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सिर्फ न्यायाधीश से तीखी नोकझोंक केस ट्रांसफर करने का कोई आधार नहीं : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
सिर्फ न्यायाधीश से तीखी नोकझोंक केस ट्रांसफर करने का कोई आधार नहीं : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी अदालत के पीठासीन अधिकारी के साथ तीखी बहस ही किसी अन्य अदालत में स्थानांतरण की मांग का कारण नहीं हो सकती। बेंच ने कहा," यह ध्यान में रखना होगा कि बहस के दौरान कई बार भले ही इसकी आवश्यकता न हो, तापमान बहुत अधिक हो जाता है। हालांकि यह अकेले किसी के भी मन में आशंका पैदा करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं होगा।"जस्टिस विक्रम अग्रवाल की पीठ ने कहा,''पक्षकारों को संबंधित न्यायालय से न्याय नहीं मिलेगा।' 'न्यायालय ने आगे स्पष्ट किया कि साथ ही, यह पीठासीन...

पति को सिर्फ इसलिए पत्नी पर अत्याचार करने और उसे पीटने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि वे शादीशुदा हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
पति को सिर्फ इसलिए पत्नी पर अत्याचार करने और उसे पीटने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि वे शादीशुदा हैं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक जोड़े की एक दशक पुरानी शादी को खत्म करते हुए कहा है कि कोई भी कानून पति को यह अधिकार नहीं देता है कि वह अपनी पत्नी को केवल इसलिए पीटने और प्रताड़ित करने का अधिकार देता है क्योंकि उन्होंने शादी कर ली है। जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने कहा," केवल इसलिए कि दोनों पक्षों ने शादी कर ली है और प्रतिवादी उसका पति है, कोई भी कानून उसे अपनी पत्नी को पीटने और यातना देने का अधिकार नहीं देता है।"कोर्ट ने यह माना कि पति द्वारा शारीरिक उत्पीड़न का शिकार...

बार-बार निषेधाज्ञा आदेश का उल्लंघन करने पर 5 लाख रुपये का भुगतान करें या सिविल जेल का सामना करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने रमाडा के ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में होटल को आदेश दिया
'बार-बार निषेधाज्ञा आदेश का उल्लंघन करने पर 5 लाख रुपये का भुगतान करें या सिविल जेल का सामना करें': दिल्ली हाईकोर्ट ने रमाडा के ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में होटल को आदेश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय आतिथ्य कंपनी रमाडा द्वारा दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन मुकदमे में इसके खिलाफ पारित निषेधाज्ञा आदेश के बार-बार उल्लंघन और "अपमानजनक अवज्ञा" के 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट ने साथ ही होटल को जुर्माने की 5 लाख रुपये की राशि इसकी रजिस्ट्री में जमा करेने का निर्देश दिया।जस्टिस सी हरि शंकर ने कहा कि यदि राशि जमा नहीं की जाती है तो ला रमाडा वर्ल्ड रिज़ॉर्ट एंड स्पा के निदेशक कुमार संभव को एक सप्ताह की अवधि के लिए सिविल जेल में कैद की सजा भुगतनी होगी।पीठ ने...

क्या कोई दोषी आरटीआई के तहत केस डायरी की कॉपी मांग सकता है? तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
क्या कोई दोषी आरटीआई के तहत केस डायरी की कॉपी मांग सकता है? तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

तेलंगाना हाईकोर्ट ने इस सवाल का जवाब देने के लिए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है कि क्या कोई दोषी व्यक्ति सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत केस डायरी भाग- I की कॉपी मांग सकता है।जस्टिस बी विजयसेन रेड्डी ने कहा कि अपवाद प्रावधान इस बात को लेकर अस्पष्ट हैं कि क्या दोषी अधिनियम के तहत केस डायरी तक पहुंचने का हकदार है, जिसमें विवरण उनके अपने मामले के बारे में जानकारी है।पीठ ने कहा,“आरटीआई एक्ट की धारा 8 के तहत अपवाद प्रावधान बहुत अस्पष्ट हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि पहले मुझ पर आरोप लगाया गया;...

क्या आप अपनी प्रैक्टिस सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने के इच्छुक हैं? - सुप्रीम कोर्ट लॉयर वेलफेयर ट्रस्ट ने जस्टिस जेएस वर्मा फ़ेलोशिप स्कीम की घोषणा की
क्या आप अपनी प्रैक्टिस सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने के इच्छुक हैं? - सुप्रीम कोर्ट लॉयर वेलफेयर ट्रस्ट ने जस्टिस जेएस वर्मा फ़ेलोशिप स्कीम की घोषणा की

सुप्रीम कोर्ट लॉयर वेलफेयर ट्रस्ट (एससीएलडब्ल्यूटी) ने जस्टिस जेएस वर्मा फैलोशिप की स्थापना करके सुप्रीम कोर्ट में मुकदमेबाजी के क्षेत्र में युवा कानूनी प्रतिभा को पहचानने और बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख प्रैक्टिसिंग सीनियर वकीलों के योगदान से 2008 में स्थापित उक्त ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट के भीतर वकीलों के लिए पेशेवर अवसरों और कल्याण पहलों को समर्थन देने और बढ़ाने के लिए समर्पित है।ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने के इच्छुक योग्य...

कोई आश्चर्य नहीं कि अंबेडकर का जातिविहीन समाज का सपना अभी भी एक सपना है: मद्रास हाईकोर्ट ने नौकरी पाने के लिए गलत कम्युनिटी सर्टिफिकेट हासिल करने वाले लोगों के लिए कहा
कोई आश्चर्य नहीं कि अंबेडकर का 'जातिविहीन समाज' का सपना अभी भी एक सपना है: मद्रास हाईकोर्ट ने नौकरी पाने के लिए गलत कम्युनिटी सर्टिफिकेट हासिल करने वाले लोगों के लिए कहा

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में इस बात पर अफसोस जताया कि हालांकि संविधान निर्माताओं ने समतावादी समाज का सपना देखा था, जहां लोगों के साथ उनके धर्म, जाति या लिंग के बावजूद समान व्यवहार किया जाएगा, लेकिन कुछ लोग आज भी रोजगार और शिक्षा प्राप्त करने के लिए झूठे कास्ट सर्टिफिकेट पेश करने में लगे हुए हैं। इस प्रकार योग्य लोगों को अवसर से वंचित किया जा रहा है।जस्टिस एन माला ने कहा कि ऐसे लोगों के कारण ही डॉ. अंबेडकर का जातिविहीन समाज बनाने का सपना अभी भी एक सपना ही है।जस्टिस माला ने टिप्पणी की,“हमारे...

एक बार आरोप तय होने के बाद दोषमुक्ति/दोषी ठहराया जाना चाहिए, सीआरपीसी की धारा 216 आरोप को हटाने की अनुमति नहीं देती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
एक बार आरोप तय होने के बाद दोषमुक्ति/दोषी ठहराया जाना चाहिए, सीआरपीसी की धारा 216 आरोप को हटाने की अनुमति नहीं देती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक बार आरोप तय होने के बाद मुकदमे के अंत में आरोपी को या तो बरी होना चाहिए या दोषी ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि सीआरपीसी की धारा 216 आरोप को हटाने की अनुमति नहीं देती।जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने देव नारायण नामक व्यक्ति द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। उक्त पुनर्विचार याचिका में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी), चित्रकूट द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों में बदलाव के लिए...

हिजाब प्रतिबंध विवाद : कर्नाटक हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूल की दीवार पर हिजाब हमारी गरिमा है लिखने के आरोपी दो युवाओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की
हिजाब प्रतिबंध विवाद : कर्नाटक हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूल की दीवार पर "हिजाब हमारी गरिमा है" लिखने के आरोपी दो युवाओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने विजयनगर के सीएमसी होसपेटे के पास एक सरकारी गर्ल्स हाई स्कूल की दीवारों पर काले रंग से "हिजाब हमारी गरिमा है" लिखने के आरोपी दो युवाओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द कर दिया। जस्टिस एम नागाप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने मुज़म्मिल (23) और मोहम्मद जमाउल (25) द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया और कर्नाटक ओपन प्लेस (विरूपण की रोकथाम) अधिनियम, 1981 की धारा 3 के तहत उनके खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को रद्द कर दिया । .पीठ ने कहा कि अधिनियम के प्रावधानों को संबंधित क्षेत्र...

आत्म-सम्मान विवाह के लिए सार्वजनिक अनुष्ठान या घोषणा की आवश्यकता नहीं है: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास एचसी का  फैसला खारिज किया
आत्म-सम्मान विवाह के लिए सार्वजनिक अनुष्ठान या घोषणा की आवश्यकता नहीं है: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास एचसी का फैसला खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (28 अगस्त) को किसी व्यक्ति के जीवन साथी चुनने के मौलिक अधिकार को बरकरार रखते हुए मद्रास हईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया। इस फैसले में मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि वकीलों के कार्यालयों में की गई शादियां हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के अनुसार वैध नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामला धारा 7ए के अनुसार स्व-विवाह प्रणाली पर आधारित था, जिसे हिंदू विवाह अधिनियम में तमिलनाडु संशोधन द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम में शामिल किया गया था। इस धारा के अनुसार, दो हिंदू अपने दोस्तों या...

अखबार में रिपोर्ट छपती है और अगली सुबह रिट दायर: कलकत्ता हाईकोर्ट ने जादवपुर यूनिवर्सिटी में प्रतिबंधित स्टूडेंट यूनियन के खिलाफ जनहित याचिका खारिज की
'अखबार में रिपोर्ट छपती है और अगली सुबह रिट दायर': कलकत्ता हाईकोर्ट ने जादवपुर यूनिवर्सिटी में "प्रतिबंधित स्टूडेंट यूनियन" के खिलाफ जनहित याचिका खारिज की

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सुवेंदु अधिकारी द्वारा "रिविजनरी स्टूडेंट्स यूनियन/फेडरेशन" के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज कर दी। "रिविजनरी स्टूडेंट्स यूनियन/फेडरेशन" कथित तौर पर प्रतिबंधित स्टूडेंट यूनियन है। यह स्टूडेंट यूनियन जादवपुर यूनिवर्सिटी के भीतर से संचालित हो रहा है।चीफ जस्टिस टीएस शिवगणम और जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने रिट याचिका पर गौर करने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कहा,“क्या आप रिट याचिका को लेकर बहुत गंभीर हैं? हमें इसकी उम्मीद नहीं है।...

ज्ञानवापी-काशी स्वामित्व विवाद: मस्जिद समिति ने अलग पीठ द्वारा फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद मामलों को हाईकोर्ट की सीजे-बेंच में ट्रांसफर करने पर आपत्ति जताई
ज्ञानवापी-काशी स्वामित्व विवाद: मस्जिद समिति ने अलग पीठ द्वारा फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद मामलों को हाईकोर्ट की सीजे-बेंच में ट्रांसफर करने पर आपत्ति जताई

अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति (जो वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करती है) ने ज्ञानवापी मस्जिद-काशी विश्वनाथ मंदिर स्वामित्व विवाद मामलों को चीफ जस्टिस की पीठ को ट्रांसफर करने पर आपत्ति जताई। यह ट्रांसफर उस आदेश के लगभग एक महीने बाद मामलों में फैसला एक अलग पीठ द्वारा सुरक्षित रख लेने के बाद आया।चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर ने जब इस मामले उठाया तो सीनियर वकील एसएफए नकवी ने मामलों के हस्तांतरण के संबंध में अपनी आपत्ति जताई और इस प्रकार प्रस्तुत किया:"हम असमंजस में हैं। फैसला पहले सुरक्षित...

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के डब्ल्यूसीडी अधिकारी द्वारा कथित तौर पर नाबालिग से बलात्कार का स्वत: संज्ञान लिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के डब्ल्यूसीडी अधिकारी द्वारा कथित तौर पर नाबालिग से बलात्कार का स्वत: संज्ञान लिया

दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग (डब्ल्यूसीडी) के एक अधिकारी द्वारा कथित तौर पर एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को स्वत: संज्ञान लिया।प्रेमोदय खाखा पर नाबालिग से कई महीनों तक दुष्कर्म करने और उसे गर्भवती करने का आरोप है। आरोपी और उसकी पत्नी को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पत्नी पर आरोप है कि उसने नाबालिग बच्ची को गर्भपात की गोलियां दीं।मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव नरूला की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लिया और दिल्ली पुलिस से यह...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने 30 साल जेल में रहने के बाद मौत की सजा पाए 70 वर्षीय दोषी की सजा कम की, दया याचिका पर निर्णय लेने में अस्पष्ट देरी की आलोचना की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने 30 साल जेल में रहने के बाद मौत की सजा पाए 70 वर्षीय दोषी की सजा कम की, दया याचिका पर निर्णय लेने में अस्पष्ट देरी की आलोचना की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मौत की सजा पाए 70 वर्षीय दोषी की सजा रद्द की। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मौत की सजा आजीवन कारावास में बदल दिया, क्योंकि उसने 30 साल सलाखों के पीछे बिताए हैं। इन 30 सालों में से लगभग दो दशक उसने एकान्त कारावास में बिताए।जस्टिस जी नरेंद्र और जस्टिस सी एम पूनाचा की खंडपीठ ने साईबन्ना निंगप्पा नाटिकर द्वारा दायर रिट याचिका को दो आधारों पर स्वीकार कर लिया - उसकी दया याचिका पर निर्णय लेने में 7 साल और आठ महीने की अत्यधिक देरी/कानून की मंजूरी के बिना एकांत कारावास और एक ही सेल कारावास...

एनडीपीएस एक्ट | लैब रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य पूरक आरोपपत्र के माध्यम से दायर नहीं किया जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट
एनडीपीएस एक्ट | लैब रिपोर्ट 'सबसे महत्वपूर्ण' साक्ष्य पूरक आरोपपत्र के माध्यम से दायर नहीं किया जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट की सर्किट बेंच ने हाल ही में आरोप पत्र में विभिन्न 'प्रक्रियात्मक कमजोरियों' को ध्यान में रखते हुए नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस) के तहत आरोपी की जमानत याचिका को अनुमति दे दी।जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य और जस्टि, प्रसेनजीत विश्वास की खंडपीठ ने कहा:एक्जामिनेशन रिपोर्ट प्राप्त करने पर पूरक आरोप-पत्र दाखिल करने का मात्र बयान एनडीपीएस एक्ट की धारा 36ए(4) के प्रावधान के तहत वैधानिक आदेश के अनुरूप नहीं है। रासायनिक जांच रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य बन जाती...

सीआरपीसी की धारा 451 | जब्त की गई संपत्ति आवश्यकता से अधिक समय तक पुलिस/अदालत के कस्टडी में नहीं रहनी चाहिए: केरल हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 451 | जब्त की गई संपत्ति आवश्यकता से अधिक समय तक पुलिस/अदालत के कस्टडी में नहीं रहनी चाहिए: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सीआरपीसी की धारा 451 के दायरे का विश्लेषण किया। उक्त दायरा आपराधिक अदालतों को किसी अपराध की सुनवाई और पूछताछ के दौरान उसके समक्ष पेश की गई जब्त संपत्ति की अंतरिम कस्टडी के आदेश देने का अधिकार देता है।जस्टिस राजा विजयराघवन वी. की एकल न्यायाधीश पीठ का विचार था कि जब कोई संपत्ति आपराधिक अदालत के समक्ष पेश की जाती है तो उक्त अदालत के पास ऐसा आदेश देने का विवेक होगा, क्योंकि वह ऐसी वस्तु की उचित कस्टडी, जांच या ट्रायल के लिए उचित समझती है।हालांकि, कोर्ट ने संकेत...

त्वरित सुनवाई अनुच्छेद 21 की भावना: केरल हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ 12 साल पुराने क्रूरता मामला रद्द किया
त्वरित सुनवाई अनुच्छेद 21 की भावना: केरल हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ 12 साल पुराने क्रूरता मामला रद्द किया

केरल हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह पति के खिलाफ 12 साल पुराने क्रूरता के मामले को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि दोनों पक्षों ने अपने विवाद सुलझा लिए हैं और पीड़िता इस मामले पर आगे मुकदमा नहीं चलाना चाहती है।जस्टिस के बाबू ने कहा कि एफआईआर के आधार पर आपराधिक मुकदमा चलाने की अनुमति देने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा होने की संभावना नहीं है, जिसकी जांच बारह साल पहले शुरू हुई थी लेकिन कहीं नहीं पहुंची।पीठ ने कहा, “संहिता के प्रावधानों की अक्षरशः भावना और संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित संवैधानिक संरक्षण के...

नैरेटिव बदलने का दबाव कौन से मामलों में चल सकता है, न्यायाधीश और जांच एजेंसियां मीडिया के दबाव से प्रतिरक्षित नहीं: जस्टिस अनुप जे. भंभानी
नैरेटिव बदलने का दबाव कौन से मामलों में चल सकता है, न्यायाधीश और जांच एजेंसियां मीडिया के दबाव से प्रतिरक्षित नहीं: जस्टिस अनुप जे. भंभानी

दिल्ली हाईकोर्ट के जज, जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने शनिवार को कहा कि जांच एजेंसियां और न्यायाधीश मीडिया के दबाव से अछूते नहीं हैं और किसी मामले के इर्द-गिर्द बने नैरेटिव का दबाव भटक जाता है और मामले की दिशा बदल देता है।न्यायाधीश ने कहा,"आपराधिक न्याय प्रणाली में शामिल लोगों की तरह वकील के रूप में हमें हमेशा यह कहना चाहिए कि हम जो सुनते हैं, जो पढ़ते हैं, उससे हम सभी अचेतन रूप से प्रभावित होते हैं। यह हमारी सोच को प्रभावित करता है।"जस्टिस भंभानी आपराधिक और संवैधानिक न्यायशास्त्र पर प्रवचन केंद्र...

ज्ञानवापी - मस्जिद परिसर के एएसआई के सर्वेक्षण के दौरान मिली कलाकृतियों, अन्य सामग्रियों को संरक्षित करने के लिए वाराणसी न्यायालय में आवेदन
ज्ञानवापी - मस्जिद परिसर के एएसआई के सर्वेक्षण के दौरान मिली कलाकृतियों, अन्य सामग्रियों को संरक्षित करने के लिए वाराणसी न्यायालय में आवेदन

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के चल रहे सर्वेक्षण के दौरान मिली कलाकृतियों और अन्य सामग्रियों को संरक्षित करने के लिए वाराणसी न्यायालय के समक्ष एक नया आवेदन दायर किया गया है । आदेश 7 नियम 39 सीपीसी के तहत आवेदन 2022 के श्रृंगार गौरी पूजा सूट (सूट नंबर 18) में 4 महिला वादी द्वारा एडवोकेट हरि शंकर जैन, विष्णु शंकर जैन, सुभाष नंदन चतुर्वेदी और सुधीर त्रिपाठी के माध्यम से दायर किया गया है।आवेदन में यह कहा गया है कि एएसआई को जो भी वस्तुएं मिलीं, वे मामले की संपत्ति...