मुख्य सुर्खियां
मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत पर्याप्त भ्रूण असामान्यताएं क्या हैं? दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को मेडिकल बोर्ड की राय को खारिज करते हुए ने एक 26 वर्षीय महिला को 33 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी।महिला के पहली तीन अल्ट्रासाउंड रिपोर्टों में भ्रूण में कोई असामान्यता नहीं पाई गई थी, जबकि 12 नवंबर की रिपोर्ट में "मस्तिष्क के बाएं पांर्श्व वेंट्रिकल को फैला हुआ" पाया गया। सेरेब्रल एबनॉर्मलटी के बावजूद, लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल के एक मेडिकल बोर्ड ने सोमवार को महिला के मामले को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि भ्रूण उन्नत अवस्था में है।जस्टिस प्रतिभा...
जस्टिस ताशी रबस्तान जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त
भारत के राष्ट्रपति ने 8 दिसंबर, 2022 से प्रभावी मुख्य न्यायाधीश के रूप में जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट के सबसे सीनियर न्यायाधीश जस्टिस ताशी रबस्तान को जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट का एक्टिंग चीफ जस्टिस नियुक्त किया है। मुख्य न्यायाधीश अली मोहम्मद माग्रे 7 दिसंबर को सेवानिवृत्त होंगे।इस संबंध में जारी अधिसूचना इस प्रकार है:" भारत के संविधान के अनुच्छेद 223 द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख के हाईकोर्ट के सबसे सीनियर न्यायाधीश जस्टिस ताशी...
न्यायिक प्रणाली का काम बहुत धीमा, न्याय की मांग कर रहे लोगों में निराशा पैदा करता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक 'निष्पादन न्यायालय' के असंवेदनशील दृष्टिकोण की निंदा करते हुए कहा कि हमारी न्यायिक प्रणाली का काम बेहद धीमा और सुस्त है, जो न्याय की मांग करने वालों में निराशा पैदा करता है।जस्टिस एचएस मदान की पीठ अनिवार्य रूप से दीवानी विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें वर्ष 2014 में अपने पक्ष में एक डिक्री प्राप्त करने के बावजूद, वादी/डिक्री-धारकों को अतिक्रमित हिस्से पर कब्जा नहीं मिल सका।अदालत ने कहा कि इस मामले में प्रतिवादी, ट्रायल कोर्ट के...
एफआईआर में यूएपीए के अपराधों को जोड़ने के बाद मजिस्ट्रेट के पास आरोपी को 30 दिनों से अधिक अवधि के लिए रिमांड पर देने की शक्ति नहीं रह जातीः कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि किसी मामले/एफआईआर जब यूएपीए के तहत अपराध जुड़ जाए तो किसी मजिस्ट्रेट के पास दंड प्रक्रिया संहिता (जैसा कि यूएपीए के तहत संशोधित किया गया है) की धारा 167 के संदर्भ में आरोपी को 30 दिनों से अधिक की अवधि के लिए रिमांड पर देने शक्ति नहीं रह जाती।जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता की पीठ ने निष्कर्ष में कहा कि एक मजिस्ट्रेट के पास न तो यूएपीए से जुड़े मामले का ट्रायल चलाने की शक्ति है, न ही उन मामलों को सौंपने की शक्ति है, और इसलिए, एक बार यूएपीए...
"आरक्षण से नौकरी मिली?" : पटना हाईकोर्ट के जज ने मजाकिया टिप्पणियों से विवाद खड़ा किया
पटना हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश ने आरक्षण का मजाक उड़ाते हुए अपनी टिप्पणी से विवाद खड़ा कर दिया है। जस्टिस संदीप कुमार की पीठ की 23 नवंबर को हुई कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।वीडियो अरविंद कुमार भारती नाम के बिहार सरकार के एक जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी के मामले से संबंधित है।अदालत ने उनसे यह बताने के लिए पेश होने को कहा था कि पार्टिशन का मुकदमा लंबित होने के दौरान उन्होंने एक पक्ष को भूमि अधिग्रहण मुआवजा कैसे जारी किया।बातचीत के दौरान अदालत को सूचित किया गया कि...
न्यायिक मजिस्ट्रेट दोबारा जांच को निर्देशित करने या एक जांच एजेंसी से दूसरी जांच एजेंसी को मामले को स्थानांतरित करने में सक्षम नहीं: जेएंडकेएंडएल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि एक न्यायिक मजिस्ट्रेट किसी मामले में दोबारा जांच का आदेश नहीं दे सकता है और न ही उसे मामले को एक जांच एजेंसी से दूसरी जांच एजेंसी में स्थानांतरित करने का अधिकार है।जस्टिस एमए चौधरी ने कहा,"सुपीरियर/संवैधानिक अदालतों को छोड़कर किसी अन्य न्यायालय के पास किसी मामले की पुनर्जांच का आदेश देने या जांच को एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी में स्थानांतरित करने की शक्ति नहीं हैं।"जस्टिस चौधरी ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता...
पंजाब पुलिस ने हाईकोर्ट को बताया, सांसदों/विधायकों के खिलाफ 102 मामलों में सुनवाई लंबित, 19 एफआईआर में जांच लंबित
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट को पंजाब सरकार के जांच ब्यूरो ने मंगलवार को बताया कि मौजूदा और पूर्व सांसदों के खिलाफ कुल 102 मामले राज्य भर की विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि निचली अदालतों में लंबित मामलों के अलावा 19 मामलों की जांच सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित है। पुलिस ने कहा कि सुनवाई की आखिरी तारीख 29 सितंबर के बाद से लंबित मामलों की संख्या 42 से घटकर 19 हो गई है।यह डेटा सांसदों/विधायकों के खिलाफ के खिलाफ लंबित मामलों की प्रगति की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के...
एनडीपीएस एक्ट| समय विस्तार के लिए जांच अधिकारी का अनुरोध लोक अभियोजक की रिपोर्ट का विकल्प नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामले में एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका की अनुमति देते हुए और एक याचिकाकर्ता को वैधानिक जमानत देते हुए पाया कि भले ही जांच एजेंसी ने जांच पूरी करने के लिए समय बढ़ाने की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया हो, लोक अभियोजक को अलग रिपोर्ट दाखिल करनी होगी, जिसमें यह दिखाया जाए कि उन्होंने अपने विवेक का प्रयोग किया है और जांच से संतुष्ट हैं।जस्टिस जी इलंगोवन ने कहा,यहां तक कि अगर आवेदन लोक अभियोजक के माध्यम से भेजा जाता है तो भी यह पर्याप्त नहीं होगा, जांच एजेंसी द्वारा समय के...
लखीमपुर खीरी कांड: ट्रायल कोर्ट ने मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा के खिलाफ हत्या का आरोप तय किया
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की एक अदालत ने आज केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा और 13 अन्य लोगों के खिलाफ लखीमपुर खीरी में किसान हत्याओं के मामले में आरोप तय किए। मिश्रा की आरोपमुक्ति याचिका सोमवार को खारिज करने के बाद अतिरिक्त जिला न्यायाधीश प्रथम (एडीजे-आई) सुनील कुमार वर्मा ने आज कुल 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किये और अब मामले की सुनवाई 16 दिसंबर से शुरू होगी।यह अपराध 3 अक्टूबर, 2021 को हुआ था, जब कई किसान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की लखीमपुर खीरी...
डीवी अधिनियम- 'मौद्रिक राहत' आदेश के उल्लंघन पर धारा 31 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, केवल संरक्षण आदेशों के उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाया जा सकता है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने कहा को कि घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम की धारा 31 के तहत प्रदान किया गया जुर्माना केवल अधिनियम की धारा 18 के तहत पारित संरक्षण आदेशों के उल्लंघन के लिए और अधिनियम 2005 के तहत पारित किसी अन्य आदेश के उल्लंघन के मामले में सीआरपीसी के प्रावधानों का सहारा लिया जा सकता है।धारा 18 के तहत पारित संरक्षण आदेश का उल्लंघन धारा 31 के तहत अपराध है और इसमें एक साल की कैद हो सकती है।जस्टिस ए बदरुद्दीन ने 5 दिसंबर के फैसले में इस सवाल पर विचार किया कि क्या धारा...
धारा 311 सीआरपीसी| जिरह के दरमियान दिया गया बयान गवाह को वापस बुलाने का आधार नहीं हो सकताः बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक फैसले में माना कि जिरह के दरमियान आरोपी द्वारा शिकायतकर्ता को दिए गए सुझाव से शिकायतकर्ता के पक्ष में अधिकार नहीं बनता कि वह सीआरपीसी की धारा 311 के तहत अपनी दोबारा जांच की मांग करे, खासकर तब जब उसे पहली बार उसी प्रावधान का उपयोग करके गवाही देने की अनुमति दी गई थी।जस्टिस अमित बोरकर ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सीआरपीसी की धारा 311 के तहत शिकायतकर्ता के आवेदन को निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत चेक बाउंस होने के मामले में दो चालान...
क्या बैंगलोर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड आरटीआई अधिनियम के तहत 'सार्वजनिक प्राधिकरण' है? कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग से नए सिरे से फैसला करने को कहा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग को नए सिरे से यह तय करने का निर्देश दिया कि क्या बैंगलोर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (बीआईएएल) सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 2 (एच) के अर्थ में सार्वजनिक प्राधिकरण है।जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस एस विश्वजीत शेट्टी की पीठ ने एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ बीआईएएल द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें आयोग के फैसले को बरकरार रखा गया, जिसमें कंपनी को 'सार्वजनिक प्राधिकरण' घोषित किया गया और आरटीआई के तहत निजी प्रतिवादी द्वारा मांगी गई कुछ जानकारी प्रस्तुत...
सुप्रीम कोर्ट में अगला सप्ताह "मिसलेनियस वीक" होगा: सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़
भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार को कहा कि अगला सप्ताह (12 से 16 दिसंबर) सुप्रीम कोर्ट में एक विविध सप्ताह (Miscellaneous Week) होगा। सीजेआई ने यह बात तब कही जब शिवसेना विवाद से जुड़े मामले का अगले हफ्ते तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया गया।सीजेआई ने कहा कि चूंकि यह संविधान पीठ का मामला है, इसलिए इस पर अगले हफ्ते सुनवाई नहीं हो सकती, जो कि विविध सप्ताह है।सीजेआई ने कहा, "विविध सप्ताह में 5 न्यायाधीशों को इकट्ठा करना संभव नहीं होगा।"सुप्रीम कोर्ट में, सोमवार और शुक्रवार विविध...
जिस न्यायालय की सीमा में सेवानिवृत्त कर्मचारी पेंशन प्राप्त करता है, बकाया राशि के लिए याचिका सुनने का अधिकार क्षेत्र उसी के पास, नियोक्ता की सुविधा प्रासंगिक नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को एक फैसले में कहा कि सेवानिवृत कर्मचारियों को मिलने वाले सेवांत लाभों का दावा करने के लिए दायर याचिकाओं में उनकी सुविधा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पूर्वोक्त याचिकाएं उस स्थान पर क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र वाले न्यायालय के समक्ष दायर की जा सकती हैं जहां वह संबंधित है और पेंशन प्राप्त कर रहा था।जस्टिस अनु शिवरामन ने कहा,अब याचिकाकर्ताओं, जो सेवा पेंशनभोगी हैं, को उन राशियों को प्राप्त करने के लिए दिल्ली और बॉम्बे में हाईकोर्टों का रुख करने की आवश्यकता है, जो मेरे अनुसार,...
अंतिम निर्णय मां का होता है, मेडिकल बोर्ड को गुणात्मक रिपोर्ट देनी चाहिएः दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रूण असामान्यताओं से जुड़ी गर्भावस्था के मामले में कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया है कि भ्रूण की असामान्यताओं से जुड़े गर्भावस्था के मामलों में अंतिम निर्णय मां का होता है और इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे मामलों में मेडिकल बोर्ड को गुणात्मक रिपोर्ट देनी चाहिए। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने फैसले में कहा, ''निष्कर्ष में, अदालत का मानना है कि ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय मां की पसंद और अजन्मे बच्चे के लिए एक गरिमापूर्ण जीवन की संभावना को मान्यता देना है।'' पीठ ने मस्तिष्क संबंधी असामान्यताओं से पीड़ित 33 सप्ताह से अधिक के अपने भ्रूण की...
झारखंड हाईकोर्ट ने पोक्सो मामले में छत्तीसगढ़ बीजेपी प्रत्याशी ब्रह्मानंद नेताम को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की
झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने पोक्सो मामले (POCSO Case) में छत्तीसगढ़ बीजेपी प्रत्याशी ब्रह्मानंद नेताम को अंतरिम सुरक्षा प्रदान किया।कोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया कि वह छत्तीसगढ़ में भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार ब्रह्मानंद नेताम के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 बी, 376 (2)(ए) (i),, 376डी, 366ए और 370 के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 और 6 के तहत गंभीर यौन अपराधों से जुड़े मामले में कोई भी 'दंडात्मक कदम' न उठाया जाए।इस मामले में कथित तौर पर झारखंड की एक 15 वर्षीय...
पॉक्सो मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ बीजेपी प्रत्याशी ब्रह्मानंद नेताम को अंतरिम संरक्षण दिया
झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य को निर्देश दिया कि वह छत्तीसगढ़ में भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार ब्रह्मानंद नेताम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 बी, 376 (2)(ए) (i), 376डी, 366ए और धारा 370 के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) की धारा 4 और 6 के तहत गंभीर यौन अपराधों से जुड़े मामले में कोई भी 'दंडात्मक कदम' न उठाए।इस मामले में कथित तौर पर झारखंड की 15 वर्षीय लड़की का यौन उत्पीड़न करने का आरोप शामिल है।नेताम की ओर से पेश एडवोकेट इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत को...
फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने जस्टिस मुरलीधर के खिलाफ टिप्पणी के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी
भीमा कोरेगांव मामले में एक्टिविस्ट गौतम नवलखा की हाउस अरेस्ट और ट्रांजिट रिमांड के आदेश को रद्द करने के जज के आदेश के संबंध में जस्टिस एस मुरलीधर के खिलाफ अपनी टिप्पणी के लिए फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी।अदालत ने 2018 में इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू की थी।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस तलवंत सिंह की एक खंडपीठ ने अग्निहोत्री द्वारा दायर एक आवेदन को अनुमति दी, जिसमें स्वप्रेरणा कार्यवाही में उपस्थित...
जब दूसरी जगह जांच की जा रही है तो जब्त की गई वस्तुओं की वापसी का आदेश देने के लिए अदालत के पास क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने माना कि जब जांच अलग स्थान पर की जा रही है तो जब्त की गई वस्तुओं की वापसी का आदेश देने के लिए अदालत के पास क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं है, भले ही तलाशी और जब्ती उसकी क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर की गई हो।जस्टिस पीएन प्रकाश और जस्टिस आरएमटी टीका रमन की खंडपीठ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा चेन्नई में याचिकाकर्ता के आवास से जब्त किए गए याचिकाकर्ता के "अवैध रूप से" जब्त किए गए दस्तावेजों और मोबाइल फोन को वापस करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।अदालत ने निम्नानुसार...
एक निवेशक उपभोक्ता नहीं होता : एनसीडीआरसी
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) की एक बेंच ने एक व्यक्ति द्वारा एक कंपनी के खिलाफ दायर एक उपभोक्ता शिकायत का निस्तारण करते हुए कहा है कि एक निवेशक उपभोक्ता नहीं है। पीठ में श्री सी. विश्वनाथ और श्री सुभाष चंद्रा शामिल हैं।यह एनसीडीआरसी के समक्ष सीधे दायर की गई एक मूल शिकायत थी, जिसमें 5,00,30,000/- रुपये की राहत मांगी गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने शुरुआत में प्रतिवादी कंपनी बिल्डर के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) के आधार पर 17,00,000/- का निवेश किया। बाद में, उन्होंने एक...


















