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[मोदी-चोर टिप्पणी] - राहुल गांधी ने मानहानि मामले में दोषसिद्धि पर रोक लगाने के लिए गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया
['मोदी-चोर' टिप्पणी] - राहुल गांधी ने मानहानि मामले में दोषसिद्धि पर रोक लगाने के लिए गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अप्रैल 2019 में करोल में एक राजनीतिक अभियान के दौरान की गई अपनी टिप्पणी "सभी चोर मोदी सरनेम साझा क्यों करते हैं" पर मानहानि के मामले में अपनी सजा पर रोक लगाने के लिए गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया है। सूरत सत्र न्यायालय के 20 अप्रैल के आदेश को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने मंगलवार को हाईकोर्ट के समक्ष एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की गई, जिसमें उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की उनकी अर्जी को खारिज कर दिया गया था।गौरतलब है कि 23 मार्च को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की...

धारा 27(2) पॉक्सो एक्ट | महिला पीड़ित की जांच पुरुष चिकित्सक ने की, अभियुक्त इसे कवच के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकता: उड़ीसा हाईकोर्ट
धारा 27(2) पॉक्सो एक्ट | महिला पीड़ित की जांच पुरुष चिकित्सक ने की, अभियुक्त इसे कवच के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकता: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि पॉक्सो अधिनियम की धारा 27(2) के तहत जनादेश का अनुपालन न करने पर किसी आरोपी के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।उक्त प्रावधान के अनुसार पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण केवल महिला डॉक्टरों ही कर सकती है।संगम कुमार साहू की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा,उक्त प्रावधान का महत्वपूर्ण उद्देश्य "न्यायिक कार्यवाही के हर चरण में बच्चों के हित और भलाई की रक्षा करना है। पॉक्सो अधिनियम की धारा 27 (2) को बालिकाओं को शर्मिंदगी से बचाने और यह सुनिश्चित करने के लिए...

बर्खास्त कर्मचारी की सेवा में विश्वास खोना तथ्यों के वस्तुनिष्ठ विचार पर आधारित होना चाहिए : कर्नाटक हाईकोर्ट
बर्खास्त कर्मचारी की सेवा में विश्वास खोना तथ्यों के वस्तुनिष्ठ विचार पर आधारित होना चाहिए : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों में जहां नियोक्ता कर्मचारी में विश्वास टूटना व्यक्त करता है, श्रम न्यायालय या औद्योगिक न्यायाधिकरण को आसपास के तथ्यों और परिस्थितियों के मद्देनज़र में उक्त विवाद पर विचार करना होगा और यह पता लगाना होगा कि क्या ऐसा संदेह तथ्यों के वस्तुनिष्ठ सेट पर आधारित है या किसी बाहरी कारक के आधार पर है। सूरज गोविंदराज की एकल न्यायाधीश पीठ ने मेसर्स टीवीएस मोटर कंपनी (नियोक्ता) द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें श्रम अदालत के उस आदेश को रद्द करने की मांग की...

विवाह प्रमाणपत्र की सत्यता का निर्धारण असाधारण रिट क्षेत्राधिकार के तहत नहीं किया जा सकता, घोषणा के लिए सक्षम कोर्ट से संपर्क करें: पटना हाईकोर्ट
विवाह प्रमाणपत्र की सत्यता का निर्धारण असाधारण रिट क्षेत्राधिकार के तहत नहीं किया जा सकता, घोषणा के लिए सक्षम कोर्ट से संपर्क करें: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने एक फैसले में माना कि विशेष विवाह अधिनियम के तहत प्राप्त विवाह प्रमाण पत्र, इस तथ्य के बिना कि इसे विशेष विवाह अधिनियम के चैप्टर III के तहत प्रदान किए गए विवाह प्रमाणपत्र पुस्तक में अंतत: दर्ज किया गया था, केवल "विवाह का प्रमाण" है " और "अधिनियम के अनुसार विवाह का प्रमाण" नहीं।जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की बेंच ने कहा,"विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की धारा 18 में कहा गया है कि जहां विवाह प्रमाण पत्र को विशेष विवाह अधिनियम के चैप्टर III के तहत विवाह प्रमाणपत्र पुस्तक में अंतिम रूप से दर्ज...

भारत के मुख्य न्यायाधीश एडिशनल बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स में सुप्रीम कोर्ट जजेस लाइब्रेरी का औपचारिक उद्घाटन किया
भारत के मुख्य न्यायाधीश एडिशनल बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स में सुप्रीम कोर्ट जजेस लाइब्रेरी का औपचारिक उद्घाटन किया

भारत के मुख्य न्यायाधीश डॉ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के एडिशनल बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स में नए न्यायाधीशों के पुस्तकालय को औपचारिक रूप से कार्यात्मक बनाया। नई लाइब्रेरी चार मंजिलों में फैली हुई है और इसमें सर्कुलेशन सेक्शन, रेफरेंस सेक्शन, इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सेक्शन, लीगल रिसर्च एंड लॉ सेक्शन और एक्विजिशन सेक्शन शामिल हैं। जजेस लाइब्रेरी में पुस्तकों और संदर्भ सामग्री का कुल संग्रह 3,77,000 है, जिसमें से 2,40,000 नई किताबें में रखी गई हैं। लाइब्रेरी में जज लाउंज और जज...

एससी/एसटी एक्ट- ‘ समन जारी करने के आदेश के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 482 के तहत आवेदन सुनवाई योग्य’: इलाहाबाद हाईकोर्ट
एससी/एसटी एक्ट- ‘ समन जारी करने के आदेश के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 482 के तहत आवेदन सुनवाई योग्य’: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत एक अपराध के लिए एक अभियुक्त को समन जारी करने के आदेश को सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एक आवेदन दायर करके चुनौती दी जा सकती है।जस्टिस राहुल चतुर्वेदी की पीठ ने रामावतार बनाम मध्य प्रदेश राज्य एलएल 2021 एससी 589 और बी वेंकटेश्वरन बनाम पी भक्तवतचलम 2023 लाइवलॉ (एससी) 14 मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए ये आदेश दिया। इनमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एससी/एसटी अधिनियम से...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से पूछा, 2019 में जारी सर्कुलर के बावजूद में शारीरिक अशक्तता प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया?
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से पूछा, 2019 में जारी सर्कुलर के बावजूद में शारीरिक अशक्तता प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया?

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव से पूछा है कि 2019 में उन्होंने शारीरिक अशक्तता प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए एक सर्कुलर जारी किया था, इसके बावजूद उस दिशा मे कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया? हाईकोर्ट ने इस संबंध में मुख्य सचिव को व्य‌क्तिगत हलफनामा दायर करने के ल‌िए कहा है।मौजूदा याचिकाकर्ता ने इससे पहले 2019 में जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें उसने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) के तहत जारी 'प्रमाण पत्र' के निरंतर दुरुपयोग पर...

धारा 190 सीआरपीसी के तहत कोई सिस्टम उपलब्ध नहीं है जो मजिस्ट्रेट को स्वत: या किसी आवेदन पर आगे की जांच के लिए निर्देश देने का अधिकार देता हो : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
धारा 190 सीआरपीसी के तहत कोई सिस्टम उपलब्ध नहीं है जो मजिस्ट्रेट को स्वत: या किसी आवेदन पर आगे की जांच के लिए निर्देश देने का अधिकार देता हो : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि धारा 190 सीआरपीसी मजिस्ट्रेट को स्वतः संज्ञान लेकर किसी मामले में आगे की जांच के निर्देश देने का अधिकार नहीं देती है।जस्टिस संजय द्विवेदी की पीठ ने कहा कि एक बार मामले का संज्ञान लेने के बाद मजिस्ट्रेट आगे की जांच के लिए निर्देश नहीं दे सकता है-याचिकाकर्ता के विद्वान वकील द्वारा दिए गए मामलों पर विचार करने के बाद और सीआरपीसी के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार, यह स्पष्ट है कि सीआरपीसी की धारा 190 में, अभिव्यक्ति "संज्ञान लेना" का अर्थ है कि...

मुस्लिम कानून के तहत बच्चों की कस्टडी का मां का अधिकार पूर्ण या श्रेष्ठ नहीं, पिता 7 साल से अधिक उम्र के बेटे का वैध अभिभावक: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
मुस्लिम कानून के तहत बच्चों की कस्टडी का मां का अधिकार पूर्ण या श्रेष्ठ नहीं, पिता 7 साल से अधिक उम्र के बेटे का वैध अभिभावक: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 2022 में मुस्लिम पिता के खिलाफ कथित तौर पर अपने 8- और 10 साल के बेटों को उनकी मां की कस्टडी से अगवा करने के लिए दायर एफआईआर खारिज कर दी।अदालत ने कहा कि मुस्लिम कानून के तहत पिता अपने पुत्र के नाबालिग होने के दौरान कानूनी अभिभावक होता है, और मां सात साल की उम्र तक ऐसे बच्चे की कस्टडी का दावा कर सकती है।जस्टिस के श्रीनिवास रेड्डी ने कहा,"कानूनी अभिभावक निश्चित रूप से वैध अभिभावक है, और यदि वह नाबालिग बच्चे को मां की कस्टडी से लेता है, जो निश्चित रूप से कानूनी या प्राकृतिक...

नई पेमेंट पॉलिसी के खिलाफ स्टार्ट-अप के आवेदनों पर विचार करने के लिए CCI को निर्देश देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को Google ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी
नई पेमेंट पॉलिसी के खिलाफ स्टार्ट-अप के आवेदनों पर विचार करने के लिए CCI को निर्देश देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को Google ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी

Google ने भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को निर्देश देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अपनी याचिका में Google ने कहा कि टेक जायंट की नई इन-ऐप यूजर्स लाइक बिलिंग पॉलिसी के खिलाफ स्टार्ट-अप के गठबंधन द्वारा दायर आवेदनों को लिया जाए और उस पर या उस पर 26 अप्रैल से पहले विचार किया जाए।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष Google की ओर से सीनियर एडवोकेट संदीप सेठी ने उक्त अपील का उल्लेख किया।सेठी ने मामले को...

सोसाइटी के निवासी विशेष रूप से गर्मी के मौसम की शुरुआत को ध्यान में रखते हुए जानवरों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए बाध्य: बॉम्बे हाईकोर्ट
सोसाइटी के निवासी विशेष रूप से गर्मी के मौसम की शुरुआत को ध्यान में रखते हुए जानवरों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए बाध्य: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाउसिंग सोसाइटी और उसके सदस्यों के बीच आवारा कुत्तों को खाना खिलाने के विवाद में कहा कि सोसायटी के निवासियों का यह दायित्व होगा कि वे हमेशा जानवरों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने का प्रावधान करें। विशेष रूप से गर्मी के मौसम की शुरुआत को देखते हुए।जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आर एन लड्डा की खंडपीठ ने सोमवार को मामले का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता पशु प्रेमी द्वारा उठाए गए तर्क को स्वीकार कर लिया कि वह कुत्तों को पीने का पानी उपलब्ध कराना चाहेगी।अदालत ने कहा,"...पक्षों को...

आईपीसी की धारा 295A | देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को प्रभावित करने वाले अपराधों को कम नहीं आंका जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
आईपीसी की धारा 295A | देश के 'धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने' को प्रभावित करने वाले अपराधों को कम नहीं आंका जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि समुदायों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले और देश के 'धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने' को प्रभावित करने की प्रवृत्ति वाले अपराधों को कम नहीं आंका जा सकता।जस्टिस शरद कुमार शर्मा की एकल न्यायाधीश की पीठ ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295ए के तहत अपराध को कम आंकने से करने इनकार करते हुए कहा,"संविधान में 'समाजवादी', 'धर्मनिरपेक्ष' और 'लोकतांत्रिक गणराज्य' इन शब्दों को क्यों शामिल किया गया, इसका व्यापक कारण इस देश के प्रत्येक नागरिक में दूसरे धर्म के प्रति...

[आईटी नियम संशोधन] सरकार के बारे में फेक न्यूज और अन्य फेक न्यूज को अलग-अलग करना मनमाना, अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: बॉम्बे हाईकोर्ट में कुणाल कामरा का तर्क
[आईटी नियम संशोधन] सरकार के बारे में फेक न्यूज और अन्य फेक न्यूज को अलग-अलग करना मनमाना, अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: बॉम्बे हाईकोर्ट में कुणाल कामरा का तर्क

बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष कॉमेडियन कुणाल कामरा ने लिखित सबमिशन में कहा कि जो यूजर्स केंद्र सरकार के कामों से संबंधित विषयों पर नियमित रूप से टिप्पणी करते हैं या उनसे जुड़ते हैं, यदि MeitY की फैक्ट चेकिंग यूनिट (FCU) को अधिसूचित किया जाता है तो इससे संभावित विनाशकारी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।यह नोट सोमवार को पेश किया गया, जिसमें कामरा ने आईटी संशोधन नियम 2023 पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की। नियम सोशल मीडिया इंटरमीडिएटर से अपेक्षा करते हैं कि वे एफसीयू द्वारा पहचानी गई सरकार के बारे में फेक न्यूज...

नाम बदलने की प्रक्रिया पूरी होने तक औरंगाबाद के लिए नए नाम का उपयोग नहीं करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देंगे: बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार ने कहा
नाम बदलने की प्रक्रिया पूरी होने तक औरंगाबाद के लिए नए नाम का उपयोग नहीं करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देंगे: बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार ने कहा

बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को कहा कि वह संबंधित अधिकारियों को निर्देश देगी कि जब तक उनके नाम बदलने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे औरंगाबाद जिले और राजस्व अधिकारियों का आधिकारिक संचार में नाम नहीं बदलेंगे।एक्टिंग चीफ जस्टिस एसवी गंगापुरवाला और जस्टिस संदीप वी मार्ने की खंडपीठ ने कहा,"हम रिकॉर्ड करेंगे कि आप निर्देश जारी करेंगे कि संबंधित अधिकारियों द्वारा प्रक्रिया पूरी होने तक संबंधित राजस्व और जिला अधिकारियों के नाम नहीं बदले जाएंगे।"राज्य का प्रतिनिधित्व एडवोकेट...

गुजरात हाईकोर्ट ने कालाबाजारी रोकथाम कानून के तहत नजरबंदी आदेश रद्द किया
गुजरात हाईकोर्ट ने कालाबाजारी रोकथाम कानून के तहत नजरबंदी आदेश रद्द किया

गुजरात हाईकोर्ट ने कालाबाजारी रोकथाम और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के रखरखाव वस्तु अधिनियम, 1980 के तहत हिरासत का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने उक्त आदेश रद्द करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा पारित हिरासत के आदेश को सात दिनों के भीतर केंद्र सरकार को अनिवार्य रूप से अग्रेषित करने की आवश्यकता है।जस्टिस एएस सुपेहिया और जस्टिस दिव्येश ए जोशी की खंडपीठ ने शुरुआत में दर्ज किया कि डिटेनिंग अथॉरिटी द्वारा हिरासत में लिए गए मामले में कोई जवाबी हलफनामा दायर नहीं किया गया। इसने यह भी नोट किया कि अधिनियम के...

लंबित मामलों पर इंटरव्यू देने न्यायाधीश का काम नहीं है: सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जज अभिजीत गंगोपाध्याय से स्पष्टीकरण मांगा
लंबित मामलों पर इंटरव्यू देने न्यायाधीश का काम नहीं है: सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जज अभिजीत गंगोपाध्याय से स्पष्टीकरण मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जज, जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मौखिक रूप से टिप्पणी की कि न्यायाधीशों को लंबित मामलों पर टीवी इंटरव्यू देने का कोई अधिकार नहीं है। उक्त आदेश में उन्होंने प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से पूछताछ करने के लिए सीबीआई और ईडी को निर्देश दिया था।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई...

दिल्ली के सभी जिला कोर्ट बार एसोसिएशन ने समलैंगिक विवाह पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चल रही कार्यवाही के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया
दिल्ली के सभी जिला कोर्ट बार एसोसिएशन ने समलैंगिक विवाह पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चल रही कार्यवाही के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया

दिल्ली के सभी जिला कोर्ट बार एसोसिएशन ने सेम-सेक्स विवाह की मान्यता पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चल रही कार्यवाही के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव में कहा गया कि विवाह के मुद्दे या वैधीकरण को केवल सभी हितधारकों के परामर्श से विधायी प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित किया जा सकता है।वकीलों के निकाय की समन्वय समिति द्वारा पारित प्रस्ताव में कहा गया कि प्रक्रिया को "एकल अदालत के मामले" में संघनित नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके लिए निरंतर बातचीत और सहयोग की आवश्यकता होती है। इस मुद्दे को संसद...

बस टिकट - एक महीने में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को थर्ड जेंडर के रूप में मान्यता देने के लिए प्रतिनिधित्व तय करें या एमडी को उपस्थित रहने के लिए कहें : दिल्ली हाईकोर्ट ने डीटीसी से कहा
बस टिकट - एक महीने में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को थर्ड जेंडर के रूप में मान्यता देने के लिए प्रतिनिधित्व तय करें या एमडी को उपस्थित रहने के लिए कहें : दिल्ली हाईकोर्ट ने डीटीसी से कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक को उसके समक्ष उपस्थित रहने या बस टिकट पर ट्रांसजेंडर समुदाय को थर्ड जेंडर के रूप में मान्यता देने और उन्हें एक महीने के भीतर मुफ्त यात्रा प्रदान करने के लिए प्रतिनिधित्व पर फैसला करने के लिए कहा है। जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा एक ट्रांसजेंडर अमित जुयाल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें दिल्ली सरकार और डीटीसी के खिलाफ दीवानी अवमानना ​​​​कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी, जो कि 19 अक्टूबर, 2022 को एक खंडपीठ द्वारा पारित...

सीआरपीसी की धारा 190 के तहत ऐसा कोई सिस्टम नहीं है जो मजिस्ट्रेट को आगे की जांच का निर्देश देने के लिए स्वत: या किसी भी व्यक्ति द्वारा आवेदन पर निर्देशित करने का अधिकार देता हो :
सीआरपीसी की धारा 190 के तहत ऐसा कोई सिस्टम नहीं है जो मजिस्ट्रेट को आगे की जांच का निर्देश देने के लिए स्वत: या किसी भी व्यक्ति द्वारा आवेदन पर निर्देशित करने का अधिकार देता हो :

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा था कि सीआरपीसी की धारा 190 मजिस्ट्रेट को किसी मामले में आगे की जांच के लिए स्वत: संज्ञान लेने का निर्देश देने का अधिकार नहीं देती है। जस्टिस संजय द्विवेदी की पीठ ने कहा कि एक बार मामले का संज्ञान लेने के बाद मजिस्ट्रेट आगे की जांच के लिए निर्देश नहीं दे सकते।याचिकाकर्ता के वकील द्वारा दिए गए मामलों पर विचार करने के बाद और सीआरपीसी के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार यह स्पष्ट है कि सीआरपीसी की धारा 190 में अभिव्यक्ति "संज्ञान लेना" का अर्थ है कि मजिस्ट्रेट...

आर्य समाज के लिए यह आत्मनिरीक्षण का समय, बाल विवाह से बचने के लिए दिशानिर्देश तैयार करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आर्य समाज की सर्वोच्च संस्था को निर्देश दिया
'आर्य समाज के लिए यह आत्मनिरीक्षण का समय, बाल विवाह से बचने के लिए दिशानिर्देश तैयार करें': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आर्य समाज की सर्वोच्च संस्था को निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते आर्य समाज की सर्वोच्च संस्था 'सर्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा' को आत्मनिरीक्षण करने और नाबालिगों से जुड़े विवाहों को रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया।न्यायालय ने 'सभा' को प्रस्तावित जोड़ों की काउंसलिंग करने का भी निर्देश दिया ताकि वे विवाह योग्य आयु तक पहुंचने से पहले किसी भी आपराधिक कृत्य में प्रवेश न कर सकें।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने 'सभा' के लिए निम्नलिखित सुझाव जारी किए और इसके अध्यक्ष को एक दिशानिर्देश/रिपोर्ट तैयार करने और आठ सप्ताह...