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अधिकांश पत्रकारों को पता नहीं है कि आदेश, कार्यवाही, जजमेंट या मौखिक अवलोकन क्या है! यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है: सीजेआई रमना
अधिकांश पत्रकारों को पता नहीं है कि आदेश, कार्यवाही, जजमेंट या मौखिक अवलोकन क्या है! यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है: सीजेआई रमना

ईस्टर्न बुक कंपनी द्वारा "सुप्रीम कोर्ट केस (एससीसी) प्री '69" के शुभारंभ के लिए मुख्य अतिथि के रूप में भारत के चीफ जस्टिस एन.वी. रमना (CJI Ramana) को आमंत्रित किया गया था।सभा को संबोधित करते हुए, सीजेआई रमना ने निर्णय लिखते समय जजों द्वारा सरल भाषा का इस्तेमाल करने पर जोर दिया उन्होंने कहा कि निर्णय का तर्क और निष्कर्ष स्पष्ट होना चाहिए ताकि न्याय के उपभोक्ता को दी गई कार्यवाही के अंतिम परिणाम का पता चल सके।इसके साथ ही उन्होंने सटीक कानूनी रिपोर्टिंग की आवश्यकता पर भी बल दिया।सीजेआई ने अपने...

ईपीएफ पेंशन मामला- पेंशन कोष अछूता है, ब्याज से भुगतान आ रहा है, ईपीएफओ फंड का मुद्दा नहीं उठा सकता- कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट में कहा [ दिन- 5]
ईपीएफ पेंशन मामला- पेंशन कोष अछूता है, ब्याज से भुगतान आ रहा है, ईपीएफओ फंड का मुद्दा नहीं उठा सकता- कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट में कहा [ दिन- 5]

ईपीएफ पेंशन मामले की सुनवाई के पांचवें दिन (बुधवार को ) पेंशनभोगियों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आर सी गुप्ता बनाम क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त, जिसमें कहा गया कि पेंशन का विकल्प चुनने के लिए कोई कट-ऑफ नहीं है, सही है और वर्तमान मामले में उन पर लागू होता है।जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस सुधांशु धूलिया की तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने यह दलील दी।पीठ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा केरल, राजस्थान और दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने...

मोटर दुर्घटना मुआवजे के दावे पर फैसला करते समय आपराधिक ट्रायल में आरोपों को साबित करने के लिए साक्ष्य के नियम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
मोटर दुर्घटना मुआवजे के दावे पर फैसला करते समय आपराधिक ट्रायल में आरोपों को साबित करने के लिए साक्ष्य के नियम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मोटर दुर्घटना मुआवजे की मांग करने वाले आवेदन पर फैसला करते समय आपराधिक ट्रायल में आरोपों को साबित करने के लिए साक्ष्य के नियम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि इस तरह के एक आवेदन पर उसके सामने पेश किए गए सबूतों के आधार पर फैसला किया जाना चाहिए, न कि उन सबूतों के आधार पर जो एक आपराधिक ट्रायल में होना चाहिए था या हो सकता था।अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर एक अपील की अनुमति देते हुए इस प्रकार कहा,...

सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई को चुनौती देने वाली जमीयत की याचिका पर सुनवाई 7 सितंबर तक स्थगित की
सुप्रीम कोर्ट ने "बुलडोजर" कार्रवाई को चुनौती देने वाली जमीयत की याचिका पर सुनवाई 7 सितंबर तक स्थगित की

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई 7 सितंबर 2022 तक स्थगित कर दी। इस याचिका में आरोप लगाया गया कि यूपी और एमपी जैसे राज्यों में अधिकारी के दंगों जैसे मामलों में आरोपी व्यक्तियों के घरों को तोड़ने के लिए "बुलडोजर" कार्रवाई का सहारा ले रहे हैं। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ के समक्ष सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने सीनियर एडवोकेट पीवी सुरेंद्रनाथ की तबीयत खराब होने के कारण स्थगन की मांग की। पीठ ने सीनियर एडवोकेट सीयू सिंह को प्रतिवादियों...

कोई ट्रायल नहीं चलाया  : सुप्रीम कोर्ट ने कैट के एडवोकेट महमूद प्राचा को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराने के आदेश को रद्द किया
'कोई ट्रायल नहीं चलाया ' : सुप्रीम कोर्ट ने कैट के एडवोकेट महमूद प्राचा को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराने के आदेश को रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सितंबर 2020 में नई दिल्ली में केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (कैट) की प्रधान पीठ द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया जिसमें एडवोकेट महमूद प्राचा को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर आदेश को रद्द किया कैट द्वारा कोई ट्रायल नहीं किया गया था।कैट ने प्राचा को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया था, लेकिन चेतावनी देकर छोड़ दिया। इसने यह भी निर्देश दिया था कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए आदेश को बार काउंसिल ऑफ इंडिया और दिल्ली स्टेट बार काउंसिल को...

पैगंबर पर टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा के खिलाफ सभी वर्तमान और भविष्य की एफआईआर दिल्ली ट्रांसफर की
पैगंबर पर टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा के खिलाफ सभी वर्तमान और भविष्य की एफआईआर दिल्ली ट्रांसफर की

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में पैगंबर मोहम्मद साहब पर नूपुर की टिप्पणी को लेकर दर्ज सभी एफआईआर दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दी। यह आदेश 26 मई को "टाइम्स नाउ" द्वारा प्रसारित चैनल डिबेट पर की गई टिप्पणियों के संबंध में भविष्य में नूपुर के खिलाफ दर्ज किसी भी एफआईआर या शिकायत पर लागू होगा। अदालत ने नूपुर को एफआईआर रद्द करने की राहत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता भी दी। कोर्ट ने यह माना कि कार्रवाई का एक...

जस्टिस एन वी रमना
सीजेआई ने अर्जेंट लिस्टिंग में मामलों का उल्लेख करने के लिए सीनियर एडवोकेट को अनुमति देने से इनकार किया

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने बुधवार को सीनियर एडवोकेट को तत्काल सूची (urgent listing) के लिए मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी और कहा कि यह बेहतर होगा कि एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड द्वारा उल्लेख किया जाए।भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा, "सीनियरों को उल्लेख करने की अनुमति देने का कोई सवाल ही नहीं है।"यह टिप्पणी तब आई जब एक जूनियर एडवोकेट ने सीनियर एडवोकेट एएम सिंघवी (जो वर्चुअल पेश हो रहे थे) को उल्लेख करने की अनुमति देने के लिए सीजेआई की अनुमति मांगी।सीनियर काउंसल को अनुमति देने...

क्या धारा 319 सीआरपीसी के तहत जोड़ा गया आरोपी धारा 227 सीआरपीसी के तहत आरोप मुक्त करने की मांग कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट पहले के फैसलों का पुन: परीक्षण करने को तैयार
क्या धारा 319 सीआरपीसी के तहत जोड़ा गया आरोपी धारा 227 सीआरपीसी के तहत आरोप मुक्त करने की मांग कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट पहले के फैसलों का पुन: परीक्षण करने को तैयार

क्या धारा 319 सीआरपीसी के तहत जोड़ा गया आरोपी धारा 227 सीआरपीसी के तहत आरोप मुक्त करने की मांग कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट विशेष अनुमति याचिका में उठाए गए इस मुद्दे की जांच के लिए तैयार हो गया है।विशेष अनुमति याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट एस नागमुथु ने तर्क दिया था कि जोगेंद्र यादव बनाम बिहार राज्य (2015) 9 SCC 244 मामले में इस मुद्दे का उत्तर नकारात्मक में दिया गया था और यह कि उक्त दृष्टिकोण कानून में सही दृष्टिकोण नहीं है।जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
केवल अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति के आधार पर दोषसिद्धि को कायम नहीं रखा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हत्या (Murder Case) के आरोपी को बरी करने के हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति साक्ष्य का एक कमजोर टुकड़ा है और जब तक कुछ पुष्टि नहीं होती, केवल अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति के आधार पर दोषसिद्धि कायम नहीं रह सकती है।अभियोजन पक्ष का मामला यह था कि आरोपी ने अपनी पत्नी को लाठी से मार डाला, उसे घर से 100 फीट दूर खींच लिया और सबूत नष्ट करने के लिए उसे आग लगा दी।ट्रायल कोर्ट ने सबूतों की सराहना करते हुए आरोपी को आईपीसी की धारा...

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में एमबीबीएस उम्मीदवारों पर अनिवार्य बॉन्ड शर्तों के खिलाफ याचिका पर विचार करने से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में एमबीबीएस उम्मीदवारों पर अनिवार्य बॉन्ड शर्तों के खिलाफ याचिका पर विचार करने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अखिल भारतीय प्रारंभिक चिकित्सा टेस्ट (एआईपीएमटी) में प्राप्त योग्यता के आधार पर मेडिकल अंडर ग्रेजुएट एमबीबीएस कोर्स में वर्ष 2011 और 2013 में ऑल इंडिया कोटा सीट में एडमिशन लेते समय याचिकाकर्ताओं पर महाराष्ट्र राज्य द्वारा लगाए गए अनिवार्य बॉन्ड शर्तों को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस ए.एस. बोपन्ना ने कहा कि महाराष्ट्र राज्य द्वारा याचिकाकर्ताओं पर बॉन्ड की शर्तें लगाई जा रही हैं, जो महाराष्ट्र में...

NEET-UG एडमिशन : यूनिवर्सिटी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केवल आंशिक फीस का भुगतान करने वाली छात्रा के मूल दस्तावेज लौटाने पर सहमति व्यक्त की
NEET-UG एडमिशन : यूनिवर्सिटी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केवल आंशिक फीस का भुगतान करने वाली छात्रा के मूल दस्तावेज लौटाने पर सहमति व्यक्त की

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मुद्दे से संबंधित याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी कि क्या नामांकन फॉर्म, अंडरटेकिंग और हलफनामा जमा किए बिना केवल फीस का आंशिक भुगतान करना मेडिकल कॉलेज में एडमिशन पाने और कॉलेज ज्वॉइन करने के समान होगा।याचिका उस उम्मीदवार द्वारा दायर की गई, जिसने मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) द्वारा आयोजित नीट-यूजी काउंसलिंग में आवेदन किया था। उसे डीवाई पाटिल (डीम्ड) यूनिवर्सिटी, नवी मुंबई में एक डीम्ड/पेड कोटा सीट आवंटित की गई। रिकॉर्ड से ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता...

गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं मुफ्त उपहार नहीं, मंत्रियों, सांसदों/विधायकों और कॉरपोरेट्स को दिए जाने वाले भत्तों का आकलन करें: आप आदमी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं 'मुफ्त उपहार' नहीं, मंत्रियों, सांसदों/विधायकों और कॉरपोरेट्स को दिए जाने वाले भत्तों का आकलन करें: आप आदमी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दायर एक हलफनामे में एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय (Ashwini Upadhyay) द्वारा दायर जनहित याचिका का विरोध करते हुए कहा कि वंचित जनता के सामाजिक-आर्थिक कल्याण के लिए योजनाओं को "मुफ्त उपहार" के रूप में वर्णित नहीं किया जा सकता है।मामले को "गंभीर" बताते हुए, याचिकाकर्ता एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने याचिका में कहा है कि चुनाव आयोग को राज्य और राष्ट्रीय राजनीतिक दल को ऐसी चीजें देने से रोकना चाहिए। "मुफ्तखोरी" का वादा कर वोट मांग रहे...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने "जनसंख्या विस्फोट" को नियंत्रित करने के उपायों की मांग वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए "जनसंख्या विस्फोट" को नियंत्रित करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सोमवार को केंद्र को नोटिस जारी किया।याचिका में कहा गया कि वर्तमान याचिका के लिए कार्रवाई का कारण केंद्र द्वारा प्रस्तुत एक दिसंबर, 2020 हलफनामे (केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के परिवार नियोजन विभाग में अवर सचिव द्वारा हस्ताक्षरित) से सुप्रीम कोर्ट में यह कहने से उत्पन्न हुआ कि भारत " परिवार...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
राहुल गांधी के वीडियो के साथ छेड़छाड़ मामला: सुप्रीम कोर्ट ने ज़ी न्यूज़ के प्रोड्यूसर के खिलाफ दर्ज एफआईआर में गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने ज़ी न्यूज़ (Zee News) के प्रोड्यूसर नरिंदर सिंह को राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के वीडियो के साथ छेड़छाड़ करके उसे प्रसारित करने के संबंध में दर्ज एफआईआऱ में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की।सिंह की ओर से पेश हुए वकील ने जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस ए.एस. बोपन्ना के समक्ष कहा कि उनके खिलाफ तीन प्राथमिकी दर्ज की गई हैं - एक जयपुर, राजस्थान में; दूसरा रायपुर, छत्तीसगढ़ में; और तीसरा नोएडा, यूपी में जी न्यूज द्वारा। कंपनी की ओर से दायर शिकायत में उसने...

दक्ष न्यायाधीशों में खराब संदेश गया: सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट से पॉक्सो मामलों का कुछ ही दिनों में फैसला करने वाले जज के खिलाफ कार्यवाही वापस लेने का आग्रह किया
'दक्ष न्यायाधीशों में खराब संदेश गया': सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट से पॉक्सो मामलों का कुछ ही दिनों में फैसला करने वाले जज के खिलाफ कार्यवाही वापस लेने का आग्रह किया

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पटना हाईकोर्ट से बिहार के एक निलंबित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के खिलाफ पॉक्सो मामलों का फैसला कुछ ही दिनों में करने के लिए शुरू की गई सभी अनुशासनात्मक कार्यवाही को वापस लेने का आग्रह किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा,"हमारी ईमानदारी से सलाह है कि सब कुछ छोड़ दें। अगर आप नहीं चाहते हैं तो हम इसकी तह तक जाएंगे। जब तक आप भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा रहे हैं, तब तक कुछ स्पष्ट होना चाहिए .....वह केवल अपने आदेशों का पालन कर रहे हैं, यह उनके खिलाफ बेहद अनुचित है।"यह सुनकर...

सीआरपीसी धारा 311 के तहत आवेदन को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि इससे अभियोजन पक्ष के मामले की खामियों को भरने में मदद मिलेगी : सुप्रीम कोर्ट
सीआरपीसी धारा 311 के तहत आवेदन को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि इससे अभियोजन पक्ष के मामले की खामियों को भरने में मदद मिलेगी : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धारा 311 सीआरपीसी के तहत एक आवेदन को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है कि इससे अभियोजन पक्ष के मामले की खामियों को भरने में मदद मिलेगी।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि जहां भी अदालत को लगता है कि मामले के न्यायसंगत निर्णय के लिए कोई सबूत आवश्यक है और सबूतों को बंद करने के लिए बाध्य नहीं है, वहां शक्ति का प्रयोग किया जाना चाहिए।दरअसल एक वकील की 18 नवंबर 2015 को उसके कार्यालय के बाहर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पांच आरोपियों को...

ज्ञानवापी परिसर में मिली संरचना की प्रकृति का अध्ययन करने की पीआईएल को खारिज करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल
ज्ञानवापी परिसर में मिली संरचना की प्रकृति का अध्ययन करने की पीआईएल को खारिज करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज करने के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है जिसमें ज्ञानवापी परिसर में मिली संरचना की प्रकृति का अध्ययन करने के लिए हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश (वर्तमान / सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में एक समिति / आयोग की नियुक्ति की मांग की गई थी।गौरतलब है कि जून 2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें यह पता लगाने के लिए एक पैनल का गठन करने निर्देश देने की मांग की गई थी कि क्या मस्जिद के...