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सुप्रीम कोर्ट ने नाइजीरियाई डॉक्टर की गवाही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए रिकॉर्ड करने की इजाज़त दी [निर्णय पढ़े]

Live Law Hindi
20 April 2019 7:55 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने नाइजीरियाई डॉक्टर की गवाही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए रिकॉर्ड करने की इजाज़त दी [निर्णय पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट ने एक नाइजीरियाई डॉक्टर का बयान वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए रेकर्ड करने की अनुमति दे दी है।इस डॉक्टर ने मृतक के शव का अंत्य परीक्षण किया था।

इस मामले में आरोपी पर नाइजीरिया में अपनी पत्नी की हत्या का आरोप है। एक नाइजीरियाई डॉक्टर ने मृतक के शव का परीक्षण किया था। मृतक की माँ ने आवेदन देकर शव का परीक्षण करने वाले डॉक्टर आई यूसुफ़ का बयान दर्ज करने की अपील थी।

निचली अदालत ने इस अपील को ठुकरा दिया था और इसका कारण यह बताया था कि यह सुनवाई पिछले 8 सालों से लंबित है और दूसरा यह कि डॉक्टर यूसुफ़ ने जो शव परीक्षण किया था उसकी एक रिपोर्ट कोर्ट के पास पहले से ही मौजूद है। राजस्थान हाईकोर्ट ने निचली अदालत के इस निर्णय को सही ठहराया।

न्यायमूर्ति एएम सप्रे और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने कहा कि इस मामले में शव परीक्षण करने वाले डॉक्टर का बयान बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। जहाँ तक मामले के 8 सालों से लंबित रहने की बात है, कोर्ट ने कहा कि केस के लंबे समय से लंबित होने की चिंता इस मामले में न्याय के लिए ज़रूरी तथ्यों की जगह नहीं ले सकता। दूसरे शब्दों में, जब किसी मामले में ज़रूरी गवाही की पड़ताल की माँग की जा रही है उस स्थिति में किसी मामले का लंबे समय से लंबित रहना कोई मायने नहीं रखता।

इस संबंध में पीठ ने State of Maharashtra v. Dr. Praful B. Desai मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का भी ज़िक्र किया जिसमें आपराधिक सुनवाई में वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए अमरीका में बैठे गवाह का बयान दर्ज कराने की अनुमति दी थी।

पीठ ने सीआरपीसी की धारा 311 के तहत यह अपील स्वीकार कर ली और निचली अदालत को गवाह से पूछताछ सुनिश्चित करने के लिए सभी तरह का आवश्यक क़दम उठाने और विडीओ कंफ्रेंसिंग के ज़रिए बयान दर्ज करने को कहा।


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