बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने निजी विवाद में PMC की कार्रवाई को बताया मनमाना; वेलबिल्ड पर ₹25 लाख और नगर निगम अधिकारियों पर ₹5 लाख जुर्माना
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे नगर निगम (PMC) के अधिकारियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि नगर निगम जैसी वैधानिक संस्थाओं का उपयोग निजी संविदात्मक विवादों को निपटाने के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता। अदालत ने पाया कि अधिकारियों ने बिना कानूनी आधार, बिना साइट निरीक्षण और बिना रिकॉर्ड की जाँच के एट्रिया कंस्ट्रक्शन्स पर स्टॉप-वर्क नोटिस जारी कर दिया, जो पूरी तरह मनमाना और हड़बड़ी में उठाया गया कदम था।यह मामला एट्रिया कंस्ट्रक्शन्स और वेलबिल्ड मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच चल रहे विवाद से जुड़ा...
'माता-पिता की देखभाल करना बच्चों की क़ानूनी ज़िम्मेदारी, उनकी प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा होने की शर्त पर नहीं': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि माता-पिता की देखभाल और भरण-पोषण करने की बच्चों की ज़िम्मेदारी, मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ़ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिज़न्स एक्ट, 2007 के तहत बिना शर्त कानूनी ज़िम्मेदारी है। यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि बच्चे के पास माता-पिता की प्रॉपर्टी है या नहीं, या वह उसे विरासत में मिलेगी या नहीं। कोर्ट ने कहा कि बुज़ुर्ग और मेडिकली कमज़ोर माता-पिता को छोड़ना या उनकी अनदेखी करना, सीनियर सिटिज़न्स के लिए सम्मान, सेहत और एक अच्छी ज़िंदगी पक्की करने वाली संवैधानिक और कानूनी गारंटी...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूर्व स्टॉक ब्रोकर केतन पारेख के विदेश यात्रा के लिए 27 करोड़ जमा करने की शर्त रद्द की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में पूर्व स्टॉकब्रोकर केतन पारेख को विदेश यात्रा के लिए 27.06 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश देने वाला आदेश रद्द कर दिया। पारेख पर 1990 के दशक के आखिर और 2000 के दशक की शुरुआत में सिक्योरिटीज मार्केट में बड़े पैमाने पर हेरफेर करने का आरोप है और उनके खिलाफ मुकदमा चल रहा है।जस्टिस एन जे जमादार की सिंगल बेंच ने कहा कि स्पेशल कोर्ट का यह निर्देश पारेख की ट्रायल में मौजूदगी सुनिश्चित करने से जुड़ा हुआ नहीं था।कोर्ट ने कहा,“उक्त राशि जमा करने का निर्देश 2 जनवरी, 2025 के...
'MPDA Act के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन का इस्तेमाल पहले से ज़मानत पर चल रहे व्यक्ति को हिरासत में लेने के लिए नहीं किया जा सकता': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र खतरनाक गतिविधि निवारण अधिनियम, 1981 (MPDA Act) के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन (Preventive Detention) तब लागू नहीं किया जा सकता, जब बंदी उसी अपराध में पहले से ही ज़मानत पर हो, जिसके लिए उसे हिरासत में लिया गया, बिना हिरासत प्राधिकारी द्वारा यह विचार किए कि ज़मानत की शर्तें कथित पूर्वाग्रही गतिविधियों को रोकने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं। कोर्ट ने कहा कि जब किसी व्यक्ति को सक्षम आपराधिक न्यायालय द्वारा ज़मानत पर रिहा किया जाता है तो प्रिवेंटिव डिटेंशन के आदेश की...
महाराष्ट्र में सहकारी समिति के विभाजन के लिए CIDCO से पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र सहकारी समिति अधिनियम, 1960 की धारा 18 के तहत किसी सहकारी समिति के विभाजन के लिए CIDCO से पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है। नवगठित समिति का पंजीकरण ही क़ानून द्वारा परिकल्पित परिसंपत्तियों और देनदारियों के आवश्यक हस्तांतरण को प्रभावित करता है। न्यायालय ने कहा कि जहां क़ानून मौन है, वहां बाहरी अनुमोदन की आवश्यकता लागू करना विधायी योजना के विपरीत होगा।जस्टिस अमित बोरकर बालाजी टावर सहकारी आवास समिति और अन्य द्वारा दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने व्यवसायी की "विलासितापूर्ण जीवनशैली" पर विचार करते हुए पत्नी का गुजारा भत्ता ₹50,000 से बढ़ाकर ₹3.5 लाख किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महिला के मासिक गुजारा भत्ते को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 3.50 लाख रुपये कर दिया। कोर्ट ने पाया कि पुणे निवासी उसका व्यवसायी पति अपने दो बेटों के साथ एक आलीशान जीवन शैली जी रहा था, जबकि तलाकशुदा पत्नी, जिसने उसके साथ 16 साल बिताए, अब 1 लाख रुपये प्रति माह कमाने और अपना और अपनी बेटी का पालन-पोषण करने के लिए संघर्ष कर रही है।जस्टिस बर्गेस कोलाबावाला और जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन की खंडपीठ ने कहा कि रियल एस्टेट व्यवसायी पति मुकेश गड़ा ने पुणे स्थित पारिवारिक न्यायालय को...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्सप्रेस पब्लिकेशन्स को दक्षिणी राज्यों के बाहर 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' टाइटल इस्तेमाल करने से रोका
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्सप्रेस पब्लिकेशन्स (मदुरै) प्राइवेट लिमिटेड को उन दक्षिणी राज्यों के बाहर 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' टाइटल का उपयोग करने से रोक दिया, जिनके लिए उसे अधिकार दिए गए थे। न्यायालय ने कहा कि "इंडियन एक्सप्रेस" ट्रेडमार्क का स्वामित्व विशेष रूप से द इंडियन एक्सप्रेस (प्रा.) लिमिटेड के पास है।जस्टिस आर. आई. छागला की सिंगल बेंच ने 13 नवंबर, 2025 को इंडियन एक्सप्रेस द्वारा दायर अंतरिम आवेदन को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।कोर्ट ने माना कि एक्सप्रेस पब्लिकेशन्स द्वारा निर्दिष्ट...
बिजली अधिनियम की धारा 151 के तहत अनधिकृत व्यक्ति द्वारा दर्ज शिकायत पर संज्ञान लेने से पूरी कार्यवाही अमान्य: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि किसी अदालत द्वारा बिजली अधिनियम 2003 की धारा 151 के तहत अनधिकृत व्यक्ति द्वारा दायर शिकायत पर संज्ञान लिया जाता है तो यह केवल एक प्रक्रियात्मक त्रुटि नहीं बल्कि मूलभूत अवैधता है, जो पूरे मुकदमे को निष्फल कर देती है।जस्टिस एम. एम. नेर्लिकर की एकल पीठ राज्य सरकार की उस आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी।मामले के अनुसार, उड़नदस्ता (फ्लाइंग स्क्वाड) ने आरोपी के आइस...
रिलायंस पर ONGC के गैस कुओं से 1.55 अरब डॉलर की चोरी के आरोपों की CBI जांच की मांग पर बॉम्बे हाईकोर्ट का नोटिस
बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और उसके निदेशक मुकेश धीरूभाई अंबानी के खिलाफ कथित रूप से ONGC के पड़ोसी गैस कुओं से 1.55 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की प्राकृतिक गैस चोरी के आरोपों की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।बता दें, यह कथित गैस चोरी कृष्णा-गोदावरी बेसिन में आंध्र प्रदेश तट के पास स्थित गहरे समुद्री कुओं से होने का आरोप है।यह याचिका भारतीय नागरिक जितेंद्र पी. मरू द्वारा दायर की गई, जिसमें उन्होंने अदालत से CBI और केंद्र सरकार को कार्रवाई का निर्देश देने की...
न्यायिक कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग अन्य अदालतों में साक्ष्य के रूप में प्रयोग नहीं की जा सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट, MERC सुनवाई रिकॉर्ड करने वाली PIL खारिज
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र विद्युत विनियामक आयोग (MERC) की कार्यवाही की अनिवार्य ऑडियो–वीडियो रिकॉर्डिंग कराने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि न्यायिक अथवा अर्ध-न्यायिक कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग को किसी अन्य अदालत में 'साक्ष्य' के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंक्हड़ की खंडपीठ ने यह भी रेखांकित किया कि अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग पर पहले से ही स्पष्ट प्रतिबंध मौजूद है।खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कॉर्पोरेट वकील पल्लवी पुरकायस्थ की हत्या के लिए चौकीदार की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अगस्त, 2012 में मुंबई के वडाला इलाके में महिला कॉर्पोरेट वकील पल्लवी पुरकायस्थ की हत्या के दोषी चौकीदार की दोषसिद्धि बरकरार रखी।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने शहर की एक सत्र अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा पाए सज्जाद अहमद अब्दुल अजीज मुगल उर्फ पठान की दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखी।जज सेशन कोर्ट के जुलाई, 2014 के फैसले के खिलाफ दो अपीलों पर सुनवाई कर रहे थे, एक सज्जाद की और दूसरी राज्य की।सज्जाद ने मामले से बरी करने की मांग की जबकि राज्य ने सजा को आजीवन...
सिर्फ इतना कहना कि 'बेटी दुखी थी' या 'अक्सर रोती थी' 498A के तहत ससुराल वालों या पति को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं : बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी महिला के ससुराल वालों या पति को केवल इस आधार पर धारा 498A (क्रूरता) के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि महिला के माता-पिता ने कहा हो कि उनकी बेटी शादी में 'असंतुष्ट' थी या 'रोती रहती थी'।जस्टिस मिलिंद सथाये ने पुणे की सत्र न्यायालय के 17 नवंबर 1998 के फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें रामप्रकाश मनोहर को धारा 498A (क्रूरता) और धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत उसकी पत्नी रेखा की आत्महत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। रेखा ने नवंबर...
पुलिस वकीलों को धमका नहीं सकती, न ही उन्हें मुवक्किलों के साथ बातचीत का ब्यौरा बताने के लिए मजबूर कर सकती है: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक पुलिस अधिकारी पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए स्पष्ट किया कि पुलिस वकीलों पर अपने मुवक्किलों के साथ 'विशेषाधिकार प्राप्त' बातचीत का ब्यौरा देने का दबाव नहीं डाल सकती।जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और जस्टिस संदेश पाटिल की खंडपीठ इस बात से नाराज़ थी कि मुंबई के माटुंगा पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने एक सीनियर सिटीजन के बेटे द्वारा उसके खिलाफ दर्ज कराई गई FIR से संबंधित मामले में उसका प्रतिनिधित्व कर रहे दो वकीलों को कम से कम छह नोटिस जारी किए।जस्टिस मोहिते-डेरे ने...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने POSH मामले में सुनवाई से इनकार करने पर ICC रिपोर्ट को चुनौती देने वाली अकासा एयर के पायलट की रिट याचिका खारिज की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि POSH Act के तहत कार्यवाही में गवाहों से क्रॉस एक्जामिनेशन करने का अवसर न मिलने मात्र से जांच स्वतः ही दोषपूर्ण नहीं हो जाती, खासकर जहां मूल तथ्य स्वीकार कर लिए गए हों और कोई पूर्वाग्रह प्रदर्शित न हुआ हो। कोर्ट ने कहा कि आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के समक्ष कार्यवाही तथ्यान्वेषण प्रकृति की होती है। साक्ष्य संबंधी सख्त नियमों से बंधी नहीं होती।जस्टिस एन.जे. जमादार अकासा एयर में कैप्टन के रूप में कार्यरत पायलट द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें ICC की अंतिम...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 26/11 मुंबई आतंकी हमला मामले में अबू जंदल के खिलाफ मुकदमे पर लगी रोक हटाई
26/11 मुंबई आतंकी हमला मामले में दूसरे चरण की सुनवाई का रास्ता साफ करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (3 नवंबर) को विशेष अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें 2018 में शहर में घुसे 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों के कथित संचालक जबीउद्दीन अंसारी उर्फ अबू जंदल के खिलाफ मुकदमे पर रोक लगा दी गई थी।सिंगल जज जस्टिस आरएन लड्ढा ने विशेष अदालत का 2018 का आदेश रद्द कर दिया और जंदल के खिलाफ मुकदमा शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया।एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने पुष्टि की,"विस्तृत बहस के बाद आज बॉम्बे...
केवल एक पक्षकार के अनुपस्थित रहने पर तलाक नहीं दिया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि केवल एक पक्ष के अनुपस्थित रहने या लिखित बयान दाखिल न करने पर तलाक का आदेश पारित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने आगे कहा कि एकपक्षीय कार्यवाही में भी ट्रायल कोर्ट को विवाह विच्छेद करने से पहले याचिकाकर्ता के साक्ष्य का स्वतंत्र रूप से आकलन करना चाहिए और गुण-दोष के आधार पर निष्कर्ष दर्ज करने चाहिए।जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस संदेश डी. पाटिल की खंडपीठ फैमिली कोर्ट द्वारा 5 नवंबर 2024 को पारित तलाक के फैसले और डिक्री को चुनौती देने वाली फैमिली कोर्ट की अपील पर सुनवाई कर...
S.263 Succession Act | प्रोबेट रद्द करने के आधार उदाहरणात्मक, संपूर्ण नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (Indian Succession Act) की धारा 263 में प्रोबेट रद्द करने के लिए दिए गए स्पष्टीकरण (क) से (ङ) उदाहरणात्मक हैं, संपूर्ण नहीं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इन स्पष्टीकरणों में स्पष्ट रूप से उल्लिखित न की गई परिस्थितियां भी प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर प्रोबेट या प्रशासन पत्र के अनुदान को रद्द करने या रद्द करने के लिए "उचित कारण" बन सकती हैं।जस्टिस एम.एस. कार्णिक और जस्टिस एन.आर. बोरकर की खंडपीठ ने जस्टिस मनीष पिटाले द्वारा दिए गए...
इंटरव्यू समिति की गलत नियुक्ति से पूरी भर्ती रद्द: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर किसी भर्ती की पूरी चयन प्रक्रिया दोषपूर्ण (tainted) पाई जाती है, तो कुछ उम्मीदवारों को चुनकर बाकी को बाहर करने की “पिक एंड चूज़” नीति नहीं अपनाई जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरव्यू समिति द्वारा अपने अधिकारों को अधीनस्थ अधिकारियों को सौंपना कानूनन अस्वीकार्य है और इससे पूरी चयन प्रक्रिया अवैध हो जाती है।जस्टिस अनिल एस. किलोर और जस्टिस रजनीश आर. व्यास की खंडपीठ ने यह फैसला दो याचिकाओं पर सुनाते हुए दिया, जिन्हें भंडारा जिले में पुलिस पटिल पद पर चयनित...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने किसान आंदोलन से नागरिकों को हो रही असुविधा पर संज्ञान लिया, आंदोलन स्थल तुंरत खाली करने का निर्देश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को पूर्व विधायक ओमप्रकाश उर्फ बच्चू कडू के नेतृत्व में किसानों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग 44 (वर्धा रोड) पर जारी विरोध प्रदर्शन के कारण नागरिकों को हुई "पीड़ा और अशांति" का स्वतः संज्ञान लिया।नागपुर पीठ में बैठे सिंगल जज जस्टिस रजनीश व्यास ने अवकाशकालीन अदालत की अध्यक्षता करते हुए बच्चू कडू को तुरंत शांतिपूर्ण तरीके से धरना स्थल खाली करने का आदेश दिया और कहा कि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो पुलिस को कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।जज ने राष्ट्रीय...
बॉम्बे हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: एक बार ट्रायल का मुद्दा साबित होने पर बचाव का अधिकार देने के लिए अत्यधिक जमा राशि नहीं लगाई जा सकती
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि एक बार जब सारांश मुकदमे में प्रतिवादी किसी परीक्षणीय मुद्दे को सफलतापूर्वक स्थापित कर देता है तो उसे मुकदमे का बचाव करने के लिए बिना शर्त अनुमति मिलनी चाहिए। न्यायालय बचाव का अधिकार देने के लिए दावा राशि का एक बड़ा हिस्सा जमा कराने जैसी अत्यधिक बोझिल या कठोर शर्त नहीं थोप सकता।जस्टिस प्रफुल्ल एस. खुबलकर की पीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सिविल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई थी। सिविल जज ने अपने आदेश में HDFC लिमिटेड द्वारा दायर सारांश...




















