Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

दूसरी शादी किसी व्यक्ति को बच्चों का संरक्षण प्राप्त करने के अधिकार से वंचित रखने का आधार नहीं हो सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
30 Oct 2018 6:17 PM GMT
दूसरी शादी किसी व्यक्ति को बच्चों का संरक्षण प्राप्त करने के अधिकार से वंचित रखने का आधार नहीं हो सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
x

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ इसलिए कि किसी व्यक्ति ने दूसरी शादी कर ली है और वह अपनी दूसरी पत्नी के साथ रहा रहा है, उसे इस आधार पर बच्चों का संरक्षण प्राप्त करने से नहीं रोका जा सकता।

न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने एक बच्चे का संरक्षण प्राप्त करने के मामले की सुनवाई करते हुए यह बात कही। यह मामला एक डॉक्टर दंपति का है और दोनों ही सीआरपीएफ में काम करते हैं।

पृष्ठभूमि  

इन दम्पतियों के दो बच्चे हैं और आपसी सहमति से दोनों दिसम्बर 2016 में अलग हो गए। कोर्ट के आदेश के अनुसार, यह सहमति हुई कि दोनों बच्चों का संरक्षण पति को मिलेगा। यह भी सहमति हुई कि पति बेटे के लिए शिक्षा, दवाएं और शादी का खर्च वहन करेगा, जबकि पत्नी यही सब बेटी के लिए करेगी।

विवाद तब शुरू हुआ जब पति ने पत्नी से अपने वादे पूरे करने की बात याद दिलाते हुए पत्र लिखा। पत्नी ने इस पत्र के जवाब में लिखा कि सहमति का आदेश उसे स्वीकार्य नहीं है और यह भी आरोप लगाया कि बच्चों को बोर्डिंग स्कूल में भेजना एकपक्षीय फैसला था और जो खर्चा हुआ उसे बढ़ा चढ़ाकर बताया गया है।

पत्नी ने बच्चों के संरक्षण के लिए अपील दायर की जो कि उच्च न्यायालय पहुंची। उच्च न्यायालय, पति के दूसरे विवाह को ध्यान में रखते हुए और यह देखते हुए कि बच्चों को बोर्डिंग स्कूल में भेजा गया था, निर्देश दिया था कि बच्चे एक वर्ष की अवधि के लिए मां के संरक्षण में ही रहेंगे। पति ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

पीठ ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा : “अपीलकर्ता की दूसरी शादी का उसके खिलाफ प्रयोग नहीं किया जा सकता और न ही यह बात कि उसकी दूसरी पत्नी से हुए बच्चे उनके साथ रहते हैं, इस आधार पर उसको बच्चों का संरक्षण हासिल करने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है जो उसे प्रतिवादी नंबर 1 की सहमति से हासिल हुआ है”।

अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि उनकी सेवा की परिस्थिति की अनिवार्यताओं के कारण बच्चों को कुछ समय के लिए बोर्डिंग स्कूल में रखा जाना था, पर अब वो स्थिति नहीं है।

“अपीलकर्ता की दूसरी पत्नी एक शिक्षित महिला है। केवल इसलिए कि अपीलकर्ता ने जीवन में आगे बढ़ने का फैसला किया है, और दूसरी शादी हुई है, उसे अपने बच्चों का संरक्षण प्राप्त करने से वंचित करने का आधार नहीं बन सकता विशेषकर जब वह बच्चों की देखभाल और उनकी किसी भी प्रतिबद्धता से मुकड़ा नहीं है,” खंडपीठ ने कहा।

इसके बाद खंडपीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को खारिज कर दिया और कहा कि आपसी सहमति से तलाक के आदेश के सारे अधिकार और दायित्व दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी हैं।


निर्णय पढ़ें
Next Story