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सुप्रीम कोर्ट ने बताया, कब लागू हो सकता है सह-प्रतिवादियों के बीच Res Judicata का सिद्धान्त [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने बताया, कब लागू हो सकता है सह-प्रतिवादियों के बीच Res Judicata का सिद्धान्त [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि सह-प्रतिवादियों के बीच Res Judicata (पूर्व न्याय) के सिद्धांत को लागू करने के पूर्व  निम्नलिखित चार शर्तों को संतुष्ट करने की आवश्यकता है : संबंधित प्रतिवादियों के हित टकराते हों; अभियोगी को दावों राहत देने के लिए हितों के टकराव का निर्णय करना आवश्यक है; प्रतिवादियों के बीच सवालों को अंततः तय किया जाना चाहिए; तथा पूर्व में दायर मामले में दोनों ही सह-प्रतिवादियों का पक्षकार होना जरूरी है।इस मामले में (गोविन्दम्मल बनाम वैद्यनाथन), अभियुक्त के पिता और प्रतिवादी के...

घर का कब्जा लेने में खुद देरी करने वालों को लाभ उठाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
घर का कब्जा लेने में खुद देरी करने वालों को लाभ उठाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि “खरीदार को कब्जा लेने में खुद देरी करने का लाभ उठाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए”। घर खरीदने वाले एक असंतुष्ट व्यक्ति को मुआवजा दिये जाने का फैसला देते हुए न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की पीठ ने यह कहते हुए दावे की राशि की गणना के लिए समय की अवधि को कम कर दिया कि खरीदार ने घर का कब्जा लेने में खुद देरी की। अदालत ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 23 के तहत दायर अपील की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। इस अपील...

वित्तीय सेवा प्रदाता इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी एक्ट के अधिकार क्षेत्र केबाहर : एनसीएलएटी [निर्णय पढ़ें]
वित्तीय सेवा प्रदाता इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी एक्ट के अधिकार क्षेत्र केबाहर : एनसीएलएटी [निर्णय पढ़ें]

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने कहा है कि वित्तीय सेवा प्रदाता जैसी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी एक्ट (आई एंड बी) कोड के दायरे से बाहर हैं। न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय (अध्यक्ष) और न्यायमूर्ति बंसी लाल भट (न्यायिक सदस्य) ने इस बारे में आदेश जारी किया। मामलारणधीरज ठाकुर, निदेशक, मेफेयर कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड बनाम निदेशक, जिंदल सक्सेना फाइनेंशियल सर्विसेज और मेफेयर कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित है। पीठ ने कहा, “यदि आई एंड बी संहिता की पूरी योजना...

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा, बाल अश्लीलता से निपटने के लिए 15 नवंबर तक एसओपी को अंतिम रूप दें
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा, बाल अश्लीलता से निपटने के लिए 15 नवंबर तक एसओपी को अंतिम रूप दें

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र को 15 नवंबर तक बाल अश्लीलता से जुड़े शिकायतों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया।न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने जोर देकर कहा, "हम इस समय सीमा को निर्धारित करने के लिए बाध्य हैं क्योंकि भारत सरकार के पास पिछले दो माह से मानक संचालन प्रणाली और इसके पोर्टल पर काम करने का अनुभव हो चुका है और इस प्रक्रिया के बारे में कोई अंतिम निर्णय होना चाहिए”।वर्ष 2015 में बाल तस्करी के खिलाफ काम करने...

एनसीएलटी को सदस्यों के रजिस्टर में शेयर पूंजी आवंटन, परिवर्तन और उसमें संशोधन करने का अधिकार दिया: दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
एनसीएलटी को सदस्यों के रजिस्टर में शेयर पूंजी आवंटन, परिवर्तन और उसमें संशोधन करने का अधिकार दिया: दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) को किसी कंपनी के सदस्यों के रजिस्टर में शेयर पूंजी आवंटन, परिवर्तन और उसमें संधोधान का अधिकार है और इस बारे में कोई सिविल मुकदमा हाईकोर्ट में नहीं सुना जाएगा।न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह एसएएस होस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े एक मुकदमे की सुनवाई कर रही थीं। इस मामले में यह घोषणा करने की मांग की गई कि कुछ प्रतिवादियों को आवंटित शेयर को अवैध घोषित किया जाए। प्रतिवादी ने दलील दी थी कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 430 और धारा...

मामले को किसी अन्य अदालत को भेजने के बावजूद निचली अदालत ने दिया फैसला, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दिया जांच के आदेश [आर्डर पढ़े]
मामले को किसी अन्य अदालत को भेजने के बावजूद निचली अदालत ने दिया फैसला, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दिया जांच के आदेश [आर्डर पढ़े]

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने उस जज के खिलाफ जांच के आदेश दिये हैं जिसने मामले को किसी अन्य अदालत को भेजने के बाद भी इस मामले में आदेश जारी किया। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी ने जांच को तीन महीने के भीतर समाप्त करने का आदेश दिया, जिसके बाद मामले के हस्तांतरण के उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने के दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू किए जाने की बात कही। अदालत ने 19 अगस्त, 2015 को पारित आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत दायर...

आरटीई अधिनियम के तहत शिक्षा का अधिकार छात्रों को शिक्षित करने के लिए है न की शिक्षकों के संरक्षण के लिए [निर्णय पढ़ें]
आरटीई अधिनियम के तहत शिक्षा का अधिकार छात्रों को शिक्षित करने के लिए है न की शिक्षकों के संरक्षण के लिए [निर्णय पढ़ें]

'अतिथि शिक्षकों' की याचिका पर विचार करते हुए, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षा का अधिकार का उद्देश्य शिक्षकों की रक्षा करना नहीं बल्कि छात्रों को शिक्षा देना है।मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला की पीठ अतिथि शिक्षकों की याचिका याचिकाओं पर विचार कर रहा था जो सरकार की स्थानांतरण नीति से पीड़ित हैं और जहां अतिथि शिक्षकों की जगह दूसरे अतिथि शिक्षकों के एक अन्य समूह की नियुक्ति की जा रही है।राज्य नीति के खिलाफ उनके मंतव्यों को...

घर खरीदाने वाले घर विलंब से मिलने पर अनुबंध में निर्दिष्ट टोकन राशि से उच्च मुआवजे की मांग कर सकते हैं : एनसीडीआरसी [आर्डर पढ़े]
घर खरीदाने वाले घर विलंब से मिलने पर अनुबंध में निर्दिष्ट टोकन राशि से उच्च मुआवजे की मांग कर सकते हैं : एनसीडीआरसी [आर्डर पढ़े]

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने फैसला दिया है कि भवन निर्माता खरीदारों के साथ हुए समझौते के उस क्लॉज़ की आड़ नहीं ले सकते जिसमें कहा गया है कि अगर मकान सौंपने में विलंब हो रहा है तो विलंब की पूरी अवधि के लिए वे प्रति माह पाँच रुपए प्रति वर्ग फुट के हिसाब से मुआवजा देकर बच सकते हैं। आयोग ने कहा है कि खरीदार को मकान का कब्जा लेने के बाद ज्यादा मुआवजा मांगने का विकल्प है और वह चाहे तो चुकाई गई राशि को वापस करने की मांग भी कर सकता है। डॉ. एसएम कानितकर और दिनेश सिंह की खंडपीठ ने...

सात साल की बच्ची के साथ बलात्कार के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आरोपी की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदला [निर्णय पढ़ें]
सात साल की बच्ची के साथ बलात्कार के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आरोपी की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदला [निर्णय पढ़ें]

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने सात साल की बच्ची के साथ बलात्कार करने वाले आरोपी की मौत की सजा को बदल दिया है।निचली अदालत ने 46 दिनों के भीतर मुकदमा पूरा कर लिया था और 7 जुलाई 2018 को अपने फैसले में अभियुक्त को मौत की सजा सुनाई थी। पिछले हफ्ते, मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला समेत उच्च न्यायालय की पहली खंडपीठ ने हालांकि उसको दोषी माना पर मृत्युदंड की उसकी सजा को कम कर दिया।सात साल की इस बच्ची के साथ बलात्कार इस साल 21 मई को मंदिर परिसर में हुआ था। वहां प्रत्यक्ष गवाह थे...

यौन उत्पीड़न के बारे में बोलने के लिए काफी हिम्मत चाहिए : दिल्ली हाईकोर्ट ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को संवेदनहीन और मानवीय समझ नहीं होने की बात कही [निर्णय पढ़ें]
यौन उत्पीड़न के बारे में बोलने के लिए काफी हिम्मत चाहिए : दिल्ली हाईकोर्ट ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को संवेदनहीन और मानवीय समझ नहीं होने की बात कही [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 साल की एक लड़की के साथ बलात्कार के लिए बुधवार को 21 साल के एक युवक को दोषी ठहराया। कोर्ट ने इस मामले में संवेदनशीलता और मानवीय समझ नहीं दिखाने के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) को आड़े हाथों लिया। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और आईएस मेहता की पीठ ने कहा, “यौन अपराध पीड़ित और उसके परिवार के सदस्यों के लिए लज्जा, और शर्मिंदगी की बात समझी जाती है। इस अपराध के बारे में बोलना आसान नहीं है और इसके लिए काफी हिम्मत चाहिए। अगर पीड़ित छोटे बच्चे हैं और उन्हें गंभीर परिणाम होने की धमकी दी...

जीवन के संध्याकाल में माँ-बाप का उत्पीड़न होने देना क्रूरता है; बॉम्बे हाईकोर्ट ने बहू को घर छोड़ने को कहा [निर्णय पढ़ें]
जीवन के संध्याकाल में माँ-बाप का उत्पीड़न होने देना क्रूरता है; बॉम्बे हाईकोर्ट ने बहू को घर छोड़ने को कहा [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक वरिष्ठ दंपति के पक्ष में फैसला दिया जो अपने बेटे और उसकी पत्नी के साथ खार, मुंबई के एक फ्लैट में रह रहे हैं।न्यायमूर्ति शलिनी फनसालकर जोशी ने वरिष्ठ दंपति की बहू सिमरन को उस फ्लैट से निकल जाने का आदेश दिया। जज ने कहा की उम्र के संध्याकाल में वह बूढ़े दंपति के उत्पीड़न की इजाजत नहीं दे सकतीं और बहू को आदेश दिया की वह अपने लिए कोई वैकल्पिक आवास ढूंढ ले।पृष्ठभूमिइससे पहले निचली अदालत ने उनके बेटे को 19 जुलाई 2018 को इस फ्लैट को छह माह के भीतर खाली करने का आदेश दिया था...

आरोपी के अधिकार आज भी पीड़ित के अधिकारों से ज्यादा वजनदार हैं; दोनों के बीच संतुलन की जरूरत ताकि सुनवाई दोनों के लिए न्यायपूर्ण हो : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
आरोपी के अधिकार आज भी पीड़ित के अधिकारों से ज्यादा वजनदार हैं; दोनों के बीच संतुलन की जरूरत ताकि सुनवाई दोनों के लिए न्यायपूर्ण हो : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

यह कहते हुए कि ‘पीड़ित’ बिना अनुमति लिए अपील कर सकता है, सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ितों के अधिकारों के बारे में बहुत ही महत्त्वपूर्ण बातें कही हैं।न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने अपने फैसले में कहा कि आज भी कई अर्थों में आरोपी के अधिकार पीड़ित के अधिकार से कहीं ज्यादा वजनदार हैं और उनके अधिकारों को संतुलित करने की जरूरत है ताकि आपराधिक सुनवाई दोनों के लिए न्यायोचित हो।न्यायाधीश ने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि हम आरोपी को सजा सुनाते हुए गंभीरता से पीड़ितों की बात सुनना शुरू करें। उन्होने कहा कि पीड़ित पर पड़ने...

अपनी पत्नी के प्रेमी की हत्या करनेवाले व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सही : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अपनी पत्नी के प्रेमी की हत्या करनेवाले व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सही : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक व्यक्ति को निचली अदालत से मिली आजीवन कारावास की सजा को सही ठहराया जिसने अपनी पत्नी के प्रेमी की हत्या कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा की अभियोजन पक्ष हत्या के पीछे इरादे के होने को साबित कर पाया। कोर्ट ने इस बारे में उन दो लोगों की गवाही को उद्धृत किया जिन्होंने कहा कि मृतक ने उन्हें कहा था कि आरोपी की पत्नी के साथ उसके अवैध संबंध हैं।न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आईएस मेहता की पीठ ने कहा, “वीरेंदर (आरोपी) ने अपनी पत्नी को मृतक के साथ समर्पण की स्थिति में...

न्यायिक सेवा में नियुक्ति नहीं देने के लिए नैतिक भ्रष्टता की यांत्रिक या शब्दाडंबरपूर्ण दुहाई नहीं दी जा सकती : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
न्यायिक सेवा में नियुक्ति नहीं देने के लिए नैतिक भ्रष्टता की यांत्रिक या शब्दाडंबरपूर्ण दुहाई नहीं दी जा सकती : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि वह न्यायिक सेवा में जाने की ख़्वाहिश रखने वाले उस सफल उम्मीदवार को नियुक्ति देने पर एक बार फिर विचार करे जिसे ‘नैतिक भ्रष्टता” के आधार पर नियुक्ति नहीं दी गई है।न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ,न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने कहा कि नैतिक भ्रष्टता की दुहाई देकर किसी को नियुक्ति के लिए चुनकर उसे नियुक्ति देने से इनकार नहीं किया जा सकता।मोहम्मद इमरान को महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग ने 14 अक्तूबर 2009 को नियुक्ति के लिए चुना...

जब मामले की सुनवाई स्थगित हो, तो पक्षकारों को अदालत में मौजूद होने की जरूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
जब मामले की सुनवाई स्थगित हो, तो पक्षकारों को अदालत में मौजूद होने की जरूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि जब निचली अदालत की सुनवाई स्थगित है, तो जब तक यह स्थगन समाप्त नहीं हो जाता तब तक पक्षकारों के अदालत में मौजूद होने की जरूरत नहीं है।पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर भी शामिल हैं, ने कहा कि ट्रांसफर के एक मामले में एक वकील ने उससे कहा कि अदालत द्वारा स्थगन का आदेश देने के बावजूद पंजाब की निचली अदालत पक्षकारों के अदालत में मौजूद रहने पर ज़ोर डालती है।“हमें यह समझ नहीं आता कि अगर वकील ने जो कहा है वह सही है, तो इस तरह की...

मोटर वाहन अधिनियम मुआवजा : कर्मचारी परिवार लाभ योजना के तहत मिली राशि को आय में हुई क्षति की राशि से घटाया नहीं जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
मोटर वाहन अधिनियम मुआवजा : कर्मचारी परिवार लाभ योजना के तहत मिली राशि को आय में हुई क्षति की राशि से घटाया नहीं जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कर्मचारी परिवार लाभ (ईएफबी) योजना के तहत दुर्घटना में मृत व्यक्ति के परिवार को जो राशि मिलती है उसे मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे की राशि से घटाया नहीं जा सकता।न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर,न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने सेबेस्टियानी बनाम नेशनल इंश्योरेंश कंपनी लिमिटेडमामले में बीमा कंपनी की इस दलील पर गौर कर रहा था की चूंकि दावेदार को ईएफबी योजना के तहत 50,082 की राशि मिल रही है, उस राशि को अदालत द्वारा निर्धारित की जाने वाली मुआवजे की...

हरियाणा में परिवार के सात सदस्यों की हत्या की सजायाफ्ता महिला की मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई, 16 अक्तूबर को होनी थी फांसी
हरियाणा में परिवार के सात सदस्यों की हत्या की सजायाफ्ता महिला की मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई, 16 अक्तूबर को होनी थी फांसी

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा में 2009 में अपने ही परिवार के सात सदस्यों की हत्या में सजायाफ्ता महिला सोनम को 16 अक्तूबर को दी जाने वाली मौत की सजा पर रोक लगा दी। सात सदस्यों में चार बच्चे भी शामिल थे।इससे पहले महिला के प्रेमी नवीन कुमार की मौत की सजा पर भी सुप्रीम कोर्ट रोक लगा चुका है।मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस नवीन सिन्हा की पीठ ने इस अपील को भी नवीन की याचिका के साथ टैग कर दिया है।इस वर्ष जून में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 27 वर्षीय महिला और उसके 28 वर्षीय...

आरोपी को बरी किए जाने के खिलाफ पीड़ित बिना अनुमति लिए अपील दाखिल कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
आरोपी को बरी किए जाने के खिलाफ पीड़ित बिना अनुमति लिए अपील दाखिल कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि किसी आरोपी को बरी किए जाने की स्थिति में पीड़ित को उसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील के लिए अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने बहुमत के इस फैसले में कहा, “कानून की सरल भाषा और कई हाईकोर्टों की इस बारे में व्याख्या और फिर संयुक्त राष्ट्र की महासभा के प्रस्ताव द्वारा दिये गए फैसले के आधार पर यह काफी स्पष्ट है कि सीआरपीसी की धारा 2 में जिसे पीड़ित कहा गया है, उसे उस कोर्ट में अपील का अधिकार होगा जिस कोर्ट में साधारणतया सजा के खिलाफ...

बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने पत्रकार को अवमानना का दोषी पाया, तीन महीने के लिए जेल भेजा [निर्णय पढ़ें]
बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने पत्रकार को अवमानना का दोषी पाया, तीन महीने के लिए जेल भेजा [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने एक पत्रकार केतन तिरोदकर को तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। तिरोदकर पर दो हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है क्योंकि कोर्ट ने उन्हें आपराधिक अवमानना का दोषी पाया है।न्यायमूर्ति एएस ओका, न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति आरएम सावंत की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने तिरोदकर के फेसबुक पोस्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था जिसमें उन्होंने हाईकोर्ट के वर्तमान और पूर्व जजों पर घूस लेकर फैसले देने का आरोप लगाया था।कोर्ट ने तिरोदकर के आरोपों के...