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आपराधिक अभियोजन को निपटाने का कोई शॉर्टकट नहीं हो सकता; बॉम्बे हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के फैसले से नाराजगी जताई, जांच अधिकारी और एपीपी के खिलाफ जांच का आदेश दिया [निर्णय पढ़ें]
आपराधिक अभियोजन को निपटाने का कोई शॉर्टकट नहीं हो सकता; बॉम्बे हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के फैसले से नाराजगी जताई, जांच अधिकारी और एपीपी के खिलाफ जांच का आदेश दिया [निर्णय पढ़ें]

हाल के एक फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 277 (लापरवाही से गाड़ी चलाने), धारा 337  और धारा 304A के तहत एक आरोपी को बरी किए जाने के फैसले पर नाराजगी जाहिर करते हुए इस मामले की दुबारा सुनवाई का आदेश दिया है।नागपुर खंडपीठ के न्यायमूर्ति जेडए हक़ ने मजिस्ट्रेट के उस फैसले की आलोचना की और आरोपी को बरी करने के फैसले को खारिज कर दिया और कहा कि “मजिस्ट्रेट आपराधिक न्याय दिलाने के अपने कर्तव्य में विफल रहा है”।अदालत ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि शीर्षक सहित यह फैसला साढ़े चार...

सुप्रीम कोर्ट ने स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम 1968 के तहत 1973 में इस अधिनियम को दी गई चुनौती याचिका खारिज की [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम 1968 के तहत 1973 में इस अधिनियम को दी गई चुनौती याचिका खारिज की [निर्णय पढ़ें]

पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने उस स्वर्ण अधिनियम 1968 के तहत एक अपील को खारिज कर दिया जिसकी सुनवाई के लंबित रहने के  दौरान उस अधिनियम को ही संसद ने रद्द कर दिया।दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1972 में ही इस अपील को खारिज कर दिया था। 1973 में उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ एक विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी, और शीर्ष अदालत ने 9 अगस्त 1973 को इसकी  कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।हालांकि जब इस अपील पर सुनवाई लंबित थी उसी दौरान  वर्ष 1990 में संसद ने स्वर्ण (नियंत्रण) अधिनियम, 1968 को रद्द कर दिया। यह पाया गया...

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी ‘बाबा’ को जमानत देने से इनकार किया; कहा, समाज किसी व्यक्ति में जितना ज्यादा विश्वास जताता है उसकी ज़िम्मेदारी उतनी ही बड़ी होती है [आर्डर पढ़े]
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी ‘बाबा’ को जमानत देने से इनकार किया; कहा, समाज किसी व्यक्ति में जितना ज्यादा विश्वास जताता है उसकी ज़िम्मेदारी उतनी ही बड़ी होती है [आर्डर पढ़े]

 “हमारे समाज ने ‘गुरुओं’ में काफी विश्वास जताया है और लोग उन पर भगवान की तरह ही विश्वास करते हैं और आम तौर पर भक्त इन गुरुओं के प्रति खुद को बिना किसी शर्त के समर्पित कर देते हैं और उनके आदेशों को एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह मानते हैं”बलात्कार के मामले में आरोपी एक बाबा  की जमानत याचिका खारिज करते हुए हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि अपने को पवित्र और आध्यात्मिक व्यक्ति बताते हुए अगर कोई व्यक्ति अपराध करता है तो वह अपराध ज्यादा गंभीर होता है क्योंकि इस तरह का कृत्य समाज के विश्वास को हिला...

श्रमिक मुआवजा अधिनियम : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मुआवजा राशि पर ब्याज दुर्घटना की तारीख से देय होगा
श्रमिक मुआवजा अधिनियम : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मुआवजा राशि पर ब्याज दुर्घटना की तारीख से देय होगा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत किसी कर्मचारी को मुआवजे के भुगतान पर ब्याज की अदायगी दुर्घटना की तारीख से होनी चाहिए।कोर्ट ने यह फैसला एक नियोक्ता की याचिका पर दिया जिसने अपने एक कर्मचारी की मौत पर मुआवजे की राशि के भुगतान को चुनौती दी थी।इस मामले में, श्रमिक मुआवजा आयुक्त ने मुआवजे की राशि पर प्रति वर्ष 12% की दर से ब्याज देने को कहा था पर यह आदेश की तिथि की समाप्ति होने के 45 दिनों के बाद से दिया था और वह भी अगर नियोक्ता 45 दिनों के भीतर तय राशि को चुकाने में नाकाम...

अगर आरोप निर्धारित नहीं किए जाने से आरोपी के प्रति कोई दुर्भावना पैदा नहीं हुई है तो उसको दोषी करार दिये जाने के फैसले को निरस्त नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अगर आरोप निर्धारित नहीं किए जाने से आरोपी के प्रति कोई दुर्भावना पैदा नहीं हुई है तो उसको दोषी करार दिये जाने के फैसले को निरस्त नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी बड़े अपराध में आरोप निर्धारित किए बिना दोषी ठहराने के फैसले को तभी खारिज किया जा सकता है जब आरोपी यह साबित करे कि उसके खिलाफ इससे दुर्भावना पैदा हुई है और इस तरह, न्याय विफल रहा है।उत्तर प्रदेश राज्य बनाम कामिल मामले में न्यायमूर्ति आर बनुमती और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने  आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। आरोपी का कहना था कि आईपीसी की धारा 302 के तहत उस पर अभी कोई आरोप तय नहीं किया गया है इसलिए इस धारा के तहत उसको दोषी करार नहीं दिया जा...

हर मामले में ‘मौत की सजा’ देना उचित नहीं है, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धारा 376 के तहत मौत की सजा को फिर बदला [निर्णय पढ़ें]
हर मामले में ‘मौत की सजा’ देना उचित नहीं है, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धारा 376 के तहत मौत की सजा को फिर बदला [निर्णय पढ़ें]

“हमारी राय में संबंधित मामले में कथित अपराध नृशंस तरीके से नहीं हुआ और इसलिए यह विरलों में विरल मामले मामला नहीं है जिसे लिए मौत की सजा दी जाए”।मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने के बार फिर, एक आरोपी को आईपीसी की धारा 376 के तहत मिली मौत की सजा को बदल दिया है। आरोपी पर तीन साल की एक बच्ची के साथ बलात्कार का आरोप है।एक ही महीने में मौत की सजा को हाईकोर्ट द्वारा बदलने की यह तीसरी घटना है।तीन साल की एक बच्ची के साथ बलाताकार करने के दोषी तौहीद को निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने कहा था कि प्रत्यक्ष...

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रावधानों के तहत लिव-इन पार्टनर गुजारा राशि का दावा कर सकते हैं [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रावधानों के तहत लिव-इन पार्टनर गुजारा राशि का दावा कर सकते हैं [आर्डर पढ़े]

“तथ्य यह है कि, डीवीसी अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत पीड़ित जैसे पत्नी या लिव-इन-पार्टनर आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 125के तहत मिलने वाली  राहत से कहीं ज्यादा राहत  पाने के हकदार हैं।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लिव-इन पार्टनर घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत महिलाओं के संरक्षण के प्रावधानों के तहत गुजारा राशि की मांग कर सकता है।मुख्य न्यायाधीश  रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की तीन सदस्यीय पीठ ने ललिता टोप्पो बनाम झारखंड राज्य मामले पर सुनवाई करते हुए...

आपराधिक सुनवाइयों के बारे में निचली अदालतों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए दिशानिर्देश [निर्णय पढ़ें]
आपराधिक सुनवाइयों के बारे में निचली अदालतों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए दिशानिर्देश [निर्णय पढ़ें]

“सीआरपीसी की धारा 231 (2) के तहत किसी आवेदन पर निर्णय लेने के दौरान, अभियुक्त के अधिकारों के बीच एक बनाया जाना चाहिए”।सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आपराधिक मुकदमे के संदर्भ में किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए इस बारे में एक दिशानिर्देश जारी किया।केरल उच्च न्यायालय के आदेश को निरस्त करते हुए न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की पीठ ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 231 (2) के तहत गवाह से पूछताछ को स्थगित करने के किसी आवेदन पर गौर करने के दौरान आरोपी के अधिकार और अभियोजन पक्ष के...

जो बहुत दृढ़ चरित्र की महिला नहीं है उसे भी किसी के साथ संभोग करने से इनकार का अधिकार है, सुप्रीम कोर्ट ने सामूहिक बलात्कार मामले में सजा बरकरार रखा [निर्णय पढ़ें]
जो बहुत दृढ़ चरित्र की महिला नहीं है उसे भी किसी के साथ संभोग करने से इनकार का अधिकार है, सुप्रीम कोर्ट ने सामूहिक बलात्कार मामले में सजा बरकरार रखा [निर्णय पढ़ें]

“ऐसी महिला के साक्ष्य को केवल इसलिए नहीं दरकिनार नहीं किया जा सकता क्योंकि दृढ़ चरित्र वाली महिला नहीं है”।अगर यह मान भी लें कि महिला दृढ़ चरित्र वाली नहीं है, उसे किसी के भी साथ यौन संबंध को नकारने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने सामूहिक बलात्कार मामले में चार लोगों की सजा को बरकरार रखते हुए यह बात कही।पृष्ठभूमिआरोपी ने निचली अदालत को सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अपने बयान में कहा था कि इस महिला का चरित्र खराब था और वह वेश्यावृत्ति करती थी। हालांकि उन्होंने अदालत से कहा कि इस महिला के खिलाफ...

विशेष अनुमति याचिका पर फैसला होने तक दिल्ली में संशोधित न्यूनतम वेतन लागू होगा; सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित अधिसूचना 3 महीने में तैयार करने को कहा [आर्डर पढ़े]
विशेष अनुमति याचिका पर फैसला होने तक दिल्ली में संशोधित न्यूनतम वेतन लागू होगा; सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित अधिसूचना 3 महीने में तैयार करने को कहा [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी में 37% की वृद्धि को अस्थायी रूप से बहाली का निर्देश दिया जो विशेष अनुमति याचिका पर फैसला होने तक के लिए है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में कोई बकाया भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी, वर्तमान मजदूरी अधिसूचना के अनुसार दी जाएगी होगी। अदालत ने आगे कहा कि दिल्ली सरकार न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 की धारा 5 (1) (ए) या 5 (1) (बी) के तहत न्यूनतम वेतन के...

निचली अदालत के फैसले को सही ठहराने वाले फैसले अपीलीय न्यायालय के फैसले के 12 साल के भीतर दायर की गई निष्पादन याचिका सीमाबद्धता से प्रतिबंधित नहीं होगी : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
निचली अदालत के फैसले को सही ठहराने वाले फैसले अपीलीय न्यायालय के फैसले के 12 साल के भीतर दायर की गई निष्पादन याचिका सीमाबद्धता से प्रतिबंधित नहीं होगी : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

‘विलय का सिद्धान्त अपीली प्राधिकरण द्वारा फैसले को बदलने, उसको संशोधित करने या फैसले की पुष्टि करने में किसी तरह का भेद नहीं करता”। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निचली अदालत के फैसले की पुष्टि करते हुए उच्च न्यायालय के फैसले के 12 वर्षों के भीतर दायर निष्पादन याचिका किसी सीमा से बंधा नहीं होगा।इस मामले में, मकान मालिक ने एक मुकदमा दायर किया जिसका फैसला किरायेदार के खिलाफ आया। जब 2003 में उच्च न्यायालय के इस फैसले की पुष्टि के बाद मकान मालिक ने 2006 में निष्पादन याचिका दायर की तो किरायेदार ने इस पर...

दूसरी शादी किसी व्यक्ति को बच्चों का संरक्षण प्राप्त करने के अधिकार से वंचित रखने का आधार नहीं हो सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
दूसरी शादी किसी व्यक्ति को बच्चों का संरक्षण प्राप्त करने के अधिकार से वंचित रखने का आधार नहीं हो सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ इसलिए कि किसी व्यक्ति ने दूसरी शादी कर ली है और वह अपनी दूसरी पत्नी के साथ रहा रहा है, उसे इस आधार पर बच्चों का संरक्षण प्राप्त करने से नहीं रोका जा सकता।न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने एक बच्चे का संरक्षण प्राप्त करने के मामले की सुनवाई करते हुए यह बात कही। यह मामला एक डॉक्टर दंपति का है और दोनों ही सीआरपीएफ में काम करते हैं।पृष्ठभूमि  इन दम्पतियों के दो बच्चे हैं और आपसी सहमति से दोनों दिसम्बर 2016 में अलग हो गए। कोर्ट के आदेश के...

अगर एक बच्चा को गोद दे दिया गया है तो भी उड़ीसा ग्राम पंचायत अधिनियम के तहत “दो से ज्यादा बच्चे” का अयोग्यता नियम लागू होगा : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
अगर एक बच्चा को गोद दे दिया गया है तो भी उड़ीसा ग्राम पंचायत अधिनियम के तहत “दो से ज्यादा बच्चे” का अयोग्यता नियम लागू होगा : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

कुछ मलयालम समाचार पोर्टलों की खबर के बाद यह खबर सोशल मीडिया में वायरल हो गया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिन लोगों के दो से अधिक बच्चे हैं वे पंचायत का चुनाव नहीं लड़ सकते। इन खबरों में यह कहा गया था कि यह फैसला केरल पर भी लागू होगा जहां इस तरह का कोई कानून नहीं है। पर क्या कोर्ट ने ऐसा कुछ कहा है जो केरल पर भी लागू होगा? नहीं, ऐसा नहीं है।सुप्रीम क्रोट ने मीनासिंह माझी बनाम कलक्टर, नुआपाड़ा ने उड़ीसा ग्रामपंचायत अधिनियम, 1965 के एक प्रावधान की सिर्फ व्याख्या की है। इसके तहत एक अगर किसी व्यक्ति...

आपराधिक न्यायालय जमानत देते हुए पासपोर्ट जमा कराने की शर्त नहीं रख सकते हैं : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
आपराधिक न्यायालय जमानत देते हुए पासपोर्ट जमा कराने की शर्त नहीं रख सकते हैं : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि जमानत देने के दौरान, आपराधिक अदालत आरोपी पर अपना पासपोर्ट जमा कराने के लिए शर्त नहीं थोप सकता। न्यायमूर्ति दया चौधरी ने कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 104 में अदालत को उसके समक्ष पेश किए गए किसी भी दस्तावेज़ या वस्तु को जब्त करने की इजाजत दी गई है, लेकिन पासपोर्ट को पासपोर्ट अधिनियम की धारा 10(3) के तहत सिर्फ पासपोर्ट प्राधिकरण ही जब्त कर सकता है। अदालत ने कहा, “निचली अदालत पासपोर्ट नहीं जब्त कर सकती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि...

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजनाओं का सख्ती से पालन करना होगा; इस तरह की योजनाओं में अन्य योजनाओं के हिस्सों को शामिल नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजनाओं का सख्ती से पालन करना होगा; इस तरह की योजनाओं में अन्य योजनाओं के हिस्सों को शामिल नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

“नियोक्ता जो पेशकश करता है वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की योजनाओं का एक पैकेज है, और सिर्फ उसी पर गौर किया जा सकता है”।सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजनाओं का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए और अगर दूसरी योजनाओं की बातों को इस योजना में शामिल किया गया तो इस योजना का जो उद्देश्य है वह पूरा नहीं होगा।न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने बीमा कंपनियों के कर्मचारियों के संगठनों की अपीलों पर विचार के क्रम में यह बात काही। इन कर्मचारियों ने जनरल...

दिल्ली हाईकोर्ट ने की महिला की दरियादिली की प्रशंसा; पत्नी के माफ कर देने पर अलग हुए पति को जाने दिया [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाईकोर्ट ने की महिला की दरियादिली की प्रशंसा; पत्नी के माफ कर देने पर अलग हुए पति को जाने दिया [निर्णय पढ़ें]

अलग हुई पत्नी के नाम पर फर्जी अकाउंट बनाकर दोस्ती बनाने वाले अपने पूर्व पति को माफ कर देने वाली महिला की दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रशंसा की। कोर्ट ने इस महिला की दरियादिली की तारीफ करते हुए इस व्यक्ति के खिलाफ दायर एफआईआर को निरस्त कर दिया पर इस व्यक्ति को मुख्यमंत्री राहत कोष में एक लाख रुपए की राशि देने का आदेश दिया।न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने यह आदेश साराय रोहिल्ला थाने में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत इस व्यक्ति के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग संबंधी याचिका पर निर्णय लेते...

सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ते के लिए दायर किए गए मुकदमे की प्रक्रिया के लिए शादी का पुख्ता सबूत जरूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ते के लिए दायर किए गए मुकदमे की प्रक्रिया के लिए शादी का पुख्ता सबूत जरूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

‘उच्च न्यायालय ने यह ध्यान नहीं दिया कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत कार्यवाही में, विवाह का पुख्ता प्रमाण आवश्यक नहीं है’।सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसके तहत उसने गुजारा भत्ते से संबंधित एक मामले को शादी का पुख्ता सबूत नहीं होने के कारण निरस्त कर दिया था। कोर्ट ने दुहराया है कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत पुख्ता प्रमाण आवश्यक नहीं है।कमला बनाम एमआर मोहन कुमार मामले में फ़ैमिली कोर्ट ने इस मामले पर गौर करने के बाद पाया कि दोनों पक्षों में...

सेवा नियमों का उल्लंघन कर अधिकारी को ‘ऊंची छलांग’ वाली पदोन्नति की अनुमति देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त किया [निर्णय पढ़ें]
सेवा नियमों का उल्लंघन कर अधिकारी को ‘ऊंची छलांग’ वाली पदोन्नति की अनुमति देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त किया [निर्णय पढ़ें]

“जो हुआ उसे ‘नियमसम्मत’ नहीं कहा जा सकता है। यह स्पष्ट रूप से पक्षपात का मामला था। 'सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को असम के पूर्व मुख्यमंत्री के साथ काम करने वाले एक अधिकारी को ‘ऊंची छलांग’ वाले प्रोमोशन की अनुमति देने को सेवा शर्तों का उल्लंघन बताया।न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने गौहाटी उच्च न्यायालय के एकल पीठ के फैसले को बहाल कर दिया जिसे पहले खंडपीठ ने देरी के आधार पर निरस्त कर दिया था। खंडपीठ ने यह भी स्वीकार किया था कि 13 रिक्तियों का कोई अस्तित्व नहीं था और देबजीत दास...