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आधार की अनिवार्यता की डेडलाइन को लेकर अंतरिम रोक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज
आधार की अनिवार्यता की डेडलाइन को लेकर अंतरिम रोक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज

बैंक खातों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार को लिंक करने के खिलाफ अंतरिम रोक की अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट आज अपना फैसला सुनाएगा।चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए के सीकरी, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस अशोक भूषण की संविधान पीठ ने AG के के वेणुगोपाल और याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि अब डेडलाइन बढा दी गई है इसलिए ये ही सवाल बचता है कि क्या नए बैंक खाते के लिए आधार को अनिवार्य किया जा सकता...

उप राज्यपाल ठोस कचरा प्रबंधन के बारे में उप नियमों को तीन सप्ताह के भीतर नोटिफाई करें : दिल्ली हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
उप राज्यपाल ठोस कचरा प्रबंधन के बारे में उप नियमों को तीन सप्ताह के भीतर नोटिफाई करें : दिल्ली हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाई कोर्ट ने ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर उप नियमों को अधिसूचित नहीं कर पाने के लिए दिल्ली सरकार पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। इन उप नियमों को ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के तहत अधिसूचित करना जरूरी है। इन उप नियमों को नगर निगम निकायों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने मिलकर तैयार किया है।दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने कहा कि उप नियमों को नोटिफाई करने के कोर्ट के बार-बार निर्देश के बावजूद आज तक ऐसा नहीं किया गया।कोर्ट ने कहा, “पर्यावरण...

केंद्र को उत्तराधिकार मामले पर याचिका दायर करने से इसलिए छूट नहीं मिल सकती क्योंकि विधि आयोग समान नागरिक संहिता की जांच कर रहा है : दिल्ली हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
केंद्र को उत्तराधिकार मामले पर याचिका दायर करने से इसलिए छूट नहीं मिल सकती क्योंकि विधि आयोग समान नागरिक संहिता की जांच कर रहा है : दिल्ली हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाई कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के उत्तराधिकार से संबंधित क़ानून को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाबी हलफनामा दायर करने से केंद्र को छूट देने से मना कर दिया। केंद्र सरकार ने कहा था कि समान आचार संहिता का मुद्दा विधि आयोग के विचाराधीन है ऐसे में जवाबी हलफनामा दाखिल करने से छूट दी जाए।  लेकिन कोर्ट ने छूट देने से इनकार कर दिया।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका में जवाबी हलफनामा दाखिल करने से छूट के लिए उक्त आधार नहीं हो सकता और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह छह हफ्ते में जवाबी हलफनामा दाखिल करे...

अतिरिक्त उत्तर पुस्तिका नहीं मिलने के नियम के खिलाफ मुंबई यूनिवर्सिटी के खिलाफ हाई कोर्ट गयी क़ानून की छात्रा [याचिका पढ़े]
अतिरिक्त उत्तर पुस्तिका नहीं मिलने के नियम के खिलाफ मुंबई यूनिवर्सिटी के खिलाफ हाई कोर्ट गयी क़ानून की छात्रा [याचिका पढ़े]

क़ानून की पढ़ाई कर रहे अंतिम वर्ष के एक छात्रा मानसी भूषण ने मुंबई यूनिवर्सिटी के परिक्षा नियंत्रक द्वारा जारी एक सर्कुलर के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की है। इस सर्कुलर में कहा गया है कि किसी भी विषय के परीक्षार्थी को अतिरिक्त उत्तर पुस्तिका नहीं दी जाएगी।कोर्ट ने इस याचिका पर यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया है।यह सर्कुल्रल 9 अक्टूबर 2017 को जारी किया गया और यह इस यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आने वाले सभी कॉलेजों के प्रिंसिपल, डीन और विभागाध्यक्षों को भेजा गया है। सर्कुलर के अनुसार यूनिवर्सिटी के...

बलात्कार की शिकार को बलात्कारी के बच्चे को जन्म देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
बलात्कार की शिकार को बलात्कारी के बच्चे को जन्म देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि बलात्कार की शिकार को इस बात के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता कि वह बलात्कारी के बच्चे को जन्म दे। और अगर मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 की शर्तें पूरी होती हैं तो बलात्कार की शिकार महिला के गर्भ को नष्ट किया जा सकता है।न्यायमूर्ति सुजोय पॉल ने एक माँ के इस अनुरोध पर गौर करते हुए यह बात कही जिसने अपने अवयस्क बेटी के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति मांगी थी। उसकी बेटी के साथ कथित रूप से बलात्कार हुआ था।कोर्ट ने कहा कि बलात्कार की पीड़ित/अभिभावक को यह...

लैब रिपोर्ट पर स्नातकोत्तर की डिग्री वाले रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर ही हस्ताक्षर कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
लैब रिपोर्ट पर स्नातकोत्तर की डिग्री वाले रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर ही हस्ताक्षर कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (एमसीआई) के नजरिये का समर्थन करते हुए कहा, “लेबोरेटरी रिपोर्ट पर पैथोलॉजी में स्नातकोत्तर की डिग्री रखने वाला कोई रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर ही साइन कर सकता है।”न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर बानुमती की पीठ ने एक विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। इस याचिका में गुजरात हाई कोर्ट द्वारा सितम्बर 2010 में दिए गए आदेश को चुनौती दी गई है। इस फैसले में हाई कोर्ट ने कहा था कि लेबोरेटरी तकनीशियन पैथोलोजिस्ट नहीं होते और...

झूठी खबर प्रकाशित करना जनता से अपकार, मीडिया को कुछ भी बोलने का विशेषाधिकार नहीं : हिमाचल हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
झूठी खबर प्रकाशित करना जनता से अपकार, मीडिया को कुछ भी बोलने का विशेषाधिकार नहीं : हिमाचल हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि झूठा समाचार प्रकाशित करना जनता के लिए अपकार है और मीडिया को उच्चस्तरीय मानक अपनाने चाहिए और खबर फैलाने से पहले इसकी सत्यता की जांच कर लेनी चाहिए।बेंच ने कहा कि जब से देश में लिखित संविधान बना है, ये साफ है कि बोलने की आजादी संपूर्ण असीमित अधिकार नहीं है। अनुच्छेद 19(2) उन अधिकारों पर वाजिब रोक लगाता है जो अनुच्छेद 19(1)(a) में गारंटी दी जाती है। इसलिए मास मीडिया को उच्चस्तरीय मानक अपनाने चाहिए और खबर फैलाने से पहले इसकी सत्यता की जांच करना उसकी जिम्मेदारी है।...

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से बच्चों के यौन शोषण की शिकायत दर्ज करने के लिए 10 जनवरी तक पोर्टल बनाने को कहा [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से बच्चों के यौन शोषण की शिकायत दर्ज करने के लिए 10 जनवरी तक पोर्टल बनाने को कहा [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि वह बाल यौन शोषण, बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री और बलात्कार/सामूहिक बलात्कार के बारे में नागरिकों द्वारा शिकायत दर्ज करने के लिए 10 जनवरी 2018 या उससे पहले तक एक पोर्टल तैयार करे।न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित ने यह बात आरई : प्रज्वला पत्र 18 फरवरी 2015 यौन हिंसा के वीडिओ सुझाव के मामले में सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।भारत सरकार की इस मुद्दे पर दलील सुनने के बाद पीठ ने कहा, “यह मामला काफी दिनों से लंबित है और 8 अक्टूबर 2015 को सीबीआई...

शादी का फोटो नहीं देनेवाले फोटोग्राफर पर उपभोक्ता अदालत ने लगाया जुर्माना; कहा, शादी जिंदगी की यादगार घटना होती है [आर्डर पढ़े]
शादी का फोटो नहीं देनेवाले फोटोग्राफर पर उपभोक्ता अदालत ने लगाया जुर्माना; कहा, शादी जिंदगी की यादगार घटना होती है [आर्डर पढ़े]

फोटो हमारे जीवन के पलों को संजोते हैं और इनमें हमारी यादें बसती हैं। और अगर ये फोटो शादी के हों, तब तो ये और भी यादगार हो जाते हैं। और ऐसे में अगर फोटोग्राफर शादी के फोटो और वीडिओ नहीं दे तो किसी को भी इस पर गुस्सा आ सकता है।कुछ ऐसा ही हुआ पूर्वी दिल्ली के रहने वाले एक व्यक्ति के साथ जिनके फोटोग्राफर ने उन्हें शादी के फोटो और वीडिओ करार के मुताबिक़ शादी के तीन साल बीत जाने के बाद भी नहीं दिया। फोटोग्राफर ने उनसे अपने भुगतान की 80 फीसदी राशि ले ली थी। फोटोग्राफर से फोटो और वीडिओ जब काफी प्रयासों...

डिसेबल्ड के लिए उच्चतर शिक्षा में पहुंच की व्यवस्था ना करने पर SC ने लगाई राज्यों को फटकार
डिसेबल्ड के लिए उच्चतर शिक्षा में पहुंच की व्यवस्था ना करने पर SC ने लगाई राज्यों को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने राइट टू पर्सनस विद डिसएबलिटी एक्ट, 2016 और इससे पहले 1995 के मुताबिक डिसेबल्ड  के लिए उच्चतर शिक्षा संस्थानों के परिसर में उच्चतर शिक्षा, शारीरिक पर्यावरण के लिए गाइडलाइन बनाने और उनके लाने- ले जाने, सूचना एवं संचार तकनीक संबंधी इंतजामों का पालन ना करने पर राज्य सरकारों और UGC को कडी फटकार लगाई है।बेंच ने पूछा है कि क्या कभी तय मानकों के तहत विश्वविद्यालयों में इन जरूरतों को पूरा किया गया है इसे लेकर कोई ऑडिट किया गया ? इन्हें लागू कराने के लिए क्या क्या कदम उठाए गए ? बेंच ने...

पूर्व CJI के जी बालाकृष्णन के खिलाफ जनहित याचिका पर SC में सुनवाई बंद, NGO ने याचिका वापस ली
पूर्व CJI के जी बालाकृष्णन के खिलाफ जनहित याचिका पर SC में सुनवाई बंद, NGO ने याचिका वापस ली

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस एम शांतनागौदर की बेंच ने पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस के जी बालाकृष्णन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच वाली याचिका का निस्तारण कर दिया। गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज की इस याचिका को वापस लेने के लिए खारिज किया गया और उचित उपचार के लिए छूट दे दी गई।इस जनहित याचिका में केंद्र सरकार को तत्कालीन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस के जी बालाकृष्णन के खिलाफ जांच के लिए दिए गए दस मई 2012 के आदेश का पालन करने के निर्देश देने की मांग की गई...

खुली जेल : SC ने केंद्र को राजस्थान मॉडल पर राज्यों से बैठक करने और यूनिफार्म गाइडलाइन बनाने को कहा
खुली जेल : SC ने केंद्र को राजस्थान मॉडल पर राज्यों से बैठक करने और यूनिफार्म गाइडलाइन बनाने को कहा

एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने जेल रिफॉर्म्स  लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार को राजस्थान मॉडल की तर्ज पर खुली जेल बनाने पर विचार करने को कहा है।एमिक्स क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर खुली जेल को लेकर राजस्थान मॉडल को अपनाने और देश के हर जिले में एक खुली जेल बनाए जाने की वकालत की है।सुप्रीम कोर्ट ने एक्टिविस्ट एवं शोधकर्ता स्मिता चक्रवर्ती द्वारा राजस्थान की खुली जेल पर दाखिल रिपोर्ट को देखते हुए केंद्र सरकार को कोई...

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने अभियुक्त के हिरासत की अवधि बताने के लिए ‘फर्स्ट लिस्टिंग’ के प्रोफोर्मा में संशोधन किया [परिपत्र पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने अभियुक्त के हिरासत की अवधि बताने के लिए ‘फर्स्ट लिस्टिंग’ के प्रोफोर्मा में संशोधन किया [परिपत्र पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने फर्स्ट लिस्टिंग के प्रोफोर्मा में संशोधन किया है और इसके लिए निर्देश उत्तर प्रदेश बनाम मुन्ना @दीवाना मामले में फैसले के तहत आया।उपरोक्त आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश देकर यह सुनिश्चित करने को कहा कि जिन मामलों में लोगों को बरी किए जाते हैं और जितने भी मामले दायर किए जाते हैं उन सबको पंजीकृत करने के दौरान उनमें यह जरूर दर्शाया जाए कि अभियुक्त को कितने दिनों तक हिरासत में रखा गया।अब इस प्रोफोर्मा के कॉलम 7(e) को इस तरीके से पढ़ा जाता है : “सजा की भोगी गई...

निदेशक के खिलाफ यौन शोषण के आरोप के आधार पर सिक्यूरिटी सर्विसेज की निविदा को तकनीकी स्तर पर रद्द करना अनुचित : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
निदेशक के खिलाफ यौन शोषण के आरोप के आधार पर सिक्यूरिटी सर्विसेज की निविदा को तकनीकी स्तर पर रद्द करना अनुचित : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा सिक्यूरिटी सर्विसेज की निविदा को रद्द करना अनुचित है। विश्वविद्यालय ने इसके पीछे तर्क यह दिया था कि कंपनी के निदेशक के खिलाफ यौन शोषण का आरोप है और ऐसा करते हुए दूसरे पक्ष को अपनी बात कहने का मौक़ा नहीं दिया।न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने इस बारे में सर्वेश सिक्यूरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए उक्त बातें कही। यह कंपनी सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न सरकारी और...

कंपनियों के करार में निर्दिष्ट अधिकार क्षेत्र वाला कोर्ट ही कर सकता है मामले की सुनवाई : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
कंपनियों के करार में निर्दिष्ट अधिकार क्षेत्र वाला कोर्ट ही कर सकता है मामले की सुनवाई : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 11 के तहत दायर एक आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि समझौते के अनुसार ये मामले विशिष्ट रूप से नोएडा के न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने कहा, “जब यह कहा जाता है कि किसी मामले को नोएडा/दिल्ली के न्यायालयों में निपटाया जाएगा तो ऐसा सिर्फ विभिन्न पक्षों की सुविधा के लिए किया जाता है। इससे यह मामला दिल्ली के न्यायालयों के अधिकारक्षेत्र में नहीं आ जाता। इस प्रकार इस मामले की सुनवाई का...

मध्यस्थता रिपोर्ट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए इसमें सिर्फ एक ही वाक्य होना चाहिए : दिल्ली हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
मध्यस्थता रिपोर्ट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए इसमें सिर्फ एक ही वाक्य होना चाहिए : दिल्ली हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि कार्यवाही की गोपनीयता बनाए रखने के लिए मध्यस्थता रिपोर्ट में एक वाक्य के अलावा कुछ और शामिल नहीं होना चाहिए।न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की पीठ ने कहा कि मध्यस्थता के विफल होने के कारण एक ऐसी न्यायिक प्रक्रिया सामने आती है जिसमें सभी पक्षों को क़ानून के तहत उपलब्ध हर तरह के मंतव्यों को अपनाने की छूट होती है।अदालत श्रीमती स्मृति मदन कानसाग्रा द्वारा दायर की गई एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उस याचिका के द्वारा वह यह जानना...

‘जनगण मन’ की तरह ‘वन्दे मातरम्’ को कानूनी संरक्षण नहीं देने के दिल्ली हाई कोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया [आर्डर पढ़े]
‘जनगण मन’ की तरह ‘वन्दे मातरम्’ को कानूनी संरक्षण नहीं देने के दिल्ली हाई कोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के निर्णय के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में ‘वन्दे मातरम्’ के लिए भी उसी कानूनी संरक्षण की मांग की गई थी जो ‘जनगण मन’ को प्राप्त है।मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति एम खान्विलकर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने वरिष्ठ वकील प्रवीण एचपी पारेख की दलील सुनने के बाद इस याचिका को खारिज कर दिया।दिल्ली हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने गौतम मोरारका द्वारा दायर उस याचिका को...

पूर्व पत्नी पति की  रिलेटिव नहीं और उसे आईपीसी की धारा 498ए के तहत दंडित नहीं किया जा सकता : गुजरात हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
पूर्व पत्नी पति की रिलेटिव नहीं और उसे आईपीसी की धारा 498ए के तहत दंडित नहीं किया जा सकता : गुजरात हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

गुजरात हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति की पूर्व पत्नी के खिलाफ एक  मामले को निरस्त कर दिया जिसमें इस व्यक्ति की वर्तमान पत्नी ने आईपीसी की धारा 498ए के अंतर्गत उसके व एक अन्य आरोपी के खिलाफ आपराधिक मामला दायर किया था। शिकायतकर्ता पत्नी ने आरोप लगाया था कि उससे शादी करने के बाद उसका पति अपनी तलाकशुदा पत्नी के पास चला गया। उसने अपनी शिकायत में अपने पति और उसकी पूर्व पत्नी को भी आरोपी बनाया था।जज न्यायमूर्ति जेबी पर्दीवाला ने कहा कि अगर यह मान भी लिया जाए कि पति अपनी पहली पत्नी के पास चला गया, चूंकि शादी...

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, परीक्षाओं में कोर्ट की दखलंदाजी दुर्भाग्यपूर्ण; मध्य मार्ग अपनाने का सुझाव दिया [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, परीक्षाओं में कोर्ट की दखलंदाजी दुर्भाग्यपूर्ण; मध्य मार्ग अपनाने का सुझाव दिया [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा 2009 में आयोजित भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी पर गहरा अफ़सोस जाहिर किया और और इसे दूर करने के लिए मध्य मार्ग अपनाने का सुझाव दिया है।मामले का सिलसिलेबार ब्योरा   जून 2010:लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित जिसमें 36000 छात्रों ने भाग लिया था। सितंबर 2010:संयुक्त (लिखित और साक्षात्कार) परीक्षा परिणाम घोषित। 2010-2011: असफल उम्मीदवारों ने रिट याचिका दायर की जिसे इलाहाबाद हाई कोर्ट की...

मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम का उल्लंघन करते हुए 72 वर्षीय बुजुर्ग को हिरासत में रखने पर दिल्ली हाई कोर्ट नाराज [आर्डर पढ़े]
मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम का उल्लंघन करते हुए 72 वर्षीय बुजुर्ग को हिरासत में रखने पर दिल्ली हाई कोर्ट नाराज [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ दिन पहले 72 वर्षीय बुजुर्ग को हिरासत में रखने का निर्देश देने के लिए मजिस्ट्रेट और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवरों की कड़ी आलोचना की। बुजुर्ग राम कुमार को इन्स्टीच्यूट ऑफ़ ह्यूमन बिहेविअर एंड अलाइड साइंसेज (इहबास) ने मानसिक स्वास्थय अधिनियम 1987 को ताक पर रखते हुए उनको बंदी बनाकर रखने का आदेश दिया था।कुमार पिछले 10 सालों से अधिक समय से मोटर वाहन दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल, रोहिणी में एक दावे के मामले में एक पक्षकार के रूप में केस लड़ रहे हैं। कुमार के मिनीबस से दुर्घटना हो...