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किसी क़ानूनी आदेश के बिना डीडीए को नागरिकों को दंडित करने और उनका पैसा ज़ब्त करने का अधिकार नहीं है : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

Live Law Hindi
27 April 2019 6:50 AM GMT
किसी क़ानूनी आदेश के बिना डीडीए को नागरिकों को दंडित करने और उनका पैसा ज़ब्त करने का अधिकार नहीं है : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
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दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को यह अधिकार नहीं है कि वह ऐसे व्यक्ति को दंडित करे जिसके बारे में उसको लगता है कि उसने उसको धोखा दिया है।

न्यायमूर्ति सीएच हरि शंकर ने कुलवंत सिंह को राहत दिया जिसपर यह आरोप था कि उसने डीडीए को धोखा दिया और इस वजह से डीडीए ने उनकी जमा राशि ज़ब्त कर ली।

पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता के अनुसार, डीडीए ने वर्ष 2015 के शुरू में उसको रोहिणी आवासीय योजना-1981 के तहत एक आवासीय प्लॉट आवंटित किया था। इसके बाद याचिकाकर्ता को भेजे एक पत्र में डीडीए ने कहा कि उसकोआवंटन के लिए भुगतान करना होगा और ऐसा करने की अंतिम तिथि है 25 जुलाई 2016 और इसके बाद उसने ₹5,22,300 का भुगतान NEFT के माध्यम से किया।

ऐसा करने के बाद याचिकाकर्ता को डीडीए से एक अन्य पत्र मिला जिसमें कहा गया था कि उसका आवंटन रद्द कर दिया गया है और आवेदन के समय उसने जो ₹4815 की राशि चुकाई थी वह उसे लौटाई जा चुकी है।इसके बाद सिंह को बताया गया कि ₹5,22,300 की उसकी राशि ज़ब्त कर ली गई है क्योंकि डीडीए के साथ फ़र्ज़ी भुगतान करके धोखा किया गया है क्योंकि उसने 2001 में पंजीकरण राशि वापस लेने के बाद भी फ़र्ज़ीभुगतान किया।

फ़ैसला

डीडीए के वक़ील ने कहा कि याचिकाकर्ता के कहने पर उसका पंजीकरण रद्द कर दिया गया था और उसे बयाने की राशि वापस कर दी गई थी। पर सिस्टम में गड़बड़ी की वजह से आवंटी के रूप में उसका नाम रह गयाजिसे प्लॉट का आवंटन होना था।

इसकी वजह से याचिककर्ता को ग़लती से प्लॉट अलॉट हो गया।

दलील सुनने के बाद कोर्ट ने कहा,

"…अगर याचिकाकर्ता ने डीडीए के साथ फ़र्जीवाड़ा किया भी है तो भी याचिकाकर्ता का पैसा रोक लेना उचित नहीं है। अगर किसी नागरिक ने किसी सरकारी संस्था के साथ फ़र्जीवाड़ा किया है तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाईहो सकती है पर इस तरह की कार्रवाई क़ानून के तहत होनी चाहिए और यह सज़ा के रूप में नहीं हो सकती।"

"डीडीए ने जिस तरह से याचिकाकर्ता की ₹5,22,300/- की राशि ज़ब्त कर ली है जो उसने उसके पास जमा कराया था, उससे लगता है कि …ऐसा करके उसको सज़ा दी गई है जबकि क़ानून के तहत डीडीए को इस तरहका अधिकार नहीं है।"

इस तरह याचिकाकर्ता की अर्ज़ी स्वीकार कर ली गई और रजिस्ट्री से कहा गया कि वह डीडीए को जमा की गई राशि याचिकाकर्ता को देने का आदेश जारी करे।


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