प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए एक सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाना है।उल्लेखनीय है कि सीआरपीसी की धारा 432...
मध्यस्थता को लागू करने की परिसीमा अवधि सहमति से नहीं बढ़ाई जा सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि मध्यस्थ की नियुक्ति के लिए सहमति देने वाले मध्यस्थता खंड (Arbitration Clause) को लागू करने वाले नोटिस के जवाब में विरोधी पक्षकार द्वारा दिया गया बयान, मध्यस्थता को लागू करने के लिए परिसीमा अवधि का विस्तार नहीं करेगा, यदि दावेदार द्वारा किए गए दावे पूर्व दृष्टया कालबाधित हैं।जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की एकल पीठ ने कहा कि कानूनी उपाय लागू करने की परिसीमा अवधि सहमति से भी नहीं बढ़ाई जा सकती। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पक्षकार किसी भी समय दावा स्वीकार कर सकता।...
एएंडसी एक्ट की धारा 11 के तहत पारित निर्णय/आदेश पर पुनर्विचार की अनुमति नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि ए एंड सी एक्ट की धारा 11 के तहत पारित आदेश/निर्णय पर पुनर्विचार की अनुमति नहीं है। जस्टिस आर रघुनंदन राव की खंडपीठ ने कहा कि पुनर्विचार की शक्ति कानून का विषय है, और किसी कानून में इस प्रकार के प्रावधान के अभाव में किसी आदेश/निर्णय पर पुनर्विचार उसके गुणदोष के आधार पर नहीं की जा सकता है, जब तक कि यह कुछ प्रक्रियात्मक अनियमितता के लिए न हो।कोर्ट ने माना कि ए एंड सी एक्ट स्पष्ट रूप से या निहितार्थ में, धारा 11 के तहत पारित किसी आदेश पर पुनर्विचार की...
भारतीय बैंकिंग संस्थाएं अपनी विदेशी ब्रांच की चिंताओं के लिए बकाया राशि की वसूली के लिए "लुक आउट सर्कुलर" का अनुरोध नहीं कर सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने लुक आउट सर्कुलर जारी करने पर हाल ही में कहा कि भारतीय बैंकों द्वारा अपनी विदेशी सहयोगी कंपनियों के बकाया की वसूली के लिए लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) का अनुरोध नहीं किया जा सकता।जस्टिस रामचंद्र राव और जस्टिस हरकेश मनुजा की खंडपीठ ने इस तर्क को खारिज करते हुए कि ये गतिविधियां भारत के आर्थिक हितों को प्रभावित करती हैं, कहा कि मौजूदा मामले में भारत के आर्थिक हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है।खंडपीठ ने कहा,"ऐसी बात कैसे हो सकती है अगर विदेशी निगमित कंपनी मेसर्स...
केवल केस हारने पर वादी अपने वकील पर धोखाधड़ी के लिए मुकदमा नहीं कर सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने वकील के खिलाफ उसके मुवक्किल द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 406 और धारा 420 के तहत दायर शिकायत यह कहकर खारिज कर दी कि वकील के खिलाफ सिर्फ इसलिए मामला नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि उसने केस में सुप्रीम कोर्ट से अनुकूल आदेश प्राप्त नहीं किया।जस्टिस सूरज गोविंदराज की सिंगल जज बेंच ने के एस महादेवन की याचिका को मंजूर करते हुए कहा,"वकील केवल पेश हो सकता है और मामले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर सकता है। कोई भी वकील न तो यह कह सकता है या न ही यह कह सकता है कि उसे अनुकूल...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच का गठन किया, सीनियर सिटीजन को राहत दी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर खंडपीठ ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत (Transit Anticipatory Bail) की मांग वाली सीनियर सिटीजन कपल की याचिका पर सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच पीठ का गठन किया।आवेदक अपने विरुद्ध जिला ललितपुर (यू.पी.) में दर्ज एक शिकायत मामले के संबंध में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा अपनी गिरफ्तारी की आशंका जता रहा थे।यह देखते हुए कि आवेदक वरिष्ठ नागरिक और सम्मानित डॉक्टर हैं, जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने उनके मामले को ट्रांजिट अग्रिम जमानत देने के लिए उपयुक्त पाया, जिससे उन्हें अग्रिम जमानत देने के लिए...
ईद-ए-मिलाद जुलूस को मंजूरी देने में राज्य पुलिस की कथित निष्क्रियता को चुनौती देते हुए मिलाद कमेटी के अध्यक्ष ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया
अहमदाबाद की ईद मिलादुन्नबी (केंद्रीय) कमेटी के अध्यक्ष ने 9/10 अक्टूबर को प्रस्तावित ईद-ए-मिलाद जुलूस को मंजूरी देने में राज्य पुलिस की कथित निष्क्रियता को चुनौती देते हुए गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) का रुख किया है।अपनी याचिका में, याचिकाकर्ता [ईद मिलादुन्नबी (केंद्रीय) समिति के अध्यक्ष परवेज] ने कहा है कि जुलूस निकालने के लिए समिति का प्रतिनिधित्व स्थानीय पुलिस अधिकारियों के समक्ष लंबित है, और जूलूस को मंजूरी देने में उनकी निष्क्रियता भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 28 का उल्लंघन...
बीसीआई ने "एक बार, एक वोट" नीति को लागू करने की मांग पर राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (जयपुर) के चुनाव पर रोक लगाई
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने राजस्थान राज्य में राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के आगामी चुनावों में "एक बार, एक वोट" के सिद्धांत को लागू करने की मांग पर हुए सचिव, बार काउंसिल ऑफ राजस्थान, सचिव, राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को नोटिस जारी किया है। बार काउंसिल ने निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जयपुर बेंच के हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के आगामी चुनावों और किसी भी अन्य बार एसोसिएशन के चुनावों पर भी रोक लगाने का निर्देश दिया।बार काउंसिल ने देखा कि, "चुनाव के दौरान अनियंत्रित, अभद्र...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को औद्योगिक प्रोत्साहन प्रदान करने वाली योजना को जीएसटी के अनुरूप बनाने का निर्देश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को औद्योगिक प्रोत्साहन प्रदान करने वाली योजना को जीएसटी के अनुरूप बनाने का निर्देश दिया है।जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य की एकल पीठ ने कहा कि मामले में वैध अपेक्षा का मुद्दा शामिल है और इसलिए, न्यायालय ने उद्योग, वाणिज्य और उद्यम विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार और वित्त विभाग को उद्योगों के लिए जीएसटी के अनुरूप प्रोत्साहन प्रदान करने वाली योजना बनाने का निर्देश दिया।2010 तक संशोधित 'पश्चिम बंगाल राज्य उद्योग सहायता योजना, 2008' कुछ औद्योगिक इकाइयों को औद्योगिक प्रोत्साहन...
दिल्ली सरकार को मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 के तहत राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण का गठन करना है, मौजूदा पैनल जारी नहीं रखा जा सकता: हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस रुख को खारिज करते हुए कि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 के तहत गठित राज्य मानसिक स्वास्थ्य सेवा प्राधिकरण मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 के तहत काम करना जारी रख सकता है, कहा कि नए अधिनियम की धारा 45 संबंधित आवश्यक है। राज्य सरकारें नौ महीने की अवधि के भीतर नए निकाय - राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण [SMHA] का गठन करेंगी।जस्टिस यशवंत वर्मा ने 23 सितंबर के आदेश में कहा कि अधिनियम, 2017 के अनुसार दिल्ली सरकार द्वारा एसएमएचए का गठन किया जाना बाकी है। अदालत से यह...
यदि गुमशुदा व्यक्ति रिपोर्ट में अवैध कस्टडी का आरोप नहीं है तो हैबियस कार्पस याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने हाल ही में ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Plea) का निपटारा करते हुए कहा कि उन मामलों में जहां 'अवैध कस्टडी' के आरोप के अभाव में 'गुमशुदा व्यक्ति की रिपोर्ट' पहले ही दायर की जा चुकी है तो संबंधित मजिस्ट्रेट से संपर्क करना उचित विकल्प होगा।याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत राजस्थान हाईकोर्ट के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर अपनी बड़ी बेटी को अदालत में पेश करने की मांग की थी।याचिका की सामग्री से पता चलता है कि याचिकाकर्ता द्वारा...
एलोपैथिक और आयुर्वेदिक डॉक्टरों के लिए अलग-अलग सेवानिवृत्ति की आयु निर्धारित करना भेदभावपूर्ण, असंवैधानिक: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने राजस्थान सरकार की एक अधिसूचना को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि एलोपैथिक और आयुर्वेदिक डॉक्टरों के लिए अलग-अलग सेवानिवृत्ति की आयु निर्धारित करना भेदभावपूर्ण, असंवैधानिक है।अधिसूचना ने केवल चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के डॉक्टरों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी और आयुर्वेदिक, चिकित्सा विभाग, यूनानी, होम्योपैथी और प्राकृतिक चिकित्सा डॉक्टरों को इसके अधिदेश से बाहर कर दिया था।अधिसूचना और उसके लाभों से वंचित होने से...
एक राज्य का हाईकोर्ट दूसरे हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में दर्ज मामले में ट्रांजिट जमानत दे सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि एक राज्य का हाईकोर्ट दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 के तहत शक्ति के प्रयोग में दूसरे हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में दर्ज मामले के संबंध में ट्रांजिट जमानत दे सकता है।कोर्ट ने कहा,"हाईकोर्ट की ओर से ट्रांजिट अग्रिम जमानत देने में कोई बंधन नहीं है ताकि आवेदक उच्च न्यायालयों सहित न्यायालयों का दरवाजा खटखटा सकें जहां अपराध का आरोप लगाया गया है और मामला दर्ज किया गया है।"इसके साथ ही जस्टिस राजेश सिंह चौहान की खंडपीठ ने महाराष्ट्र में दर्ज एक मामले...
नियोक्ता 'काम नहीं तो वेतन' के सिद्धांत पर किसी कर्मचारी के बरी होने के खिलाफ आपराधिक अपील की लंबितता का हवाला देते हुए वेतन से इनकार नहीं कर सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने हाल ही में कहा कि नियोक्ता 'काम नहीं तो वेतन' के सिद्धांत पर किसी कर्मचारी के बरी होने के खिलाफ आपराधिक अपील की लंबितता का हवाला देते हुए वेतन से इनकार नहीं कर सकता।जस्टिस मंगेश एस. पाटिल और जस्टिस संदीप वी. मार्ने की खंडपीठ ने निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने के बावजूद महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के वेतन का भुगतान नहीं करने के फैसले को चुनौती देने वाली रिट याचिका में याचिकाकर्ता को वापस वेतन और सेवा की निरंतरता प्रदान की।अदालत ने कहा,"सिर्फ...
नियमित जमानत की मांग करने वाले व्यक्ति को अदालत की कस्टडी में होना चाहिए, जिसे फिजिकल कस्टडी में रखने की आवश्यकता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जमानत अर्जी दाखिल करते समय आरोपी का फिजिकल कस्टडी में होना अनिवार्य नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर आरोपी फिजिकल कस्टडी से बाहर है, लेकिन उसकी स्वतंत्रता अदालत द्वारा लगाई गई शर्तों के अधीन है यानी आरोपी क्रिएटिव कस्टडी में है तो वह नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकता है।जस्टिस सौरभ विद्यार्थी की पीठ ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 और 120 बी के तहत आरोपों का सामना कर रहे जितेंद्र को नियमित जमानत देते हुए इस प्रकार कहा। कोर्ट ने कहा कि उसका नाम...
[सीपीसी] लिखित प्रश्नों का उद्देश्य विवादों को संकीर्ण करना है, वादी द्वारा सबूतों के बोझ को प्रतिस्थापित करने के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि वादी द्वारा प्रासंगिक साक्ष्य जोड़कर चीजों को साबित करने के अपने बोझ को प्रतिस्थापित करने के लिए यह कहते हुए लिखित प्रश्नों का उपयोग नहीं किया जा सकता है कि इसका उद्देश्य विवाद को संकीर्ण करना और विवादित तथ्यों के बारे में मुद्दों को तैयार करने की सुविधा प्रदान करना है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने आगे कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 का आदेश 11 नियम 1 वाद की सुनवाई में तेज़ी लाने के लिए है, जिससे न्यायिक समय और मुकदमेबाजी की लागत में बचत होती है।अदालत ने कहा,...
कोर्ट के कर्मचारियों द्वारा केरल क्रिमिनल रूल्स ऑफ प्रैक्टिस का पालन न करना शिकायतकर्ता या किसी भी पक्ष को सूट न करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं: हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने इस सवाल पर विचार किया कि क्या अदालत के कर्मचारियों द्वारा केरल क्रिमिनल रूल्स ऑफ प्रैक्टिस का पालन न करना शिकायतकर्ता या किसी भी पक्ष को सूट न करने के लिए पर्याप्त आधार होगा, और इसका उत्तर नकारात्मक में दिया।जस्टिस ए. बधारुद्दीन ने कहा,"यह स्थापित कानून है कि अदालत द्वारा की गई गलती अदालत के समक्ष पीड़ित पक्ष को मुकदमा न करने के रास्ते में नहीं खड़ी होगी। कहावत 'एक्टस क्यूरी नेमिनेम ग्रेवाबिट' उक्त सिद्धांत का प्रतीक है। ऐसी स्थिति में, न्यायालय गलत को...
सरफेसी एक्ट लागू करने के बाद भी यदि अकाउंट में धोखाधड़ी की गई तो बैंक आपराधिक कार्रवाई शुरू कर सकता है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) किसी कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ बैंक द्वारा दर्ज शिकायत की जांच कर सकता है, जिसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है, यहां तक कि सरफेसी अधिनियम (SARFAESI Act) के तहत वसूली प्रमाण पत्र कार्यवाही शुरू करने के बाद भी कर सकता है।अदालत ने कहा,"इस न्यायालय ने फिर से कई मामलों में स्पष्ट रूप से माना कि जब बैंक द्वारा ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र का उपयोग किया जाता है, जब तक कि ऐसी कार्रवाई को धोखाधड़ी घोषित नहीं किया जाता है,...




















