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आपराधिक न्यायालय जमानत देते हुए पासपोर्ट जमा कराने की शर्त नहीं रख सकते हैं : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
28 Oct 2018 6:08 PM GMT
आपराधिक न्यायालय जमानत देते हुए पासपोर्ट जमा कराने की शर्त नहीं रख सकते हैं : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि जमानत देने के दौरान, आपराधिक अदालत आरोपी पर अपना पासपोर्ट जमा कराने के लिए शर्त नहीं थोप सकता।

 न्यायमूर्ति दया चौधरी ने कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 104 में अदालत को उसके समक्ष पेश किए गए किसी भी दस्तावेज़ या वस्तु को जब्त करने की इजाजत दी गई है, लेकिन पासपोर्ट को पासपोर्ट अधिनियम की धारा 10(3) के तहत सिर्फ पासपोर्ट प्राधिकरण ही जब्त कर सकता है।

 अदालत ने कहा, “निचली अदालत पासपोर्ट नहीं जब्त कर सकती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि सीआरपीसी की धारा 104 के तहत अगर अदालत सही समझती है तो वह अपने समक्ष पेश किए गए किसी भी दस्तावेज़ को जब्त कर सकता है। लेकिन पासपोर्ट कानून एक विशेष कानून है जबकि सीआरपीसी कानून आम कानून है। इसलिए अदालत सीआरपीसी) की धारा 104 के तहत पासपोर्ट जब्त नहीं कर सकता।

कानून के तहत यह पूरी तरह स्थापित तथ्य है कि विशेष कानून सामान्य कानून पर लागू होता है। पासपोर्ट अधिनियम एक विशेष कानून है जबकि आपराधिक प्रक्रिया संहिता एक सामान्य कानून है। इसलिए, धारा 104 की आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत न्यायालय पासपोर्ट को जब्त नहीं कर सकता, हालांकि वह अन्य किसी भी दस्तावेज़ को जब्त कर सकता है”।

 न्यायमूर्ति चौधरी ने कहा कि अगर पुलिस किसी संदिग्ध अपराधी का पासपोर्ट अपने पास रखना चाहती है, तो उसे पासपोर्ट प्राधिकरण को इसके लिए आवेदन देना होगा।

 अदालत कैप्टन अनिला भाटिया की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने अपनी अग्रिम जमानत के आदेश में राखी गई शर्तों को को चुनौती दी है। उनसे कहा गया है कि उसे पुलिस या अदालत के समक्ष अपना पासपोर्ट जमा कराना होगा और वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ सकती है।

 याचिकाकर्ता एयर इंडिया एयरलाइंस में वरिष्ठ कप्तान के पद पर कार्यरत है। उसने कहा कि एक पायलट होने के नाते उसे इस बात की अग्रिम जानकारी नहीं होती कि उसे किस देश के लिए उड़ान भरना है। उसने यह भी कहा कि अगर उसे हर बार यात्रा करने से पहले अगर निचली अदालत की अनुमति लेनी पड़ी तो शायद यह भी उसके लिए संभव नहीं है।

 उनकी विवादों की जांच करते हुए, अदालत ने बताया कि जब किसी व्यक्ति को अपना पासपोर्ट जमा करने को कहा जाता है तो इससे उसका कहीं आना-जाना बाधित होता है। कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 437 के तहत संबंधित अदालत को जमानत देने के लिए जरूरी शर्त लगाने का अधिकार है पर इसका मतलब यह नहीं है कि उसके पास पासपोर्ट जब्त करने का भी अधिकार है।

 अदालत ने आगे कहा कि आपराधिक अदालतें, यांत्रिक रूप से, हर मामले में, आरोपी व्यक्ति के पासपोर्ट को जब्त करने का आदेश नहीं दे सकती है।

 इसलिए, अदालत ने इस स्थिति को निरस्त कर दिया और याचिकाकर्ता को अपना पासपोर्ट दो सप्ताह के अंदर दिये जाने के लिए आवेदन देने को कहा। निचली अदालत से कहा गया कि वह इस आवेदन पर गौर करते हुए आवेदनकर्ता का पासपोर्ट बिना किसी विलंब के लौटा दे।

याचिकाकर्ता को कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई में वह अदालत के समक्ष यह लिखित आश्वासन देगी कि विदेश में लंबी अवधि के लिए रहने के लिए वह पूर्व अंजमाती लेगी।


 
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