मुख्य सुर्खियां
सजा से ज्यादा दिनों तक जेल में रखने के एवज में मांगा मुआवजा, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को ये कहते हुए वापस जेल भेजा कि रिहाई गलती से हुई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति की सजा से ज्यादा दिनों तक जेल में बंद रखने पर मुआवजे की मांग वाली याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि उसे गलती से जल्दी रिहा कर दिया गया था। इस तथ्य का पता चलने पर अदालत ने उसे जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया ताकि वह सजा के शेष हिस्से को पूरा कर सके।चीफ जस्टिस रवि मलीमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ एक व्यक्ति द्वारा दायर रिट याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें अत्यधिक कारावास के लिए राज्य से 10 लाख रुपये का मुआवजा मांगा...
पीएफआई गिरफ्तारियां: एफआईआर की कॉपी दी गई, रिमांड आवेदन की प्रति नहीं दी जा सकती, इसमें गोपनीय जानकारी है: दिल्ली हाईकोर्ट में एनआईए ने कहा
दिल्ली हाईकोर्ट में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को कहा कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के कथित सदस्यों के खिलाफ दर्ज मामले में एफआईआर और गिरफ्तारी के आधार की प्रति हाल ही में एजेंसी द्वारा किए गए एक छापे में गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद यूसुफ को प्रदान की गई।एनआईए की ओर से पेश हुए विशेष लोक अभियोजक ने हालांकि रिमांड आवेदन की प्रति मांगने वाली प्रार्थना पर इस आधार पर आपत्ति जताई कि इस तरह की राहत मांगने के लिए उपयुक्त मंच निचली अदालत है न कि हाईकोर्ट।जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता की पीठ...
रेप केस में आरोपियों के पक्ष में डीएनए टेस्ट रिपोर्ट अंतिम सत्य नहीं, डॉक्टर से क्रॉस एग्जामिनेशन जरूरी: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि डीएनए टेस्ट रिपोर्ट का बलात्कार के मामले में आरोपी के पक्ष में आना कोई ठोस सबूत (Gospel Truth) नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो जाएगी।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने आपराधिक कार्यवाही के खिलाफ आरोपी की याचिका खारिज करते हुए कहा:"यदि आरोपी के खिलाफ डीएनए टेस्ट रिपोर्ट पॉजीटिव आती है तो यह उसके खिलाफ आगे की कार्यवाही के लिए ठोस सबूत का गठन करेगा। यदि रिपोर्ट निगेटिव आती है तो अन्य सामग्रियों का वजन और रिकॉर्ड पर सबूत की पुष्टि के लिए उस पर...
वेलनेस थेरेपिस्ट या टिंडर डेट? कर्नाटक हाईकोर्ट ने ऑनलाइन धोखाधड़ी की आरोपी महिला के खिलाफ कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को सोशल मीडिया सहित ऑनलाइन सर्विस की पेशकश करने वाले डॉक्टर को रोकने के लिए कुछ नियामक उपाय बनाने चाहिए।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश की पीठ ने कहा,"यह सार्वजनिक डोमेन में है कि सोशल मीडिया यानी इंस्टाग्राम, ट्विटर या फेसबुक पर तथाकथित डॉक्टरों की बड़ी संख्या है, जैसा कि जिस भी मेडिकल फिल्म का मामला होगा, डॉक्टर उसमें खुद को पेश करते हैं। यह सार्वजनिक डोमेन में भी है कि वे सभी झोलाछाप डॉक्टर हैं, जो "इंस्टाग्राम पर लोगों को प्रभावित करने वाले" हैं।अदालत...
महिला की गरिमा का सार उसकी लैंगिकता, केवल गंदी या अभद्र भाषा का उपयोग को उसकी गरिमा का हनन नहीं कहा जा सकता: दिल्ली कोर्ट
दिल्ली की एक कोर्ट ने यह देखते हुए कि एक महिला की गरिमा का "सार" (Essence of woman's modesty) उसकी लैंगिकता (Sex) है, कहा कि भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 509 के अर्थ में अपमानजनक या गंदी भाषा का उपयोग को किसी महिला की गरिमा का हनन नहीं माना जा सकता है।तीस हजारी अदालतों के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट देवांशु सजलान ने कहा कि किसी महिला की गरिमा का हनन हुआ है या नहीं, यह पता लगाने का अंतिम परीक्षण यह है कि यह जांच की जाए कि क्या अपराधी की कार्रवाई ने उसकी शालीनता की भावना को झकझोर दिया या नहीं।अदालत...
प्रतिवादी द्वारा विवादित नहीं होने पर ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन की वैधता पर न्यायालय स्वत: संज्ञान नहीं ले सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी ट्रेडमार्क के रजिस्ट्रेशन की वैधता पर सवाल उठाने के लिए अदालत के लिए यह खुला नहीं है कि क्या उक्त मार्क विवादित नहीं है या प्रतिवादी द्वारा मुकदमे में लाया गया है।जस्टिस विभू बाखरू और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने कहा कि व्यापार ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 की धारा 9 रजिस्ट्रेशन के बाद के चरण में किसी भी वैधानिक अवरोध को शामिल नहीं करती। खंडपीठ ने कहा कि ट्रेडमार्क के रजिस्ट्रेशन की वैधता को मुद्दे में नहीं लाया जाता है, यह सांविधिक धारणा है कि मार्रक वैध हैं। इसे...
धारा 119 साक्ष्य अधिनियम | मद्रास हाईकोर्ट ने मूक-बधिर गवाहों की जांच के लिए सिद्धांत निर्धारित किए
मद्रास हाईकोर्ट ने एक आपराधिक अपील में दिए फैसले में भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 119 के तहत ऐसे गवाहों, जो बोलने में असमर्थ हैं, के परीक्षण से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांत निर्धारित किए हैं।उल्लेखनीय है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 119 के अनुसार, यदि कोई गवाह बोल नहीं सकता है, तो वह किसी भी तरीके से साक्ष्य दे सकता है जिससे वह समझने योग्य हो सके, जैसे लिखित या खुले न्यायालय में संकेतों द्वारा, ऐसे साक्ष्य को मौखिक साक्ष्य माना जाएगा।भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 119 के प्रावधान में...
मद्रास हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के खिलाफ कथित तौर पर नारे लगाने वाले 13 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस रद्द किया
मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के खिलाफ कथित तौर पर नारे लगाने वाले 13 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला रद्द किया।जस्टिस जी के इलांथिरैया की पीठ ने पूनमल्ली में न्यायिक मजिस्ट्रेट नंबर II की फाइल पर लंबित आपराधिक मामले की पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया, जो प्रतिवादी पुलिस द्वारा कथित विरोध प्रदर्शन के लिए आईपीसी की धारा 143, 188 और 117 के तहत दर्ज प्राथमिकी से उत्पन्न हुई थी।कार्यवाही को रद्द करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि पुलिस अधिकारी आईपीसी की धारा 188 के...
[सीनियर सिटीजन एक्ट] अपीलीय प्राधिकारी को बेदखली आदेश पर रोक लगाने की मांग करने वाले आवेदन से निपटने के लिए कौन से कारकों पर विचार करने की आवश्यकता है? दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाब दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने बेदखली के आदेश के खिलाफ लंबित अपील में स्थगन की मांग करने वाले आवेदन से निपटने के दौरान सीनियर सिटीजन एक्ट, 2007 के तहत अपीलीय प्राधिकारी द्वारा विचार किए जाने वाले विभिन्न कारकों को निर्धारित किया है।जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा कि ऐसे मामलों में अपीलीय प्राधिकारी को उन साक्ष्यों की प्रकृति पर विचार करना होगा, जो ट्रिब्यूनल के समक्ष रखे गए हैं, जिसने उसे बेदखली का आदेश पारित करने के लिए बाध्य किया।अदालत ने कहा कि यदि अपीलीय प्राधिकारी को पता चलता है कि बेदखली का आदेश सीनियर...
पत्नी को उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ समाप्त करने के लिए मजबूर करना क्रूरता होगी: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ समाप्त करने के लिए मजबूर करना क्रूरता होगी। आगे कहा कि मातृत्व हर महिला के लिए सहज, स्वाभाविक और संतोषजनक है।जस्टिस रितु बाहरी और जस्टिस निधि गुप्ता की खंडपीठ ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत एक पत्नी की तरफ से दायर तलाक की मांग वाली याचिका पर फैसला सुनाया और इस प्रकार, तलाक के डिक्री द्वारा 2012 में संपन्न पक्षों के विवाह को खत्म कर दिया।जस्टिस बाहरी और जस्टिस गुप्ता की पीठ ने कहा कि पत्नी को अपने पति के आग्रह पर...
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने 20 दिनों में 2000 से अधिक मामलों का निपटारा किया
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने हाल ही में केवल 20 कार्य दिवसों में 2000 से अधिक मामलों का निपटारा किया।जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जे सत्य नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामलों में यह त्वरित निर्णय दिया।पीठ ने 5 सितंबर को अपनी बैठक के बाद से 2085 मामलों का निपटारा किया। इनमें से 938 मुख्य मामले थे जिनमें 776 रिट याचिकाएं, 147 रिट अपील और 1147 विविध मामले शामिल थे।पीठ ने उन मामलों का भी निपटारा किया जो छह साल से अधिक समय से लंबित थे। रिपोर्टों के अनुसार पीठ ने पुराने और नए मामलों का निपटारा करते हुए...
केरल हाईकोर्ट ने एक वरिष्ठ नागरिक को स्पर्म फ्रीजिंग कराने की अनुमति दी, सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत आयु-सीमा के खिलाफ दायर की थी याचिका
केरल हाईकोर्ट ने एक उल्लेखनीय आदेश में हाल ही में 61 वर्ष की आयु के एक वरिष्ठ नागरिक को इस तथ्य पर विचार करते हुए कि वह एक दुर्लभ हृदय रोग से पीड़ित है, अपने शुक्राणु के साइक्रो प्रिजर्वेशन (cycro-preservation)की अनुमति दी।जस्टिस वीजी अरुण की एकल पीठ ने सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन अधिनियम 2021) के तहत आयु सीमा के खिलाफ एक व्यक्ति और उसकी 39 वर्षीय पत्नी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर विचार करते हुए यह अंतरिम राहत दी।याचिकाकर्ताओं, जो एक निःसंतान दंपति हैं, उन्होंने रिट याचिका दायर कर यह...
एससी/एसटी एक्ट| स्पेशल कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने का आदेश धारा 14A के तहत हाइकोर्ट के समक्ष अपील योग्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए विशेष न्यायालय द्वारा जमानत देने/अस्वीकार करने का आदेश 1989 अधिनियम की धारा 14 ए के तहत हाईकोर्ट के समक्ष अपील योग्य है।जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि विशेष अदालत आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार करती है, तो वह 1989 के अधिनियम की धारा 14 ए के तहत हाईकोर्ट के समक्ष जमानत से इनकार करने के आदेश के खिलाफ अपील कर सकता है, हालांकि, यह विकल्प उसके पास नहीं होगा कि...
पति ने धोखाधड़ी से तलाक की एक-पक्षीय डिक्री प्राप्त की, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उसे 50 हजार रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में यह जानने के बाद कि तलाक की एक पक्षीय डिक्री पाने के लिए उसे गुमराह किया गया है, एक व्यक्ति को अपने वेतन से 50 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। अदालत ने उसे चार सप्ताह के भीतर राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के पास रुपये जमा करने का आदेश दिया।दरअसल, पति पत्नी के साथ रहता था और उसने उसे अंधेरे में रखते हुए गलत तरीके से उसका हस्ताक्षर प्राप्त किया था। उसने पत्नी से कहा कि किसी केस के सिलसिले में हस्ताक्षर की आवश्यकता है, और उस हस्ताक्षर के जरिए वह एक पक्षीय तलाक...
संयुक्त उद्यम में शामिल सदस्य व्यक्तिगत क्षमता से मध्यस्थता खंड लागू नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि जहां पार्टियों द्वारा एक कंजॉर्टियम/ज्वाइंट वेंचर बनाकर एक समझौता किया जाता है, कंजोर्टियम के सदस्यों में से एक अलग से अपनी व्यक्तिगत क्षमता में मध्यस्थता समझौते को लागू नहीं कर सकता है।जस्टिस मिनी पुष्कर्ण की एकल पीठ ने दोहराया कि जब एक कंजोर्टियम के साथ समझौता होता है तो पार्टियों का यह इरादा कभी नहीं होता कि कंजोर्टियम के सदस्यों में से एक अलग से मध्यस्थता खंड को लागू कर सकता है।प्रतिवादी- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने परामर्शी सेवाएं...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (3 अक्टूबर, 2022 से 7 अक्टूबर, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।जब कार्यवाही दूसरी जगह लंबित हो तो यूएपीए के तहत मुकदमे की मंजूरी देने के प्राधिकरण के आदेश को दिल्ली में सिर्फ इसलिए चुनौती नहीं दी जा सकती क्योंकि गृह मंत्रालय दिल्ली में है: दिल्ली हाईकोर्टदिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने फैसला सुनाया कि जब कार्यवाही दूसरी जगह लंबित हो तो यूएपीए के तहत मुकदमे...
'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में रामायण को आपत्तिजनक तरीके से चित्रित नहीं किया जा सकता': 'आदिपुरुष' प्रोमो के खिलाफ दिल्ली की अदालत में याचिका
दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर कर आगामी फिल्म 'आदिपुरुष' की वर्तमान रूप में रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि इसके निर्माताओं द्वारा जारी किए गए प्रोमो ने हिंदू देवताओं, भगवान राम और भगवान हनुमान को गलत तरीके से चित्रित करके हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।तीस हजारी कोर्ट में एडवोकेट राज गौरव द्वारा दायर याचिका में फिल्म के निर्माता और निर्देशक को टीज़र से कथित आपत्तिजनक हिस्से को यूट्यूब और फेसबुक सहित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का...
केरल हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश के खिलाफ टिप्पणी को लेकर फिल्म निर्देशक बैजू कोट्टाराक्कारा के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की
केरल हाईकोर्ट ने मलयालम फिल्म निर्देशक बैजू कोट्टाराक्कारा के खिलाफ नौ मई को निचली अदालत के न्यायाधीश के खिलाफ समाचार चैनल चर्चा के दौरान अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए अवमानना की कार्यवाही शुरू की, जो 2017 अभिनेता के अपहरण और हमले के मामले की सुनवाई कर रहे हैं।56 वर्षीय निदेशक को रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से भेजे गए ड्राफ्ट चार्ज में हाईकोर्ट ने कहा कि उनकी टिप्पणी "उस न्यायाधीश की विशेषता है, जो ट्रायल करता है और न्यायपालिका को भी बदनाम करता है।"यह आरोप लगाते हुए कि फिल्म निर्देशक ने समाचार...
भारत के चुनाव आयोग ने उद्धव और शिंदे ग्रुप को अंतिम निर्णय तक "शिवसेना" नाम और प्रतीक का उपयोग करने से रोक दिया
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने शनिवार को एक अंतरिम आदेश पारित किया, जिसमें निर्देश दिया गया कि एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे दोनों ग्रुप "शिवसेना" या प्रतीक "धनुष और तीर" का उपयोग तब तक नहीं करेंगे जब तक कि आधिकारिक मान्यता के लिए प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावों पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता। आयोग ने आदेश दिया है कि एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे ग्रुप को अलग-अलग प्रतीक आवंटित किए जाएंगे क्योंकि वे स्वतंत्र प्रतीकों की सूची में से चुन सकते हैं। दोनों समूहों को उनके द्वारा चुने जाने वाले नामों से जाना जाएगा,...
"बच्चे का बलात्कार वासना का सबसे बुरा रूप, इससे ज्यादा अश्लील, बर्बर कुछ भी नहीं": पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दोषी की अपील खारिज की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 9 साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या के आरोपी को दोषी ठहराने के निचली अदालत के फैसले को पलटने से इनकार करते हुए हाल ही में कहा कि बच्चों के बलात्कार के मामले वासना के सबसे खराब रूप हैं, जहां लोग यौन सुख की खोज में बच्चों को भी नहीं बख्शते।इस बात पर जोर देते हुए कि इससे ज्यादा अश्लील, शैतानी और बर्बर कुछ नहीं हो सकता, कोर्ट ने कहा,"यह न केवल समाज के खिलाफ बल्कि पूरी मानवता के खिलाफ एक अपराध है। इस तरह के कई मामलों को इस तथ्य के कारण प्रकाश में नहीं लाया जाता कि इसमें...









![[सीनियर सिटीजन एक्ट] अपीलीय प्राधिकारी को बेदखली आदेश पर रोक लगाने की मांग करने वाले आवेदन से निपटने के लिए कौन से कारकों पर विचार करने की आवश्यकता है? दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाब दिया [सीनियर सिटीजन एक्ट] अपीलीय प्राधिकारी को बेदखली आदेश पर रोक लगाने की मांग करने वाले आवेदन से निपटने के लिए कौन से कारकों पर विचार करने की आवश्यकता है? दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाब दिया](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/10/10/500x300_438483-delhihc.jpg)










