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पति अनुसूचित जाति का है तो सामान्य श्रेणी की पत्नी आरक्षण का लाभ नहीं उठा सकती : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
20 Jan 2018 3:04 PM GMT
पति अनुसूचित जाति का है तो सामान्य श्रेणी की पत्नी आरक्षण का लाभ नहीं उठा सकती : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सामान्य श्रेणी की एक महिला को उसके पति के अनुसूचित जाति के होने का फ़ायदा उठाने से रोक दिया। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने जिस व्यक्ति से शादी की है वह अनुसूचित जाति का है, और इसलिए उनको आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता क्योंकि वह उसकी पत्नी हैं। जाति का निर्धारण जन्म से होता है, शादी से नहीं।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति मोहन एम शंतानागौदर की पीठ ने कहा, “इस बात को लेकर कोई विवाद नहीं है कि जाति का निर्धारण जन्म से होता है और किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति से शादी करने की वजह से किसी की जाति नहीं बदल सकती। निस्संदेह, याचिकाकर्ता का जन्म अग्रवाल परिवार में पैदा हुआ जो कि साधारण श्रेणी में आता है न कि अनुसूचित जाति की श्रेणी में। सिर्फ इसलिए कि उसका पति अनुसूचित जाति का है, याचिकाकर्ता को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकता।”

कोर्ट सुनीता सिंह की याचिका पर गौर कर रहा था जिसने इलाहबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसने उसको केंद्रीय विद्यालय, पठानकोट, पंजाब के वाईस प्रिंसिपल के पद से हटाने के आदेश को सही ठहराया था।

सिंह को जिला मजिस्ट्रेट ने 1991 में जाति प्रमाणपत्र जारी किया था। उसके प्रमाणपत्र और उसकी अकादमिक योग्यता को ध्यान में रखते हुए उसे 1993 में पीजी शिक्षक नियुक्त किया गया। उसने बाद में पद पर रहते हुए एमएड की परिक्षा पास कर ली। हालांकि, दो दशक बाद उसकी नियुक्ति को इस आधार पर रद्द कर दिया गया कि अनुसूचित जाति का नहीं होने के बावजूद आरक्षण का लाभ उठाया था।

सुप्रीम कोर्ट में मामला गया और उसने उसको पद से हटाये जाने को सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि उसको हटाये जाने के आदेश को सुधारा जाए और उसको नियमित रूप से रिटायर कर दिया जाए यह देखते हुए कि उसने शिक्षक और वाईस प्रिंसिपल के रूप में 21 वर्षों तक बेदाग़ सेवा दी है।”

इसलिए उसने आदेश को संशोधित कर दिया और स्पष्ट किया कि इस आदेश को एक नज़ीर नहीं माना जाए।


 
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