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दूरस्थ शिक्षा कोर्स से वर्ष 2001-2005 के दौरान इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से एकमुश्त राहत [आदेश पढ़ें]

LiveLaw News Network
23 Jan 2018 8:32 AM GMT
दूरस्थ शिक्षा कोर्स से वर्ष 2001-2005 के दौरान इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से एकमुश्त राहत [आदेश पढ़ें]
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सुप्रीम कोर्ट ने इंजीनियरिंग के उन छात्रों को आज एक मुश्त राहत की घोषणा की जो अकादमिक वर्ष 2001-2005 के लिए दूरस्थ शिक्षा कोर्स में पंजीकृत हैं। कोर्ट के निर्देश के अनुसार :




  • ऐसे उम्मीदवार जो एआईसीटीई द्वारा मई-जून 2018 में आयोजित परीक्षा में बैठना चाहते हैं और जिनके पास फैसले के संदर्भ में टेस्ट में बैठने का विकल्प है वे 11 प्रश्नों में डिग्री बनाए रख सकते हैं और इसके होने वाले फायदे उन्हें परिणाम प्रकाशित होने के एक महीने या 31 अगस्त 2018 तक (जो भी पहले होगा) मिलता रहेगा।

  • यह सुविधा एकमुश्त है ताकि जिनके पास योग्यता है और जो एक ही बार में टेस्ट पास हो सकते हैं उनको असुविधा न हो इसलिए ऐसा किया गया है। ऐसे सभी उम्मीदवारों को सभी सुविधाएं मिलेंगी। पर अगर वे असफल रहते हैं या टेस्ट में नहीं बैठते हैं तो उनको न तो डिग्री मिलेगी और न ही किसी तरह का लाभ। बाद में इस तरह का मौक़ा और नहीं मिलने जा रहा है। उन्हें दूसरी बार परिक्षा में बैठने का अधिकार होगा पर ये सुविधाएं उन्हें दूसरे प्रयास में नहीं मिलेंगी।

  • हम एआईसीटीई को निर्देश देते हैं कि वह यह टेस्ट मई-जून 2018 में कराए और समय पर परिणाम प्रकाशित करे।


गत वर्ष नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने 2001 से 2005 के बीच दूरस्थ शिक्षा से ली गई डिग्रियों को निलंबित कर दिया था। जिन संस्थानों की डिग्रियां रद्द की गई थीं उनमें शामिल हैं जेआरएन राजस्थान विद्यापीठ, राजस्थान (जेआरएन), इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज इन एजुकेशन, राजस्थान (आईएएसई) और इलाहाबाद एग्रीकल्चरल इंस्टिट्यूट, इलाहाबाद (एएआई)।

न्यायमूर्ति एके गोएल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने उपरोक्त स्पष्टीकरण जारी किया। कोर्ट ने इस दलील को माना कि अगर उनकी डिग्री को रद्द किए जाने के आदेश पर अमल हुआ तो उम्मीदवारों को उनकी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।

पर कोर्ट ने इस दलील को मानने से इनकार कर दिया कि जिन उम्मीदवारों ने दूरस्थ शिक्षा कोर्स से इंजीनियरिंग में डिग्री ली है वे अपने करियर में बहुत आगे बढ़ गए हैं और उन्होंने कई स्तरों पर अपनी योग्यता साबित की है और उन्हें दुबारा इस तरह की परिक्षा में बैठने की आवश्यकता से मुक्त कर दिया जाए।  कोर्ट ने कहा, “हम इस तरह का अपवाद नहीं कर सकते। उनकी डिग्री की बुनियादी खामी से मुँह नहीं मोड़ा जा सकता।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि इंजीनियरिंग में दूरस्थ शिक्षा द्वारा डिग्री देने को एआईसीटीई ने कभी भी सिद्धांततः मंजूरी नहीं दी थी और उनके अध्ययन केंद्र की कभी भी जाँच नहीं की गई और उनका कभी भी अनुमोदन नहीं किया गया था।


 
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