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'आई लव केजरीवाल'के कारण ऑटो-रिक्शा के चालान का मामला, दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को जारी किया नोटिस
ऑटो-रिक्शा के पीछे 'आई लव केजरीवाल' लिखे जाने पर हुए चालान के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नवीन चावला की एकल पीठ ने सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता का मानना है कि यह चालान संंविधान केअनुच्छेद 14 और 21 के तहत न केवल उनके मौलिक अधिकार का हनन करता है, बल्कि यह उसके बोलने की आज़ादी में ग़ैरक़ानूनी दख़ल देता है। इस मामले में याचिकाकर्ता एक ऑटो-रिक्शा ड्राइवर है जिसने अपने ऑटो के पीछे 'आई लव केजरीवाल'(मैं केजरीवाल को पसंद करता हूं) सितम्बर 2019 से अपने मन से...
बोर्डिंग पास जारी करने के बाद यात्री को बोर्डिंग गेट तक एस्कॉर्ट करने के लिए एयरलाइंस बाध्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चेक-इन काउंटर पर बोर्डिंग पास जारी करने के बाद बोर्डिंग गेट तक पहुंचने के लिए हर यात्री को एस्कॉर्ट (अनुरक्षण) करने का दायित्व एयरलाइंस पर नहीं है। इंडिगो एयरलाइंस ने उपभोक्ता आयोग के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। आयोग ने एयरलाइंस को दो यात्रियों को मुआवजा देने का निर्देश दिया था, जिनकी अगरतला जाने वाली फ्लाइट छूट गई थी। राज्य उपभोक्ता आयोग, जिसके निर्णय को राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने बरकरार रखा था, उसने कहा था कि यह एयरलाइंस का दायित्व...
सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश की मांग वाली याचिका पर पत्रकार ज़िया उस सलाम ने हस्तक्षेप आवेदन दिया
वरिष्ठ पत्रकार जिया उस सलाम ने मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश करने और नमाज अदा करने की इजाजत देने की मांग करने वाली याचिकाओं पर हस्तक्षेप आवेदन दाखिल किया है। महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश करने की अनुमति देने की मांग वाली याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी देकर जिया अस सलाम ने बताया कि भारत में महिलाओं के लिए मस्जिदों में प्रवेश करने के लिए कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है, लेकिन वहां एक मौन प्रतिबंध है, क्योंकि वहां महिलाओं के लिए कोई अलग प्रवेश नहीं है, उनके लिए...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने बांग्लादेश की 'अवैध प्रवासी' महिला को सीएए को ध्यान रखते हुए जमानत दी
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को एक 'अवैध प्रवासी' बांग्लादेशी ईसाई महिला को नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के प्रावधानों के मद्देनजर जमानत दे दी। अर्चोना पूर्णिमा प्रमाणिक बांग्लादेशी नागरिक हैं और ईसाई हैं। उन पर आरोप था कि उन्होंने अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था और बाद में पैन कार्ड, आधार कार्ड जैसे भारतीय दस्तावेज प्राप्त कर लिए और इन दस्तावेजों के बल पर उन्होंने धोखाधड़ी से भारतीय पासपोर्ट प्राप्त किया। वह नवंबर 2019 से गिरफ्तार थीं और हिरासत में थीं। उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 465,...
बीएमसी के वकील ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर किया गलत हलफनामा, हाईकोर्ट ने तत्काल नए वकीलों को भर्ती करने की सिफारिश की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका के पैनल के एक वकील द्वारा गलत तथ्य पेश किए जाने और गलत हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को गुमराह किए जाने के बाद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए महानगरपालिका से कहा कि वह नगर निगम के जूनियर पैनल 'ए' में सूचीबद्ध होने के इच्छुक वकीलों से आवेदन तुरंत आमंत्रित करे। जस्टिस एसजे कथावाला और जस्टिस बीपी कोलाबावाला की खंडपीठ ने स्पार्क डेवलपर्स द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम ने 2 नवंबर, 2017 के हाईकोर्ट के...
क्रिमिनल ट्रायल : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कानून अभियुक्त को वैकल्पिक दलील अपनाने से नहीं रोकता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कानून अभियुक्त को वैकल्पिक दलीलों को अपनाने से नहीं रोकता। कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी यह कहते हुए की है कि एक हत्या का अभियुक्त यह दलील दे सकता है कि वह उस करतूत में शामिल नहीं था, जिसके कारण मृतका की मौत हुई, लेकिन इससे वह उस तथ्य को स्थापित करने के अपने अधिकार से वंचित नहीं हो जाता कि उसके खिलाफ मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 300 के तहत वर्णित किसी अपवाद के दायरे में रखा जाये। इस मामले के अभियुक्त और उसकी मां के खिलाफ अभियुक्त की पत्नी की हत्या का मामला चला था।...
कर्मचारी को मरने के बाद बकाया राशि के भुगतान में देरी के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य को लगाई फटकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक कर्मचारी को उसकी मौत के बाद भविष्य निधि, ग्रैच्यूटी और बकाया वेतन आदि के भुगतान में 24 साल से अधिक की देरी के लिए राज्य अथॉरिटीज को फटकार लगाई। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा, "किसी मृत व्यक्ति को उसका बकाए का 24 साल से अधिक समय से बिना किसी कारण के भुगतान नहीं करना किसी भी सूरत में मनमाना है। यह प्रतिवादियों की हठधर्मिता और ग़ैरक़ानूनी है। किसी की मौत के बाद भी उसके बकाए को सालों तक रोके रखना न केवल ग़ैरक़ानूनी और मनमाना है बल्कि पाप भी है। अगर किसी क़ानून...
जस्टिस अनंत बिजय सिंह ने झारखंड हाईकोर्ट से इस्तीफा दिया, NCLAT के ज्यूडिशियल मेंबर बने
न्यायमूर्ति अनंत बिजय सिंह ने न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय के कार्यालय से अपना इस्तीफा सौंप दिया। केंद्र सरकार द्वारा 24 जनवरी को एक अधिसूचना जारी की गई थी। उनके इस्तीफे के बाद, 20 जनवरी को एनसीएलएटी द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, जस्टिस अनंत सिंह को अब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। शपथ ग्रहण समारोह 21 जनवरी को एनसीएलएटी अध्यक्ष के न्यायालय में आयोजित किया गया था। न्यायमूर्ति अनंत बिजय सिंह को अप्रैल 2016 को झारखंड उच्च न्यायालय के...
एक केस जिसे भुला दिया गया : बिना किसी रिकॉर्ड के लंबित 23 साल पुराने केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया
पिछले हफ्ते, दिल्ली हाईकोर्ट ने एक आपराधिक मामले में नोटिस जारी किया जो 23 वर्षों से निष्क्रिय पड़ा हुआ था। 23 साल से इस केस में कोई प्रगति नहीं हुई और फिर अचानक यह केस सामने आया। एक व्यक्ति जो अग्रिम जमानत पर बाहर है, अचानक उसके खिलाफ एक मामला याद आया जो कुछ दशक पहले उसके खिलाफ शुरू हुआ था। यह मामला तब सामने आया जब इस व्यक्ति के पासपोर्ट आवेदन पर उसके खिलाफ आपराधिक मामलों की जांच की गई। आपराधिक कार्यवाही लंबित होने के कारण इस व्यक्ति का पासपोर्ट आवेदन खारिज हो गया, तब उसे पता चला कि...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अदालतों से कहा, लोअर कोर्ट या सबऑर्डिनेट कोर्ट जैसे शब्दों का प्रयोग न करें
कर्नाटक के हाईकोर्ट ने सभी ज़िला और सत्र न्यायालयों को अपनी अपीलीय शक्तियों का प्रयोग करते हुए लोअर कोर्ट या सबऑर्डिनेट कोर्ट (निचली अदालत" या अधीनस्थ न्यायालय) शब्दों का उपयोग नहीं करने के लिए कहा है। कर्नाटक के सभी न्यायालयों को संबोधित एक पत्र में, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने अपील की है, जिसमें उनकी रजिस्ट्रियां भी शामिल हैं, कि लोअर कोर्ट या सबऑर्डिनेट कोर्ट शब्दों के बजाय "ट्रायल कोर्ट" या "डिस्ट्रिक्ट कोर्ट" शब्दों का उपयोग न्यायिक पक्ष में है। इसमें कहा गया है कि शब्द लोअर...
शिवसेना पार्षद हत्याकांड : सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया, माफिया डॉन अरुण गवली की उम्रकैद की सजा के खिलाफ याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने माफिया डॉन अरुण गवली की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस आर बानुमति की पीठ ने सोमवार को गवली की उस याचिका पर नोटिस जारी किया जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के गवली को उम्रकैद बरकरार रखने के आदेश को चुनौती दी गई। गौरतलब है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने 9 दिसंबर को माफिया डॉन अरुण गवली को दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति बी पी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति स्वप्ना जोशी की पीठ ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप, पिछ्ले सप्ताह SC के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप, पिछ्ले सप्ताह SC के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र सुप्रीम कोर्ट में 20 जनवरी 2020 से 24 जनवरी 2020 का सप्ताह कैसा रहा। यह जानने के लिए पेश हैं पिछले सप्ताह के सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर?/जजमेंट पर एक नज़र। सीएए को SC में चुनौती : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया सुप्रीम कोर्ट ने विवादित नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (सीएए) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली लगभग 140 रिट याचिकाओं का जवाब देने के लिए बुधवार को...
पॉक्सो नियमों के तहत ट्रायल कोर्ट केवल मुआवजे की सिफारिश कर सकती है, राशि का निर्धारण नहीं कर सकती : कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने माना कि ट्रायल कोर्ट / विशेष अदालत को जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण / राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को POCSO नियमों, या पीड़ित मुआवजा योजना के अनुसार मुआवजे का फैसला करे और अवॉर्ड करने की सिफारिश करे, लेकिन उसे मुआवज़े की राशि का निर्धारण नहीं करना चाहिए, जो कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के प्रावधानों के खिलाफ है। न्यायमूर्ति के नटराजन ने उस पुनर्विचार याचिका को स्वीकार कर लिया है, जो कर्नाटक राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण, (केएसएलएसए) ने ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित आदेश के...
कॉरपोरेट दिवाला प्रस्ताव की मंजूरी एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत दायर मुकदमा समाप्त करने का आधार नहीं : मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में व्यवस्था दी है कि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (आईबीसी) की धारा 31 के तहत किसी कंपनी को दिवालिया घोषित करने की प्रकिया की मंजूरी ऋणी कंपनी और उसके अधिकारियों के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रमेंट (एनआई) एक्ट, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत शुरू किये गये मुकदमे को समाप्त करने का आधार नहीं हो सकती।न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन की एकल पीठ ने कहा, "दिवाला प्रक्रिया का निर्णय करने वाले अधिकारी/अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा भले ही कंपनी को दिवालिया घोषित करने की...
JNU छात्र संघ की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया
न्यायालय ने शुक्रवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) द्वारा नए छात्रावास मैनुअल को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को 2 सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया।विश्वविद्यालय प्रशासन के अलावा, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भी नोटिस जारी किए गए हैं। न्यायमूर्ति राजीव शकधर की एकल पीठ ने 10% छात्रों को, जिन्होंने अब तक पंजीकरण नहीं कराया है, उन्हें दरों में संशोधन से पहले प्रचलित शुल्क पर एक...
कस्टोडियल टॉर्चर: मद्रास हाईकोर्ट की पुष्टि, पीड़ित को एक लाख का मुआवजा देने सेशन कोर्ट का फैसला बरकरार
मद्रास हाईकोर्ट की एकल पीठ के जज जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने सेशन जज के एक फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें उन्होंने हिरासत में यातना, शारीरिक चोट और अपमान पीड़ित एक व्यक्ति को एक लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया था। पीड़ित ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष याचिका दायर की, जिसमें कस्टोडियल टॉर्चर के आरोप लगाए गए थे। हालांकि मामले में राज्य की आरे से एक प्रतिवाद दायर किया गया था कि पीड़ित की मां ने मानवाधिकार अधिनियम के तहत पहले ही अदालतों का दरवाजा खटखटा चुकी है। चूंकि प्रधान...
मध्यस्थता के तर्कहीन फ़ैसले मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 34 के तहत लोक नीति के विपरीत : कलकत्ता हाईकोर्ट
“तर्क तथ्यों और निष्कर्षों के बीच संपर्क सूत्र है और वह आलोच्य मुद्दे के पीछे किस तरह का विचार काम कर रहा था, उसका परिचय देता है और यह नैरेटिव से निर्देश तक की यात्रा का पता देता है। तर्क किसी भी स्वीकार्य फ़ैसले की प्रक्रिया का जीवन-रक्त है और यह कि कोई फ़ैसले या आदेश तार्किक है कि नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है जिन शब्दों का प्रयोग किया गया है उनकी मात्रा नहीं बल्कि गुणवत्ता क्या है।”
कारावास और जुर्माने की मिश्रित सजा के खिलाफ दायर अपील अभियुक्त की मौत होने पर भी समाप्त नहीं होती
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि अभियुक्त-अपीलार्थी कारावास और जुर्माने की मिश्रित सज़ा के खिलाफ दायर आपराधिक अपील के लंबित रहने के दौरान मर जाता है तो भी अपील समाप्त नहीं होती। इस मामले में आरोपी को आबकारी अधिनियम की धारा 55 (ए), (जी) के तहत दोषी ठहराया गया था। दो साल के कारावास की सज़ा के साथ उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। अपील के लंबित रहने के दौरान हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता की मृत्यु के तथ्य पर गौर किया। हालांकि, सीआरपीसी की धारा 394 के तहत सिद्धांत का हवाला देते हुए योग्यता के आधार...
छह न्यायिक अधिकारियों और एक अधिवक्ता को राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश
22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छह न्यायिक अधिकारियों और एक अधिवक्ता को राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की है। वो हैं: देवेंद्र कछवाहा सतीश कुमार शर्मा प्रभा शर्मा मनोज कुमार व्यास रामेश्वर व्यास श्री चंद्र कुमार सोंगरा मनीष सिसोदिया, एडवोकेट


















