ताज़ा खबरें
सुप्रीम कोर्ट ने भारत-पाक एशिया कप मैच रद्द करने से किया इनकार, कहा- मैच जारी रहने दें
सुप्रीम कोर्ट ने एशिया कप टी20 टूर्नामेंट के तहत 14 सितंबर को होने वाले भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को रद्द करने की मांग वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया।यह मामला जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत किया गया।जस्टिस माहेश्वरी ने उस वकील की बात सुनते हुए टिप्पणी की,"इसमें इतनी जल्दी क्या है? यह एक मैच है, इसे जारी रहने दें।"वकील ने मामले को कल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था।वकील ने जब बताया कि मैच रविवार (14 सितंबर) को है। अगर मामला गुरुवार को...
पुलिस को FIR दर्ज करने के लिए सूचना की सत्यता की जांच करने की आवश्यकता नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि पुलिस को FIR दर्ज करते समय शिकायत की सत्यता या विश्वसनीयता की जांच करने की आवश्यकता नहीं है; यदि शिकायत में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का पता चलता है तो पुलिस FIR दर्ज करने के लिए बाध्य है।अदालत ने कहा,"यदि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है तो FIR दर्ज करना पुलिस का कर्तव्य है, पुलिस को उक्त सूचना की सत्यता और विश्वसनीयता की जांच करने की आवश्यकता नहीं है।"अदालत ने कहा कि रमेश कुमारी बनाम राज्य (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली) (2006) 2 एससीसी 677 में यह निर्धारित...
सुप्रीम कोर्ट ने 2021 बंगाल चुनाव बाद हिंसा मामले में दुष्कर्म पीड़िता की गवाही में देरी पर ट्रायल कोर्ट से सवाल किए
सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को टिप्पणी की कि पश्चिम बंगाल की एक ट्रायल कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता की गवाही को अधूरा (टुकड़ों में) दर्ज करके अप्रत्यक्ष रूप से आरोपी को सबूतों से छेड़छाड़ करने का अवसर दिया है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट और लोक अभियोजक से यह स्पष्टीकरण मांगा कि जब आरोपी को एक साल पहले ही जमानत मिल चुकी थी, तो अब तक पीड़िता की गवाही पूरी क्यों नहीं हुई।यह मामला 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़ा है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने आदेश...
NI Act | 'चेक अनादर की शिकायत दर्ज करने के लिए 30 दिन की समय-सीमा अनिवार्य': सुप्रीम कोर्ट ने शिकायत खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (NI Act) की धारा 142(बी) के तहत शिकायत दर्ज करने के लिए निर्धारित 30 दिन की समय-सीमा अनिवार्य है, जब तक कि विलंब की क्षमा के लिए कोई औपचारिक आवेदन न हो और उसे अनुमति देने वाला न्यायिक आदेश न हो।अदालत ने कहा,"एक बार जब क़ानून शिकायत दर्ज करने के लिए अनिवार्य समय-सीमा निर्धारित कर देता है तो उसमें कोई विचलन नहीं हो सकता, सिवाय इसके कि शिकायत के साथ विलंब के कारणों का खुलासा करते हुए क्षमा की मांग करने वाला आवेदन दायर किया गया हो और तब भी...
'पड़ोस का झगड़ा आत्महत्या के लिए उकसाने के बराबर नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने महिला को बरी किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने पड़ोसी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में महिला को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पड़ोस में झगड़े सामुदायिक जीवन में आम हैं और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में उकसावे की भावना इतनी बढ़ जानी चाहिए कि पीड़ित के पास आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प न बचे।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने कहा,"हम यह मानने को तैयार नहीं हैं कि जब अपीलकर्ता के परिवार और पीड़ित के परिवार के बीच तीखी बहस हुई तो दोनों में से किसी भी परिवार के किसी सदस्य को...
भारत-पाकिस्तान एशिया कप मैच रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका, कहा- 'क्रिकेट राष्ट्रीय हित से ऊपर नहीं'
एशिया कप टी20 टूर्नामेंट के तहत 14 सितंबर को होने वाले भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई।चार याचिकाकर्ता वर्तमान में वकालत कर रहे हैं। उनका तर्क है कि पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेलना राष्ट्रीय हित के विरुद्ध है और यह सशस्त्र बलों के साथ-साथ हमले में जान गंवाने वाले नागरिकों के बलिदान को कमतर आंकता है।याचिका में कहा गया,"पाकिस्तान के साथ खेलने से यह उल्टा संदेश जाता है कि जहां...
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CBI अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश बरकरार रखा, कहा- कभी-कभी जांच करने वालों की भी जांच की जाए
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट का वह निर्देश बरकरार रखा, जिसमें दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त नीरज कुमार और इंस्पेक्टर विनोद कुमार पांडे के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। यह निर्देश वर्ष 2000 में CBI में प्रतिनियुक्ति के दौरान धमकाने, अभिलेखों में हेराफेरी और जालसाजी के आरोपों के बाद दिया गया था।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ 2001 में दो व्यक्तियों द्वारा दायर रिट याचिकाओं में हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ अधिकारियों की अपीलों पर विचार कर रही थी, जिसमें...
आप कैसे कह सकते हैं कि राज्य झूठा बोल रहे हैं, जबकि विधेयक राज्यपाल के पास वर्षों से लंबित हैं? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा
राष्ट्रपति संदर्भ मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से सवाल किया कि केंद्र कैसे कह सकता है कि राज्य "झूठा अलार्म" बजा रहे हैं, जबकि विधेयक राज्यपालों के पास 3-4 वर्षों से लंबित हैं। यह केंद्र द्वारा दी गई इस दलील के जवाब में था कि पिछले 55 वर्षों में, "17000" में से केवल 20 विधेयकों पर ही सहमति रोकी गई है और 90% मामलों में विधेयकों पर एक महीने के भीतर ही सहमति दे दी गई।इस संदर्भ में केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा:"राज्यपाल की भूमिका संविधान के संरक्षक, भारत...
नियम न हों तो आरक्षित उम्मीदवार छूट लेकर भी सामान्य वर्ग में चयनित हो सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितंबर) को फैसला सुनाते हुए कहा कि जब तक भर्ती नियमों में स्पष्ट रूप से मना न किया गया हो, आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार जिसने शारीरिक मानकों में छूट ली हो, अगर मेरिट में चयनित होता है तो उसे सामान्य श्रेणी (अनारक्षित) की पोस्ट पर भी नियुक्त किया जा सकता है।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एक सामान्य वर्ग के उम्मीदवार की याचिका खारिज कर दी, जिसने CISF असिस्टेंट कमांडेंट (एक्जीक्यूटिव) भर्ती में एक अंक से चयन चूक जाने के बाद, आरक्षित वर्ग के...
सुप्रीम कोर्ट : टेंडर नोटिस में मांगे ही नहीं गए दस्तावेज़ की गैर-प्रस्तुति पर बोली खारिज नहीं की जा सकती
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितंबर) को कहा कि नोटिस इन्वाइटिंग टेंडर (NIT) के तहत मांगे ही नहीं गए किसी दस्तावेज़ की गैर-प्रस्तुति के आधार पर किसी बोली को खारिज करना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि टेंडर प्राधिकरण उन शर्तों को लागू नहीं कर सकते, जो टेंडर दस्तावेज़ में स्पष्ट रूप से लिखी ही नहीं गई हों।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बोलीदाता की अयोग्यता केवल इसलिए बरकरार रखी गई थी कि उसने जॉइंट वेंचर...
दिल्ली दंगों की साज़िश मामले में जमानत से इनकार के खिलाफ उमर खालिद पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
जेएनयू के पूर्व शोधार्थी और सोशल एक्टिविस्ट उमर खालिद ने दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश से जुड़े मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। खालिद पिछले पांच वर्षों से UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत दर्ज इस केस में न्यायिक हिरासत में हैं।खालिद ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2 सितंबर को दिए गए उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की खंडपीठ ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था।हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इसी आदेश में अन्य आरोपियों शरजील इमाम, अथर...
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम ज़मानत आवेदनों पर सीधे विचार करने को अस्वीकार किया, जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने सेशन कोर्ट की अवहेलना करते हुए हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम ज़मानत आवेदनों पर सीधे विचार करने की प्रथा पर असहमति व्यक्त की।न्यायालय ने इस प्रथा की उपयुक्तता पर विचार करने का निर्णय लिया और केरल हाईकोर्ट को नोटिस जारी किया। केरल हाईकोर्ट ने चुनौती दिए गए आदेश को पारित किया था। न्यायालय ने एडवोकेट जी. अरुधरा राव की सहायता से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा को इस मामले में एमिक्स क्यूरी नियुक्त किया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने स्वीकार किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा...
सुप्रीम कोर्ट ने अपील में मेडिकल लापरवाही का नया मामला गढ़ने के लिए NCDRC की आलोचना की, डॉक्टर के हक में दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितंबर) को एक शिकायतकर्ता को प्राप्त ₹10 लाख का मुआवज़ा वापस करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि NCDRC ने डॉक्टरों के खिलाफ 'प्रसवपूर्व लापरवाही' का मामला गढ़कर गलत मुआवज़ा दिया, जबकि मूल शिकायत 'प्रसवोत्तर लापरवाही' तक ही सीमित थी।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस एससी शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए दोहराया कि ऐसा नया मामला गढ़ना अस्वीकार्य होगा, जिसका ज़िक्र याचिका/शिकायत में कभी नहीं किया गया। चूंकि, NCDRC ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर डॉक्टर को कथित...
सुप्रीम कोर्ट ने टाइगर रिज़र्व सफ़ारी पर समिति गठित की | मौजूदा टाइगर सफ़ारी को जारी रखने की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) को गोवा के महादेई वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के क्षेत्रों को बाघ अभयारण्य के रूप में अधिसूचित करने के मुद्दे की जांच करने और छह सप्ताह के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने गोवा राज्य को उन क्षेत्रों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का भी आदेश दिया, जिन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट ने बाघ अभयारण्य के रूप में अधिसूचित करने का निर्देश...
PC-PNDT मामलों में बरी किए गए लोगों को चुनौती न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की आलोचना की
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि राज्य गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) अधिनियम के मामलों में अपराधियों को बरी किए जाने के खिलाफ अपील क्यों नहीं दायर कर रहे हैं।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) नियम, 1966 के नियम 18ए(5)(vi) का कड़ाई से पालन करने का निर्देश देने की मांग की गई। यह नियम बरी किए जाने के आदेश के मामले में हाईकोर्ट में अपील, पुनर्विचार या अन्य कार्यवाही के लिए...
राष्ट्रपति संदर्भ: कर्नाटक, केरल और पंजाब ने सुप्रीम कोर्ट में कहा– राज्यपाल को बिल अनिश्चितकाल तक रोकने का अधिकार नहीं
कर्नाटक, केरल और पंजाब राज्यों ने आज राष्ट्रपति को संदर्भित मामले में अपनी दलीलें पूरी कीं, जो बिलों पर सहमति (assent) देने की समयसीमा से जुड़ा है। राज्यों ने कहा कि अनुच्छेद 200 के तहत संवैधानिक ढांचे में राज्यपाल को कोई विवेकाधिकार (discretion) नहीं दिया गया है।सीनियर एडवोकेट के.के. वेणुगोपाल (केरल की ओर से) ने जोर देकर कहा कि राज्यपाल को इस तरह विवेकाधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह मनी बिल तक को रोक दें। वहीं, कर्नाटक की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि राष्ट्रपति और...
आयु-छूट लेने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार सामान्य श्रेणी सीटों पर नहीं जा सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितम्बर) को कहा कि आरक्षित वर्ग के वे उम्मीदवार, जो आरक्षण श्रेणी में आयु-छूट लेकर आवेदन करते हैं, उन्हें बाद में अनारक्षित (सामान्य) श्रेणी की रिक्तियों में चयन के लिए नहीं माना जा सकता, यदि भर्ती नियम ऐसे स्थानांतरण (migration) को स्पष्ट रूप से रोकते हैं।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह मामला सुना, जो स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की कॉन्स्टेबल (GD) भर्ती से जुड़ा था। इसमें आयु सीमा 18–23 वर्ष तय थी और ओबीसी उम्मीदवारों को 3 साल की छूट दी गई...
झूठे विवाह वादे पर बने संबंधों के मामलों में आरोपी की नीयत देखना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह स्पष्ट किया है कि शादी का वादा करने के बाद आपसी सहमति से बने यौन संबंध, और शुरुआत से ही बुरी नीयत से झूठा वादा करके बनाए गए यौन संबंध — दोनों में फर्क है।कोर्ट ने कहा, "बलात्कार और सहमति से बने यौन संबंधों में स्पष्ट अंतर है। जब मामला शादी के वादे का हो, तो अदालत को यह बहुत सावधानी से देखना होगा कि आरोपी सच में पीड़िता से शादी करना चाहता था या फिर उसकी नीयत शुरू से ही गलत थी और उसने केवल अपनी वासना की पूर्ति के लिए झूठा वादा किया था। बाद वाली स्थिति धोखाधड़ी या छल...
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के प्रावधानों पर पुनर्विचार करने को कहा
नौकरशाहों को भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजा तय करने की अनुमति देने वाले प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के कुछ प्रावधानों पर "पुनर्विचार" करने को कहा।अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि 1956 का अधिनियम मुआवजे का निर्णय कार्यपालिका पर छोड़ देता है, जबकि भूमि अधिग्रहण अधिनियम जैसे अन्य कानूनों के तहत अधिग्रहण के लिए न्यायिक निगरानी की आवश्यकता होती है। निष्पक्षता के महत्व पर ज़ोर देते हुए यह सुझाव दिया गया कि NHAI अधिग्रहण के मामले में मुआवजे का...
सुप्रीम कोर्ट के जजों ने बाढ़ राहत कोष में 25,000 रुपये प्रत्येक देने का निर्णय लिया
देश के कई हिस्सों में आई बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में 25,000 रुपये प्रत्येक देने का निर्णय लिया है।चीफ़ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के जजों ने प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और जल्द राहत, पुनर्वास और सामान्य स्थिति बहाल होने की आशा जताई। हाल ही में हुई भारी बारिश के बाद हिमाचल प्रदेश और पंजाब के कई हिस्से बाढ़ संकट से जूझ रहे हैं।



















