मुख्य सुर्खियां

कर्नाटक हाईकोर्ट ने लिवर डॉक्टर को हिमालय कॉर्पोरेशन के खिलाफ कथित अपमानजनक ट्वीट्स हाइड करने के लिए एक्स अकाउंट तक पहुंचने की अनुमति दी
कर्नाटक हाईकोर्ट ने लिवर डॉक्टर को हिमालय कॉर्पोरेशन के खिलाफ कथित अपमानजनक ट्वीट्स हाइड करने के लिए एक्स अकाउंट तक पहुंचने की अनुमति दी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स हैंडल '@theliverdr' संचालित करने वाले डॉ साइरिएक एबी फिलिप्स के अकाउंट को निलंबित करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को संशोधित किया।जस्टिस एसजी पंडित ने हिमालय वेलनेस कॉरपोरेशन और उसके उत्पादों के खिलाफ कथित मानहानिकारक ट्वीट्स को हाइड करने को कहने के बाद डॉ. फिलिप्स को अपने अकाउंट तक पहुंचने की अनुमति दी।हिमालय ने दलील दी कि डॉ. फिलिप्स कंपनी के उत्पादों के खिलाफ अपमानजनक बयान पोस्ट कर रहे हैं, जिसके कारण उन्हें काफी कारोबार का नुकसान हुआ है। डॉक्टर के...

आप सांसद राघव चड्ढा ने सरकारी बंगले से बेदखली वाले आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया
आप सांसद राघव चड्ढा ने सरकारी बंगले से बेदखली वाले आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया

आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने मंगलवार को ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, जिस आदेश में राज्यसभा सचिवालय को उन्हें सरकारी बंगले से बेदखल करने की मंजूरी दे दी और रास्ता साफ कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव नरूला की खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया, जिसने इसे कल सूचीबद्ध करने की अनुमति दे दी।चड्ढा की ओर से पेश वकील ने अदालत को यह भी बताया कि राघव को विवादित आदेश के अनुपालन में बेदखली नोटिस जारी किया गया है।पिछले हफ्ते...

हिरासत के आदेशों को चुनौती देना, निष्पादन से पहले रोक लगाना साक्ष्य की उचित जांच को रोक सकता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
हिरासत के आदेशों को चुनौती देना, निष्पादन से पहले रोक लगाना साक्ष्य की उचित जांच को रोक सकता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने माना कि कानूनी चैनलों के माध्यम से निष्पादन से पहले हिरासत के आदेश को चुनौती देने के बाद वे यह तर्क नहीं दे सकते कि वर्तमान स्थिति और हिरासत के आदेश के बीच लाइव लिंक की कमी के कारण आदेश को रद्द कर दिया जाना चाहिए।चीफ जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह और जस्टिस राजेश सेखरी की खंडपीठ ने तर्क दिया कि आदेश को पहले से चुनौती देकर उन्होंने इस बात की उचित जांच को रोक दिया कि क्या हिरासत आदेश के लिए पर्याप्त आधार या सबूत थे।खंडपीठ ने कहा,“..लेकिन यदि याचिकाकर्ताओं और...

चौबीस घंटे का कवरेज निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को प्रभावित कर रहा है: अभिषेक बनर्जी की पत्नी ने मीडिया कवरेज के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
चौबीस घंटे का कवरेज निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को प्रभावित कर रहा है: अभिषेक बनर्जी की पत्नी ने मीडिया कवरेज के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की, जो पश्चिम बंगाल में बहुस्तरीय भर्ती घोटाले की आरोपी हैं। इस केस की जांच सीबीआई और ईडी द्वारा की जा रही है, जिसमें उन्होंने अपने पति के मुकदमे की मीडिया कवरेज को चुनौती दी है, जिससे पूर्वाग्रह पैदा हो रहा है।जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई की, जिन्होंने डीएसजी बिल्वादल भट्टाचार्य और एक प्रतिवादी के एक अन्य वकील की प्रार्थना पर मामले को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर...

सीधी पेशाब मामला : मप्र हाईकोर्ट ने आरोपी की एनएसए हिरासत को बरकरार रखा, कहा उसके कृत्य से पूरे राज्य में शांति को खतरा
सीधी पेशाब मामला : मप्र हाईकोर्ट ने आरोपी की एनएसए हिरासत को बरकरार रखा, कहा उसके कृत्य से पूरे राज्य में शांति को खतरा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सीधी पेशाब मामले में आरोपी बंदी की पत्नी द्वारा उसकी निवारक हिरासत को चुनौती देते हुए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने कहा कि अधिकारियों ने प्रवेश शुक्ला के खिलाफ उक्त अधिनियम की धारा 3(2) के तहत कार्यवाही शुरू करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के प्रावधानों का सही ढंग से अनुपालन किया है ताकि उसे कोई भी अपराध करने से रोका जा सके। आगे चलकर कानून और व्यवस्था बनाए रखने पर प्रतिकूल प्रभाव...

अनुच्छेद 226 | आपराधिक रिट क्षेत्राधिकार में एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ इंट्रा-कोर्ट रिट सुनवाई योग्य नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट
अनुच्छेद 226 | आपराधिक रिट क्षेत्राधिकार में एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ इंट्रा-कोर्ट रिट सुनवाई योग्य नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत आपराधिक रिट क्षेत्राधिकार के प्रयोग में एकल न्यायाधीश पीठ द्वारा पारित आदेश या निर्णय के खिलाफ इंट्रा-कोर्ट रिट दायर नहीं की जा सकती।चीफ जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस कार्डक एटे की खंडपीठ ने अदालत के नियमों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में किसी भी इंट्रा-कोर्ट रिट की अनुमति नहीं है।खंडपीठ ने कहा,“यहां ऊपर की गई चर्चा के संबंध में हमारा दृढ़ विचार है कि इंट्रा-कोर्ट रिट अपील संविधान के अनुच्छेद 226 के...

महिला सुरक्षा : छेड़छाड़ के खिलाफ जागरूकता पैदा करने के लिए बसों में पोस्टर लगाने पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा
महिला सुरक्षा : छेड़छाड़ के खिलाफ जागरूकता पैदा करने के लिए बसों में पोस्टर लगाने पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए छेड़छाड़ के खिलाफ जागरूकता पैदा करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन में पोस्टर या होर्डिंग्स लगाने पर दिल्ली सरकार से उसका रुख पूछा है। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव नरूला की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया और उसके वकील को उक्त पहलू पर निर्देश लेने के लिए छह सप्ताह का समय दिया।पीठ निर्भया सामूहिक बलात्कार मामले के बाद राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे से...

हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी का अधिकार क्षेत्र केवल तभी जब जाति प्रमाण पत्र की शुद्धता मुद्दा हो, न कि तब जब प्रमाण पत्र खुद जाली हो: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी का अधिकार क्षेत्र केवल तभी जब जाति प्रमाण पत्र की 'शुद्धता' मुद्दा हो, न कि तब जब प्रमाण पत्र खुद 'जाली' हो: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने हाल ही में 'जाली' दस्तावेजों और उन दस्तावेजों के बीच मौजूद स्पष्ट अंतर को दोहराया है जिन्हें 'संदिग्ध या गलत' माना जा सकता है।एक अभ्यर्थी ने उसे 'पटवारी' के पद पर नियुक्त करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुनाते हुए, जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया की सिंगल जज बेंच ने याचिकाकर्ता उम्मीदवार की ओर से प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र की सत्यता के बारे में उप मंडल अधिकारी, शोहागपुर द्वारा दायर जांच रिपोर्ट को रद्द करने से इनकार कर दिया।एसडीओ, शोहागपुर...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पैरेंस पैट्रिया के सिद्धांत का इस्तेमाल करते हुए कोमा में पड़े पति के संरक्षक के रूप में पत्नी को नियुक्त किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'पैरेंस पैट्रिया' के सिद्धांत का इस्तेमाल करते हुए कोमा में पड़े पति के संरक्षक के रूप में पत्नी को नियुक्त किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्याय के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए याचिकाकर्ता-पत्नी को उसके पति, जो स्थायी रूप से निष्क्रिय अवस्था में है, के संरक्षक के रूप में नियुक्त करने के लिए 'पैरेंस पैट्रिया' के सिद्धांत को लागू किया है। जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस प्रशांत कुमार की पीठ ने कहा,“मानसिक अक्षमता को एक असाधारण परिस्थिति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है जो इस क्षेत्राधिकार के प्रयोग को उचित ठहराएगा। यदि न्यायालय इस बात से संतुष्ट है कि संबंधित व्यक्ति निष्क्रिय अवस्था में है, तो निश्चित रूप...

उमेश पाल हत्याकांड | मारे गए गैंगस्टर अतीक अहमद के भाई की पत्नी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की याचिका, एफआईआर को चुनौती
उमेश पाल हत्याकांड | मारे गए गैंगस्टर अतीक अहमद के भाई की पत्नी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की याचिका, एफआईआर को चुनौती

अतीक अहमद के भाई खालिद अज़ीम उर्फ़ अशरफ़ की पत्नी ज़ैनब फातिमा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक क्रिमिनल रिट पीटिशन फाइल की है, जिसमें उसने उमेश पाल मर्डर केस में अपने ख़िलाफ़ फरवरी 2023 में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की है।जस्टिस विवेक कुमार बिड़ला और जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ इस सप्ताह इस मामले पर सुनवाई कर सकती है।ज़ैनब पर यूपी पुलिस ने 2005 के राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल और उसके दो पुलिस गार्डों की हत्या के बाद शूटरों को प्रयागराज से भागने में मदद करने का आरोप लगाया है।ज़ैनब...

केरल हाईकोर्ट ने सौतेले पिता को नाबालिग लड़की का बलात्कार करने के लिए सहयोग देने की आरोपी मां को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया
केरल हाईकोर्ट ने सौतेले पिता को नाबालिग लड़की का बलात्कार करने के लिए सहयोग देने की आरोपी मां को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया

केरल हाईकोर्ट ने सौतेले पिता को नाबालिग बेटी से बलात्कार और यौन उत्पीड़न करने की सुविधा देने के आरोप में नाबालिग बेटी की मां की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस गोपीनाथ पी. ने कहा कि अगर मां के खिलाफ आरोप सही साबित हुए तो यह मातृत्व का अपमान है। न्यायालय ने यह भी कहा कि चूंकि जैविक मां को आरोपी के रूप में सूचीबद्ध किया गया, इसलिए वह आरोपी व्यक्तियों के पक्ष में साक्ष्य देने के लिए नाबालिग बच्चे को प्रभावित करने या डराने-धमकाने की स्थिति में हो सकती है।“मेरा विचार है कि याचिकाकर्ता स्पष्ट...

सीआरपीसी की धारा 200 के तहत शिकायत का संज्ञान लेते समय मजिस्ट्रेट गवाहों की गवाही का अवलोकन नहीं कर सकते: मद्रास हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 200 के तहत शिकायत का संज्ञान लेते समय मजिस्ट्रेट गवाहों की गवाही का अवलोकन नहीं कर सकते: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में पाया कि सीआरपीसी की धारा 200 के तहत शिकायत का संज्ञान लेते समय मजिस्ट्रेट गवाहों की सत्यता पर गौर नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि संज्ञान चरण में मजिस्ट्रेट केवल यह जांच कर सकता है कि प्रथम दृष्टया अपराध का गठन करने के लिए सामग्री उपलब्ध है या नहीं।जस्टिस पी धनबल ने मुकेश जैन पुत्र प्रेम चंद बनाम बालाचंदर मामले में हाईकोर्ट के पहले के फैसले पर भरोसा किया और कहा कि संज्ञान चरण में मजिस्ट्रेट को शिकायत और अन्य दस्तावेजों के साथ-साथ गौर करना होगा। यह देखने के लिए कि क्या...

न्यूज़क्लिक गिरफ़्तारियां| चीन से एक पैसा भी नहीं आया, गिरफ्तारी का आधार नहीं बताया गया: प्रबीर पुरकायस्थ ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा
न्यूज़क्लिक गिरफ़्तारियां| 'चीन से एक पैसा भी नहीं आया, गिरफ्तारी का आधार नहीं बताया गया': प्रबीर पुरकायस्थ ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को न्यूज़क्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती द्वारा चीन समर्थक प्रचार के लिए धन प्राप्त करने के पोर्टल के आरोपों के बाद दर्ज यूएपीए मामले में उनके रिमांड आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।जस्टिस तुषार राव गेडेला ने पुरकायस्थ, चक्रवर्ती और दिल्ली पुलिस दोनों के वकीलों को 2 घंटे से अधिक समय तक सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दर्ज यूएपीए एफआईआर को चुनौती के संबंध में अदालत तय करेगी...

[NEET] प्राइवेट कॉलेजों में कुछ विशेषाधिकार प्राप्त और उच्च संपर्क वाले उम्मीदवारों को पिछले दरवाजे से एडमिशन दिया गया: इलाहाबाद हाईकोर्ट
[NEET] प्राइवेट कॉलेजों में कुछ विशेषाधिकार प्राप्त और उच्च संपर्क वाले उम्मीदवारों को पिछले दरवाजे से एडमिशन दिया गया: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में देखा कि कम अंक वाले कुछ उम्मीदवारों को उत्तर प्रदेश राज्य के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में पिछले दरवाजे से एडमिशन दिया गया, जबकि विभिन्न राज्यों से संबंधित याचिकाकर्ताओं को उनके निवास स्थान की कमी के आधार पर काउंसलिंग में भाग लेने का अवसर देने से इनकार कर दिया गया।ग्यारह याचिकाकर्ता, यूपी राज्य के गैर-निवासी/गैर-निवास, डेंटल कॉलेजों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित नेशनल एलीजिबल एंड एंट्रेस्ट टेस्ट में उपस्थित हुए और 108-132 के बीच अंकों के साथ उत्तीर्ण हुए।...

मेडिकल लापरवाही की किसी एक घटना के लिए अस्पताल को निष्क्रिय नहीं बनाया जा सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संजय गांधी अस्पताल, अमेठी के लाइसेंस निलंबन पर रोक लगाई
मेडिकल लापरवाही की किसी एक घटना के लिए अस्पताल को निष्क्रिय नहीं बनाया जा सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संजय गांधी अस्पताल, अमेठी के लाइसेंस निलंबन पर रोक लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हाल ही में संजय गांधी अस्पताल, अमेठी के लाइसेंस के निलंबन पर रोक लगा दी। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनीष कुमार की पीठ ने कहा कि चूंकि चिकित्सा लापरवाही की एक घटना में जांच लंबित है, इसलिए पूरे अस्पताल को निष्क्रिय नहीं बनाया जा सकता।पीठ ने कहा,“ इन परिस्थितियों में मेडिक लापरवाही की किसी एक घटना के मामले में जांच लंबित रहने के दौरान अस्पताल को निष्क्रिय रखना भी बड़े पैमाने पर जनता के हित के खिलाफ है। यह ऐसा मामला नहीं है जहां बड़ी संख्या में मरीजों को परेशानी...

दिल्ली हाईकोर्ट ने बरी होने के बाद रिहाई के लिए जमानत की आवश्यकता पर नई सीआरपीसी की धारा 438 में बदलाव का सुझाव दिया, कहा- होगा को हो सकता है से बदलें
दिल्ली हाईकोर्ट ने बरी होने के बाद रिहाई के लिए जमानत की आवश्यकता पर नई सीआरपीसी की धारा 438 में बदलाव का सुझाव दिया, कहा- 'होगा' को 'हो सकता है' से बदलें

दिल्ली हाईकोर्ट ने संसद की चयन समिति को नई सीआरपीसी [बीएनएसएस] की धारा 438 (1973 संहिता की धारा 437ए के समान) में बदलाव करने का सुझाव दिया, जो किसी आरोपी द्वारा बरी होने पर जमानत के साथ व्यक्तिगत बांड प्रस्तुत करने की आवश्यकता से संबंधित है।जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने चयन समिति को "होगा" शब्द को "हो सकता है" से बदलने और "जमानत या जमानत बांड" शब्द को "जमानत के साथ या बिना व्यक्तिगत बांड" से बदलने का सुझाव दिया।सीआरपीसी की धारा 437ए [भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता,...

दिल्ली दंगे: अदालत ने लंबी हिरासत का हवाला देते हुए शाहरुख पठान को जमानत दी, लेकिन पुलिस पर बंदूक तानने के आरोप में जेल में ही रहना होगा
दिल्ली दंगे: अदालत ने लंबी हिरासत का हवाला देते हुए शाहरुख पठान को जमानत दी, लेकिन पुलिस पर बंदूक तानने के आरोप में जेल में ही रहना होगा

दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान एक पुलिसकर्मी पर बंदूक तानने के आरोपी शाहरुख पठान को दंगे से संबंधित मामले में जमानत दे दी। इन दंगों में पुलिस कर्मी घायल हो गए थे और सशस्त्र भीड़ द्वारा रोहित शुक्ला नामक व्यक्ति को गोली मार दी गई। . (जफराबाद थाने में एफआईआर 49/2020 दर्ज) कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा कि पठान 03 अप्रैल, 2020 से मामले में न्यायिक हिरासत में है। घायल व्यक्ति की जांच की गई है, प्रासंगिक शेष गवाह सभी...

एससी/एसटी अधिनियम के तहत अपराधों की जांच सौंपने की राज्य सरकार की शक्ति को नियमों द्वारा कम नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
एससी/एसटी अधिनियम के तहत अपराधों की जांच सौंपने की राज्य सरकार की शक्ति को नियमों द्वारा कम नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में माना कि एससी/एसटी एक्ट की धारा 9(1)(बी) राज्य सरकारों को अपराधियों को गिरफ्तार करने, जांच करने और मुकदमा चलाने का अधिकार सौंपने की शक्ति देती है।कोर्ट ने जोर देकर कहा कि शक्तियों का यह प्रत्यायोजन अधिनियम का एक महत्वपूर्ण पहलू है और इसे एससी/एसटी अधिनियम की धारा 23 के तहत बनाए गए किसी भी नियम द्वारा कम नहीं किया जाना चाहिए।यह ध्यान रखना उचित है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 9 शक्तियों को प्रदान करने से संबंध‌ित है-"(1)...

हरियाणा सिविल जज 2021: हाईकोर्ट ने इंटरव्यू में कथित तौर पर अनुपातहीन अंक दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
हरियाणा सिविल जज 2021: हाईकोर्ट ने इंटरव्यू में कथित तौर पर "अनुपातहीन अंक" दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सिविल जज 2021 परीक्षा के वाइवा में दिए गए कथित "अनुपातहीन" मार्क्स के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया।उम्मीदवारों ने तर्क दिया कि उनके व्यक्तित्व का अनुचित, मनमाना और "मनमौजी मूल्यांकन" किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही उन्होंने मुख्य परीक्षा में ज्यादा अंक प्राप्त किए, लेकिन साक्षात्कार में उन्हें "बेहद कम अंक" दिए गए।यह देखते हुए कि चयन समिति द्वारा पक्षपात साबित करने के लिए रिकॉर्ड पर कोई सबूत नहीं रखा गया है, याचिका खारिज कर दी गई।जस्टिस...