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सुप्रीम कोर्ट का मेधा पाटकर से सवाल: वीके सक्सेना के खिलाफ 25 साल पुराने मानहानि मामले को क्यों घसीट रही हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मेधा पाटकर की उस याचिका पर विचार करने से इनकार किया, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी, जिसमें उन्हें दिल्ली के उपराज्यपाल (Delhi LG) वीके सक्सेना के खिलाफ 2000 में दायर आपराधिक मानहानि के मामले में अतिरिक्त गवाह से पूछताछ करने की अनुमति नहीं दी गई। बता दें, उस समय वीके सक्सेना , एनजीओ नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज के प्रमुख थे।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने पाटकर को हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने की अनिच्छा...
5 साल से ज़्यादा समय से जेल में बंद UAPA आरोपी की ज़मानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार व्यक्ति की ज़मानत याचिका पर नोटिस जारी किया। यह व्यक्ति पिछले 5 साल से ज़्यादा समय से हिरासत में है।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के वकील की दलील सुनने के बाद यह आदेश पारित किया, जिन्होंने तर्क दिया कि भारत संघ बनाम केए नजीब मामले में दिया गया फ़ैसला इस मामले पर लागू होगा।जस्टिस कांत ने टिप्पणी की,"मैं हाईकोर्ट के फ़ैसले को समझ नहीं पाया।"संक्षेप में मामलावर्तमान मामला वामपंथी...
सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पत्रकार महेश लांगा की ज़मानत याचिका पर नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार महेश लांगा की ज़मानत याचिका पर नोटिस जारी किया, जो दो FIR (जिनमें धोखाधड़ी का अपराध भी शामिल है) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दर्ज है।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल (लांगा की ओर से) की दलील सुनने के बाद यह आदेश पारित किया, जिन्होंने तर्क दिया कि ये मामले झूठे आरोपों पर दर्ज किए गए।सिब्बल ने आग्रह किया,"एक FIR अग्रिम ज़मानत। दूसरी FIR अग्रिम ज़मानत। तीसरी FIR वे कहते हैं कि आयकर चोरी है।” आरोपों के आधार...
सुप्रीम कोर्ट ने AMU कुलपति के रूप में प्रोफ़ेसर नईमा खातून की नियुक्ति बरकरार रखी
सुप्रीम कोर्ट ने आज (8 सितंबर) अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की पहली महिला कुलपति के रूप में प्रोफ़ेसर नईमा खातून की नियुक्ति में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ प्रोफ़ेसर मुज़फ़्फ़र उरुज रब्बानी और प्रोफ़ेसर फैज़ान मुस्तफ़ा द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें प्रोफ़ेसर खातून की नियुक्ति को बरकरार रखा गया।इससे पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन...
BREAKING| सुप्रीम कोर्ट का ECI को निर्देश: आधार कार्ड को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार करें
बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (8 सितंबर) को भारत के चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया कि वह आधार कार्ड को "12वें दस्तावेज़" के रूप में माने, जिसे बिहार की संशोधित मतदाता सूची में शामिल होने के लिए पहचान के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।इसका अर्थ है कि आधार कार्ड को मतदाता सूची में शामिल होने के लिए स्वतंत्र दस्तावेज़ के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है, जैसे कि चुनाव आयोग द्वारा मूल रूप से स्वीकार्य अन्य ग्यारह दस्तावेज़ों में से किसी एक को...
Breaking | ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025 पर दायर याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर
सुप्रीम कोर्ट ने आज (8 सितंबर) केंद्र सरकार की ट्रांसफर याचिकाओं को मंज़ूरी देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट,कर्नाटक हाईकोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित उन सभी याचिकाओं को अपने पास ट्रांसफर कर लिया, जिनमें ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन और रेगुलेशन एक्ट, 2025 (Online Gaming Act) को चुनौती दी गई।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने आदेश दिया,“याचिकाएं ट्रांसफर करने की प्रार्थना स्वीकार की जाती है। संबंधित हाईकोर्ट्स सभी रिकॉर्ड और इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन्स एक हफ्ते के भीतर डिजिटल...
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश : 4.7 साल अतिरिक्त जेल में रखे गए दोषी को 25 लाख रुपये मुआवज़ा दे राज्य सरकार
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश राज्य को एक दोषी को 25 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का निर्देश दिया। बता दें, इस आरोपी को बलात्कार के मामले में सात साल की पूरी सज़ा काटने के बाद 4.7 साल से ज़्यादा जेल में रहना पड़ा।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने मध्य प्रदेश राज्य की लापरवाही के लिए कड़ी फटकार लगाते हुए यह आदेश पारित किया, जिसके कारण दोषी को ज़्यादा समय तक जेल में रहना पड़ा। शुरुआत में जब मध्य प्रदेश राज्य को नोटिस जारी किया गया तो अदालत ने कहा था कि दोषी ने 8 साल...
सुप्रीम कोर्ट ने बकाया किराया जमा करने के वचन से मुकरने वाले किरायेदार को फटकार लगाई; पंजाब बाढ़ राहत कोष में भुगतान करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में किरायेदार के आचरण की निंदा की, जिसने बकाया किराया जमा करने के लिए अदालत को दिए गए अपने वचन से यह दावा करके मुकरने की कोशिश की कि उसके वकील ने उसके निर्देश के बिना यह बयान दिया था।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने किरायेदार पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया। यह जुर्माना पंजाब के मुख्यमंत्री के आपदा राहत कोष में जमा करना होगा।खंडपीठ सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 15 नियम 5 के अनुसार स्वीकृत किराया बकाया जमा न करने के लिए बेदखली के मुकदमे में...
जस्टिस विनोद चंद्रन ने वेदांता ग्रुप के खिलाफ सुनवाई से खुद को अलग किया
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने सोमवार को उस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें अमेरिका स्थित शॉर्ट-सेलर वायसराय रिसर्च एलएलसी द्वारा वेदांता समूह की कंपनियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच की मांग की गई।शक्ति भाटिया द्वारा दायर जनहित याचिका को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। अब यह याचिका किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की जाएगी।याचिकाकर्ता ने सार्वजनिक रूप से...
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ दायर मानहानि का मामला खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (8 सितंबर) को भारतीय जनता पार्टी (BJP, तेलंगाना) द्वारा राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला बहाल करने की मांग वाली याचिका खारिज की।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें BJP के राज्य महासचिव करम वेंकटेश्वर लाल द्वारा रेड्डी के इस बयान पर दायर की गई शिकायत खारिज कर दी गई कि BJP लोकसभा चुनाव में 400 सीटें...
ज़मानत खारिज किए जाने के फैसले को गुलफ़िशा फ़ातिमा ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
स्टूडेंट एक्टिविस्ट गुलफ़िशा फ़ातिमा ने दिल्ली दंगों की व्यापक साज़िश के मामले में ज़मानत खारिज करने के दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित करने में अग्रणी रहीं फ़ातिमा को 9 अप्रैल, 2020 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आरोपों के चलते हिरासत में हैं। दिल्ली पुलिस के आरोपपत्र में उन पर कई अन्य व्यक्तियों के साथ फरवरी, 2020 के अंतिम सप्ताह...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (01 सितंबर, 2025 से 05 सितंबर, 2025 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।S. 68 Evidence Act | कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच विवाद न होने पर भी वसीयत साबित करने के लिए सत्यापनकर्ता गवाह से पूछताछ अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 68 के तहत वसीयत के कम से कम सत्यापनकर्ता गवाह से पूछताछ अनिवार्य है। इस आवश्यकता को केवल...
दिल्ली दंगों की साजिश मामले में ज़मानत खारिज होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे शरजील इमाम
शरजील इमाम ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी एक बड़ी साजिश का आरोप लगाते हुए UAPA मामले में ज़मानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।इमाम ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2 सितंबर के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शलिंदर कौर की खंडपीठ ने उन्हें ज़मानत देने से इनकार कर दिया था।यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं है। इमाम को 28 जनवरी, 2020 को गिरफ्तार किया गया था।इस आदेश के तहत दिल्ली हाईकोर्ट ने सह-आरोपी उमर खालिद, अतहर खान, खालिद सैफी, मोहम्मद...
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने लॉ ग्रेजुएट से 'संविधान के संरक्षक' बनने का आग्रह किया
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली के 12वें दीक्षांत समारोह में "न्यायालय के अधिकारी और संविधान के संरक्षक" विषय पर बोलते हुए जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने ग्रेजुएट स्टूडेंट्स से अपने पेशेवर जीवन में संवैधानिक मूल्यों और सत्यनिष्ठा को बनाए रखने का आह्वान किया।उन्होंने कहा,"अपनी उपाधि प्राप्त करते समय आपको केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मिल रही है - आप सामूहिक ज़िम्मेदारी ले रहे हैं। आपको यह जानना चाहिए कि आपका जुड़ाव अब केवल हमारे संस्थान के मूल्यों से ही नहीं, बल्कि कानूनी पेशे में सहयोगी के रूप में...
चीफ जस्टिस बीआर गवई ने नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णयों की सराहना की
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई ने हाल ही में इस बात पर प्रकाश डाला कि न्यायशास्त्र सीमाओं से परे कैसे कार्य करता है। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के उन ऐतिहासिक निर्णयों की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने कानून की विभिन्न शाखाओं में न्याय को आगे बढ़ाया है।नेपाल-भारत न्यायिक संवाद 2025 में बोलते हुए चीफ जस्टिस ने बताया कि नेपाल की न्यायपालिका ने समाज के विभिन्न वर्गों के अधिकारों की रक्षा में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है।उन्होंने कहा:“इसलिए मैं लैंगिक न्याय, निजता, पर्यावरण और स्वदेशी लोगों के...
S. 68 Evidence Act | कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच विवाद न होने पर भी वसीयत साबित करने के लिए सत्यापनकर्ता गवाह से पूछताछ अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 68 के तहत वसीयत के कम से कम सत्यापनकर्ता गवाह से पूछताछ अनिवार्य है। इस आवश्यकता को केवल इसलिए नहीं टाला जा सकता, क्योंकि विवाद में कानूनी उत्तराधिकारियों का कोई विवाद नहीं है।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की जिसमें वादी-प्रतिवादी ने दावा किया कि उसने 1996 में अपने पिता से विक्रय समझौते, सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी, शपथ पत्र, रसीद और रजिस्टर्ड वसीयत के माध्यम से संपत्ति खरीदी थी। उसने आरोप लगाया कि...
अनिश्चितता अपनाएँ, सोचें क्या आपको खुश करता है: जस्टिस सूर्यकांत
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने हाल ही में युवा वकीलों को संदेश दिया कि वे बदलाव को स्वीकार करें और अपने करियर में नए रास्तों की खोज से न डरें। उन्होंने कहा कि वकीलों को यह सोचने और समझने की हिम्मत रखनी चाहिए कि वास्तव में उन्हें क्या खुश करता है। विशाखापट्टनम स्थित दमोदरम संजीवय्या नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में बोलते हुए जस्टिस कांत ने कहा कि सफल और खुशहाल जीवन के लिए बदलाव को अपनाना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद या उसके दौरान किसी भी व्यक्ति की...
उमर खालिद व अन्य को जमानत न मिलना अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: कपिल सिब्बल
दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश मामले में आरोपित उमर ख़ालिद (और अन्य) को दिल्ली हाईकोर्ट से ज़मानत न मिलने के बाद, वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कल प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर न्यायपालिका की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अदालतें सुनवाई टालकर मामले में देरी कर रही हैं और इस तरह संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन कर रही हैं। सिब्बल ने कहा, "अगर कोर्ट सालों तक फैसला नहीं करता, तो क्या इसकी ज़िम्मेदारी हमारी है? अदालत की यही हालत है। अगर जमानत नहीं देनी है,...
एक ही प्रतिष्ठान में समान स्थिति वाले दैनिक वेतनभोगियों का चयनात्मक नियमितीकरण समता का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के चयनात्मक नियमितीकरण के विरुद्ध निर्णय दिया। न्यायालय ने कहा कि स्थायी कार्य में लगे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमितीकरण से वंचित करके उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता, जबकि रिक्त पदों पर कार्यरत अन्य समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को यह लाभ दिया जा रहा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उस मामले की सुनवाई की जिसमें अपीलकर्ता - पांच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और एक चालक - 1989-1992 से प्रतिवादी आयोग के साथ...
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को लगाई फटकार: गिरफ्तारी पर सवाल पूछने के बजाय जमानत पर फैसला करना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे आरोपी को अग्रिम ज़मानत (Anticipatory Bail) देते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की तीखी आलोचना की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने अस्पष्ट और असामान्य आदेश पारित किया, जिसमें आरोपी की जमानत याचिका पर फैसला करने के बजाय पुलिस से पूछा गया कि उसे चार साल तक क्यों नहीं गिरफ़्तार किया गया।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट को या तो अग्रिम जमानत मंज़ूर करनी चाहिए थी या फिर उसे ठुकरा देना चाहिए था। अदालत ने...



















