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AIBE को कई भाषाओं में आयोजित किया जा सकता है, CLAT अनुवाद की जटिलता के कारण संभव नहीं: कंसोर्टियम ऑफ NLUs ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया
कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि AIBE का आसानी से अनुवाद किया जा सकता है और कई भाषाओं में आयोजित किया जा सकता है, जबकि CLAT परीक्षा में अनुवाद की बहुत अधिक समस्याएं मौजूद हैं। यह कहते हुए कि दोनों परीक्षाओं के बीच बुनियादी अंतर हैं, कंसोर्टियम ने कहा है कि CLAT 2024, जो दिसंबर में होना है, उसके लिए इस स्तर पर "पूरी तरह से नया प्रारूप" पेश करना संभव नहीं है क्योंकि यह उन सभी उम्मीदवारों को, जिन्होंने इस वर्ष के लिए अपनी तैयारी पहले ही शुरू कर दी है, को गंभीर...
पार्टनर का शोषण करना, उसका दुख कम करने की कोशिश न करना आईपीसी की धारा 306 के तहत अपराध हो सकता है : कोर्ट ने प्रत्यूषा बनर्जी आत्महत्या मामले में बॉयफ्रेंड को बरी करने से इनकार किया
मुंबई के एक सेशन कोर्ट ने 2016 में अभिनेत्री प्रत्यूषा बनर्जी को आत्महत्या को उकसाने के आरोपी इवेंट प्लानर राहुल राज सिंह को आरोपमुक्त करने से इनकार करते हुए कहा कि अपने साथी का इस हद तक शोषण करना कि उसको जीने की इच्छा न करे और उसकी तकलीफ कम करने के लिए कोई कदम न उठाना, आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध हो सकता है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसजे अंसारी ने प्रथम दृष्टया पाया कि बनर्जी के लिव-इन पार्टनर सिंह ने उसके जीवन को " जीते जी नरक" बना दिया और कहा जा सकता है कि उसने जानबूझकर उसे आत्महत्या के...
'यौन इरादे का कोई संकेत नहीं': केरल हाईकोर्ट ने शीलभंग के लिए नाबालिग का हाथ पकड़ने के आरोपी युवक को अग्रिम जमानत दी
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 21 वर्षीय लड़के को अग्रिम जमानत दे दी। इस लड़के पर 15 वर्षीय लड़की का शीलभंग करने के इरादे से उसका हाथ पकड़ने का आरोप है।याचिकाकर्ता-अभियुक्त के खिलाफ अभियोजन पक्ष का मामला यह है कि वह मामले के दूसरे आरोपी के साथ बाइक पर आया और उसने नाबालिग लड़की का शीलभंग करने के इरादे से उसका हाथ पकड़ लिया। दोनों लड़कों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 और सपठित पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 7, 8 और धारा 16 के तहत मामला दर्ज किया गया।जस्टिस कौसर एडप्पागाथ ने कहा कि प्रथम...
अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक संस्थानों के अधिकारों का उल्लंघन: पटना हाईकोर्ट ने शिक्षकों की नियुक्ति के लिए चयन समिति के "अनुमोदन" की आवश्यकता वाला संशोधन खारिज किया
पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि बिहार राज्य में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को अब नियुक्ति, पदोन्नति, बर्खास्तगी, सेवामुक्ति, सेवा से निष्कासन और सेवा समाप्ति या शिक्षकों की पदावनति से संबंधित मामलों में "अनुमोदन" लेने के बजाय केवल अपने संबंधित यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन से परामर्श करने की आवश्यकता होगी।अदालत का फैसला बिहार राज्य यूनिवर्सिटी (संशोधन) एक्ट, 2013 की धारा 4(5) को चुनौती देने वाले दो रिट आवेदनों के जवाब में आया। उक्त आवेदनों में बिहार राज्य यूनिवर्सिटी एक्ट, 1976...
यूपी 'धर्मांतरण विरोधी' कानून का कोई अनुपालन नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'विवाहित' अंतर-धार्मिक जोड़े की सुरक्षा याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को अंतर-धार्मिक जोड़े (जो दूर के ममेरे भाई-बहन हैं) द्वारा दायर सुरक्षा याचिका खारिज कर दी। उक्त जोड़े ने कथित तौर पर हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार एक-दूसरे से शादी की है।कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता नं. 1/लड़की, जो जन्म से मुस्लिम है, उसने खुद को हिंदू धर्म में परिवर्तित करने से पहले यूपी गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम 2021 (UP Prohibition of Unlawful Conversion of Religion Act 2021) की धारा 8 और 9 का पालन नहीं किया। इस मामले में जबकि याचिकाकर्ता नंबर 1 मुस्लिम...
अपने कृत्यों के बदले कुछ सामाजिक भलाई करें: कलकत्ता हाईकोर्ट ने वृक्षारोपण का आदेश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने अवमानना क्षेत्राधिकार (Contempt Jurisdiction) का उपयोग करते हुए न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करने वालों को सामाज की भलाई में योगदान करने का निर्देश दिया। कलकत्ता हाईकोर्ट ने अवमाननाकर्ताओं को बंगाल में सतत ग्रामीण विकास और गांवों की समृद्धि को आगे बढ़ाने में उपयोग के लिए प्रत्येक ग्राम समृद्धि फाउंडेशन को 25,000 रुपये के जुर्माने का भुगतान करने के साथ-साथ "दस फल देने वाले पेड़" लगाने का निर्देश दिया।जटिस शेखर बी सराफ की एकल पीठ ने कहा," अवमाननाकर्ताओं ने...
एमएस धोनी विश्व ख्याति प्राप्त क्रिकेटर, मीडिया को ऐसी हस्तियों के खिलाफ आरोप लगाने से पहले सच्चाई का पता लगाना चाहिए : मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने पक्षकारों के बीच चल रहे मानहानि के मुकदमे में पूर्व भारतीय क्रिकेटर एमएस धोनी द्वारा की गई पूछताछ को चुनौती देने से इनकार करने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ ज़ी मीडिया की अपील को खारिज करते हुए कहा कि समाचार चैनलों को समाचार रिपोर्ट प्रसारित करने में सतर्क रहना चहिए। जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस मोहम्मद शफीक की खंडपीठ ने कहा,“ पहला प्रतिवादी विश्व ख्याति प्राप्त क्रिकेटर और एक समर्पित व्यक्ति है और उन्होंने ईमानदारी और समर्पण के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के उच्चतम स्तर...
'मांस की अनिधिकृत बिक्री की संभावना के आधार पर मांस की दुकान के लिए एनओसी देने से इनकार नहीं किया जा सकता': इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मांस की अनिधिकृत बिक्री की संभावना खुदरा मांस की दुकान के लिए 'अनापत्ति प्रमाणपत्र' (एनओसी) देने से इनकार करने का कोई आधार नहीं।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनीष कुमार की खंडपीठ ने पुलिस सुपरिटेंडेंट, अंबेडकर नगर, को खुदरा मांस की दुकान खोलने के लिए एनओसी देने के लिए मोहम्मद शकील द्वारा दायर आवेदन पर पुनर्विचार करने और नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया।मूलतः मांस की दुकान खोलने के लिए याचिकाकर्ता का आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि पुलिस द्वारा अनुकूल रिपोर्ट...
एससी/एसटी एक्ट का संरक्षण उन राज्यों तक ही सीमित नहीं, जहां पीड़ितों को एससी/एसटी के रूप में मान्यता दी जाती है, यह जहां भी अपराध होता है वहां लागू होता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (अत्याचार निवारण अधिनियम) के तहत अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति (SC/ST Act) के सदस्यों की सुरक्षा उन राज्यों तक सीमित नहीं की जा सकती, जहां पर उनको आधिकारिक तौर पर SC/ST के रूप में मान्यता प्राप्त है जस्टिस रेवती मोहिते डेरे, जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस एनजे जमादार की फुल बेंच ने कहा कि भले ही किसी राज्य में किसी समुदाय को एससी या एसटी के रूप में मान्यता नहीं दी गई हो, फिर भी अगर वहां उनके खिलाफ...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 73 वर्षीय रिटायर्ड नर्स को पेंशन के लिए 15 साल तक मुकदमा चलाने के लिए कोल्हापुर नगर निगम पर 25 हजार जुर्माना लगाया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कोल्हापुर नगर निगम पर 73 वर्षीय रिटायर्ड स्टाफ नर्स को उसकी पेंशन और पेंशन लाभ के लिए 15 साल तक मुकदमा चलाने के लिए 25,000/- रुपये का जुर्माना लगाया गया।जस्टिस संदीप वी मार्ने ने कोल्हापुर नगर निगम के आयुक्त द्वारा 2008 में रिटायर हुई स्टाफ नर्स शशिकला विजय भोरे को देय पेंशन राशि जमा करने के औद्योगिक न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली रिट याचिका खारिज कर दी।"यह न्यायालय याचिकाकर्ता - नगर निगम, जो सार्वजनिक निकाय और आदर्श नियोक्ता है, उसके आचरण पर ध्यान देता...
उड़ीसा हाईकोर्ट के आदेश के बाद पति ने कुछ ही घंटों में पत्नी, बेटी का 8 महीने का भरण-पोषण बकाया चुकाया
उड़ीसा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक पति को पत्नी और नाबालिग बेटी को आठ महीने की बकाया भरण-पोषण राशि का भुगतान करने का आदेश दिया और ऐसा न करने पर उसे कानून की प्रक्रिया के अनुसार हिरासत में लेने की चेतावनी दी।जस्टिस संगम कुमार साहू की सिंगल बेंच ने एक आपराधिक विविध याचिका पर ये फैसला दिया। मामले में याचिकाकर्ता पत्नी और बेटी हैं।फैमिली कोर्ट जज-सेकंड, कटक की अदालत ने पांच जनवरी 2023 को विपरीत पक्ष यानि पति को सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पहली और दूसरी याचिकाकर्ताओं को क्रमशः 4,000 रुपये और 3,000...
आरोपी व्यक्तियों के बीच रिकॉर्ड की गई टेलीफोनिक बातचीत अवैध रूप से प्राप्त की गई हो तो भी साक्ष्य के रूप में स्वीकार्यः इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह एक फैसले में कहा कि भले ही दो आरोपी व्यक्तियों के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत अवैध रूप से सहेजी गई हो, इससे ऐसे आरोपियों के खिलाफ रिकॉर्ड की गई बातचीत की साक्ष्य के रूप में स्वीकार्यता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में एक आरोपी (महंत प्रसाद राम त्रिपाठी) को आरोप मुक्त करने से इनकार करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एक पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।मामले में...
न्यायालय किसी दस्तावेज़ को साक्ष्य के रूप में लेने से केवल इसलिए इनकार नहीं कर सकता क्योंकि वह कमजोर फोटोस्टेट कॉपी या कथित तौर पर मनगढ़ंत है : आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि ट्रायल कोर्ट का ऐसा आदेश जिसमें कुछ दस्तावेजों को केवल यह कहकर रिकॉर्ड पर लेने से इनकार किया गया हो कि वे फोटोस्टेट हैं या दस्तावेजों को केवल यह कहकर रिकॉर्ड पर लेने से इनकार किया गया हो कि अभियोजन पक्ष द्वारा उन पर कमजोर दस्तावेज़ या मनगढ़ंत दस्तावेज़ होने का आरोप लगाया गया है, न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। जस्टिस डॉ. वीआरके कृपा सागर ने कहा, "इन दस्तावेजों की सामग्री की सच्चाई या अन्यथा यह एक ऐसा मामला है जिसका निर्णय मुकदमे में किया जाना चाहिए, न...
अवैध विवाह के बच्चों का हिंदू संयुक्त परिवार की संपत्ति में अपने माता-पिता के हिस्से पर अधिकार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में शुक्रवार को कहा कि अमान्य/शून्य विवाह से पैदा हुए बच्चे अपने मृत माता-पिता की संपत्ति में हिस्सा पाने के हकदार हैं, जो उन्हें हिंदू सहदायिक संपत्ति के काल्पनिक विभाजन पर आवंटित किया गया होगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल हिंदू मिताक्षरा कानून द्वारा शासित हिंदू संयुक्त परिवार की संपत्तियों पर लागू है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली 3-जजों की पीठ रेवनासिद्दप्पा बनाम मल्लिकार्जुन (2011) मामले में दो-जजों की पीठ के फैसले के...
लिव इन रिलेशन स्थिरता प्रदान नहीं कर सकते, ऐसे रिश्ते से बाहर आने के बाद एक महिला के लिए पति ढूंढना मुश्किल: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप से बाहर आने के बाद एक महिला के लिए शादी के लिए पुरुष साथी ढूंढना बहुत मुश्किल होता है।कोर्ट ने यह टिप्पणी अपनी लिव-इन पार्टनर से बलात्कार के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत देते हुए की।यह देखते हुए कि ऐसे संबंधों पर भारत में सामाजिक सहमति नहीं होती है, जिसमें मुख्य रूप से मध्यम वर्ग शामिल है, पीठ ने कहा कि ऐसा मध्यम वर्ग ऐसी अलग महिलाओं को सामान्य रूप से नहीं देखता है।"वे ऐसे रिश्ते से बाहर आने वाली महिला को सामान्य व्यक्ति नहीं मानते हैं। अपवाद...
'ऐसे मामलों में मां का साक्ष्य सबसे अच्छा साक्ष्य': कलकत्ता हाईकोर्ट ने तीन साल की बच्ची के साथ अप्राकृतिक अपराध के दोषी की सजा बरकरार रखी
कलकत्ता हाईकोर्ट ने तीन वर्षीय बच्चे के साथ अप्राकृतिक अपराध (आईपीसी की धारा 377 के तहत) करने के आरोपी एक व्यक्ति की अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने इस मामले में उचित संदेह से परे उसके अपराध को स्थापित कर दिया। जस्टिस शंपा दत्त (पॉल) ने कहा कि ऐसे मामलों में बच्चे की मां द्वारा दिया गया साक्ष्य 'सर्वोत्तम साक्ष्य माना जाना चाहिए।बेंच ने कहा,"इस तरह के मामले में एक मां की गवाही अदालत के सामने सबसे अच्छी गवाही है। अपने तीन साल के कोमल असहाय बच्चे के लिए मां के दिल में...
हर मौसम में पार्टनर बदलना स्थिर समाज की पहचान नहीं, भारत में विवाह संस्था को नष्ट करने के लिए व्यवस्थित डिजाइन काम कर रहा है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है कि भारत में विवाह की संस्था को नष्ट करने के लिए एक व्यवस्थित डिजाइन काम कर रहा है और फिल्में और टीवी धारावाहिक इसमें योगदान दे रहे हैं।कोर्ट ने यह टिप्पणी अपनी लिव-इन पार्टनर से बलात्कार के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत देते हुए की।कोर्ट ने यह मानते हुए कि "हर मौसम में साथी बदलने" की क्रूर अवधारणा को "स्थिर और स्वस्थ" समाज की पहचान नहीं माना जा सकता है, जोर देकर कहा कि विवाह संस्था किसी व्यक्ति को जो सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करती है, उसकी उम्मीद लिव-इन-रिलेशनशिप...
व्यापमं मामले जैसी कोई साजिश नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर स्थित यूनिवर्सिटी द्वारा बी.टेक में एडमिशन रद्द करने का आदेश रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदन मोहन मालवीय टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, गोरखपुर द्वारा जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कथित तौर पर फर्जी तरीके से एडमिशन लेने के आरोप में 67 दूसरे और लास्ट ईयर के बी.टेक स्टूडेंट के एडमिशन रद्द कर दिए गए।जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की एकल पीठ ने व्यापम मामले से समानताएं निकालने से इनकार कर दिया, जहां सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी के स्थापित उदाहरण पाते हुए न केवल उन लोगों के एडमिशन रद्द कर दिए, जिन्होंने अपना कोर्स पूरा कर लिया, बल्कि उन लोगों के भी एडमिशन रद्द कर दिए, जो...
सबूतों की चैन गायब: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस एक्ट के तहत 10 साल की कैद के दोषी व्यक्ति को बरी किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कथित तौर पर 520 ग्राम प्रतिबंधित पदार्थ रखने के लिए एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी कर दिया। कोर्ट ने उक्त आदेश यह देखते हुए दिया कि अभियोजन में कमी आत्मविश्वास को प्रेरित नहीं करती है।जस्टिस अरुण मोंगा ने साक्ष्यों में कमियों की ओर इशारा करते हुए कहा,“अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों में कमियां और विसंगतियां विश्वास को प्रेरित नहीं करतीं, जैसा कि पिछले पैराग्राफ में पहले ही चर्चा की जा चुकी है। यहां महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक अभियोजन पक्ष...
सीआरपीसी की धारा 438(4) | यदि आरोप प्रथम दृष्टया झूठे हों तो कुछ बलात्कार अपराधों के लिए अग्रिम जमानत देने पर रोक नहीं होगी: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने माना कि यदि ऐसे अपराध प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री से नहीं बने हैं, या आरोप झूठे प्रतीत होते हैं तो कुछ बलात्कार अपराधों के लिए अग्रिम जमानत देने पर रोक, जैसा कि सीआरपीसी की धारा 438 (4) के तहत दर्शाया गया है, लागू नहीं होगी।सीआरपीसी की धारा 438(4) और धारा 376(3), 376 एबी, 376 डीए, और धारा 376 डीबी के तहत दंडनीय अपराधों में कथित रूप से शामिल आरोपी को अग्रिम जमानत पर रोक लगाती है।जस्टिस ज़ियाद रहमान ए.ए. की एकल पीठ ने कहा कि केवल इसलिए कि धारा 376 (3), 376 एबी, 376 डीए...




















