स्तंभ
जानिए POCSO अधिनियम के बारे में खास बातेंं
भारत के कुल जनसंख्या का 37% हिस्सा बच्चों का है और विश्व की कुल जनसंख्या में 20% हिस्सा बच्चों का है। बच्चों का यौन शोषण एक सामुदायिक चिंता का विषय बन गया है और कई विधायी और व्यावसायिक पहलों पर ध्यान केंद्रित किया है। वयस्कों की तुलना में, बच्चों को अपने ऊपर हुए जुल्मो का खुलासा करना अधिक कठिन लगता है। यह सिद्ध के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि जिन लोगों ने अपने बचपन में दुर्व्यवहार का सामना किया है, वे इसके दुष्परिणामों को अपने वयस्कता में अच्छी तरह से निभाते हैं, दूसरों के साथ अपने संबंधों और...
जानिए बन्दी प्रत्यक्षीकरण ( Habeas corpus) के बारे में विशेष बातें
दुनिया के कई देशो में प्राधिकारी अपने किसी भी नागरिक को बिना चार्ज किये महीनों, वर्षो तक कारागार में बंदी बना कर रख सकते है ऐसे में उन नागरिको के पास विरोध करने या चुनौती देने का कोई कानूनी साधन उपलब्ध नहीं होता है। बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट गैरकानूनी बंदी या हिरासत में लिए जाने के खिलाफ़ नागरिकों के पास एक हथिहार है जो नागरिकों को अपने हितो की रक्षा का लिए उच्चतम न्यायालय जाने का शक्ति प्रदान करता है। याचिका की अवधारणा अनिवार्य रूप से इंग्लैंड में उत्पन्न हुई थी, इंग्लैंड में उत्पन्न इस तरह के...
हिंदी भाषा : राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय विषय बनने तक का सफ़र
किसी भी विषय पर मंथन करने से पूर्व उस विषय के गर्भ तक जाना सदैव प्रशंसनीय रहता है | हिंदी भाषा के अंतरराष्ट्रीय संवर्धन पर जाने से पूर्व हमारा यह देखना बेहद जरूरी है कि हिंदी का भारत देश में ही राष्ट्रीय संवर्धन किस स्तर तक हो रखा है |आम जनमानस के लिए हमेशा से ही भ्रमित करने वाला सबसे बड़ा प्रश्न यही रहा है कि,"क्या हिंदी 'राष्ट्रभाषा' है" ? हममें से कई लोगों मानते है "हाँ" और कई लोगों कहते है "न" | व्यवहारतः, हिंदी भाषा भारत देश कि मात्र एक औपचारिक भाषा ही है और जिस प्रकार से भारत का एक...
जब महात्मा गांधी ने माफी मांगने से इनकार किया और अवमानना की कार्रवाई का सामना किया
अशोक किनीअवमानना मामले में एडवोकेट प्रशांत भूषण ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दिए बयान में महात्मा गांधी के कथन को उद्धृत किया था। महात्मा गांधी के उक्त कथन की काफी चर्चा हुई। दरअसल महात्मा गांधी ने उक्त कथन 1919 में बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष दिया था। तब गांधी के खिलाफ़ उस कोर्ट ने अवमानना कार्यवाही शुरु की थी। आलेख गांधी के खिलाफ चलाए गए अवमानना मामले और उस मामले में फैसले पर चर्चा की गई है। मोहनदास करमचंद गांधी और महादेव हरिभाई देसाई "यंग इंडिया" नामक एक साप्ताहिक समाचार पत्र के...
"मेरे प्यारे दोस्त, कल केस है! आपके वकील ने ब्रीफ तक नहीं पढ़ी है" भूलाभाई देसाई की कहानी, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए जिरह की
संजोय घोष"और यह न्याय का मज़ाक होगा, अगर हमें किसी फैसले के नतीजे रूप में बताया जाए या अन्यथा हो, कि भारतीय, एक सैनिक के रूप में जर्मनी के खिलाफ इंग्लैंड की आज़ादी के लिए लड़ सकता है, इंग्लैंड की आज़ादी के लिए इटली के खिलाफ, जापान के खिलाफ लड़ सकता है, और अभी तक ऐसी स्थिति नहीं आई है कि जब एक आज़ाद भारतीय राज्य खुद को इंग्लैंड सहित किसी भी देश से आज़ाद करने की इच्छा व्यक्त नहीं कर सकता है।" यह ऐसा ट्रायल था, जिस पर सभी की निगाह थी। खचाखच भरे कोर्ट रूप में उस गुजराती वकील के एक-एक शब्द गूंज...
'संविधान की पवित्रता अनिवार्य रूप से धर्मनिरपेक्षता की पुष्टि में है': संविधान सभा की एकमात्र मुस्लिम महिला बेगम ऐज़ाज़ रसूल के भाषण के अंश
('संविधान सभा में महिलाएं' श्रृंखला में भारत की संविधान सभा में महिलाओं द्वारा निभाई गई भूमिका की चर्चा की जा रही है। यह श्रृंखला का चौथा लेख है।) "संविधान की सर्वोत्कृष्ट विशेषता यह है कि भारत विशुद्ध धर्मनिरपेक्ष राज्य है। संविधान की पवित्रता अनिवार्य रूप से धर्मनिरपेक्षता की पुष्टि में निहित है और हमें इस पर गर्व है। मुझे पूरा विश्वास है कि धर्मनिरपेक्षता संरक्षित और अक्षुण्ण रहेगी, भारत के लोगों की पूर्ण एकता इसी पर निर्भर है, इसके बिना प्रगति की सभी आशाएं व्यर्थ हैं।" [1] 22 नवंबर 1949...
कानूनी पेशे को गैर-वकीलों के मूक हमलों से बचाने की जरूरत
एच कार्तिक सेशाद्री परिचय एक रोचक संघर्ष जारी है। इसका कानूनी पेशे की प्रगति के तरीके पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ना तय है। दिल्ली बार काउंसिल ने मार्च 2019 में चार बड़ी ऑडिट फर्मों को एक नोटिस जारी किया था, जिसमें उन्हें अपने यहां काम कर रहे अधिवक्ताओं की एक सूची देने का निर्देश दिया गया था, और निर्देश दिया गया था कि वे कानून के किसी भी अभ्यास में लिप्त न रहें। बाद में भी उन्हें कानून के अभ्यास से रोक भी दिया गया था। [2] कानूनी पेशेवरों और अन्य पेशेवरों जैसे कि चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी...
सुनवाई-पूर्व पूर्वाग्रह : क्या भारत में इसकी पहचान का समय आ गया है?
भारत की संविधान सभा में 4 नवंबर 1948 को संविधान के ड्राफ़्ट पर चर्चा के दौरान एक शब्द समूह का प्रयोग हुआ - "संवैधानिक नैतिकता" (constitutional morality") का । बाबा साहेब अंबेडकर ने इसका प्रयोग किया और इसे 'ग़ैर-स्वाभाविक भावना' बताया जिसे भारतीय समाज को अपने अंदर विकसित करना है। भारतीय समाज को बाबा साहेब अंबेडकर ने 'आवश्यक रूप से अलोकतांत्रिक' बताया। इसे समाज का ग़ैर-स्वाभाविक भावना बताते हुए बाबा साहेब ने संवैधानिक नैतिकता और सामाजिक नैतिकता के बीच विवाद की एक रेखा खींची। यह रेखा आज भी...
जस्टिस आर भानुमतिः महत्वपूर्ण फैसले
विश्वजीत आनंदसुप्रीम कोर्ट की पांचवी वरिष्ठतम जज जस्टिस आर भानुमति का शुक्रवार, 17 जुलाई अंतिम कार्य दिवस था। उनकी सेवानिवृत्ति की आधिकारिक तारीख 19 जुलाई (रविवार को कोर्ट की छुट्टी रहती है) थी। जस्टिस भानुमति 2014 में सुप्रीम कोर्ट की जज बनी थीं, और कई महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल रहीं। अक्टूबर 2014 के बाद से, लगभग 42 महीने तक, वह सुप्रीम कोर्ट में एकमात्र महिला जज रहीं। COVID-19के मद्देनजर, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस भानुमति के लिए 'वर्चुअल विदाई' की व्यवस्था की थी, जिसमें जजों और...
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सिस्टम
अशोक किनीपिछले महीने, केरल हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने केरल हाईकोर्ट एडवोकट्स एसोसीएशन [केएचसीएए] को एक पत्र भेजा, जिसमें उन्हें हाईकोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड सिस्टम शुरू करने के प्रस्ताव पर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। रजिस्ट्रार जनरल ने एसोसिएशन से अनुरोध किया कि वह 'एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड' सिस्टम, हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के नियमन के लिए नियम और कानूनी स्थिति, मानकीकरण की कार्यप्रणाली, तय किए जाने वाले मापदंड, इस तरह के विनियमन को लागू करने के लिए हाईकोर्ट की शक्तियों, के...
अध्ययन सूची परियोजनाः कानून के छात्रों और वकीलों के लिए आवश्यक किताबें
हमजा लकड़वाला विचार भारत में कानून के अधिकांश छात्रों को उनकी कानूनी शिक्षा पुरानी और अधूरी लगती है। कॉलेज और विश्वविद्यालय अक्सर मूलभूत सिद्धांतों और अवधारणाओं के साथ कुछ बुनियादी प्रक्रियात्मक और ठोस कानूनों को सिखाते हैं। यह बुनियादी समझ बनाने में मदद करता है, मगर, किसी भी तरह से पर्याप्त नहीं है। ज्ञान क्षुधा की पूर्ति के लिए अधिकांश छात्र स्वाध्याय का सहारा लेते हैं, हालांकि ऐसा करने में, उन्हें यह महसूस होता है कि उन्हें नहीं पता कि उन्हें क्या पढ़ना है ओर क्या नहीं। हालांकि कई...
किसी संक्रमित बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के रोग की सूचना किसी अन्य व्यक्ति को देना अपराध नहीं है अपितु लोक नीति के पक्ष में
इस समय विश्व भर में कोरोना वायरस जैसी गंभीर संक्रमित बीमारी चल रही है। इस बीमारी ने भारत भर को भी अपने चपेट में ले रखा है। यह एक संक्रामक रोग है तथा एक से दूसरे में संक्रमित होता है। आम जनसाधारण के भीतर इस बीमारी को लेकर एक बड़ा प्रश्न वैधानिक दृष्टिकोण से पैदा होता है कि यदि किसी व्यक्ति को इस प्रकार का कोई संक्रमित रोग है, जिस से वह संक्रमण दूसरों में भी फैल सकता है तो ऐसी परिस्थिति में क्या ऐसे व्यक्ति की पहचान को अभिव्यक्त करना अपराध है। किसी की बीमारी को सार्वजनिक करना अपराध हो सकता...
[लॉ ऑन रील्स] "आप लोग हैं कौन?" बोस्टन लीगल और रेप के अपराध में मृत्युदंड
सुनील फर्नांडिसबोस्टन लीगल (2004-2008) 'लॉ' जॉनर की लोकप्रिय अमेरिकी टीवी सीरीज़ों में से एक है।5 सीज़न्स और 101 एपिसोड्स की यह सीऱीज, जिसका निर्माण डेविड ई केली ने किया था, बोस्टन, मैसाचुसेट्स स्थित एक काल्पनिक लॉ फर्म 'क्रेन पूल एंड श्मिट' के वकीलों की जिंदगी और कानूनी मामलों की कहानी है। सीरीज़ में एकमात्र वास्तविक वकील खुद निर्माता डेविड ई केली थे। वह बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ के पूर्व छात्र थे। सीरीज़ में दो प्रमुख पात्र थे डेनी क्रेन और एलन शोर हैं। डेनी क्रेन का किरदार निभाया है...
वैवाहिक बलात्कारः क्या भारत में यह कानून पर्याप्त तरक्की कर चुका है?
वैवाहिक बलात्कार के मुद्दे ने लंबे समय से, दुनिया भर में, कानूनविदों और समाज को प्रभावित किया है। अधिकांश देशों में वैवाहिक बलात्कार को अपराध का दर्जा दिया गया है, क्योंकि यह माना गया है कि विवाह के रिस्ते में संभोग को जीवनसाथी का अधिकार नहीं माना जा सकता है। इंडिया टुडे वेब डेस्क द्वारा 12 मार्च 2016 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन 36 देशों में से एक है, जहां आज तक वैवाहिक बलात्कार को अपराध नहीं माना जाता है। हम पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन, अफगानिस्तान, म्यांमार, ईरान, मलेशिया,...
"क्या गोपालन का भूत अभी भी हमारे न्यायशास्त्र को परेशान करता है?" : एके गोपालन बनाम मद्रास राज्य मामले की समकालीन प्रासंगिकता की तलाश
जस्टिस जयशंकरन नांबियार एके हमारे संविधान के क्रियाशील होने के पहले साल में, जिन ऐतिहासिक मामलों पर फैसला हुआ, मेरा मानना है कि उनमें गोपालन मामले को उसका उचित श्रेय नहीं मिलता है। मैं इसे दुर्भाग्यपूर्ण मानता हूं क्योंकि गोपालन मामलें में कई मतों को पढ़ने से निरे पांडित्य, न्यायिक अनुशासन और विचारों की स्पष्टता का पता चलता है, जिन्होंने जजों को अपने-अपने फैसले देने में मदद की, मामले में पेश हुए वकीलों की आकर्षक, प्रेरक और उत्तेजक दलीलों का उल्लेख ही न कीजिए! विचार से प्रकट होता है कि...
पतंजलि की COVID-19 की दवा की एकतरफा घोषणा कैसे कानून का उल्लंघन करती है?
पतंजलि आयुर्वेद ने COVID-19 के लिए इलाज के लिए आयुर्वेदिक दवा विकसित करने का सनसनी खेज दावा किया है। पतंजलि संस्थापक रामदेव और प्रबंध निदेशक बालकृष्ण ने घोषणा की कि उन्होंने "क्रोनिल और स्वासरी" दवाओं के जरिए COVID-19 का सौ फीसदी इलाज विकसित कर लिया है। पतंजलि ने अपने बयान में दावा किया है कि COVID-19 रोगी दवा के इस्तेमाल के 3 से 15 दिनों के भीतर निरोग हो गया। दावा किया गया कि दवाओं की 'क्लिनिकल केस स्टडी' दिल्ली, मेरठ और अहमदाबाद जैसे कई शहरों में की गई। इन दवाएं को कोरोना किट में बेचा...
जानिए वाहन दुर्घटना होने पर भारतीय कानून के बारे में खास बातें
वाहन दुर्घटना अत्यंत विचलित कर देने वाली घटना होती है तथा ऐसी घटना किसी भी व्यक्ति के जीवन में भूचाल ला देती है। छोटी से छोटी वाहन दुर्घटना भी जीवन को हिला कर रख देती है। कुछ आंकड़ों के मुताबिक भारत में प्रत्येक दिन 500 से अधिक वाहन दुर्घटनाएं होती है तथा इनमें अनेक लोग वाहन दुर्घटनाओं में जान तक गंवा देते है। इस लेख में वाहन दुर्घटना से संबंधित भारतीय कानून के ऊपर चर्चा की जा रही है। वाहन दुर्घटनाओं के लिए तथा मोटर यातायात के लिए मोटर व्हीकल अधिनियम 1988 अधिनियमित है। यह एक केंद्रीय कानून...
किस्से, कानूनी दांवपेंच और इतिहास: जानिए क्या था राज नारायण-इंदिरा गाँधी मामला?
तारीख 18 मार्च और साल 1975। सुबह 10 बजने में 2 मिनट बाकी रह गए थे कि तभी इलाहाबाद हाईकोर्ट के कोर्ट रूम नंबर 24 में जस्टिस जगमोहन सिन्हा दाखिल हुए। यह दिन खास था, देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री, न्यायालय में प्रवेश करने वाली थीं। यह उनकी प्रतिपरीक्षा (Cross-examination) का दिन था, या यूँ कहें कि असल मायने में यह उनकी अग्नि-परीक्षा का दिन था। हालाँकि, जिस मामले में वे पेश होने अदालत आ रही थीं, उसे कई बार प्रकृति में त्रुटिपूर्ण तकनीकी मामला कहा जाता है। ब्रिटिश अखबार, 'द गार्जियन' ने इस मामले को...
वकालत के पेशे में मेंटर की तलाश
गौतम शिवशंकरCOVID-19 के कारण लागू लॉकडाउन का एक दुष्प्रभाव विभिन्न प्रकार के कानूनी विषयों पर आयोजित हो रही वेबिनारों की बाढ़ है। कानूनी पेशे में परिचर्चा और परामर्श की यह लहर निस्संदेह मियादी है और लॉकडाउन समाप्त होने के बाद संभवतः खत्म हो जाए। जब सभी दोबारा व्यस्त हो जाएंगे, युवा वकीलों को, आज जिस उदारता से दी जा रही है, उसकी अपेक्षा, तब मेंटरशिप की अधिक आवश्यकता होगी। पिछले 15 वर्षों में, पहले कानून के छात्र के रूप में और बाद में एक वकील के रूप में, मैंने उचित प्रकार की मेंटरशिप प्राप्त...
हाथी भारत की सांस्कृतिक धरोहर और विरासत
शशांक शेखर सिंह, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्टजैसा कि हमने देखा, दुनिया भर में सरकारों द्वारा बड़े पैमाने पर तालाबंदी के प्रयासों के बाद घरों के अंदर रहने को मजबूर किया गया था। यह माँ प्रकृति के लिए एक सांस लेने का क्षण था। सोशल मीडिया भी खाड़ी क्षेत्रों में आने वाले डॉल्फिन की खूबसूरत तस्वीरों से भर गया था, हिरणों की सड़क पार करती तसवीरेंऔर कछुओं की वापस आते हुए देखना तथा समुद्र तट क्षेत्र को अपने खेल मैदान के रूप में पुनः प्राप्त करते हुए देखना सुखद था।मानव आवासों पर मंडरा रहे वायरस के इस पूरे संकट...













![[लॉ ऑन रील्स] आप लोग हैं कौन? बोस्टन लीगल और रेप के अपराध में मृत्युदंड [लॉ ऑन रील्स] आप लोग हैं कौन? बोस्टन लीगल और रेप के अपराध में मृत्युदंड](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2020/07/10/500x300_378007-377872-boston-legal.jpg)






