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सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों पर GST के खिलाफ याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई पर रोक लगाई [याचिका और आदेश पढ़ें]

LiveLaw News Network
23 Jan 2018 8:01 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों पर GST के खिलाफ याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई पर रोक लगाई [याचिका और आदेश पढ़ें]
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित कानून फर्मों के माध्यम से या वकीलों के व्यक्तिगत तौर पर  सेवाओं के लिए गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी )  को चुनौती देने वाली याचिकाओं में आगे की सुनवाई पर रोक लगा दी।

 केंद्र सरकार ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 13 9 ए के तहत सुप्रीम कोर्ट से याचिकाओं के ट्रांसफर करने की मांग की थी कि उनमें सारे मुद्दे एक जैसे हैं। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस  एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच ने उत्तरदाताओं को नोटिस जारी किया है।

इस दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) पिंकी आनंद ने कहा कि दो याचिकाएं दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित हैं और एक अन्य याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित है। । जे के मित्तल एंड कंपनी द्वारा दायर एक याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि केंद्र सरकार द्वारा आगे स्पष्टीकरण जारी किए जाने तक सीजीएसटी अधिनियम, आईजीएसटी अधिनियम या डीजीएसटी अधिनियम के तहत किसी भी कानूनी आवश्यकता के अनुपालन के लिए वकीलों और कानून फर्मों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने से दूर रहें। इस संबंध में याचिका  में केंद्र और दिल्ली सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं को चुनौती दी है जिसमें यह निर्धारित किया गया था कि वकील और कानून फर्म सभी सेवाओं पर कर का भुगतान करेंगे। केवल प्रतिनिधित्व सेवाओं को एक अपवाद बना दिया गया था यह बताते हुए कि ग्राहक ही ऐसी सेवाओं के लिए कर का भुगतान करेंगे। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि यह जीएसटी परिषद द्वारा की गई सिफारिश के विपरीत है जोकि सेवा प्राप्तकर्ता एक वकील और कानूनी फर्म द्वारा दी गई सभी सेवाओं पर कर का भुगतान करेगा।

 ट्रांसफर याचिका में केंद्र की प्रार्थना

 "एकरूपता को बनाए रखने के लिए और मुकदमेबाजी की बहुलता से बचने के लिए और सभी के ऊपर कीमती न्यायिक समय को बचाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल  मैसर्स जे के मित्तल और कंपनी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य  के रूप में नामित रिट याचिका 2017 की (सी) नं. 570 9,   लीगलेंस आईपी कॉर्प एलएलपी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया   और अन्य  के रूप में  दाखिल  2017 की 6017 और छतीसगढ हाईकोर्ट में  मैसर्स लेक्सलोफ्ट एलएलपी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य की दाखिल याचिका को या तो सुप्रीम कोर्ट में या फिर इन दोनों हाईकोर्ट में से एक यानी दिल्ली हाईकोर्ट या छतीसगढ हाईकोर्ट की बिलासपुर बेंच में ट्रांसफर किया जाए।”


 

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