मुख्य सुर्खियां
सरकारी मामलों में देरी को माफ करने के लिए कुछ छूटों को कानून का उल्लंघन करने के लाइसेंस के रूप में नहीं समझा जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा दायर देरी की माफी की मांग करने वाली एक अर्जी को खारिज करते हुए, हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि कानून में सभी के लिए समान संतुलन है और हालांकि सरकार के मामले में कुछ छूट की अनुमति है, लेकिन इसे अपने मन मुताबिक उल्लंघन के पूर्ण लाइसेंस के रूप में नहीं माना जा सकता है। आवेदन एक अपील के साथ दायर किया गया था, जिसके संदर्भ में सरकार ने एक संदर्भ अदालत द्वारा पारित एक अवार्ड का विरोध किया था। राज्य ने देरी के लिए अवार्ड की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने में लगने वाले समय और...
[विभागीय कार्रवाई] आदेश की वैधता की जांच करते हुए कोर्ट को प्रक्रिया में खामियों की पहचान करनी चाहिए, बजाय अपीलीय प्राधिकारी के रूप में निर्णय पर विचार करेः पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने हाल ही एक फैसले में कहा कि विभागीय जांच में सजा के आदेश की वैधता की जांच करते समय, न्यायालय को निर्णय लेने की प्रक्रिया में खामियों की पहचान करने पर ध्यान देना चाहिए, बजाय इसके कि वह एक अपीलीय प्राधिकारी के रूप में निर्णय पर ही विचार करने लगे।जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा की पीठ इस मामले में, मुख्य अभियंता (केंद्रीय), जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार द्वारा पारित एक आदेश के खिलाफ दायर एक रिट याचिका पर विचार कर रही थी। आदेश में एक विभागीय कार्यवाही में याचिकाकर्ता पर 5% पेंशन रोकने का दंड...
किशोर न्याय अधिनियम की धारा 102 के तहत पुनरीक्षण की शक्तियां केवल हाईकोर्ट के पास, सत्र न्यायालय/ बाल न्यायालय इनका प्रयोग नहीं कर सकते: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किशोर न्याय बोर्ड के आदेश के खिलाफ एक पुनरीक्षण याचिका पर सत्र न्यायालय या बाल न्यायालय विचार नहीं कर सकता है।जस्टिस संजय धर ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 102 के तहत संशोधन की शक्ति अकेले उच्चाधिकारियों के पास है। पीठ ने कहा, "सत्र न्यायालय या बच्चों की अदालत में ऐसी कोई शक्ति निहित नहीं है।"कोर्ट ने यह जोड़ा,"संशोधन से संबंधित प्रावधान की प्रयोज्यता यानी सीआरपीसी की धारा 397 को जेजे एक्ट की धारा 1 (4) सहपठित धारा 5 सीआरपीसी के...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल पर नाराजगी जताई, यूनियन नेताओं के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने शुक्रवार को अदालत के दिसंबर 2022 के आदेश के बावजूद उत्तर प्रदेश बिजली विभाग के कर्मचारियों द्वारा जारी हड़ताल पर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए।जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने कर्मचारी एसोसिएशन और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही जारी करते हुए कहा कि भले ही श्रमिकों द्वारा उठाई गई मांगों में कोई दम हो, फिर भी पूरे राज्य की बिजली आपूर्ति में बाधित...
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने टीपाम हिल्स में कथित अवैध अतिक्रमण पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक स्वत: संज्ञान जनहित याचिका में अधिकारियों को ऐतिहासिक टीपाम पहाड़ी के अवैध अतिक्रमण के आरोप के संबंध में एक रिपोर्ट पेश करने और अब तक की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। स्वर्गीय निलय दत्ता, सीनियर एडवोकेट द्वारा लिखे गए एक पत्र के आधार पर 2018 में अदालत द्वारा स्वत: संज्ञान जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें तिपाम पहाड़ी क्षेत्र में अवैध खनन के साथ-साथ अवैध खनन से संबंधित असमिया अखबार 'नियोमिया बार्टा' की एक रिपोर्ट पर प्रकाश डाला गया था।इससे...
आर्बिट्रेशन एक्ट की धारा 9 समाप्त हो चुके अनुबंध की बहाली की परिकल्पना नहीं करती है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि ए एंड सी एक्ट की धारा 9 के दायरे में प्रकृति में राहत की परिकल्पना नहीं की गई, जो उस अनुबंध को बहाल करेगी जो पहले से ही समाप्त हो चुका है।जस्टिस चंद्र धारी सिंह की खंडपीठ ने कहा कि न्यायालय एएंडसी अधिनियम की धारा 9 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए निर्धारित अनुबंध के विशिष्ट प्रदर्शन को निर्देशित नहीं कर सकता। इसने माना कि जो अनुबंध अपनी प्रकृति में निर्धारणीय है, विशिष्ट राहत अधिनियम की धारा 14 (डी) के तहत विशेष रूप से लागू नहीं किया जा सकता। इसलिए न्यायालय ऐसा कुछ...
आर्बिट्रेशन एक्ट की धारा 31 के अनुसार ब्याज देने की शक्ति केवल समझौते के अभाव में लागू होती है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 (ए एंड सी अधिनियम) की धारा 31 (7) (ए), जो पूर्व-संदर्भ अवधि के संबंध में ब्याज देते समय आर्बिट्रेटर के विवेक से संबंधित है, केवल वहीं लागू होती है, जहां दिए जाने वाले ब्याज की दर के संबंध में पक्षकारों के बीच कोई समझौता नहीं है।जस्टिस चंद्र धारी सिंह की पीठ ने टिप्पणी की कि आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल, अधिनिर्णय के बाद ब्याज देते समय एक्ट की धारा 31(7)(बी) का सहारा नहीं ले सकता, जब पक्षकारों के बीच समझौते में ब्याज दर के संबंध में...
लंबित अदालती मामलों की मध्यस्थता स्टार्ट-अप के लिए 'ब्लू ओशन' के रूप में काम कर सकती है: जस्टिस हिमा कोहली
'हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च, स्कूल ऑफ लॉ' स्कूल ऑफ लॉ के न्यू लॉ स्कूल बिल्डिंग के शिलान्यास समारोह और कॉनकॉर्डिया : नेशनल एडीआर फेस्ट, 2023 के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस हिमा कोहली ने शुक्रवार को कहा कि लंबित अदालती मामलों के संबंध में मध्यस्थता स्टार्ट-अप के शोषण के लिए 'ब्लू ओशन' अवसर के रूप में काम कर सकती है।उन्होंने 'ब्लू ओशन' की अवधारणा को एक ऐसी रणनीति के रूप में समझाया जो नए, अप्रयुक्त बाजारों के निर्माण के इर्द-गिर्द घूमती है जहां...
निर्धारिती को कोई नोटिस नहीं दिया गया, सुनवाई का अवसर दिए बिना मूल्यांकन आदेश पारित किया गया: गुजरात हाईकोर्ट ने आदेश रद्द किया
गुजरात हाईकोर्ट ने मूल्यांकन आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि धारा 153 के तहत धारा 144 के साथ पठित मूल्यांकन निर्धारण अधिकारी द्वारा याचिकाकर्ता निर्धारिती को अधिनियम की धारा 144 के संदर्भ में और उसके अर्थ के भीतर सुनवाई का अवसर दिए बिना किया गया था।जस्टिस एन.वी.अंजारिया और जस्टिस निराल आर.मेहता की खंडपीठ ने कहा है कि याचिकाकर्ता को कोई नोटिस नहीं मिला। जब याचिकाकर्ता ने निर्धारण वर्ष 2021-2022 में जांच के लिए पोर्टल खोला, तभी उसे पुनर्मूल्यांकन के विवादित आदेशों और परिणामी दंड आदेशों के बारे में...
ट्रायल शुरू होने के बाद केवल अस्पष्टता को दूर करने के लिए दलीलों में संशोधन की अनुमति नहीं दी जा सकती: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट के जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की पीठ ने हाल ही के एक मामले में माना कि न्यायालय को संतुष्ट करने के लिए मुकदमे में संशोधन की मांग करने वाले पक्षकार झूठ बोलते हैं कि उचित परिश्रम के बावजूद, वे इस मामले को ट्रायल ट्रायल शुरू होने से पहले नहीं उठा सकते थे।अदालत ने आगे कहा कि संशोधनों को केवल इसलिए अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि वे प्रकृति में स्पष्ट हैं या ट्रायल शुरू होने के बाद किसी भी अस्पष्टता को दूर करते हैं।यह ऐसा मामला है, जहां वादी ने भूमि के विभाजन के साथ-साथ घोषणा के लिए...
वकील कानून से उपर नहीं': त्रिपुरा हाईकोर्ट ने आरोपी-मुवक्किल की तलाश के लिए वकील-दम्पति के घर पर छापा मारने वाली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई से इनकार किया
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने हाल ही में आरोपी की तलाश में वकील-दंपति के घर पर छापा मारने के लिए पुलिस के खिलाफ कार्रवाई से इनकार कर दिया।एक्टिंग चीफ जस्टिस टी. अमरनाथ गौड़ और जस्टिस टी अरिंदम लोध की पीठ ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 47, 165 और 166 (1) के अनिवार्य प्रावधानों का पालन करते हुए तलाशी ली गई है।अधिनियम की धारा 47 पुलिस अधिकारी को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए किसी स्थान की तलाशी लेने के लिए अधिकृत करती है, सीआरपीसी की धारा 165 विशेष रूप से पुलिस को बिना तलाशी वारंट की मांग के ऐसी तलाशी...
उड़ीसा हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में मारे गए आदिवासी की पत्नी को ₹10 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया
उड़ीसा हाईकोर्ट ने 2010 में सीआरपीएफ और ओडिशा पुलिस की हिरासत में मारे गए एक आदिवासी की पत्नी को दस लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।चीफ जस्टिस डॉ एस मुरलीधर और जस्टिस मुरहरी श्री रमन की खंडपीठ ने कहा कि यह कोई संयोग नहीं कि मृत आदिवासी, जिसे माओवादी करार दिया गया, जबकि इस संबंध के रत्ती भर सबूत भी नहीं थे, उसके बाद उसे मार दिया गया, वह समाज के गरीब वर्ग से संबंधित था।कोर्ट ने खेद व्यक्त किया कि पीड़ित को हिरासत की अवधि में उसके मूल अधिकारों से वंचित कर दिया गया।तथ्यएक जून, 2010 को पिडेरा...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामलों में सजा के निलंबन के लिए 'अनिवार्य हिरासत' के नियम में ढील दी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा, ऐसे मामलों, जहां दोषी ने जानबूझकर मादक द्रव्य की व्यावसायिक मात्रा अपने पास रखी थी, में सजा निलंबन की राहत प्रदान करने पर विचार के लिए 6 साल की न्यूनतम हिरासत अवधि के मानदंड में 6 महीने की मामूली राहत दी जा सकती है...।कोर्ट के समक्ष दायर याचिका आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 389 (2) के तहत दायर एक आवेदन से संबंधित है, जिसमें स्पेशल कोर्ट लुधियाना ने आवेदक को एनडीपीएस एक्ट, 1985 की धारा 15 (सी) के तहत दोषी ठहराया था। उसे 12 साल की सजा दी गई और एक...
पुलिस द्वारा कथित रूप से वकील पर हमले के बाद मुंबई एडवोकेट एसोसिएशन काम से विरत रहे, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट पारित करने की मांग
मुंबई और ठाणे जिले के एडवोकेट एसोसिएशंस ने बोरीवली बार एसोसिएशन के एक वकील साथ कथित तौर पर पुलिस की मारपीट के बाद साथ एकजुटता दिखाते हुए 16 और 17 मार्च के बीच काम से अनुपस्थित रहे और विरोध किया। वकीलों का आरोप है कि उपनगरीय मुंबई के कांदिवली पुलिस स्टेशन के एक पुलिस निरीक्षक ने वकील पर हमला किया। एडवोकेट एसोसिएशंस ने एपीआई हेमंत गीते के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने 14 मार्च, 2023 को एडवोकेट पृथ्वीराज झाला पर हमला किया।गीते को बाद में पुलिस थाने से बाहर...
एफआईआर नंबर, पुलिस स्टेशन एरिया जैसी मूलभूत अनिवार्यताओं को जमानत आदेशों में दर्ज किया जाना सुनिश्चित करें: सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से कहा
सुप्रीम कोर्ट ने देखा कि सभी हाईकोर्ट में जमानत आदेशों का एक समान प्रारूप नहीं है। यह नोट करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि ज़मनत आदेशों में कुछ बिन्दुओं को बुनियादी अनिवार्यता के रूप में दर्ज किया जाए। कई मामलों में आदेशों में निचली अदालत के समक्ष लंबित कार्यवाही या मामले में अपराधों की प्रकृति का उल्लेख नहीं होता है। जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने इस पृष्ठभूमि में आदेश दिया,"इस न्यायालय की राय है कि जमानत/अग्रिम जमानत के...
धारा 125 सीआरपीसी | सौतेली मां मृतक पति के पास संपत्ति होने का सबूत दिखाकर सौतेले बच्चों से गुजारा भत्ता मांग सकती है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि एक सौतेली मां अपने मृत पति के कानूनी उत्तराधिकारियों से भरण-पोषण प्राप्त करने लिए फैमिली कोर्ट के समक्ष यह साबित करना होगा कि उसके पति के पास काफी संपत्ति थी और उनसे आमदनी होती थी। इस प्रकार वह भरण-पोषण की हकदार होगी।जस्टिस के नटराजन की सिंगल जज बेंच ने खलील उल-रहमान की ओर से दायर याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने फैमिली कोर्ट की ओर से उनकी सौतेली मां को प्रति माह 25,000 रुपये का भरण-पोषण देने के आदेश को रद्द करने और संशोधित करने की मांग की...
जांच अधिकारी, लोक अभियोजक एनडीपीएस मामलों में जांच पूरी करने के लिए यूं ही समय विस्तार की मांग नहीं कर सकते, उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाए: केरल हाईकोर्ट
केरल हाइकोर्ट ने यह देखते हुए कि जांच अधिकारी और सरकारी वकील कई मामलों में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 की धारा 36ए (4) के तहत ठीक से याचिका दायर करने और प्रस्तुत करने में ढिलाई दिखा रहे हैं, अभियोजन महानिदेशक और पुलिस महानिदेशक से पुलिस अधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण और रिफ्रेशर कोर्स कराने के लिए उचित कार्रवाई करने के लिए कहा है।जस्टिस वीजी अरुण ने कहा,"अभियुक्तों की 180 दिनों से अधिक की हिरासत की मांग के लिए स्पष्ट रूप से दोहरी आवश्यकताओं को तय करने की आवश्यकता को...
दिल्ली कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की ईडी कस्टडी पांच दिनों के लिए बढ़ाई
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी की आबकारी नीति 2021-22 के संबंध में दर्ज धन शोधन के एक मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत पांच दिनों के लिए और बढ़ा दी। विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल ने ईडी के वकील जोहेब हुसैन और सिसोदिया की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मोहित माथुर और सिद्धार्थ अग्रवाल को सुनने के बाद आदेश सुनाया। न्यायाधीश ने एजेंसी से 22 मार्च को सिसोदिया को फिर से पेश करने को कहा।ईडी की हिरासत की सात दिनों की अवधि...
रेप केस: गुजरात हाईकोर्ट ने आसाराम की सजा के खिलाफ अपील स्वीकार की
गुजरात हाईकोर्ट ने दो दशक पुराने रेप के एक मामले में स्थानीय अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ आसाराम की अपील को स्वीकार किया।बता दें, इस साल जनवरी में, गांधीनगर कोर्ट ने आसाराम को 2001 से 2007 तक अपने अहमदाबाद स्थित आश्रम में एक शिष्या के साथ बलात्कार करने के मामले में आईपीसी की धारा 376, 377, 342, 354, 357 और 506 के तहत दोषी ठहराया था।कोर्ट ने आसाराम पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था। इसके साथ पीड़िता को मुआवजे के तौर पर 50 हजार रुपये देने का निर्देश दिया गया है।2013 की...
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीएम एडवोकेट्स वेलफेयर स्कीम के बजट में योगदान करने के एकल न्यायाधीश के निर्देश के खिलाफ बीसीडी की अपील पर नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (बीसीडी) द्वारा सिंगल बेंच के निर्देशों के खिलाफ अपील पर नोटिस जारी किया, जिसमें मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना (Chief Minister Advocates Welfare Scheme) के लिए दिल्ली सरकार द्वारा घोषित बजट में योगदान करने के लिए कहा गया था, जो वकीलों के लिए एक बीमा योजना है। अदालत ने 2021 के फैसले में कहा था कि दिल्ली सरकार को केवल बीमा प्रीमियम देने का भार वहन करने के लिए नहीं कहा जा सकता और बीसीडी को वार्षिक घाटे को पूरा करना चाहिए जो उत्पन्न हो सकता...


![[विभागीय कार्रवाई] आदेश की वैधता की जांच करते हुए कोर्ट को प्रक्रिया में खामियों की पहचान करनी चाहिए, बजाय अपीलीय प्राधिकारी के रूप में निर्णय पर विचार करेः पटना हाईकोर्ट [विभागीय कार्रवाई] आदेश की वैधता की जांच करते हुए कोर्ट को प्रक्रिया में खामियों की पहचान करनी चाहिए, बजाय अपीलीय प्राधिकारी के रूप में निर्णय पर विचार करेः पटना हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/08/17/500x300_430928-patnahighcourt.jpg)
















