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मार्कशीट की जालसाजी के आरोप में एफआईआर में बरी होने के बाद पटना हाईकोर्ट ने अधिकारियों से बहाली के लिए पूर्व स्वास्थ्य प्रबंधक के दावे पर विचार करने के लिए कहा
पटना हाईकोर्ट ने अधिकारियों को एक ऐसे कर्मचारी के मामले पर विचार करने का निर्देश दिया है, जिसे मार्कशीट में कथित तौर पर फर्जीवाड़ा करने के कारण उसकी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, लेकिन बाद में संबंधित आपराधिक मामले में निचली अदालत ने उसे बरी कर दिया था। जस्टिस हरीश कुमार और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने कहा कि,"अपीलकर्ता की इंगेजमेंट को केवल एमबीए की गलत और जाली मार्कशीट पेश करके अपीलकर्ता द्वारा की गई जालसाजी के कारण समाप्त कर दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप एक आपराधिक मामला...
यूएपीए मामला: कर्नाटक हाईकोर्ट ने कथित पीएफआई सदस्यों की डिफॉल्ट जमानत की अस्वीकृति को बरकरार रखा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पांच कथित सदस्यों की ओर से दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत अपराधों के ट्रायल के लिए नामित विशेष अदालत के आदेश को बरकरार रखा है, जिसने डिफॉल्ट जमानत देने के लिए उनके आवेदन को खारिज कर दिया था।जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विजयकुमार ए पाटिल की खंडपीठ ने मोहम्मद बिलाल और अन्य की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में मेरिट नहीं पाई।केंद्र सरकार ने सितंबर 2022 में संगठन पर...
हाईकोर्ट के सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अप्रूवर को जमानत देने में धारा 306 बाधा नहीं : जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया है कि सीआरपीसी की धारा 306 (4) (बी) सीआरपीसी के संदर्भ में अप्रूवर को को जमानत नहीं दी जा सकती है जो हिरासत में है, हालांकि, एक उपयुक्त मामले में हाईकोर्ट सीआरपीसी की धारा 482 सीआरपीसी के तहत अपनी निहित शक्तियों से अप्रूवर को जमानत पर रिहा कर सकता हैं।जस्टिस मोहन लाल ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं, जिसके संदर्भ में याचिकाकर्ता ने सीआरपीसी की धारा 306 (4) (बी) को रद्द करने की प्रार्थना की थी, जो अप्रूवर को जमानत पर...
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा, कैंपस के अंदर पीएम मोदी पर बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग अनुशासनहीनता के बराबर
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 2002 के गुजरात दंगों में उनकी कथित भूमिका पर बनी बीबीसी के डॉक्यूमेंट्री का कैंपस के अंदर हाल ही में प्रदर्शन अनुशासनहीनता का घोर कृत्य है।यूनिवर्सिटी ने पीएचडी स्कॉलर और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सचिव लोकेश चुग द्वारा डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग में उनकी कथित संलिप्तता को लेकर एक साल के लिए प्रतिबंधित किए जाने के खिलाफ दायर याचिका के विरोध में दायर जवाबी हलफनामे में यह प्रस्तुतियां दी है।याचिका...
भूमि आवंटन: पंचायत कुछ श्रेणियों के व्यक्तियों को शुल्क से छूट दे सकती है, लेकिन केवल गरीबी के आधार पर: पीएंडएच हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा ग्राम सामान्य भूमि (विनियमन) नियम, 1964 के नियम 8 के उप-नियम 4 के प्रावधान के तहत कुछ व्यक्तियों को भूमि आवंटित करने के ग्राम पंचायत के प्रस्ताव की अस्वीकृति को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया है।जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस कुलदीप तिवारी की खंडपीठ ने फैसले में कहा कि ग्राम पंचायत के पास गढ़ा खड्ड से भूखंडों को तराशने और "अनुसूचित जाति या पिछड़े वर्ग के किसी भी सदस्य या किसी भूमिहीन मजदूर या किरायेदार को" आवंटन के लिए प्रस्ताव लेने का कोई...
मैं डॉकेट एक्सप्लोज़न नहीं, डॉकेट एक्सक्लूज़न को लेकर चिंतित हूं: बॉम्बे हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस
बॉम्बे हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस एसवी गंगापुरवाला ने शनिवार को न्याय प्रणाली में वैकल्पिक विवाद समाधान के महत्व के बारे में बात करते हुए कहा, "मैं एक पल के लिए भी डॉकेट एक्सप्लोज़न (विस्फोट) के बारे में चिंतित नहीं हूं, हमारे जज इससे निपटने में सक्षम हैं ... मैं डॉकेट एक्सक्लूजन (बहिष्करण) के बारे में चिंतित हूं।" जस्टिस गंगापुरवाला मुंबई के मझगांव में नए सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट और मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट बिल्डिंग के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।उन्होंने डॉकेट...
एफआईआर में लगाए गए आरोपों की सत्यता ट्रायल में परखी जाएगी, सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए हाईकोर्ट ऐसा नहीं कर सकताः केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि हाईकोर्ट को धारा 482 सीआरपीसी के तहत आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने के लिए अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए पूरी तरह से शिकायत में लगाए गए आरोपों या उसके साथ लगे दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ना होगा।जस्टिस के बाबू की सिंगल जज बेंच ने पश्चिम बंगाल राज्य बनाम स्वपन कुमार गुहा (1982), केरल राज्य बनाम ओसी कुट्टन (1999), एम/एस निहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य (2021), और मीनाक्षी बाला बनाम सुधीर कुमार और अन्य में दिए सुप्रीम...
'मोदी चोर' टिप्पणी - हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ पटना कोर्ट में लंबित मानहानि मामले की कार्यवाही पर 16 मई तक रोक लगाई
पटना हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी द्वारा उनकी 'मोदी-चोरी' टिप्पणी को लेकर पटना अदालत में दायर आपराधिक मानहानि मामले में पटना अदालत में लंबित कार्यवाही पर सोमवार को 16 मई तक रोक लगा दी। जस्टिस संदीप सिंह की पीठ ने यह आदेश गांधी द्वारा दायर की गई याचिका में पारित किया, जिसमें गांधी ने वर्ष 2019 के एक मामले को खारिज करने की मांग की। इस मामले को 18 अप्रैल को अदालत के समक्ष रखा गया था और सुनवाई के लिए आज पोस्ट किया गया था।अदालत के समक्ष गांधी के...
कोई अखिल भारतीय न्यायिक सेवा मौजूद नहीं है, न्यायिक अधिकारी को फीडर ग्रेड में सेवा के पात्रता मानदंड को पूरा करना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि एक न्यायिक अधिकारी को किसी विशेष राज्य न्यायिक सेवा के फीडर ग्रेड में निर्दिष्ट सेवा के निर्धारित पात्रता मानदंड को पूरा करना होता है। कोर्ट ने देखा कि जजों के लिए कोई अखिल भारतीय न्यायिक सेवा नहीं है।जस्टिस मनमोहन और जस्टिस सौरभ बनर्जी की खंडपीठ ने सिविल जज नीतू नागर की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने 2018 में स्वेच्छा से हरियाणा सिविल सेवा से इस्तीफा दे दिया था और परीक्षा पास करने के बाद दिल्ली न्यायिक सेवा में शामिल हो गए थे।सिविल जज ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के...
आईटी नियम संशोधन में प्रथम दृष्टया ‘व्यंग्य’ के बचाव के लिए आवश्यक उपायों की कमी: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कुणाल कामरा केस में कहा
स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा द्वारा दायर याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को आईटी नियम 2022 के नए संशोधन में आवश्यक सुरक्षा उपायों का अभाव देखा।जस्टिस गौतम पटेल और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने अंतरिम राहत के मामले को बृहस्पतिवार से आगे स्थगित करने से इनकार करते हुए ये टिप्पणी की।बेंच ने कहा,“हलफनामे (संघ) में कहा गया है कि व्यंग्य आदि को छूट दी जाएगी, लेकिन नियम ऐसा नहीं कहते हैं। यहां समस्या यह है कि नियम भले ही नेक इरादे से क्यों न हो, इसमें आवश्यक सुरक्षा की कमी है।”अदालत सूचना...
दिल्ली दंगा: हाईकोर्ट मीडिया लीक के खिलाफ आसिफ इकबाल तन्हा के मामले की सुनवाई 02 अगस्त को करेगा
दिल्ली हाईकोर्ट 02 अगस्त को आसिफ इकबाल तन्हा द्वारा 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित बड़ी साजिश में अपने कथित कबूलनामे के बयान को मीडिया में लीक करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करेगा।जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने जस्टिस अमित शर्मा और जस्टिस अनूप जयराम भंभानी द्वारा हाल ही में इसकी सुनवाई से खुद को अलग कर लेने के बाद इस मामले पर विचार करने का फैसला किया।तन्हा का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील सौजन्य शंकरन ने अदालत को अवगत कराया कि दिल्ली पुलिस, ज़ी न्यूज़ और ऑपइंडिया डॉट कॉम द्वारा इस...
न्यायपालिका, उप-न्यायिक मुद्दों पर ट्वीट न करें: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक्टर चेतन कुमार के ओसीआई रद्दीकरण पर 2 जून तक रोक लगाई
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत के माध्यम से कन्नड़ एक्ट और सोशल एक्टिविस्ट चेतन ए कुमार को जारी किए गए ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया कार्ड (ओसीआई) रद्द करने के केंद्र सरकार द्वारा पारित आदेश के संचालन पर रोक लगा दी।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश की पीठ ने कहा,"मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में मुझे यह उचित लगता है कि प्रतिवादियों को सुनवाई की अगली तारीख- 2 जून तक मामले को ओसीआई कार्ड के मामले में तूल न देने का निर्देश दिया जाए।"अदालत ने इस शर्त पर राहत दी कि कुमार अदालत में हलफनामा जमा करते...
मुकदमेबाजी को डिफ़ॉल्ट रूप से समाप्त नहीं किया जाना चाहिए, जहां तक संभव हो योग्यता पर निर्णय की किया जाना चाहिए : आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 2012 में दायर मुकदमे के लिए 339 दिनों की देरी की माफी की अनुमति दी, जिससे प्रतिवादी को बैलगाड़ी लेकर किसी भी तरह से मार्ग के उपयोग में बाधा डालने से रोका जा सके।जस्टिस रवि चीमलपति की पीठ ने कहा,"आम तौर पर मुकदमेबाजी को वादी या प्रतिवादी के डिफ़ॉल्ट रूप से समाप्त नहीं किया जाना चाहिए। न्याय के उद्देश्य के लिए यह आवश्यक है कि जहां तक संभव हो न्यायनिर्णय गुण-दोष के आधार पर किया जाए। हालांकि मुकदमा वर्ष 2012 का है, फिर भी वही लंबित है और यदि उक्त आवेदन पर विचार नहीं किया...
एनडीपीएस एक्ट- ‘केवल पत्नी की गर्भावस्था अंतरिम जमानत देने के लिए पर्याप्त कारण नहीं’: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि अक्टूबर 2022 में सिटी खन्ना पुलिस स्टेशन, जिला लुधियाना में दर्ज नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (एनडीपीएस एक्ट) की धारा 22 के तहत आरोपी व्यक्ति को अंतरिम जमानत देने के लिए केवल पत्नी की गर्भावस्था पर्याप्त नहीं है।अदालत अंतरिम जमानत देने के लिए सीआरपीसी की धारा 439 के साथ पाठित सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।जस्टिस जगजीत सिंह बेदी की पीठ ने कहा कि मात्र गर्भावस्था याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत देने के लिए...
अन-रजिस्टर्ड रेलिंक्विशमेंट डीड साक्ष्य के रूप में अस्वीकार्य: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि विरासत में मिली संपत्ति को छोड़ने का दस्तावेज तब तक साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य नहीं है जब तक कि वह रजिस्टर्ड न हो।नागपुर खंडपीठ के जस्टिस एमएस जावलकर ने बहन के बंटवारे के मुकदमे को इस आधार पर खारिज कर दिया कि उसने रेलिंक्विशमेंट डीड (Relinquishment Deed) पर हस्ताक्षर किया, यह देखते हुए कि भाई ने कभी डीड प्रस्तुत नहीं किया।अदालत ने कहा,"इस तरह डीड को रजिस्टर्ड करने की आवश्यकता है अन्यथा यह साक्ष्य में स्वीकार्य नहीं है। वर्तमान मामले में रेलिंक्विशमेंट डीड...
निष्कासन अभियान: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम में आश्रय शिविरों की संख्या पर रिपोर्ट मांगी
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने स्वत: जनहित याचिका में असम सरकार से पूरे राज्य में अस्थायी आश्रय शिविरों की सही संख्या के बारे में रिपोर्ट मांगी, जिसमें बेदखली अभियान के कारण विस्थापित हुए लोगों को रखा जा रहा है।चीफ जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस मृदुल कुमार कलिता की खंडपीठ ने आगे निर्देश दिया:"आंकड़ों में लिंग-वार वितरण के साथ-साथ इन सभी शिविरों में आश्रय प्राप्त बच्चों की संख्या भी शामिल होगी।"इससे पहले अदालत ने सीनियर एडवोकेट बी.डी. कोंवर को इस मामले में एमिक्स क्यूरी के रूप में कार्य करने और चांगमाजी...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने जालसाजी मामले में बरी होने को सही ठहराया, लेखक या दस्तावेज़ के हस्ताक्षरकर्ताओं पर कोई लिखावट रिपोर्ट नहीं होने के कारण जांच को दोषपूर्ण बताया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फर्जी जांच का हवाला देते हुए जालसाजी के मामले में पांच लोगों को बरी कर दिया, क्योंकि जाली दस्तावेज पर हस्ताक्षर के लेखकों के बारे में हस्तलिपि विशेषज्ञ की कोई रिपोर्ट नहीं थी।जस्टिस जीए सनप ने कहा कि हस्तलिपि रिपोर्ट के अभाव में शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं हस्ताक्षर करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने कहा,“लेखक या दस्तावेजों के हस्ताक्षरकर्ताओं के संबंध में लिखावट विशेषज्ञ की कोई रिपोर्ट नहीं है। उस पहलू पर जांच दोषपूर्ण है। ऐसे में शिकायतकर्ता की भूमिका को लेकर...
[मोटर दुर्घटना में मृत्यु] दावा याचिका के सुनवाई योग्य होने के लिए निर्भरता का नुकसान पर्याप्त: मद्रास हाईकोर्ट ने दूसरी पत्नी को मुआवजे देने का आदेश बरकरार रखा
मद्रास हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति की दूसरी पत्नी को दिए गए मुआवजे को बरकरार रखते हुए हाल ही में देखा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166(1) के तहत मुआवजे का दावा करने के उद्देश्य के लिए निर्भरता के नुकसान को स्थापित करना पर्याप्त है।जस्टिस आर विजयकुमार ने कहा कि अधिनियम के तहत मुआवजे की पात्रता का आधार निर्भरता है। इस प्रकार, यहां तक कि कानूनी उत्तराधिकारी भी जो मृतक पर निर्भर नहीं है, मुआवजा प्राप्त करने का हकदार नहीं होगा।यह भी देखा जा सकता है कि आश्रितता मुआवजा प्रदान करने का...
केवल आरोपों की गंभीरता पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता, आरोपी के खिलाफ विशिष्ट आरोपों और सबूतों पर विचार किया जाना चाहिए: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि अदालत केवल आरोपों की गंभीरता और संभावित सजा के आधार पर जमानत से इनकार नहीं कर सकती और अन्य कारकों, जैसे आरोपी के खिलाफ आरोप और उपलब्ध साक्ष्य के लिए जमानत आवेदन का फैसला करते समय विचार किया जाना चाहिए और संतुलित किया जाना चाहिए।जस्टिस सत्येन वैद्य ने याचिका पर सुनवाई करते हुए जमानत के सिद्धांतों पर ये टिप्पणियां कीं, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपनी लंबी हिरासत को अनुचित बताते हुए चुनौती दी। जांच एजेंसी को याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी आपत्तिजनक सबूत...
जुवेनाइल जस्टिस | शिकायतकर्ता की आयु निर्धारित करने के लिए आधार कार्ड स्वीकार्य नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) नियम, 2012 के नियम 12 के तहत प्रावधान के अनुसार, शिकायतकर्ता के आधार कार्ड पर उनकी आयु निर्धारित करने के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता।जस्टिस विवेक अग्रवाल की पीठ नाबालिग की उम्र निर्धारित करने के लिए आधार कार्ड की विश्वसनीयता के संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ के निर्णय से भिन्न है।हालांकि पन्नीरसेल्वम बनाम पुलिस निरीक्षक, MANU/TN/1054/2014 में माननीय मद्रास हाईकोर्ट से अलग दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने माना कि आधार...

















![[मोटर दुर्घटना में मृत्यु] दावा याचिका के सुनवाई योग्य होने के लिए निर्भरता का नुकसान पर्याप्त: मद्रास हाईकोर्ट ने दूसरी पत्नी को मुआवजे देने का आदेश बरकरार रखा [मोटर दुर्घटना में मृत्यु] दावा याचिका के सुनवाई योग्य होने के लिए निर्भरता का नुकसान पर्याप्त: मद्रास हाईकोर्ट ने दूसरी पत्नी को मुआवजे देने का आदेश बरकरार रखा](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/07/11/500x300_425317-maduraibench.jpg)

