ताज़ा खबरें
सुप्रीम कोर्ट ने कलेक्टर से वकील अशोक पांडे पर लगाए गए एक लाख रुपये के जुर्माने की वसूली पर मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता मोहम्मद फैजल की लोकसभा सदस्यता की बहाली को चुनौती देने वाली तुच्छ याचिका दायर करने के लिए लखनऊ के वकील पर लगाए गए जुर्माने की राशि भू-राजस्व के बकाए के रूप में क्यों नहीं वसूली गई।20 अक्टूबर, 2023 को याचिकाकर्ता एडवोकेट अशोक पांडे ने याचिका दायर कर दलील दी कि एक बार जब कोई सांसद आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के कारण अपना पद खो देता है तो वह हाईकोर्ट द्वारा बरी किए जाने तक अयोग्य बना रहेगा।जस्टिस बी.आर. गवई,...
"न्यायालय की कार्यवाही पर टिप्पणियों को लेकर इतनी संवेदनशीलता क्यों?" ANI मानहानि मामले पर विकिपीडिया पेज हटाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने ने विकिपीडिया फाउंडेशन द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें विकिपीडिया के खिलाफ समाचार एजेंसी एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI) द्वारा शुरू की गई मानहानि की कार्यवाही से संबंधित चर्चाओं और विकिपीडिया पेज को हटाने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुयान की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के निर्देश और इस टिप्पणी के बारे में चिंता व्यक्त की कि सामग्री चल रही अदालती कार्यवाही में हस्तक्षेप करने के बराबर...
सुप्रीम कोर्ट ने ऑरोविले टाउनशिप परियोजना पर NGT की रोक खारिज की, कहा- विकास पर्यावरण संरक्षण जितना ही महत्वपूर्ण
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का आदेश खारिज कर दिया, जिसमें ऑरोविले फाउंडेशन को पुडुचेरी में अपने टाउनशिप में विकासात्मक गतिविधियों से रोक दिया गया था।जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की खंडपीठ ने अप्रैल, 2022 में NGT दक्षिणी क्षेत्र पीठ द्वारा पारित आदेश के खिलाफ ऑरोविले फाउंडेशन द्वारा दायर अपील को स्वीकार की, जिसमें फाउंडेशन को पर्यावरण मंजूरी प्राप्त होने तक अपनी विकासात्मक गतिविधियों से रोक दिया गया था।फैसला सुनाते हुए जस्टिस त्रिवेदी ने कहा कि विकास का...
सरकारी लॉ ऑफिसर में कम से कम 30% महिलाएं होनी चाहिए: जस्टिस बी.वी. नागरत्ना
सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि सरकारी लीगल अधिकारियों में कम से कम 30% महिलाएं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के सभी लीगल सलाहकारों में कम से कम 30% महिलाएं होनी चाहिए, इसी तरह सभी राज्य संस्थाओं और एजेंसियों में भी।शनिवार को "ब्रेकिंग द ग्लास सीलिंग: वूमेन हू मेड इट" विषय पर सेमिनार में बोलते हुए जस्टिस नागरत्ना ने उन विभिन्न कदमों पर चर्चा की जो पेशेवर क्षेत्रों, विशेष रूप से विधि पेशे में लैंगिक बाधाओं को खत्म करने के लिए आवश्यक हैं।जस्टिस नागरत्ना...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (10 मार्च, 2025 से 14 मार्च, 2025 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।Motor Accident Claims | कानूनी प्रतिनिधि वह होता है जिसे नुकसान होता है, जरूरी नहीं कि वह मृतक का जीवनसाथी, बच्चा या माता-पिता हो : सुप्रीम कोर्टहाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत कानूनी प्रतिनिधि शब्द की संकीर्ण व्याख्या नहीं की जानी चाहिए, जिससे उन लोगों को...
Prevention Of Corruption Act | 'ट्रैप केस में रिश्वत की मांग और स्वीकृति साबित नहीं हुई': सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों को बरी किया
सुप्रीम कोर्ट ने रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोपी दो सरकारी कर्मचारियों को बरी कर दिया, यह देखते हुए कि अभियोजन पक्ष रिश्वत की मांग और स्वीकृति के तथ्य को साबित करने में विफल रहा।कोर्ट ने दोहराया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (PC Act) की धारा 20 के तहत अभियुक्त के खिलाफ तब तक कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता, जब तक कि अभियोजन पक्ष द्वारा रिश्वत की मांग और स्वीकृति के तथ्य को साबित नहीं कर दिया जाता।इसके अलावा, कोर्ट ने सबूतों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए ट्रैप मामलों में स्वतंत्र...
SCBA Election Reforms| जस्टिस नागेश्वर राव ने सुप्रीम कोर्ट बार से सुझाव आमंत्रित किए
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली समिति ने SCBA उपनियमों में सुधार विशेष रूप से चुनावों से संबंधित प्रावधानों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के सदस्यों से सुझाव आमंत्रित किए।निम्नलिखित मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट बार के सदस्यों से सुझाव मांगे गए-1. कार्यकारी समिति के चुनाव लड़ने के लिए पात्रता की शर्तें।2. कार्यकारी समिति के चुनाव में मतदान के लिए पात्रता की शर्तें।3. कार्यकारी समिति BBB।4. कार्यकारी समिति की ताकत5. उम्मीदवारों की अयोग्यता (मतदान के...
Maharashtra Slum Act | 'जनगणना की गई झुग्गी-झोपड़ियां' भी 'झुग्गी-झोपड़ियां' हैं, पुनर्विकास के लिए अलग से अधिसूचना की आवश्यकता नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार जब किसी झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र को 'जनगणना की गई झुग्गी-झोपड़ियां' घोषित कर दिया जाता है, यानी सरकारी या नगर निगम के उपक्रम की भूमि पर स्थित झुग्गियां, तो ऐसी झुग्गियां महाराष्ट्र झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र (सुधार, निकासी और पुनर्विकास) अधिनियम, 1971 (Maharashtra Slum Act) के तहत अलग से अधिसूचना की आवश्यकता के बिना ही झुग्गी-झोपड़ी अधिनियम के तहत पुनर्विकास के लिए स्वतः ही पात्र हो जाती हैं।कोर्ट ने कहा,"यदि कोई झुग्गी-झोपड़ी 'जनगणना की गई झुग्गी-झोपड़ी' है तो उसे DCR के...
लंबे समय में कॉरपोरेट करियर की तुलना में मुकदमेबाजी अधिक फायदेमंद है; यह सोचना गलत है कि पहली पीढ़ी के वकील सफल नहीं हो सकते: जस्टिस ओक
सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस एएस ओक ने मंगलवार (11 मार्च) को कॉरपोरेट कानून की तुलना में मुकदमेबाजी की पारंपरिक प्रैक्टिस को आगे बढ़ाने के महत्व पर विस्तार से बात की और इस रूढ़ि को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया कि संवैधानिक न्यायालयों में प्रैक्टिस करना जिला या ट्रायल कोर्ट में अभ्यास करने से 'बेहतर' है।जस्टिस ओक असम के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय और न्यायिक अकादमी द्वारा आयोजित एक व्याख्यान में बोल रहे थे। उन्होंने कॉलेज के तुरंत बाद कॉरपोरेट लॉ फर्मों में शामिल होने की युवा विधि स्नातकों की...
दिल्ली में तैनात CRPF कर्मियों के किराये के आवास का मुद्दा सुलझाएं: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह दिल्ली में अस्थायी रूप से तैनात CRPF कर्मियों के लिए किराये के आवास के मुद्दे को उचित समय के भीतर सुलझाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक ऐसा नहीं किया जाता है, तब तक वह अनुच्छेद 142 के अधिकार क्षेत्र के तहत आवश्यक रूप से निर्देश जारी करेगा।जस्टिस एएस ओक और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ CRPF कर्मियों को उन्हें दिए जाने वाले HRA के तहत दिल्ली में किराये के आवास उपलब्ध कराने के मुद्दे से संबंधित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।वर्तमान मामला दिल्ली...
जब चयन पूरी तरह से इंटरव्यू मार्क्स पर आधारित हो तो मनमानी और पक्षपात की मौजूदगी का अनुमान लगाना उचित: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने असम की तत्कालीन भाजपा सरकार के 2016 के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें तत्कालीन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सरकार द्वारा 2014 में अधिसूचित असम वन सुरक्षा बल (एफपीएफ) में 104 कांस्टेबलों की भर्ती प्रक्रिया के लिए चयन सूची को रद्द करने का फैसला लिया गया था।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने पाया कि भर्ती प्रक्रिया में विसंगतियों को देखते हुए रद्द करना न तो मनमाना था और न ही असंगत था, जिसमें जिला प्रतिनिधित्व में असमानता और आरक्षण नीति का उल्लंघन शामिल है।कोर्ट ने आगे इस बात...
लीगल रीसर्च के लिए AI पर निर्भर रहना जोखिम भरा, ChatGPT जैसे प्लेटफॉर्म ने फर्जी केस साइटेशन तैयार किए: जस्टिस गवई
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई ने न्यायपालिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने की वकालत की। यह स्वीकार करते हुए कि AI केस प्रबंधन के प्रशासनिक बोझ को कम करने के लिए एक लाभकारी उपकरण हो सकता है। इसका उपयोग मामलों की प्रभावी लिस्टिंग और शेड्यूलिंग के लिए किया जा सकता है, जस्टिस गवई ने AI पर अत्यधिक निर्भरता में निहित जोखिमों के बारे में चेतावनी दी।केन्या के सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित सम्मेलन में बोलते हुए जस्टिस गवई ने कहा कि AI-संचालित शेड्यूलिंग टूल को केस...
'शॉर्ट क्लिप अक्सर गुमराह करती हैं और सनसनी फैलाती हैं': जस्टिस गवई ने केन्याई सुप्रीम कोर्ट में बोलते हुए लाइव सुनवाई के दुरुपयोग पर चिंता जताई
सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस बीआर गवई ने सुनवाई के लाइवस्ट्रीम वीडियो के कंटेंट क्रिएटर्स द्वारा दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की, जो अक्सर कार्यवाही को सनसनीखेज बनाने और गलत सूचना फैलाने के लिए छोटी क्लिप बनाते हैं।जस्टिस गवई ने यह भी कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स और यूट्यूबर्स द्वारा इस तरह के कृत्य न्यायिक कार्यवाही के बौद्धिक संपदा अधिकारों और स्वामित्व पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने लाइव-स्ट्रीम की गई कार्यवाही के उपयोग पर स्पष्ट दिशा-निर्देशों का आह्वान किया।केन्या के सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित सम्मेलन में...
सुप्रीम कोर्ट ने एलजी के समक्ष SRB अनुशंसाएं रखने के झूठे बयान पर दिल्ली के गृह सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली सरकार के गृह विभाग सचिव को तलब किया और उनसे स्पष्टीकरण मांगा। कोर्ट ने उनसे कारण बताने को कहा कि राज्य सरकार के इस “पूरी तरह झूठे” दावे के लिए अवमानना कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए कि सजा माफी के मामले में सजा समीक्षा बोर्ड (SRB) की अनुशंसाएं उपराज्यपाल के समक्ष रखी गई थीं।जस्टिस अभय ओक और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने तिहाड़ के जेल मुख्यालय, पीएचक्यू-II के जेल अधीक्षक प्रेम सिंह मीना द्वारा दायर हलफनामे को रिकॉर्ड में लिया, जिसमें खुलासा किया गया कि सजा...
सुप्रीम कोर्ट ने सजावट के लिए नियुक्त कर्मचारियों की बिजली के झटके से हुई मौत के मामले में नियोक्ताओं को दोषमुक्त किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दो व्यक्तियों को दोषमुक्त किया, जिन पर अपने कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण (जैसे, हेलमेट, सुरक्षा बेल्ट, रबर के जूते) उपलब्ध नहीं कराने का आरोप था, जिसके कारण लोहे की सीढ़ी का उपयोग करके साइनबोर्ड पर काम करते समय बिजली के झटके से उनकी मृत्यु हो गई।अपीलकर्ताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 और 304ए के तहत FIR दर्ज की गई थी।ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट ने अपीलकर्ताओं (नियोक्ताओं) के आरोपमुक्त करने का आवेदन खारिज कर दिया, यह मानते हुए कि धारा 304 भाग II IPC के...
अंतर्राष्ट्रीय महिला न्यायाधीश दिवस मनाने के पक्ष में दलील, जस्टिस मारिया क्लेटे का आलेख
Justice Maria Cleteप्रत्येक वर्ष 10 मार्च को दुनिया अंतर्राष्ट्रीय महिला न्यायाधीश दिवस (IDWJ) मनाती है - न्यायपालिका में महिलाओं की भूमिका को मान्यता देने और बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्थापित एक दिन। इस दिन का पालन केवल प्रतीकात्मक नहीं है; यह कानूनी पेशे के भीतर लैंगिक समानता, न्यायिक अखंडता और समावेशिता के सिद्धांतों की पुष्टि के रूप में कार्य करता है। IDWJ क्यों मायने रखता हैऐतिहासिक रूप से न्यायपालिका एक पुरुष-प्रधान संस्था रही है। हालांकि प्रगति हुई है, लेकिन...
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट के आदेश के पालन करने से 16 साल तक इनकार करता रहा जम्मू-कश्मीर प्रशासन, सुप्रीम कोर्ट ने की आलोचना
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने में जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश द्वारा 16 साल की देरी के बारे में तीखी टिप्पणी की, जिसमें सरकार को निर्देश दिया गया कि वह विशिष्ट सरकारी आदेश SRO 64/1994 के अनुसार नियमितीकरण के लिए प्रतिवादी दैनिक वेतनभोगियों के मामले पर विचार करे।2007 में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने अपीलकर्ताओं को प्रतिवादी के मामले पर अन्य दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के समान विचार करने के निर्देश दिए, जिन्हें 2006 में एसआरओ 64/1994 के तहत नियमितीकरण का लाभ मिला था।जस्टिस...
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 28 मार्च से पहले विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शिक्षकों के स्वीकृत पदों को अधिसूचित करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष बच्चों के लिए शिक्षकों के स्वीकृत पदों को अधिसूचित करने और तुरंत उनकी चयन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। इसने कहा कि विभिन्न राज्यों में तदर्थ आधार पर काम कर रहे उन शिक्षकों को प्रत्येक उम्मीदवार की योग्यता के आधार पर एक जांच समिति द्वारा नियमित किया जाना चाहिए।जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षकों की कमी को...
सुप्रीम कोर्ट ने किया साफ- जब दोषसिद्धि POCSO Act और IPC दोनों के तहत हो तो सजा उस प्रावधान के तहत दी जाएगी, जिसके तहत उच्च दंड निर्धारित किया गया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि जब किसी व्यक्ति को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के बलात्कार प्रावधानों के तहत किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है तो POCSO अधिनियम की धारा 42, POCSO अधिनियम या IPC के तहत निर्धारित उच्च दंड लगाने का आदेश देती है। अदालत ने आगे कहा कि यदि IPC कुछ अपराधों के लिए उच्च दंड निर्धारित करती है तो POCSO अधिनियम के तहत कम सजा के लिए कोई दलील स्वीकार नहीं की जा सकती है, क्योंकि यह तर्क दिया गया है कि धारा...
सुप्रीम कोर्ट मंथली राउंड अप : फरवरी, 2025
सुप्रीम कोर्ट में पिछले महीने (01 फरवरी, 2025 से 28 फरवरी, 2025 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट मंथली राउंड अप।FIR में कुछ आरोपियों के नाम न बताना साक्ष्य अधिनियम की धारा 11 के तहत प्रासंगिक तथ्य: सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपराध गवाह आमतौर पर FIR में सभी अपराधियों का नाम बताता है। कुछ का नाम चुनकर दूसरों को छोड़ देना अस्वाभाविक है, जिससे शिकायतकर्ता का बयान कमजोर होता है। कोर्ट ने कहा कि यह चूक, हालांकि अन्यथा अप्रासंगिक है, लेकिन साक्ष्य अधिनियम की धारा 11...




















