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कोई उदारवादी लोकतंत्र स्वतंत्र न्यायपालिका के बिना ज़िंदा नहीं रह सकता : न्यायमूर्ति चेलामेश्वर

LiveLaw News Network
23 Jan 2018 12:30 PM GMT
कोई उदारवादी लोकतंत्र स्वतंत्र न्यायपालिका के बिना ज़िंदा नहीं रह सकता : न्यायमूर्ति चेलामेश्वर
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“आज यहाँ बैठे सभी लोग यह मानते हैं कि एक स्वतंत्र और पक्षपातहीन न्यायपालिका किसी भी लोकतंत्र के जीवित रहने की पहली शर्त है। इसके अभाव में कोई उदार लोकतंत्र फलफूल नहीं सकता।” ये शब्द हैं न्यायमूर्ति चेलामेश्वर के। मौक़ा था नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के संयुक्त कार्यक्रम का जिसमें प्रोफ़ेसर जॉर्ज एच गाद्बोई जूनियर, यूनिवर्सिटी ऑफ़ केंटुकी की पुस्तक ‘Supreme Court of India- The Beginnings’ के विमोचन का।

इस पुस्तक पर प्रकाश डालते हुए सुप्रीम कोर्ट के इस दूसरे सबसे वरिष्ठ जज ने कहा, “इस पुस्तक ने बहुत ही सूक्ष्मता से सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के समय उसके काम काज का विश्लेषण किया है; अपनी स्थापना के प्रथम 20 वर्षों में इस संस्थान के काम काज पर गौर किया गया है। हालांकि यह अध्ययन एक जारी रहने वाली प्रक्रिया है। संस्थान की भलाई और उसकी बेहतरी के लिए यह जरूरी है कि हम उसके काम करने के तरीके की जांच करते रहें, उसकी सफलता की और उसको पेश आने वाली कठिनाइयों की भी।”

सुप्रीम कोर्ट की सर्वव्यापी भूमिका की चर्चा करते हुए न्यायमूर्ति चेलामेश्वर ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के देखरेख की शक्ति...उतना प्रचारित नहीं है जितना कि आज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट को जजों की नियुक्ति, उनकी प्रोन्नति और उनके स्थानांतरण में बहुत ही व्यापक शक्ति प्राप्त है। इसके अलावा, हाई कोर्ट और निचली अदालतों में न्याय प्रशासन और न्याय दिलाना सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक़ बनाए गए कानूनों द्वारा प्रशासित होते हैं।”

यह कहते हुए न्यायमूर्ति चेलामेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट और उसके मातहत अदालतों में भारी संख्या में लंबित मामलों की भी चर्चा की। उन्होंने इन लंबित मामलों को निपटाने वाली और न्याय सुनिश्चित करने वाली अंतिम संस्था के रूप में भी सुप्रीम कोर्ट की चर्चा की। उन्होंने कहा, “हम सब लोगों को जो इस कोर्ट से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं, आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या इस तरह की स्थिति इस ऐतिहासिक संस्था के गौरव में चार चाँद लगाते हैं।”

“हम सभी को इसका हल निकालने की जरूरत है। हम एक वास्तविक समस्या झेल रहे हैं। इसलिए हमें इस स्थिति को दूर करने के लिए तरीके और इसके साधन ईजाद करने होंगे।”

न्यायमूर्ति चेलामेश्वर ने कहा कि यद्यपि देश की एक बहुत ही छोटी जनसंख्या का सुप्रीम कोर्ट से वास्ता पड़ता है, पर इसकी निगरानी की भूमिका और जिस तरह का नियंत्रण यह हाई कोर्ट्स और निचले स्तर की अदालतों पर रखता है, उसकी वजह से देश की शेष जनसंख्या भी इसके निर्णयों से किसी न किसी तरह प्रभावित होती है।

न्यायमूर्ति चेलामेश्वर ने अपने आवास पर हाल में सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों के प्रेस कांफ्रेंसे के बारे में किसी तरह के प्रश्न का जवाब देने से मना कर दिया। उन्होंने मीडिया से करबद्ध होकर कहा, “यह उचित जगह नहीं है”।

इस कार्यक्रम में न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर मुख्य अतिथि थे। उनके अलावा मौजूद अन्य लोगों में शामिल थे न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर, वरिष्ठ वकील अशोक देसाई और अरविंद दातार, एडवोकेट प्रशांत भूषण और सांसद सलमान खुर्शीद और जयराम रमेश।

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