बॉम्बे हाईकोर्ट
'हद पार मत कीजिए': हाईकोर्ट ने Republic TV से अनिल अंबानी से जुड़े मामलों की कवरेज में नरमी बरतने को कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को Republic TV और उसके एडिटर-इन-चीफ़ अर्णब गोस्वामी से मौखिक रूप से कहा कि वे उद्योगपति अनिल अंबानी और Reliance ग्रुप की कंपनियों से जुड़ी जाँच की रिपोर्टिंग करते समय अपमानजनक विशेषणों का इस्तेमाल करने से बचें।चैनल के ख़िलाफ़ रोक लगाने की मांग करने वाले अंबानी के मानहानि के मुक़दमे की सुनवाई करते हुए जस्टिस मिलिंद जाधव ने हालिया कवरेज में इस्तेमाल की गई सनसनीखेज़ टैगिंग और तीखी टिप्पणी के ख़िलाफ़ कड़ी टिप्पणियां कीं।जज ने चैनल की तरफ़ से पेश वकील से कहा,"अपनी बयानबाज़ी...
अनीता आडवाणी का दावा खारिज, राजेश खन्ना संग संबंध को 'विवाह' मानने से इनकार: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेत्री अनीता आडवाणी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के साथ अपने संबंध को विवाह का दर्जा देने की मांग की थी।जस्टिस शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने अनीता आडवाणी द्वारा दायर प्रथम अपील को खारिज करते हुए 2017 में मुंबई के डिंडोशी सिविल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। सिविल कोर्ट ने उनके मुकदमे को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था।अनीता आडवाणी का दावा था कि वह राजेश खन्ना के साथ लगभग एक दशक तक लिव-इन संबंध में रहीं और वर्ष 2012 में उनके निधन तक...
क्या 50 साल से अधिक उम्र की महिलाएं ART सेवाएं ले सकती हैं? कोर्ट करेगा फैसला: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट यह तय करने जा रहा है कि क्या 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं सहायक प्रजनन तकनीक (ART) के माध्यम से गर्भधारण कर बच्चे को जन्म देने के लिए चिकित्सकीय रूप से सक्षम मानी जा सकती हैं।यह मुद्दा जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस अभय मंत्री की खंडपीठ के समक्ष दो याचिकाओं के माध्यम से उठा, जिन्हें 55 वर्ष और 53 वर्ष की महिलाओं ने दायर किया है। दोनों याचिकाओं में Assisted Reproductive Technology Act, 2021 की धारा 21(g) की वैधता को चुनौती दी गई है।उक्त प्रावधान के तहत महिलाओं के लिए ART सेवाओं...
आपराधिक मामले में कर्मचारी के बरी होने से उसे सस्पेंशन की अवधि के लिए पूरी सैलरी और बकाया वेतन का अपने-आप अधिकार नहीं मिल जाता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी आपराधिक मामले में कर्मचारी के बरी होने से उसे सस्पेंशन की अवधि के लिए पूरी सैलरी और बकाया वेतन का अपने-आप अधिकार नहीं मिल जाता। कोर्ट ने कहा कि पूरी सैलरी का अधिकार हर मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर, और लागू सर्विस नियमों के तहत सक्षम अधिकारी द्वारा इस्तेमाल किए गए विवेक पर निर्भर करता है।जस्टिस एस.एम. मोदक और जस्टिस संदीप वी. मार्ने की डिवीज़न बेंच एक नगर निगम कर्मचारी द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने अपनी सस्पेंशन अवधि को...
'किसी निजी व्यक्ति द्वारा सरकारी कर्मचारियों पर हमला 'नैतिक पतन' का अपराध': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी निजी व्यक्ति द्वारा सरकारी कर्मचारियों पर हमला, खासकर किसी गैर-कानूनी आंदोलन के दौरान, 'नैतिक पतन' (Moral Turpitude) से जुड़ा अपराध माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे काम सामाजिक कर्तव्य का उल्लंघन दिखाते हैं और सार्वजनिक व्यवस्था को कमज़ोर करते हैं। इसलिए ये 'दुराचार' और समाज के मान्य मानकों के विपरीत आचरण की श्रेणी में आते हैं।जस्टिस रजनीश आर. व्यास एक आरोपी द्वारा दायर आपराधिक अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे। आरोपी ने दंगा करने, सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने और...
मुकेश अंबानी की रिलायंस के खिलाफ कथित 'गैस चोरी' की याचिका प्रक्रिया का दुरुपयोग, इससे प्रतिष्ठा को नुकसान होता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
कथित 'गैस चोरी' मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और उसके निदेशक मुकेश धीरूभाई अंबानी के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि ऐसी याचिकाएं इन संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती हैं और उनकी वर्तमान या भविष्य की व्यावसायिक साझेदारियों के लिए खतरा बन सकती हैं।गौरतलब है कि जितेंद्र मारू नाम के कार्यकर्ता ने RIL और अंबानी के खिलाफ CBI जांच की मांग की थी। आरोप था कि उन्होंने आंध्र प्रदेश के तट से दूर कृष्णा...
रिलायंस के खिलाफ CBI जांच की मांग खारिज, बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका ठुकराई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसके निदेशक मुकेश धीरूभाई अंबानी के खिलाफ CBI जांच की मांग वाली याचिक खारिज की।बता दें, उक्त याचिका में आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने ओएनजीसी के गैस क्षेत्रों से अवैध रूप से प्राकृतिक गैस निकाली।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस सुमन श्याम की खंडपीठ ने यह आदेश सुनाया।याचिका में आरोप था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने 2004 से 2013-14 के बीच आंध्र प्रदेश के कृष्णा-गोदावरी बेसिन में अपने कुओं से तिरछी ड्रिलिंग कर ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन के गैस भंडार...
भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी को जेल कंप्यूटर उपयोग की अनुमति पर विचार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
बॉम्बे हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में आरोपी सुरेंद्र गाडलिंग को साक्ष्यों की समीक्षा के लिए जेल में कंप्यूटर उपयोग की अनुमति देने के सवाल पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाटा की पीठ ने गाडलिंग को निजी लैपटॉप इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, लेकिन यह संकेत दिया कि जेल में उपलब्ध कंप्यूटर के उपयोग पर विचार किया जा सकता है।अदालत ने कहा,“लैपटॉप के उपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे जेल सुरक्षा से जुड़े मुद्दे हैं और यह गलत...
मजिस्ट्रेट द्वारा केस भेजे बिना सेशंस कोर्ट ड्रग्स एंड कॉस्मैटिक्स एक्ट के तहत अपराधों का संज्ञान नहीं ले सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि सेशंस कोर्ट ड्रग्स एंड कॉस्मैटिक्स एक्ट के तहत अपराधों का सीधा संज्ञान तब तक नहीं ले सकता, जब तक कि मैजिस्ट्रेट द्वारा केस उसे न भेजा जाए, जैसा कि CrPC की धारा 193 के तहत ज़रूरी है। कोर्ट ने पाया कि एक्ट में ऐसी कोई स्पष्ट व्यवस्था न होने के कारण, जो सीधे संज्ञान की अनुमति देती हो, CrPC के तहत वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।जस्टिस एन.जी. जमादार एक फार्मास्युटिकल फर्म और उसके पार्टनर्स द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें ड्रग्स एंड...
POSH Act पर अहम फैसला: ICC रिपोर्ट के आधार पर ही सजा दे सकता है नियोक्ता, अलग जांच जरूरी नहीं- बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि नियोक्ता आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की रिपोर्ट के आधार पर ही कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। इसके लिए अलग से विभागीय जांच या चार्जशीट जरूरी नहीं है।जस्टिस आर आई छागला और जस्टिस अद्वैत एम सेठना की खंडपीठ ने यह फैसला IIT Bombay के एक प्रोफेसर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उन्होंने यौन उत्पीड़न के आरोप साबित होने के बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को चुनौती दी थी।हाईकोर्ट ने स्पष्ट...
ग्राम पंचायतों पर अंतरिम व्यवस्था: सरपंच रहेंगे प्रशासक, पर बड़े फैसलों पर रोक- बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में ग्राम पंचायतों से जुड़े एक अहम मामले में अंतरिम राहत देते हुए कहा कि कार्यकाल पूरा कर चुके सरपंच फिलहाल प्रशासक के रूप में काम कर सकते हैं, लेकिन वे कोई नीतिगत या बड़े वित्तीय फैसले नहीं ले सकेंगे।जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस अभय मंत्री की खंडपीठ ने 18 मार्च को यह आदेश देते हुए राज्य सरकार के उस निर्णय पर रोक नहीं लगाई, जिसके तहत करीब 14,500 ग्राम पंचायतों में चुनाव होने तक मौजूदा या पूर्व सरपंचों को प्रशासक नियुक्त किया गया।अदालत ने कहा कि विशेष परिस्थितियों...
प्रधानमंत्री पर पोस्ट मामले में यूट्यूबर को राहत, बॉम्बे हाइकोर्ट ने हलफनामा दाखिल करने की दी अनुमति
बॉम्बे हाइकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में आरोपी डॉक्टर और यूट्यूबर डॉ. संग्राम पाटिल को राहत देते हुए उन्हें हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी।जस्टिस अश्विन भोबे की एकल पीठ ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता विदेश (UK) लौटना चाहते हैं तो उन्हें यह आश्वासन देना होगा कि वे जांच में लगातार सहयोग करते रहेंगे। अदालत ने मुंबई पुलिस को निर्देश दिया कि इस अनुरोध पर शीघ्र निर्णय लिया जाए।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट ने दलील दी कि डॉ. पाटिल पहले से ही जांच...
जांच करें कि क्या मुंबई की सड़कों पर बांग्लादेशी प्रवासी फेरी लगा रहे हैं, कानून के अनुसार कार्रवाई करें: हाईकोर्ट ने BMC और पुलिस को निर्देश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (23 मार्च) को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और मुंबई पुलिस को आदेश दिया कि वे शहर की सड़कों पर फेरी लगाने वाले सभी लोगों की पहचान का 'पूरी तरह' से सत्यापन करें। साथ ही यह भी जांच करें कि क्या इनमें कोई 'बांग्लादेशी' या अन्य 'प्रवासी' शामिल हैं जो फेरी लगाने के काम में लगे हैं। यदि ऐसे लोग मिलते हैं, तो अधिकारियों को उनके खिलाफ 'उचित' कार्रवाई करने का आदेश दिया गया।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाटा की खंडपीठ ने महाराष्ट्र हॉकर संघ (फेरीवालों का एक संगठन) द्वारा उनके समक्ष...
ग्राम पंचायत से नगर निगम में शामिल किए गए कर्मचारियों को 'समान काम के लिए समान वेतन' का अधिकार: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि ग्राम पंचायतों से नगर निगम में शामिल किए गए कर्मचारी, यदि नियमित कर्मचारियों के समान ही काम करते हैं, तो वे वेतन में समानता (बराबरी) के हकदार हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसी परिस्थितियों में 'समान काम के लिए समान वेतन' से इनकार करना भेदभाव के समान है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करता है।जस्टिस जी. एस. कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की डिवीज़न बेंच 28 कर्मचारियों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इन कर्मचारियों को मूल रूप से ग्राम...
धारा 151 CPC के तहत निष्फल मुकदमों को समाप्त कर सकती है सिविल कोर्ट: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी मुकदमे का मूल कारण (cause of action) बाद की घटनाओं के चलते समाप्त हो जाता है, तो सिविल कोर्ट अपनी निहित शक्तियों (Section 151 CPC) का प्रयोग करते हुए ऐसे मुकदमे को निष्फल (infructuous) घोषित कर खारिज कर सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मुकदमों को केवल अंतरिम आदेश बनाए रखने या भविष्य की संभावनाओं के आधार पर लंबित नहीं रखा जा सकता।यह टिप्पणी जस्टिस संदीप वी. मार्ने ने भारत संघ द्वारा दायर सिविल रिवीजन आवेदन पर सुनवाई करते हुए की। याचिका सिटी सिविल कोर्ट के...
RTE Act के तहत 25% सीटें आरक्षित करने की योजना का इस्तेमाल एक ही बच्चे के एडमिशन के लिए बार-बार नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) के तहत वंचितों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की योजना इसलिए बनाई गई ताकि ज़्यादा से ज़्यादा योग्य बच्चों को शिक्षा के अवसर मिल सकें, लेकिन यह योजना किसी माता-पिता को यह अधिकार नहीं देती कि वे एक ही बच्चे के लिए बार-बार सीट की मांग करें। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में यह फैसला सुनाया।जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस हितेन वेनेगांवकर की डिवीज़न बेंच ने पिता की याचिका खारिज की। पिता ने अपने घर के पास के एक स्कूल में अपने बच्चे के लिए सीट देने की 'ज़िद' की थी,...
“नाम में हुई क्लर्क की गलती कानूनी अधिकार को खत्म नहीं कर सकती”: बॉम्बे हाईकोर्ट ने रेलवे दुर्घटना में मौत के मुआवज़े के दावे पर फिर से विचार करने का आदेश दिया
बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि रेलवे दुर्घटना से जुड़े मुआवज़े के दावे को सिर्फ़ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता कि सीज़न टिकट पर यात्री के नाम में कोई छोटी-मोटी गलती है, जबकि टिकट पर लिखा पहचान पत्र (ID) नंबर यात्री की पहचान की पुष्टि करता हो। कोर्ट ने कहा कि अगर यात्री की पहचान रेलवे अधिकारियों द्वारा जारी पहचान पत्र जैसे भरोसेमंद सबूतों से साबित हो जाती है तो टिकट पर नाम में हुई क्लर्क की गलती या अधूरा नाम छपा होने से मुआवज़े का दावा करने का कानूनी अधिकार खत्म नहीं हो जाता।जस्टिस जितेंद्र...
75 साल पुराना पारिवारिक विवाद खत्म: बॉम्बे हाइकोर्ट ने यरवड़ा संपत्ति के बंटवारे का दिया आदेश
बॉम्बे हाइकोर्ट ने पुणे के यरवड़ा क्षेत्र की एक संपत्ति के बंटवारे का आदेश देकर 75 साल पुराने पारिवारिक विवाद को आंशिक रूप से समाप्त कर दिया।जस्टिस फरहान पी. दबाश इस लंबे समय से लंबित दीवानी मामले की सुनवाई कर रहे थे, जो वर्ष 1950 में मिया मोहम्मद हाजी जनमोहम्मद छोटानी के वारिसों द्वारा दायर किया गया। याचिका में संपत्ति में हिस्सेदारी तय करने और बंटवारे की मांग की गई।मामले में शुरुआत में ही हाइकोर्ट ने संपत्ति के प्रबंधन के लिए कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया था। बाद में वारिसों के हिस्से तय करते हुए...
वेतन को अफसरशाही की देरी का बंधक नहीं बनाया जा सकता: बॉम्बे हाइकोर्ट सख्त, 60 दिन की समयसीमा तय
बॉम्बे हाइकोर्ट ने शिक्षकों के वेतन में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण वेतन रोका नहीं जा सकता। अदालत ने शालार्थ प्रणाली से जुड़े मामलों में 60 दिनों की समयसीमा तय की।जस्टिस विभा कंकणवाड़ी और जस्टिस हितेन एस. वेनेगावकर की खंडपीठ सहायक शिक्षक विजय उत्तम चव्हाण की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने शालार्थ प्रणाली में नाम शामिल कर वेतन जारी करने की मांग की थी।अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति और सहायता प्राप्त पद पर स्थानांतरण पहले ही सक्षम...
LPG कमी पर बॉम्बे हाइकोर्ट ने याचिका बंद की, केंद्र के आश्वासन पर जताया भरोसा
बॉम्बे हाइकोर्ट ने एलपीजी सिलेंडरों की कथित कमी को लेकर दायर याचिका को बंद कर दिया है क्योंकि केंद्र सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि स्थिति को घरेलू और कूटनीतिक स्तर पर संभाला जा रहा है।जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोड़े की खंडपीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा दायर हलफनामे पर विचार करते हुए यह फैसला सुनाया।केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में हो रहे बदलावों के बावजूद नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।अदालत को...
















