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विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में ई-एफआईआर दर्ज करने की संभावना तलाशें: उड़ीसा हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया
उड़ीसा हाईकोर्ट ने सोमवार को पुलिस डायरेक्टर जनरल, ओडिशा (डीजीपी) को राज्य में 'ई-प्रथम सूचना रिपोर्ट (ई-एफआईआर)' के रजिस्ट्रेशन की संभावना तलाशने का निर्देश दिया।जस्टिस संजीब कुमार पाणिग्रही की एकल न्यायाधीश पीठ उस महिला द्वारा दायर आपराधिक विविध याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने अपनी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज न करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।राज्य के लिए अतिरिक्त सरकारी वकील शैलजा नंदन दास ने प्रस्तुत किया कि इस बीच उक्त शिकायत को एफआईआर के रूप में दर्ज कर लिया गया। इसलिए अदालत ने...
"14 जिलों के जल निकायों से अतिक्रमण 4 सप्ताह में हटाएं, अब तक उठाए गए कदमों से संतुष्ट हैं": पटना हाईकोर्ट ने अधिकारियों से कहा
पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने पटना, मगध और सारण प्रमंडल (14 से अधिक जिलों पर नियंत्रण रखने वाले) के सर्कल अधिकारियों (सीओ) को निर्देश दिया है कि वे 4 सप्ताह के भीतर अपने संबंधित क्षेत्रों में जल निकायों के अतिक्रमण को हटा दें।संबंधित 14 जिले पटना, नालंदा, भोजपुर, रोहतास, बक्सर, कैमूर, गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, सारण, सीवान और गोपालगंज हैं।चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने सभी 14 जिलों के सर्किल अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए उठाए गए कदमों के संबंध...
क्या हम ऐसे समाज को देख रहे हैं जिसमें बिल्कुल सही बच्चे हों? दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रूण में असामान्यताओं पर एमटीपी मामलों में नैतिक चिंताओं पर कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने मस्तिष्क संबंधी असामान्यताओं से पीड़ित 33 सप्ताह से अधिक के अपने भ्रूण के मेडिकल टर्मिनेशन की मांग करने वाली 26 वर्षीय विवाहित महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को भ्रूण में असमानताएं होने पर मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी की मांग करने वाले ऐसे ही मामलों में "नैतिक चिंताओं" पर विचार किया।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए तकनीक के उपयोग पर कहा कि भ्रूण में असामान्यताओं का पता लगाने की तकनीक भविष्य में और उन्नत हो सकती है, जिसमें डीएनए प्रोफाइलिंग...
भले ही सहमति मान ली गई हो, नाबालिग की मेडिकल जांच के अनुसार इच्छा मौजूद नहीं थी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को जमानत देने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 375 के अनुसार 'बलात्कार' की परिभाषा को ध्यान में रखते हुए हाल ही में कहा कि अगर इच्छा गैर-मौजूद हो तो पीड़िता की ओर से सहमति होने पर भी बलात्कार का अपराध बनता है।उल्लेखनीय है कि आईपीसी की धारा 375 के तहत दी गई 7 परिस्थितियों में संभोग बलात्कार का गठन कर सकता है और ऐसी परिस्थितियां एक-दूसरे से स्वतंत्र होती हैं, जिसका अर्थ है कि अगर सात परिस्थितियों में से एक भी पूरी हो जाती है तो एक कृत्य बलात्कार की श्रेणी में आ सकता है।इस पृष्ठभूमि के मद्देनजर यह देखते हुए...
अगर ट्रायल कोर्ट ने कानून द्वारा निर्धारित 'न्यूनतम सजा' दी है तो अपीलीय अदालत सजा को कम नहीं कर सकती: सिक्किम हाईकोर्ट
सिक्किम हाईकोर्ट ने एक फैसले में दोहराया कि दोषियों पर कानून द्वारा निर्धारित न्यूनतम सजा लगाई जानी चाहिए और अपीलीय अदालत इसे कम नहीं कर सकती है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को अपराध के लिए दोषी ठहराते समय अदालतें कानून द्वारा निर्धारित 'न्यूनतम सजा' से कम सजा नहीं दे सकती हैं। जस्टिस मीनाक्षी मदन राय और जस्टिस भास्कर राज प्रधान की खंडपीठ ने फैसले के समर्थन में मो हासिम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य का हवाला दिया।संक्षिप्त तथ्यअपीलकर्ता को आईपीसी की धारा 376(2)(एन) और 376(3)...
'नौकरी से हटाना यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करने का आधार नहीं बन सकता': कर्नाटक हाईकोर्ट ने पोस्ट मास्टर के खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न का केस खारिज किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक पोस्ट मास्टर के खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न के मामले को खारिज कर दिया है। पोस्ट मास्टर पर पुलिस ने 2018 में एक अस्थायी ग्रुप-डी कर्मचारी द्वारा दायर की गई शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। जस्टिस के. नटराजन की पीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (ए) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका को स्वीकार कर लिया। पीठ ने कहा, ''सिर्फ पोस्ट ऑफिस के प्रभारी अधिकारी ने कर्मचारी को सेवा से हटा दिया, यह खुद शिकायत दर्ज करने और...
लंबे समय तक प्रारंभिक जांच भ्रष्टाचार के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को तब तक प्रभावित नहीं करती जब तक कि अभियुक्त अपने प्रति पूर्वाग्रह नहीं दिखाता: जेएंडकेएंडएल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक फैसले में कहा कि केवल इसलिए कि शुरुआती जांच को पूरा होने में लंबा समय लगा है, भ्रष्टाचार के मामले में शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को दूषित नहीं कहा जा सकता, खासकर तब जब जांच अधिकारी पर जांच के कारण किसी पूर्वाग्रह का आरोप नहीं लगाया गया है।जस्टिस संजय धर ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार-रोधी (सीबीआई मामले), कश्मीर द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें याचिकाकर्ता और सह-आरोपी के...
लखीमपुर खीरी कांड: निचली अदालत ने आरोपी आशीष मिश्रा को डिस्चार्ज करने की याचिका खारिज की, आरोप मंगलवार को तय होंगे
खीरी जिला अदालत (यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में) ने सोमवार को लखीमपुर खीरी में किसान हत्याओं के संबंध में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के पुत्र आशीष मिश्रा द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी। आशीष ने इस याचिका में डिस्चार्ज करने की प्रार्थना की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत मंगलवार को आशीष मिश्रा के खिलाफ आरोप तय करेगी।यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रायल कोर्ट को आरोप तय करने के लिए मामले को तय करने के लिए कहने के कुछ दिनों बाद आया है।यह अपराध 3 अक्टूबर, 2021 को हुआ था, जब कई किसान उत्तर...
[धारा 138 एनआई एक्ट] ट्रस्ट को पक्षकार बनाए बिना ट्रस्ट के प्रभारी को अभियुक्त के रूप में आरोपित नहीं किया जा सकता: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि एक 'ट्रस्ट' के इनचार्ज को चेक डिसऑनर के मामले में अभियुक्त के रूप में पक्षकार नहीं बनाया जा सकता है, यदि ट्रस्ट खुद अधिनियम की धारा 141 के अनुसार पक्षकार के रूप में आरोपित नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि धारा 141 चेक डिसऑनर के मामलों में कंपनियों की देनदारियों को निर्धारित करती है।याचिकाकर्ता जो की एक ट्रस्ट के महासचिव हैं, उनके खिलाफ जारी संज्ञान के आदेश को रद्द करते हुए जस्टिस गौरीशंकर सतपथी की खंडपीठ ने कहा,"...याचिकाकर्ता के चेक के हस्ताक्षरकर्ता न होने पर कोई...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'बिलावजह की जल्दबाजी' में वकीलों के घर को गिराने और बार सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के प्रशासनिक कृत्य की अलोचना की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में अमेठी जिला प्रशासन को जिला बार एसोसिएशन के सदस्यों के खिलाफ लगातार एफआईआर दर्ज करने और बिना नोटिस दिए उनकी स्वामित्व वाली इमारतों को ध्वस्त करने पर फटकार लगाई।जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की पीठ ने कहा,"एफआईआर दर्ज करना, विध्वंस करना और यहां तक कि याचिकाकर्ता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, पूर्व पदाधिकारियों और सदस्यों के खिलाफ यूपी बार काउंसिल से शिकायत करना... एक सप्ताह से भी कम समय में, न केवल जिला प्रशासन की ओर से बिलावजह की जल्दबाजी...
आईपीसी की धारा 467 के तहत जालसाजी अभियोजन के लिए मार्कशीट 'मूल्यवान सुरक्षा' नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि आईपीसी की धारा 467 के तहत जालसाजी अभियोजन के लिए मार्कशीट 'मूल्यवान सुरक्षा (Valuable Security)' नहीं है।जस्टिस सुजॉय पॉल ने कहा,"महेंद्र कुमार शुक्ला (सुप्रा) के मामले में डिवीजन बेंच ने श्रीनिवास पंडित धर्माधिकारी बनाम महाराष्ट्र राज्य (1980) 4 SCC 551 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित अनुपात निर्णय का पालन किया है और यह माना है कि मार्कशीट आईपीसी की धारा 467 के तहत एक 'मूल्यवान सुरक्षा' नहीं है। मैं उपरोक्त फैसले से बाध्य हूं और उक्त फैसले की...
ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन के लिए 'प्री-सेट शेड्यूल' रखने पर विचार करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (एआईबीई) की अगली निर्धारित तिथि के बारे में सूचित करने का निर्देश दिया। यह एक्जाम पिछली बार 30 अक्टूबर, 2021 को आयोजित की गई थी।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने बीसीआई को एआईबीई के संचालन के लिए "पूर्व निर्धारित कार्यक्रम" पर विचार करने के लिए भी कहा ताकि द्विवार्षिक एग्जाम की तारीखों के बारे में अनिश्चितता को हल किया जा सके और अस्थाई रूप से नामांकित वकील तदनुसार तैयारी कर सकें।इस बात को ध्यान में रखते हुए कि...
'भक्ति में कोई राजनीति नहीं': कर्नाटक हाईकोर्ट ने नए मंदिर से पुराने जीर्ण-शीर्ण परिसर में भगवान की मूर्ति को स्थानांतरित करने की मांग कर रहे पक्षकारों से सिविल कोर्ट जाने को कहा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने चित्रदुर्ग जिले में नवनिर्मित कामसागर बीरालिंगेश्वर और हिंड मल्लिकार्जुनस्वामी मंदिर से देवता को वापस पुराने जीर्ण-शीर्ण मंदिर में स्थानांतरित करने के खिलाफ दायर याचिका पर निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया।न्यायालय ने हालांकि सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यथास्थिति का आदेश दिया और पक्षकारों से कहा कि वे नए भवन में देवता के बने रहने या सक्षम सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर पुराने मंदिर में स्थानांतरित करने के अपने अधिकारों की मांग करें।जस्टिस एम नागप्रसन्ना पार्टी की...
'विस्तार से सुनवाई योग्य': दिल्ली हाईकोर्ट ने विदेशी मुद्रा लेनदेन को विनियमित करने के लिए 'यूनिफॉर्म बैंकिंग कोड' की मांग वाली जनहित याचिका पर आरबीआई से जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एडवोकेट और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से जवाब मांगा, जिसमें विदेशी मुद्रा लेनदेन के लिए "यूनिफ़ॉर्म बैंकिंग कोड" लागू करने की मांग की गई है।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने यह देखते हुए कि मामला विस्तृत सुनवाई के योग्य है, आरबीआई को नोटिस जारी किया और आदेश दिया कि याचिका के दस्तावेजों का पूरा सेट उसके सरकारी वकील को सौंप दिया जाए।केंद्र की ओर से पेश...
ट्रेडमार्क उल्लंघन: दिल्ली हाईकोर्ट ने सदर बाजार के व्यापारी को लुई वुइटन प्रोडक्ट्स बेचने के मामले में अवमानना का दोषी ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने सदर बाजार के एक व्यापारी को अवमानना का दोषी ठहराया है क्योंकि उसने प्रसिद्ध फ्रांसीसी लक्जरी ब्रांड लुई वुइटन के बेल्ट को बेचना जारी रखकर अपने प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन किया था।जस्टिस सी. हरि शंकर ने 2 दिसंबर के आदेश में कहा कि अंसारी बेल्ट हाउस का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने इस तथ्य को स्वीकार किया है कि 23 सितंबर के आदेश में अंतरिम निर्देश पारित होने के बावजूद, व्यापारी ने उल्लंघनकारी प्रोडक्ट्स बेचना जारी रखा।जस्टिस शंकर ने कहा,"प्रतिवादी 2 को इस...
ट्राई अधिनियम के तहत TDSAT के विशेष क्षेत्राधिकार के भीतर मामलों के संबंध में मध्यस्थता वर्जित: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 के तहत मध्यस्थता उन मामलों के संबंध में वर्जित है, जो भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण अधिनियम, 1997 (ट्राई) के तहत दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (TDSAT) के विशेष अधिकार क्षेत्र में हैं।जस्टिस एन नागरेश ने कहा कि ट्राई अधिनियम विशेष कानून है और मध्यस्थता अधिनियम पर प्रबल होगा, जो सामान्य कानून है।कोर्ट ने कहा,"भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 1997 एक बाद की क़ानून है और दूरसंचार क्षेत्र के लिए विशेष रूप...
सफल अभियोजन पुलिस जांच की गुणवत्ता पर आधारित है, अभियुक्त की निरंतर हिरासत की अवधि बढ़ाने पर नहीं: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए कहा
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने दोहराया कि कानून की अदालत में एक आपराधिक मामले का एक सफल अभियोजन जांच के दौरान किसी संदिग्ध या अभियुक्त की निरंतर हिरासत की अवधि बढ़ाने पर आधारित नहीं है।जस्टिस राहुल भारती की बेंच ने कहा,"न्यायालय में एक आपराधिक मामले का सफल अभियोजन अपराध करने वाले मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के संबंध में पुलिस जांच की गुणवत्ता पर आधारित होता है, न कि किसी संदिग्ध या अभियुक्त की निरंतर हिरासत अवधि बढ़ाने पर। एक जांच प्राधिकरण तथ्यात्मक आधार पर यह दिखाने और प्रदर्शित करने...
सार्वजनिक कानून के तत्व वाले निजी व्यक्ति और सार्वजनिक निकाय के बीच वाणिज्यिक लेनदेन के लिए रिट क्षेत्राधिकार लागू किया जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का रिट अधिकार क्षेत्र निजी व्यक्तियों और सार्वजनिक निकायों के बीच सामान्य वाणिज्यिक लेनदेन से जुड़े मामलों के लिए भी लागू है, जब तक कि उक्त वाणिज्यिक लेनदेन में सार्वजनिक कानून का कुछ तत्व शामिल है।जस्टिस आई.पी. मुखर्जी और जस्टिस बिस्वरूप चौधरी की खंडपीठ ने यूको बैंक के साथ इस तरह के वाणिज्यिक लेनदेन को चुनौती देने वाली रिट याचिका की पोषणीयता पर याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय लेते हुए कहा:"यहां तक कि निजी व्यक्ति और सार्वजनिक...
'कैंसर का इलाज अमीर और गरीब के लिए समान रूप से वहन करने योग्य होना चाहिए': कर्नाटक हाईकोर्ट ने कैंसर रोधी 42 दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर 30% की सीमा बरकरार रखी
कर्नाटक हाईकोर्ट ने रसायन और उर्वरक मंत्रालय द्वारा जारी 2019 के आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें 42 कैंसर रोधी दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर 30% की सीमा लगाई गई है।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने हेल्थकेयर ग्लोबल एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए कहा,"भारत में कैंसर रोगियों को भारी खर्च करना पड़ता है और कैंसर की दवाओं को कुछ हद तक सस्ती करने की आवश्यकता है ताकि अमीर और गरीब दोनों समान से कैंसर के इलाज करा सके। यदि ऐसी नीति प्रख्यापित नहीं की जाती है तो गरीब या गरीब...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़के के यौन उत्पीड़न का दोषी पूर्व पुलिस अधिकारी की सजा कम की, जेल में अच्छे व्यवहार का हवाला दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने हाल ही में अच्छे व्यवहार के आधार पर एक नाबालिग लड़के का यौन उत्पीड़न करने के लिए दोषी ठहराए गए एक पूर्व पुलिस कांस्टेबल की सजा को कम कर दिया।सजा के खिलाफ एक अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सारंग वी. कोतवाल ने कहा कि अपीलकर्ता, एक दोषी के रूप में और उससे पहले एक विचाराधीन कैदी के रूप में, यौन अपराध से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO अधिनियम) की धारा 4 के तहत न्यूनतम सजा से अधिक समय तक जेल में रह चुका है।अदालत ने कहा,"आवेदक आठ साल से अधिक समय से हिरासत...









![[धारा 138 एनआई एक्ट] ट्रस्ट को पक्षकार बनाए बिना ट्रस्ट के प्रभारी को अभियुक्त के रूप में आरोपित नहीं किया जा सकता: उड़ीसा हाईकोर्ट [धारा 138 एनआई एक्ट] ट्रस्ट को पक्षकार बनाए बिना ट्रस्ट के प्रभारी को अभियुक्त के रूप में आरोपित नहीं किया जा सकता: उड़ीसा हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2021/07/15/500x300_396705-orissahighcourt.jpg)










