मुख्य सुर्खियां
COVID-19 : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने न्यायाधीशों , रजिस्ट्रार, न्यायिक अधिकारियों और न्यायपालिका के कर्मचारियों से एक दिन का वेतन दान करने का अनुरोध किया
COVID 19 महामारी के मद्देनजर राज्य / देश के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने न्यायाधीशों और रजिस्ट्रार और हाईकोर्ट के कर्मचारियों, और न्यायिक अधिकारियों और अधीनस्थ न्यायपालिका के कर्मचारियों से कोरोना के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में एक दिन का वेतन दान देने का अनुरोध किया है।। योगदान स्वैच्छिक आधार पर है और जो योगदान नहीं करना चाहते हैं उन्हें उच्च न्यायालय के नामित अधिकारी को कॉल / एसएमएस से सूचित कर सकते हैं। यदि ऐसी कोई सूचना नहीं...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ग़ैरक़ानूनी गर्भपात के आरोपी डॉक्टर को COVID-19 से मरीज़ों का इलाज करने की शर्त पर ज़मानत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट के औरंगाबाद पीठ ने सोमवार को एक डॉक्टर को इस शर्त पर ज़मानत दी कि वह कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों की मदद करेगा।सात महीने की गर्भवाली 29 साल की एक महिला का ग़ैरक़ानूनी गर्भपात कराने के आरोपी डॉक्टर को ज़मानत देते हुए एकल पीठ के जज न्यायमूर्ति टीवी नलवाड़े ने कहा, "आवेदक अभियोजन पक्ष की गवाही से किसी तरह की छेड़छाड़ और इसी तरह का कोई और अपराध नहीं करेगा' जेल से छोड़े जाने के बाद वह सरकारी मेडिकल कॉलेज, औरंगाबाद के डीन से मिलेगा और यह लिखित आश्वासन देगा कि वह डीन के कहे मुताबिक़...
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अपर न्यायिक अधिकारियों से ज़मानत के आदेशों पर अमल सुनिश्चित करने और संपर्क विवरणों को अद्यतन करने को कहा
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को अपर न्यायिक अधिकारियों से कहा कि वे ऐसी व्यवस्था बनाएँ ताकि लॉकडाउन के दौरान ड्यूटी पर मौजूद सभी मजिस्ट्रेटों के संपर्क संबंधी विवरणों को आधिकारिक वेबसाइट पर अद्यतन हो ताकि ज़मानत के आदेश पर अमल को सुनिश्चित किया जा सके। न्यायमूर्ति हरनरेश सिंह गिल ने एक विचाराधीन क़ैदी के आवेदन पर यह आदेश दिया। इस क़ैदी को पिछले दो बार से ज़मानत मिल जाने के बाद भी जेल से नहीं छोड़ा गया है। पहली बार इसे अतिरिक्त ज़िला जल ने फरवरी में और दूसरी बार सत्र न्यायधीश ने 23...
लॉकडाउन उपाय राज्य सख्ती से लागू करें : केंद्रीय गृह मंत्रालय
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को 24 मार्च को केंद्र सरकार द्वारा जारी लॉकडाउन उपायों को सख्ती से लागू करने के लिए कहा। इसके मद्देनजर, राज्य अधिकारियों को आईपीसी की धारा 188 के अलावा, आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत संबंधित प्रावधानों को व्यापक रूप से प्रचारित करने के लिए निर्देशित किया गया है, जिसका उपयोग लॉकडाउन उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ किया जा सकता है। मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिवों को संबोधित एक पत्र में कहा, " ऑर्डर नंबर 40-3 / 2020-डीएम-आई (ए) दिनांक...
COVID19: कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के प्रशासन को स्वदेशी आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को अंडमान और निकोबार द्वीप के प्रशासन के लिए कई उल्लेखनीय अंतरिम दिशा-निर्देश पारित किए हैं ताकि द्वीपों में COVID 19 को फैलने से रोकना सुनिश्चित किया जा सकें।मुख्य न्यायाधीश टी.बी.एन राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की खंडपीठ ने 27 मार्च, 2020 को एक अधिवक्ता डी.सी कबीर द्वारा लिखे गए एक पत्र पर स्वत संज्ञान लिया है। जिसमें कहा गया था कि अगर जल्द से जल्द तत्काल उपाय नहीं किए गए तो द्वीपों में संक्रमण का संभावित प्रसार हो सकता है। उपरोक्त के...
COVID-19 : बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य से श्रमिकों/प्रवासियों को ज़रूरी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने राज्य के अथॉरिटीज़ से कहा है कि वे COVID-19 महामारी को देखते हुए राज्य में सभी श्रमिकों और प्रवासी मज़दूरों को बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित करने के लिए तत्काल क़दम उठाएँ।देश भर में COVID-19 महामारी के कारण हुए लॉकडाउन के कारण श्रमिकों को उनका काम बंद हो जाने के कारण हुए "अकल्पनीय मुश्किलों" पर ग़ौर करते हुए न्यायमूर्ति सुनील बी शुक्रे की एकल पीठ ने कहा,"इस परिस्थिति में ज़रूरी बात है कि इन श्रमिकों को कपड़ा, दवा और स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया कराए जाने के अलावा...
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला, जीवन के अधिकार का ही एक पहलू है जनन का अधिकार, गर्भपात पर नाबालिग की सहमति आवश्यक
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने माना है कि नाबालिग लड़की का जनन का अधिकार या जीवन निर्माण का अधिकार, अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए जीवन के अधिकार का एक पहलू है, इसलिए नाबालिग की सहमति के बगैर उसके गर्भपात की अनुमति नहीं दी जा सकती है।जस्टिस संजय के अग्रवाल की एकल पीठ ने नाबालिग के पिता की याचिका खारिज़ कर दी, जिसमें उसने अपनी बेटी का गर्भपात करवाने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट को दिए बयान में बेटी ने गर्भपात के लिए सहमति नहीं दी थी, जिसके बाद कोर्ट ने कहा सहमति के बिना गर्भपात का आदेश नहीं दिया जा सकता है।...
'आपदा के लिए नुस्खा' : केरल हाईकोर्ट ने डॉक्टर से प्रमाणित लोगों को शराब की आपूर्ति करने के आदेश पर रोक लगाई
केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केरल सरकार द्वारा 30 मार्च को जारी किए गए उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके अनुसार आबकारी विभाग किसी डॉक्टर से यह प्रमाण पत्र लेने वाले व्यक्ति को शराब की आपूर्ति करेगा कि वह शराब वापसी सिन्ड्रोम से पीड़ित है।ये रोक तीन सप्ताह की अवधि के लिए है।जस्टिस ए के जयशंकरन नांबियार और जस्टिस शाजी पी शेली की पीठ ने कांग्रेस सांसद टी एन प्रथपन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और केरल गवर्नमेंट मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन द्वारा दायर याचिकाओं पर ये अंतरिम आदेश पारित...
COVID 19 : केंद्र सरकार ने वाहन बीमा पॉलिसी और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की नवीनीकरण तारीख 21 अप्रैल तक बढ़ाई
केंद्र सरकार ने मोटर वाहन के थर्ड पार्टी बीमा और स्वास्थ्य बीमा की नवीनीकरण की नियत तारीख को उन व्यक्तियों के लिए आगे बढ़ा दिया है, जिनकी पॉलिसी देश में चल रहे लॉकडाउन अवधि के दौरान समाप्त हो रही हैं।बुधवार को इस संबंध में जारी एक अधिसूचना के माध्यम से, वित्त मंत्रालय ने 25 मार्च 2020 से 14 अप्रैल 2020 के बीच जिन पॉलिसी धारकों की पॉलिसी की अवधि समाप्त हो रही है, उन पॉलिसियों के नवीनीकरण की अवधि 21 अप्रैल तक बढ़ा दी है।इस संबंध में दो अधिसूचनाएं जारी की गई हैं, जिनके अनुसार, "जिन...
COVID-19 : आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने मछली और झींगा को आवश्यक आपूर्ति की श्रेणी में शामिल करने का आदेश दिया
अमरावती में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने "आवश्यक आपूर्ति" की श्रेणी में मछली और झींगा (झींगे) को शामिल करने के लिए एक अंतरिम आदेश पारित किया है और राज्य के अधिकारियों को मछली और झींगा परिवहन करने वाले वाहनों को अनुमति देने का निर्देश दिया है। मत्स्य विभाग, पशुपालन मंत्रालय के मत्स्य विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा दिनांक 24.03.2020 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को संबोधित पत्र के मद्देनजर "आवश्यक आपूर्ति" की श्रेणी में मछली और झींगा (झींगे) को शामिल करके उनका परिवहन...
COVID-19: सुप्रीम कोर्ट मे अर्जी, असम के डिटेंशन सेंटर में रखे गए लोगों को रिहा करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में दायर एक अर्जी में, 'विदेशी नागरिक' बताकर असम के छह डिटेंशन सेंटर में रखे गए लोगों को रिहा करने की मांग की गई है। अर्जी में कहा गया है कि डिटेंशन सेंटर में रह रहे लोगों को भी COVID-19 से संक्रमण का खतरा हो सकता है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने कोविड 19 की महामारी के मद्देनजर जेलों में भीड़ कम करने के लिए स्वतः संज्ञान लिया है, और अथॉरिटीज़ को विशिष्ट श्रेणियों के कैदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा करने पर विचार करने को कहा है। असम स्थित एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट,...
वकीलों और क्लर्कों को बार काउंसिल से आर्थिक मदद दिलाने की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु और पुदुचेरी बार काउंसिल और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी कर वकीलों और पंजीकृत क्लर्कों के लिए वित्तीय मदद माँगने को लेकर नोटिस जारी किया है। एक याचिका दायर कर अदालत को बार काउंसिल को 50,००० रुपए और क्लर्कों को 25,००० रुपए देने का आदेश जारी करने का अनुरोध किया है। यह याचिका एडवोकेट डॉक्टर एएफ चेलय्या, चेन्नई ने दायर की और इस मामले की तत्काल सुनवाई की माँग की। न्यायमूर्ति विनीत कोठारी और न्यायमूर्ति आर सुरेश कुमार ने इस मामले की वीडीयो कंफ्रेंसिंग के माध्यम...
COVID-19 : तेलंगाना हाईकोर्ट ने कक्षा 10वीं राज्य बोर्ड परीक्षाएंं अनिश्चित काल के लिए स्थगित की
तेलंगाना हाईकोर्ट ने COVID-19 महामारी के खतरे की आशंका के मद्देनज़र राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राज्य में कक्षा 10 वीं राज्य बोर्ड परीक्षाओं को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया जाए। उक्त परीक्षा 31 मार्च से 6 अप्रैल के बीच आयोजित की जानी थी। हालांकि, कोरोना वायरस के कारण गंभीर स्वास्थ्य जोखिम और देशव्यापी लॉकडाउन के मद्देनजर, न्यायमूर्ति एमएस रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति के लक्ष्मण की खंडपीठ ने परीक्षा को स्थगित करने का आदेश दिया। , पीठ ने कहा, " कक्षा 10 राज्य बोर्ड...
COVID-19 : पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने PM CARES फंंड में दस-दस हज़ार रुपए का योगदान दिया
COVID-19 महामारी के फैलने की आशंका के मद्देनज़र चल रहे राहत और बचाव कार्य में पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने अपना योगदान देते हुए दस दस हज़ार रुपए का योगदान दिया है। पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने PM CARES में दस दस हज़ार रुपए का योगदान देने का फैसला लिया और इस संबंध में नोटिस के माध्यम से जानकारी दी। एक नोटिस के माध्यम से सूचित किया गया, जिसमें कहा गया है, "जब देश लॉकडाउन में हो तो मुश्किल के समय को ध्यान में रखते हुए, माननीय न्यायाधीशों ने किसी भी तरह की...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने COVID-19 की वजह से बाज़ार में गिरावट आने पर फ़्यूचर रीटेल की एफसीआरपीएल के गिरवी रखे शेयर बेचने से आईडीबीआई को रोका
बिज़नेस पर्सन किशोर बियानी की कंपनी को उस समय भारी राहत मिली जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने आईडीबीआई को उनकी कंपनी एफसीआरपीएल के उसके पास गिरवी रखे शेयरों को शेयर बाज़ार में आई गिरावट के बाद बेचने से रोक दिया। कोविड-19 महामारी के फैलने के बाद शेयर बाज़ार में लगातार गिरावट आ रही है। न्यायमूर्ति केके ताटेड ने रुरल फायनेंस होलसेल लिमिटेड (आरएफडब्ल्यूएल) और एफसीआरपीएल की वाणिज्यिक मामले की सुनवाई की जिसमें आईबीआईटीएसएल के पास 12 जनवरी 2018 और 10 अप्रैल 2019 गिरवी रखे अपने इन शेयरों की बिक्री के...
COVID 19 : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने और सभी अधीनस्थ न्यायालयों के अंतरिम आदेशों की मियाद 15 मई तक बढ़ाई
COVID-19 को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए छतत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 16 मार्च तक समाप्त होने वाले सभी अंतरिम आदेशों की समय सीमा को 15 मई 2020 तक बढ़ा दी है।यह समय सीमा में यह वृद्धि सभी स्थगनादेशों और ज़मानत के आदेशों पर लागू होगी।यह आदेश न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति मनींद्र मोहन श्रीवास्तव ने माहामारी के कारण मुक़दमादारों को जो कठिनाई झेलनी पड़ रही है उसको देखकर पारित किया है। पीठ ने कहा,, "संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के तहत अधिकारों का प्रयोग करते हुए यह निर्देश दिया जाता...
दिल्ली हिंसा : ईदगाह कैंप से हटाए गए दंगा प्रभावित परिवारों को भोजन और दवाइयां मुहैया कराएंगे : दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट में बताया
दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर उन दंगा प्रभावित परिवारों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला गया है जिन्हें COVID19 महामारी के कारण ईदगाह शिविर छोड़ना पड़ा है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में आश्वासन दिया है कि ऐसे परिवारों से संपर्क किया जाएगा और उन्हें सहायता प्रदान की जाएगी। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई सुनवाई के दौरान उक्त आश्वासन दिए गए हैं। दिल्ली के दंगा पीड़ितों के बारे में कई मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए,...
केरल हाईकोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान नागरिकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर स्वत: संज्ञान लिया, राज्य और केंद्र को नोटिस जारी
"COVID 19 महामारी से हम सभी प्रभावित हुए हैं, लेकिन इस दौरान हमारे कानून चुप नहीं रह सकते। उन्हें हमारे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए काम करना जारी रखना चाहिए। यह हमारे न्यायशास्त्र में अच्छी तरह से स्थापित है कि हमारे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार, आपातकाल के दौरान भी निलंबित नहीं किया जा सकता है। इस न्यायालय को नागरिकों पर संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के आरोप के रूप में आए संकट के लिए सतर्क होना चाहिए।"


















