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सुप्रीम कोर्ट ने स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम 1968 के तहत 1973 में इस अधिनियम को दी गई चुनौती याचिका खारिज की [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
10 Nov 2018 6:15 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम 1968 के तहत 1973 में इस अधिनियम को दी गई चुनौती याचिका खारिज की [निर्णय पढ़ें]
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पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने उस स्वर्ण अधिनियम 1968 के तहत एक अपील को खारिज कर दिया जिसकी सुनवाई के लंबित रहने के  दौरान उस अधिनियम को ही संसद ने रद्द कर दिया।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1972 में ही इस अपील को खारिज कर दिया था। 1973 में उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ एक विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थीऔर शीर्ष अदालत ने 9 अगस्त 1973 को इसकी  कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

हालांकि जब इस अपील पर सुनवाई लंबित थी उसी दौरान  वर्ष 1990 में संसद ने स्वर्ण (नियंत्रण) अधिनियम, 1968 को रद्द कर दिया। यह पाया गया कि यह कानून पीछे ले जानेवाला कानून था।

पिछले महीनेजब यह अपील न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आईतो अपीलकर्ता की पैरवी करने वाले वरिष्ठ वकील आर वेंकटरमानी ने तर्क दिया कि चूंकि स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम को ही समाप्त कर दिया गया हैसामान्य क्लॉज अधिनियम की धारा6 इस पर लागू नहीं होगी। इस अधिनियम को बिना किसी सविंग क्लौज के बिना रद्द कर दिया गया था।

इस बारे में दिये गए दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने कहा किवर्तमान मामले में बिना शर्त सरलीकरण पर सामान्य क्लॉज अधिनियम की धारा 6 के प्रावधान लागू नहीं होते क्योंकि  क्योंकि 1990 के निरसन अधिनियम में इसके उद्देश्यों और कारणों को बहुत ही स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया है।  पीठ ने इस संदर्भ मेंन्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम सी.पद्मा मामले में दिये गए फैसले का हवाला दिया। जिसमें इसी तरह के मुद्दे पर विचार किया था।

अपील को निपटाते  हुएपीठ ने कहा : “पूरे मामले पर गौर करने के बाद हमारी राय में 1 जून 1971 को जारी कारण बताओ नोटिस का अब कोई मतलब नहीं रहा”।


 
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