बॉम्बे हाईकोर्ट

लोगों को विरोध करने से नहीं रोक सकते, हम एक लोकतंत्र हैं: मराठा नेता मनोज जारांगे के मुंबई मार्च के खिलाफ याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सवाल किया कि वह मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जारांगे-पाटिल को विरोध करने से कैसे रोक सकता है, यह देखते हुए कि भारत एक लोकतंत्र है और "आंदोलन करने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है"।चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की डिवीजन बेंच पाटिल द्वारा दिए गए "मुंबई मार्च" के आह्वान के संबंध में निर्देश मांगने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पाटिल ने हाल ही में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर अपनी 12 दिन की भूख हड़ताल खत्म की थी।याचिकाकर्ता का...

गणेश चतुर्थी पर 12 दिन की शराबबंदी तर्कहीन: बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकारा, कहा- अस्पताल मरीजों से भर जाएंगे

गणेश चतुर्थी के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से खासकर पुणे जिले में 12 दिनों तक शराब की बिक्री पर लगाए गए व्यापक प्रतिबंध पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने ऐसी व्यापक शराबबंदी को तर्कहीन बताते हुए कहा कि केवल यह मान लेना उचित नहीं है कि शराब पीने वाला हर व्यक्ति त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करेगा।चीफ जस्टिस ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि अदालत ऐसी व्यापक पाबंदी की व्यवस्था को स्वीकार नहीं करती। उन्होंने कहा...

सड़क पर दो लोगों का जोर-जोर से चिल्लाना संज्ञेय अपराध नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने FIR रद्द की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक सड़क पर दो लोगों का एक-दूसरे से सिर्फ जोर-जोर से चिल्लाकर बात करना, अपने आप में महाराष्ट्र निषेध अधिनियम, 1949 की धारा 85(1) के तहत संज्ञेय अपराध नहीं बनता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इस आरोप के आधार पर कि दोनों व्यक्ति शराब के नशे में एक-दूसरे पर चिल्ला रहे थे, उनके खिलाफ आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता, जब तक अश्लीलता, अनैतिकता या आपत्तिजनक आचरण का कोई ठोस आरोप न हो।जस्टिस मिलिंद एन. जाधव दो आरोपियों की उस अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें पिंपरी पुलिस...

फैमिली कोर्ट ने पत्नी को याद दिलाए पवित्र कर्तव्य, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- पिछड़ी सोच वाली टिप्पणी, की आलोचना

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में पुणे फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी के पति के प्रति तथाकथित 'पवित्र कर्तव्यों' पर उपदेश देने और नाबालिग लड़के की कस्टडी उसके पिता को सौंपने के फैसले पर नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने कहा कि जजों को टिप्पणियां करते समय 'सावधान' रहना चाहिए और किसी भी 'गैर-जरूरी' या 'असंगत' टिप्पणी से बचना चाहिए।बता दें, फैमिली कोर्ट के जज गणेश घुले ने 16 मई को आदेश पारित कर नाबालिग लड़के की कस्टडी उसके पिता को सौंप दी थी। उन्होंने यह टिप्पणी की थी कि अगर कोई महिला अपने पति के प्रति इन 'पवित्र...

बॉम्बे हाईकोर्ट का DGP से सवाल: सरकारी ज़मीन सौदे के मामले में कथित तौर पर शामिल होने के बावजूद डिप्टी CM के बेटे का नाम क्यों नहीं?

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम के बेटे और राज्यसभा सांसद पार्थ पवार के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस से पूछा है कि मुंधवा ज़मीन सौदे के मामले में उन्हें आरोपी क्यों नहीं बनाया गया?सिंगल-जज जस्टिस माधव जामदार ने गौर किया कि अल्मेडा एंटरप्राइजेज LLP नाम की एक कंपनी ने पुणे के मुंधवा इलाके में 40 एकड़ सरकारी ज़मीन, उसकी असल कीमत से बहुत कम दाम पर खरीदी थी।जज ने देखा कि मामले की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ज़मीन खरीदने वाली कंपनी के दो डायरेक्टर थे - पार्थ पवार और...

BREAKING | चौकीदार चोर टिप्पणी पर राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि मामला रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (8 सितंबर) को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला रद्द करने से इनकार किया। यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "चोरों के सरदार" और "कमांडर-इन-थीफ" (चोरों का कमांडर) कहने वाली उनकी कथित टिप्पणियों से जुड़ा है।गांधी ने इस मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट के समन को चुनौती दी और तर्क दिया कि बीजेपी कार्यकर्ता द्वारा दायर शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पार्टी का नाम नहीं लिया था और किसी "पहचान योग्य या निश्चित वर्ग" को निशाना...

कमियां दूर होने पर फ़ूड बिज़नेस लाइसेंस का सस्पेंशन खत्म होना चाहिए, कानूनी लड़ाई के लिए मजबूर न करें: महाराष्ट्र FDA से हाईकोर्ट

महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) द्वारा प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंशन के मामलों से निपटने के तरीके को देखते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में साफ़ किया कि जब कोई प्रतिष्ठान, जिसका लाइसेंस अथॉरिटी ने सस्पेंड किया है, कमियों को दूर कर लेता है और ऑटो-जेनरेटेड रिपोर्ट नियमों का पालन दिखाती है तो अथॉरिटी को सस्पेंशन रद्द कर देना चाहिए।एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की डिवीज़न बेंच ने कहा कि FDA को ऐसे प्रतिष्ठानों को लाइसेंस सस्पेंशन के खिलाफ कोर्ट जाने के लिए...

गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए, मोबाइल भी बिना जब्ती पंचनामा रखा; बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को 2 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने एक 26 वर्षीय युवक की गिरफ्तारी को कानून की तय प्रक्रिया के खिलाफ मानते हुए महाराष्ट्र सरकार को उसे 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। युवक को पुलिस ने गिरफ्तार करते समय न तो गिरफ्तारी के आधार बताए थे और न ही उसे कानून के अनुसार उचित नोटिस दिया गया था।जस्टिस उर्मिला जोशी-फल्के और जस्टिस राज डी. वाकोडे की डिवीजन बेंच ने कहा कि राज्य के अधिकारियों द्वारा किसी व्यक्ति के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन किए जाने पर हाईकोर्ट...

सिर्फ़ इसलिए आश्रित माँ को फ़ैमिली पेंशन देने से मना नहीं किया जा सकता कि उनके दूसरे बच्चे भी ज़िंदा हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर सर्किट बेंच ने कहा कि किसी मृतक "अविवाहित" सरकारी कर्मचारी की आश्रित माँ को सिर्फ़ इस आधार पर फ़ैमिली पेंशन देने से मना नहीं किया जा सकता कि उनके दूसरे बच्चे भी ज़िंदा हैं, अगर वे बच्चे उन्हें आर्थिक सहारा देने की स्थिति में नहीं हैं।जस्टिस मिलिंद एन. जाधव और जस्टिस नंदेश एस. देशपांडे की डिवीज़न बेंच ने मृतक की माँ के फ़ैमिली पेंशन के दावे को मंज़ूरी दी; उनकी तीन शादीशुदा बेटियां भी हैं।महाराष्ट्र सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1982 के नियम 116 के तहत माता-पिता को पेंशन तभी...

MBBS स्टूडेंट को पहले साल की परीक्षा के लिए चार से ज़्यादा मौके नहीं मिल सकते: बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि पहले प्रोफेशनल MBBS कोर्स कर रहे स्टूडेंट को पहले साल के लिए चार से ज़्यादा मौके नहीं दिए जा सकते, चाहे स्टूडेंट ने हर मौके में किसी भी विषय की परीक्षा दी हो। कोर्ट ने एक MBBS स्टूडेंट की याचिका खारिज की, जिसमें उसने चौथी बार एनाटॉमी की परीक्षा में बैठने की अनुमति मांगी थी; कोर्ट ने कहा कि वह पहले ही पहले साल के MBBS कोर्स के लिए चार मौके ले चुकी है।जस्टिस फिरदोष पी. पूनीवाला और जस्टिस आर. आई. छागला की डिवीज़न बेंच एक स्टूडेंट द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी,...

पेंशन और फैमिली पेंशन पाने वाले सीनियर सिटीजन को भरण-पोषण का अधिकार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि नियमित पेंशन और फैमिली पेंशन प्राप्त कर रहे तथा स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम सीनियर सिटीजन को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 की धारा 4 के तहत भरण-पोषण का दावा करने का अधिकार नहीं है।जस्टिस नंदेश एस. देशपांडे ने 65 वर्षीय पिता की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। पिता ने वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिकरण और अपीलीय प्राधिकारी के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें अधिनियम की धारा 5 के तहत उनकी अर्जी खारिज कर दी गई। याचिकाकर्ता प्रतिवादी...

संयुक्त परिवार के सदस्यों के बीच बंटवारे के मुकदमे में बाहरी व्यक्ति द्वारा की गई संपत्ति की बिक्री को चुनौती नहीं दी जा सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि संयुक्त परिवार की संपत्ति को किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति के पक्ष में हस्तांतरित किए जाने को परिवार के सदस्यों के बीच चल रहे बंटवारे के मुकदमे का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिस बाहरी व्यक्ति ने संपत्ति हस्तांतरित की है, उसके पास उस संपत्ति का मालिकाना हक था या नहीं, यह सवाल संयुक्त परिवार की संपत्तियों के बंटवारे से जुड़े मुकदमे में तय नहीं किया जा सकता।जस्टिस संदीप वी.मारने ने यह टिप्पणी एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें...

चांद तक पहुंच गए लेकिन जाति व्यवस्था अब भी कायम: मैनुअल स्कैवेंजिंग पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, महाराष्ट्र की भेदभावपूर्ण नीति रद्द

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मैनुअल स्कैवेंजिंग की प्रथा जारी रहने पर महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि 21वीं सदी में भारत चांद के दूसरे छोर तक पहुंचने का गौरव हासिल कर रहा है, लेकिन जाति व्यवस्था जैसी सामाजिक बुराई अब भी समाज में मौजूद है। हाईकोर्ट ने कहा कि यही व्यवस्था आज भी कुछ लोगों को मानव गरिमा से नीचे का काम करने के लिए मजबूर करती है।जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने मैनुअल स्कैवेंजिंग से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार की 2019 और 2025 की...

बहू को घरेलू हिंसा कानून के तहत मिली सुरक्षा खत्म करने के लिए सीनियर सिटिज़न एक्ट का हथियार की तरह प्रयोग नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने फैसला सुनाया कि 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' के तहत किसी सीनियर सिटीजन की अर्जी का इस्तेमाल अदालती आदेशों को नाकाम करने या कोर्ट के आदेश से सुरक्षित किसी पक्ष को परेशान करने के लिए नहीं किया जा सकता।जस्टिस अजीत बी. कदेथांकर ने अपनी बहू को घर से बेदखल करने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा,"यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि ऐसे कल्याणकारी कानून [2007 का अधिनियम] के तहत कार्यवाही नेक नीयत, नेक इरादे और नेक मकसद से की जानी...

ट्रस्ट पदाधिकारियों का आपसी विवाद SC छात्रों के स्कूल की 11 साल की अनुदान राशि रोकने का आधार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि किसी रजिस्टर्ड ट्रस्ट के दो पदाधिकारियों के बीच आपसी विवाद को अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए स्कूल चलाने हेतु दी जाने वाली सरकारी अनुदान राशि रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि बालाजी युवक मंडल को 11 वर्षों की बकाया अनुदान राशि जारी की जाए। जस्टिस किशोर सी. संत और जस्टिस अजित बी. कदेतकर की खंडपीठ ने कहा कि पदाधिकारियों के बीच कथित विवाद के कारण अनुदान रोकना उचित नहीं है। ऐसा करने से योजना का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।कोर्ट...

श्रुति हासन के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री हटाएं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्ट्रेस श्रुति हासन से जुड़ी ऐसी आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को दिया, जो उनके सम्मान और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करती है।जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि श्रुति हासन ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रथम दृष्टया बेहद मजबूत मामला पेश किया। कोर्ट ने यह आदेश श्रुति हासन की ओर से दायर कमर्शियल मुकदमे की सुनवाई के दौरान दिया। मुकदमा 'द पायनियर' का प्रकाशन करने वाली कंपनी CMYK प्रिंटेक से अलग मामले में विभिन्न संस्थाओं और अज्ञात लोगों के...

Hanuman Chalisa Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवनीत राणा और उनके पति के खिलाफ FIR पर राज्य से मांगा स्पष्टीकरण

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (2 सितंबर) को महाराष्ट्र सरकार को हलफ़नामा (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें यह साफ़ करना होगा कि पूर्व सांसद और अब बीजेपी नेता नवनीत राणा और उनके विधायक पति रवि राणा के ख़िलाफ़ FIR कब दर्ज की गई। यह मामला 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निजी आवास के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने के उनके आह्वान से जुड़ा है।सिंगल-जज जस्टिस शिवकुमार डिगे ने राज्य को हलफ़नामे पर यह स्पष्ट करने का आदेश दिया कि राणा दंपत्ति के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा...

मुस्लिम शब्द आगे या पीछे लगाने से जाति प्रमाण पत्र रद्द नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि 'मुस्लिम' एक धर्म है, न कि कोई जाति। इसलिए सिर्फ़ इसलिए जाति प्रमाण पत्र को अमान्य नहीं किया जा सकता, क्योंकि जाति के नाम के आगे या पीछे 'मुस्लिम' शब्द लिखा है। कोर्ट ने जाति जांच समिति के उस फ़ैसले को रद्द किया, जिसमें 12वीं कक्षा के एक छात्र का प्रमाण पत्र इस आधार पर अमान्य कर दिया गया था कि जिन दस्तावेज़ों पर उसने भरोसा किया - जिनमें उसके पूर्वजों के संविधान-पूर्व (आज़ादी से पहले के) दस्तावेज़ भी शामिल थे - उनमें उनकी जाति 'मुसलमान लोहार', 'लोहार मुस्लिम' आदि लिखी...

एक साल के बाद बर्थ रजिस्ट्रेशन में देरी होने पर सिर्फ़ जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास ही आदेश दे सकते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि जिस जन्म का रजिस्ट्रेशन होने के एक साल के भीतर नहीं हुआ, उसका रजिस्ट्रेशन 'जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1969' की धारा 13(3) के तहत केवल जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास के आदेश पर ही किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट या मामलातदार एक साल से ज़्यादा की देरी वाले रजिस्ट्रेशन के मामले में अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकते, और मध्य प्रदेश के नियमों के उस नियम 9 को रद्द किया, जिसमें ऐसा प्रावधान था।जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस एक रिट याचिका पर विचार कर...