मुख्य सुर्खियां
जब एक बार तलाक हो जाता है,तो उसके बाद घरेलू हिंसा कानून के तहत नहीं मांग सकते है राहत-बाॅम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
बाॅम्बे हाईकोर्ट ने माना है कि जब एक बार तलाक हो जाए तो उसके बाद पत्नी घरेलू हिंसा कानून के तहत कोई राहत नहीं मांग सकती है। जस्टिस एम.जी गिराटकर इस मामले में एक आपराधिक पुनःविचार अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे। जो नागपुर निवासी एक 42 वर्षीय महिला ने दायर की थी। उसने प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट के बीस अगस्त 2015 के आदेश को चुनौती दी थी। इस फैसले में याचिकाकर्ता पत्नी की तरफ से घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 की धारा 12 व 18 के तहत दायर अर्जी को खारिज कर दिया गया था। क्या था मामला याचिकाकर्ता की...
किसी क़ानूनी आदेश के बिना डीडीए को नागरिकों को दंडित करने और उनका पैसा ज़ब्त करने का अधिकार नहीं है : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को यह अधिकार नहीं है कि वह ऐसे व्यक्ति को दंडित करे जिसके बारे में उसको लगता है कि उसने उसको धोखा दिया है।न्यायमूर्ति सीएच हरि शंकर ने कुलवंत सिंह को राहत दिया जिसपर यह आरोप था कि उसने डीडीए को धोखा दिया और इस वजह से डीडीए ने उनकी जमा राशि ज़ब्त कर ली।पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता के अनुसार, डीडीए ने वर्ष 2015 के शुरू में उसको रोहिणी आवासीय योजना-1981 के तहत एक आवासीय प्लॉट आवंटित किया था। इसके बाद याचिकाकर्ता को भेजे एक पत्र में डीडीए...
क्या कांग्रेस की 'न्याय' योजना वोट के लिए रिश्वत है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब देने को कहा [आर्डर पढ़े]
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस को उसकी न्याय योजना के ख़िलाफ़ दायर जनहित याचिका पर जवाब देने को कहा है। मोहित कुमार नामक एक वक़ील ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि कांग्रेस पार्टी का अपने घोषणापत्र में ग़रीबों को सालाना ₹72000 देने की न्यूनतम आय योजना और कुछ नहीं कांग्रेस उम्मीदवारों को वोट देने के लिए रिश्वत देना है। वक़ील ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह चुनाव आयोग को निर्देश देकर इस योजना की चर्चा को घोषणापत्र से निकाल दे और पार्टी और उसके उम्मीदवारों को न्याय योजना का लाभ उठाने से...
लोन का पैसा बताकर भेजा गया डिमांड नोटिस नहीं है अवैध,अगर यह राशि है बाउंस हुए चेक की राशि के बराबर-सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत लोन का पैसा बताकर भेजा गया डिमांड नोटिस अवैध नहीं है,अगर डिमांड नोटिस की राशि बाउंस हुए चेक के बराबर है। इस मामले में आरोपी ने शिकायतकर्ता से पचास हजार रुपए उधार लिए थे,जिसके बदले उसने शिकायतकर्ता को दो चेक जारी किए थे,जो बाउंस हो गए। इस मामले में दो लीगल नोटिस भेजे गए और उसके बाद दो शिकायतें दायर कर दी गई। निचली अदालत ने माना कि दोनों नोटिस दोषपूर्ण है क्योंकि नोटिस में चेक की राशि की बजाय लोन की राशि लिख दी गई। हालांकि इस मामले में...
भीड़-भाड़ वाले इलाके में तेजगति से ड्राईविंग करना, माना जा सकता है लापरवाही से गाड़ी चलाना-बाॅम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
भीड़-भाड़ वाले ऐसे इलाके में जहां लोगों का आना-जाना लगा रहता है, वहां पर तेजगति से ड्राईविंग करने को एक तरह से लापरवाही से गाड़ी चलाना माना जा सकता है। बाॅम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि जब किसी व्यक्ति को यह पता है कि वह जिस इलाके में गाड़ी चला रहा है, वह बहुत भीड़-भाड़ वाला इलाका है। उसके बावजूद भी वह अपने वाहन को तेजगति से ड्राईव करता है तो इसे लापरवाही से गाड़ी चलाने का एक तरीका माना जा सकता है। निचली अदालत ने इस मामले में पोपट भागानाथ को भारतीय दंड संहिता की धारा 304ए व धारा 279 के तहत दोषी करार...
महिलाएँ बच्चों के लालन-पालन में निपुण : पटना हाईकोर्ट ने सीडब्ल्यूसी में दो महिलाओं को रखने के बिहार सरकार के नियम को सही ठहराया [आर्डर पढ़े]
पटना हाईकोर्ट ने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) में दो महिलाओं को रखने के बिहार सरकार के नियम के ख़िलाफ़ दायर अपील को ख़ारिज कर दिया है। जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट में प्रावधान है कि सीडब्ल्यूसी में एक अध्यक्ष का पद होगा और इसके अन्य सदस्यों की संख्या चार होगी जिसकी नियुक्ति राज्य सरकार करेगी। इन सदस्यों में एक महिला होगी और दूसरा सदस्य बच्चों के मामले में विशेषज्ञता रखने वाला हो। राज्य के नियम में कहा गया है कि समिति में एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्यों का स्थान होगा जिनमें कम से कम उस जिले की दो...
अपील पर आरोपी की सज़ा को नोटिस जारी करने के बाद ही बढ़ाया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट किसी आरोपी की सज़ा को बढ़ाने का अधिकार रखता है पर ऐसा वह आरोपी को सज़ा बढ़ाने का नोटिस जारी करने के बाद ही कर सकता है। कुमार घिमिरे को निचली अदालत ने 7 साल की एक लड़की के यौन उत्पीड़न के आरोप में सात साल की सज़ा सुनाई थी। इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील पर ग़ौर करते हुए सिक्किम हाईकोर्ट ने इसको बढ़ाकर 10 साल कर दिया। आरोपी ने इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की और कहा कि सीआरपीसी की धारा 386 के तहत सज़ा बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट ने उपयुक्त...
पत्नी के लिए नया गैस कनेक्शन लेने के लिए करे भुगतान-बाॅम्बे हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा के मामले में पति को दिया निर्देश [आर्डर पढ़े]
बाॅम्बे हाईकोर्ट ने पिछले दिनों ही एक जीवेश शेट्टी नामक व्यक्ति को निर्देश दिया है िकवह अपनी पत्नी के नाम नया गैस कनेक्शन लेने के लिए पैसों दे। उसकी पत्नी ने कोर्ट को बताया था कि 16 मार्च को उसकी सास उनके वैवाहिक घर से कुकिंग गैस,फ्रीज व वाशिंग मशीन को उठाकर ले गई। जस्टिस मृदुल भटकर इस मामले में शेट्टी की तरफ से दायर एक आपराधिक रिट पैटिशन पर सुनवाई कर रहे थे। जिसमें सेशन कोर्ट के 11 अप्रैल 2019 के आदेश को चुनौती दी गई थी। अपने आदेश में सेशन कोर्ट ने शेट्टी को निर्देश दिया था कि वह सभी सुविधाएं...
बाॅम्बे हाईकोर्ट ने किया फैमिली कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार,फैमिली कोर्ट ने दिया था 75 साल के बुजुर्ग को आदेश डीवी एक्ट के तहत दे 72 वर्षीय पत्नी को एक लाख रुपए मुआवजा [आर्डर पढ़े]
पिछले दिनों ही बाॅम्बे हाईकोर्ट ने एक फैमिली कोर्ट या पारिवारिक विवाद न्याय के एक आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। फैमिली कोर्ट ने एक 75 वर्षीय बुजुर्ग को निर्देश दिया था कि वह अपनी 72 वर्षीय पत्नी को डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट 2005(घरेलू हिंसा अधिनियम 2005) के तहत एक लाख रुपए मुआवजे के तौर पर दे। जस्टिस अखिल कुरैशी व जस्टिस सारंग कोटवाल की दो सदस्यीय खंडपीठ ने इस मामले में सुभाष आनंद नामक व्यक्ति को राहत देने से इंकार कर दिया। याचिकाकर्ता पति सुभाष आनंद ने इस मामले में मुम्बई स्थित...
राज्य सज़ा में छूट के दावों के नियमों को कड़ा कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के नियमों को वैध ठहराया [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान प्रिजन्स (शॉर्टनिंग ऑफ सेंटेंस) रूल, 2006 के नियम 8 (2) (i) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। उक्त नियम में यह प्रावधान किया गया है कि ऐसे कैदी जिन्हें ऐसे अपराध के तहत आजीवन कारावास की सजा हुई है जिसमें मौत की सजा का भी प्रावधान होता है या उसे मिली मौत की सजा को अदालत द्वारा आजीवन कारावास में तब्दील किया गया है, उसकी सजा और समय से पहले रिहाई के लिए दाखिल आवेदन पर सरकार रिहाई कर सकती है। इसमें एक और नियम यह है कि इसे तभी माना जाएगा जब उसने रहम की अवधि को छोड़कर...
दिल्ली हाईकोर्ट ने जस्टडायल को पीवीआर का ट्रेड्मार्क प्रयोग करने से रोका, कहा - यह प्रथम दृष्ट्या रोक है [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने पीवीआर सिनेमाज के पक्ष में फ़ैसला सुनाते हुए जस्टडायल को पीवीआर के ट्रेड्मार्क का प्रयोग करने से रोक दिया है। पीवीआर ने मुक़दमा दायर कर जस्टडायल पर पीवीआर का लोगो प्रयोग करने पर स्थाई रोक लगाने की माँग की थी क्योंकि यह उसके ट्रेडमार्क और कॉपीराईट का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति मनमोहन ने इस मामले में दलील सुनने के बाद पर फ़ैसला सुनाया। कोर्ट में कहा गया था कि दोनों ही पक्षों में 31 मार्च 2016 को टिकट बेचने को लेकर एक ग़ैर-विशिष्ट समझौता...
पांच माह के लिए आकस्मिक तौर पर खाली हुई विधानसभा सीट को भरने के लिए उप-चुनाव करवाना है कानून का उल्लंघन,विवेकाधीन-बाॅम्बे हाईकोर्ट ने किया ईसीआई के फैसले को रद्द [निर्णय पढ़े]
एक महत्वपूर्ण फैसले में बाॅम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय चुनाव आयोग के उस निर्णय को रद्द कर दिया है,जिसमें महाराष्ट्र के नागपुर स्थित कटोल विधानसभा की आकस्मिक तौर पर खाली हुई सीट को भरने के लिए उप-चुनाव करवाने का फैसला लिया गया था। हाईकोर्ट ने इस फैसले को विवेकाधीन,पक्षपाती,अकारण व कानून के नियमों का उल्लंघन बताया है। नागपुर बेंच के जस्टिस एस.बी सुक्रे व जस्टिस पी.वी गनेडीवाला इस मामले में कटोल निवासी एक संदीप सरोडे की तरफ से दायर रिट पैटिशन पर सुनवाई कर रहे थे। सरोडे ने 11 अप्रैल को कटोल विधानसभा...
सुप्रीम कोर्ट ने नाइजीरियाई डॉक्टर की गवाही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए रिकॉर्ड करने की इजाज़त दी [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने एक नाइजीरियाई डॉक्टर का बयान वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए रेकर्ड करने की अनुमति दे दी है।इस डॉक्टर ने मृतक के शव का अंत्य परीक्षण किया था। इस मामले में आरोपी पर नाइजीरिया में अपनी पत्नी की हत्या का आरोप है। एक नाइजीरियाई डॉक्टर ने मृतक के शव का परीक्षण किया था। मृतक की माँ ने आवेदन देकर शव का परीक्षण करने वाले डॉक्टर आई यूसुफ़ का बयान दर्ज करने की अपील थी। निचली अदालत ने इस अपील को ठुकरा दिया था और इसका कारण यह बताया था कि यह सुनवाई पिछले 8 सालों से लंबित है और दूसरा यह कि...
क्या एनआई एक्ट की धारा 143ए को पिछले प्रभाव से लागू किया जा सकता है?सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने उस विशेष लीव पैटिशन (एसएलपी) पर नोटिस जारी किया है,जिसमें पूछा गया है कि क्या निगोशिएबल इंस्ट्रुमेंट एक्ट (एनआई एक्ट) को पिछले प्रभाव से लागू किया जा सकता है या नहीं? पिछले साल संशोधन के बाद जिन प्रावधन लागू किया गया था,उनके अनुसार निचली अदालत को यह अधिकार दे दिया गया है कि वह आरोपी को निर्देश दे सकती है कि वह अंतरिम मुआवजा दे,जो कि चेक की राशि का बीस प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता है। अंतरिम मुआवजे की यह राशि आदेश देने के साठ दिन के अंदर देनी होगी। सीआरपीसी की धारा 421 के तहत...
किराया नियंत्रण कानून में तय प्रक्रिया के तहत ही निकाला जा सकता है किसी किराएदायर को-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
'किराएदार से भवन खाली करवाकर वापिस लेने के लिए लगाए गए प्रतिबंध, किराएदार के लाभ के लिए लगाए गए है,जो वैधानिक नीति संबंधी मामले है।' सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किराया नियंत्रण कानून के तहत एक वैधानिक किराएदार को दिए गए संरक्षण को सिर्फ कानून में दी गई प्रक्रिया का पालन करते हुए ही अभिभूत या काबू किया जा सकता है शिवदेव कौर ने एक भवन चंद्र प्रकाश सोनी को किराए पर दिया था। शिवदेव कौर को मिली रियासत के तहत उसे यह अधिकार था िकवह इस भवन या संपत्ति को किराए पर दे सके और उसका किराया वसूल सके। कौर की...
मजिस्ट्रेट आरोपी को बरी करने के बाद ख़ुद इस मामले की आगे की जाँच का आदेश नहीं दे सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
संज्ञान लेने से पूर्व मजिस्ट्रे के पास मामले में आगे की जाँच का आदेश देने का अध्दिकार है पर संज्ञान ले लिए जाने के बाद वह ऐसा नहीं कर सकता विशेषकर तब जब आरोपी को उसने बरी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मजिस्ट्रेट को कोई अधिकार नहीं है कि वह आरोपी को बरी करने के बाद स्वतः संज्ञान लेते हुए आगे की जाँच का आदेश दे। बिकश रंजन राउत और अन्य पर आईपीसी की धारा 420, 468 और 471 के तहत मुक़दमा चलाया गया। जाँच के बाद जाँच अधिकारी ने चार्ज शीट दायर किया पर इस पर ग़ौर करने के बाद मजिस्ट्रेट ने...
अलग तिथि पर सज़ा से पूर्व सुनवाई आवश्यक नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिस दिन सज़ा सुनाई जाती है उसी दिन सज़ा पर होने वाली सुनवाई आयोजित करने पर कोई रोक नहीं है बशर्ते कि आरोपी और अभियोजन अपनी-अपनी दलील पेश करने को तैयार हैं। न्यायमूर्ति एनवाई रमना,न्यायमूर्ति एमएम शांतनागौदर और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि सीसीपी की धारा 235 (2) का उद्देश्य आरोपी को सज़ा को आसान बनाने का मौक़ा देना है। पर इसका मतलब यह नहीं है कि निचली अदालत धारा 235(2) के तहत आवश्यक शर्तें तभी पूरी कर सका है जब वह इस मामले की सुनवाई एक-दो दिन के लिए...
सजा के बाद हुई गंभीर मानसिक बीमारी है गंभीरता कम करने वाला कारक,सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए निर्देश [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि अगर सजा होने के बाद किसी को कोई मानसिक बीमारी हो जाती है तो ऐसे में मौत की सजा पाए इस व्यक्ति की अपील पर सुनवाई करते समय इसे एक गंभीरता कम करने वाले कारक के तौर पर देखा जाएगा। जस्टिस एन.वी रमाना,जस्टिस मोहन एम शांतनागौड़र व जस्टिस इंद्रा बनर्जी की खंडपीठ ने दो नाबालिग लड़कियों से दुष्कर्म करने व उनकी हत्या करने के मामले में फांसी की सजा पाए आरोपी की सजा बदल दी है। आरोपी को वर्ष 2001 में निचली अदालत ने दोषी करार देते हुए फांसी की सजा दी थी। जिसे हाईकोर्ट ने भी ठीक...
ग़लत तथ्यों के आधार पर नियमितीकरण का लाभ उठाना क़ानूनसम्मत नहीं; सुप्रीम कोर्ट ने चौकीदार को नौकरी से निकालने को सही ठहराया [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने एक चौकीदार की नौकरी को नियमित किए जाने को अवैध ठहराते हुए कहा कि अगर कोई अधिकारियों को ग़लत तथ्य पेश करके उसके आधार पर अपनी नौकरी को नियमित करवाने में सफल होता है तो इसे वैध नहीं ठहराया जा सकता। करमजीत सिंह को पंजाब शहरी योजना और विकास प्राधिकरण में 1 दिसम्बर 1995 को दिहारी आधार पर चौकीदार के रूप में रखा गया। इस संस्थान के मस्टर रोल में 31.03.1997 तक उसका नाम था। पंजाब सरकार ने वर्क-चार्ज्ड/दिहारी और अन्य श्रेणी के ऐसे कर्मचारी जिन्होंने तीन साल की सेवा पूरी कर ली है, उनके...
आपसी सहमति से तलाक के मामले में निर्धारित समय-सीमा को किसी दंपत्ति को हो रही व्यक्तिगत परेशानी के आधार पर नहीं कर सकते है खत्म-मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि दोनों पक्षकारों को हो रही व्यक्तिगत परेशानी के आधार पर हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी(2) के तहत निर्धारित छह माह की अवधि को खत्म नहीं किया जा सकता है। इस मामले में एक दंपत्ति ने आपसी सहमति से तलाक की अर्जी कोर्ट के समक्ष दायर की थी और मांग की थी कि छह महीने के कूलिंग आॅफ यानि शीलतन की समय अवधि को खत्म किया जाए। इन दोनों पक्षकारों की तरफ से दलील दी गई थी िकवह जल्दी-जल्दी कोर्ट के चक्कर नहीं काट सकते है क्योंकि उनमें से एक डाबरा में निजी स्कूल में शिक्षक है...

![जब एक बार तलाक हो जाता है,तो उसके बाद घरेलू हिंसा कानून के तहत नहीं मांग सकते है राहत-बाॅम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े] जब एक बार तलाक हो जाता है,तो उसके बाद घरेलू हिंसा कानून के तहत नहीं मांग सकते है राहत-बाॅम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356603-nagpur-bench-of-bombay-hc.jpg)
![किसी क़ानूनी आदेश के बिना डीडीए को नागरिकों को दंडित करने और उनका पैसा ज़ब्त करने का अधिकार नहीं है : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े] किसी क़ानूनी आदेश के बिना डीडीए को नागरिकों को दंडित करने और उनका पैसा ज़ब्त करने का अधिकार नहीं है : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356728-delhi-high-court-2.jpg)
![क्या कांग्रेस की न्याय योजना वोट के लिए रिश्वत है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब देने को कहा [आर्डर पढ़े] क्या कांग्रेस की न्याय योजना वोट के लिए रिश्वत है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब देने को कहा [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/26/500x300_360293-359597-congress-manifesto.jpg)
![लोन का पैसा बताकर भेजा गया डिमांड नोटिस नहीं है अवैध,अगर यह राशि है बाउंस हुए चेक की राशि के बराबर-सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े] लोन का पैसा बताकर भेजा गया डिमांड नोटिस नहीं है अवैध,अगर यह राशि है बाउंस हुए चेक की राशि के बराबर-सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356956-cheque-ll-size-min.jpg)
![भीड़-भाड़ वाले इलाके में तेजगति से ड्राईविंग करना, माना जा सकता है लापरवाही से गाड़ी चलाना-बाॅम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े] भीड़-भाड़ वाले इलाके में तेजगति से ड्राईविंग करना, माना जा सकता है लापरवाही से गाड़ी चलाना-बाॅम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2018/12/30/500x300_355726-bombay-hc.jpg)
![महिलाएँ बच्चों के लालन-पालन में निपुण : पटना हाईकोर्ट ने सीडब्ल्यूसी में दो महिलाओं को रखने के बिहार सरकार के नियम को सही ठहराया [आर्डर पढ़े] महिलाएँ बच्चों के लालन-पालन में निपुण : पटना हाईकोर्ट ने सीडब्ल्यूसी में दो महिलाओं को रखने के बिहार सरकार के नियम को सही ठहराया [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356813-patna-high-court-min.jpg)
![अपील पर आरोपी की सज़ा को नोटिस जारी करने के बाद ही बढ़ाया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] अपील पर आरोपी की सज़ा को नोटिस जारी करने के बाद ही बढ़ाया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/02/10/500x300_358203-358147-ashok-bhushan-km-joseph.jpg)
![पत्नी के लिए नया गैस कनेक्शन लेने के लिए करे भुगतान-बाॅम्बे हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा के मामले में पति को दिया निर्देश [आर्डर पढ़े] पत्नी के लिए नया गैस कनेक्शन लेने के लिए करे भुगतान-बाॅम्बे हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा के मामले में पति को दिया निर्देश [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2018/12/30/500x300_355733-bombay-hc-6.jpg)
![राज्य सज़ा में छूट के दावों के नियमों को कड़ा कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के नियमों को वैध ठहराया [निर्णय पढ़े] राज्य सज़ा में छूट के दावों के नियमों को कड़ा कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के नियमों को वैध ठहराया [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/02/500x300_359590-358715-justice-arun-mishra-and-navin-sinha.jpg)
![दिल्ली हाईकोर्ट ने जस्टडायल को पीवीआर का ट्रेड्मार्क प्रयोग करने से रोका, कहा - यह प्रथम दृष्ट्या रोक है [आर्डर पढ़े] दिल्ली हाईकोर्ट ने जस्टडायल को पीवीआर का ट्रेड्मार्क प्रयोग करने से रोका, कहा - यह प्रथम दृष्ट्या रोक है [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/22/500x300_360156-justdial.jpg)
![सुप्रीम कोर्ट ने नाइजीरियाई डॉक्टर की गवाही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए रिकॉर्ड करने की इजाज़त दी [निर्णय पढ़े] सुप्रीम कोर्ट ने नाइजीरियाई डॉक्टर की गवाही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए रिकॉर्ड करने की इजाज़त दी [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/20/500x300_360118-360058-justice-am-sapre-and-justice-dinesh-maheshwari.jpg)
![क्या एनआई एक्ट की धारा 143ए को पिछले प्रभाव से लागू किया जा सकता है?सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस [आर्डर पढ़े] क्या एनआई एक्ट की धारा 143ए को पिछले प्रभाव से लागू किया जा सकता है?सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/30/500x300_357957-uu-lalit-indu-malhotra.jpg)
![किराया नियंत्रण कानून में तय प्रक्रिया के तहत ही निकाला जा सकता है किसी किराएदायर को-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] किराया नियंत्रण कानून में तय प्रक्रिया के तहत ही निकाला जा सकता है किसी किराएदायर को-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/05/500x300_359687-358921-justice-dy-chandrachud-and-justice-hemant-gupta1.jpg)
![मजिस्ट्रेट आरोपी को बरी करने के बाद ख़ुद इस मामले की आगे की जाँच का आदेश नहीं दे सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] मजिस्ट्रेट आरोपी को बरी करने के बाद ख़ुद इस मामले की आगे की जाँच का आदेश नहीं दे सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/19/500x300_360107-358915-justice-l-nageswara-rao-and-justice-mr-shah.jpg)
![अलग तिथि पर सज़ा से पूर्व सुनवाई आवश्यक नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] अलग तिथि पर सज़ा से पूर्व सुनवाई आवश्यक नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/19/500x300_360099-358946-justice-nv-ramana-justice-mohan-m-shantanagoudar-justice-indira-banerjee.jpg)
![ग़लत तथ्यों के आधार पर नियमितीकरण का लाभ उठाना क़ानूनसम्मत नहीं; सुप्रीम कोर्ट ने चौकीदार को नौकरी से निकालने को सही ठहराया [निर्णय पढ़े] ग़लत तथ्यों के आधार पर नियमितीकरण का लाभ उठाना क़ानूनसम्मत नहीं; सुप्रीम कोर्ट ने चौकीदार को नौकरी से निकालने को सही ठहराया [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/19/500x300_360091-359984-justice-uu-lalit-and-justice-indu-malhotra.jpg)
