हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

Update: 2026-06-06 17:00 GMT
High Courts

देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (01 जून, 2026 से 05 जून, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

पेनल्टी के आधार पर पुरानी रिक्तियों के लिए पदोन्नति नहीं रोकी जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी की पदोन्नति पर विचार करते समय पिछले सात वर्षों के सेवा रिकॉर्ड की गणना संबंधित पद की रिक्ति उत्पन्न होने की तिथि से की जाएगी, न कि उस घटना की तिथि से जिसके आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई हो।

जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने कहा कि किसी कर्मचारी पर लगाई गई दंडात्मक कार्रवाई (Penalty) का प्रभाव पदोन्नति पर पड़ सकता है, लेकिन यह प्रभाव केवल उन पदोन्नतियों पर लागू होगा जो दंड आदेश जारी होने के बाद दी जानी हैं। जिन पदोन्नतियों के लिए रिक्तियां दंड आदेश से पहले उत्पन्न हो चुकी थीं, उन पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

दो साल बाद बिना किसी धोखाधड़ी सबूत के भवन निर्माण की अनुमति रद्द नहीं कर सकता निगम: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर नगर निगम द्वारा जारी भवन निर्माण अनुमति निरस्तीकरण और ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) नोटिस को रद्द करते हुए कहा कि एक बार सक्षम प्राधिकारी द्वारा वैध रूप से भवन निर्माण की अनुमति दिए जाने और उसके आधार पर निर्माण कार्य हो जाने के बाद, धोखाधड़ी या तथ्य छिपाने का कोई प्रमाण न होने पर अनुमति वापस नहीं ली जा सकती।

जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने कहा कि बिना किसी धोखाधड़ी के सबूत के, नागरिक द्वारा भारी निवेश कर निर्माण किए जाने के बाद अनुमति रद्द करना मनमाना, अनुचित और संविधान के अनुच्छेद 300A के तहत संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन है।

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: पिता की सहमति के बिना सिंगल मदर भी कर सकती है बच्चे के पासपोर्ट के लिए आवेदन, बशर्ते...

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक सिंगल मदर अपने नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट के लिए पिता की सहमति या हस्ताक्षर के बिना भी आवेदन करने की हकदार है, बशर्ते पासपोर्ट नियमों के तहत निर्धारित घोषणाएँ जमा की गई हों।

पासपोर्ट नियम, 1980 के तहत—विशेष रूप से पासपोर्ट आवेदन पत्र भरने के लिए दिशानिर्देशों के कॉलम 16 और पासपोर्ट मैनुअल/दिशानिर्देशों के क्लॉज़ 4.8 के तहत—एक सिंगल पेरेंट (एकल अभिभावक) निर्धारित हलफनामा/घोषणाएं जमा करके दूसरे अभिभावक की सहमति के बिना भी अपने नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकता है।

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वैध अनुमति के बिना कोर्ट 'जल अधिनियम' के तहत अपराध का संज्ञान नहीं ले सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या बोर्ड द्वारा अधिकृत किसी सक्षम अधिकारी की ओर से 'जल अधिनियम' की धारा 49 के तहत शिकायतकर्ता के पक्ष में वैध अनुमति न होने पर कोई भी आपराधिक कोर्ट इस अधिनियम के तहत किसी अपराध का संज्ञान नहीं ले सकता। अधिनियम की धारा 49 के अनुसार, कोई भी कोर्ट इस अधिनियम के तहत किसी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेगा, जब तक कि शिकायत निम्नलिखित द्वारा न की गई हो: (क) प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या उसकी ओर से इस संबंध में अधिकृत कोई अधिकारी; या

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

विशेष विवाह अधिनियम में तलाक याचिका के लिए एक वर्ष की प्रतीक्षा अवधि असाधारण परिस्थितियों में माफ की जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि विशेष विवाह अधिनियम, 1954 (Special Marriage Act) के तहत तलाक की याचिका दाखिल करने से पहले निर्धारित एक वर्ष की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि को असाधारण परिस्थितियों में माफ किया जा सकता है।

अदालत ने कहा कि यदि वैवाहिक संबंध केवल औपचारिक रूप से अस्तित्व में हो, उसका कभी वास्तविक निर्वहन न हुआ हो और विवाह जारी रखने से पक्षकारों की कठिनाइयां ही बढ़ें, तो अदालत इस अवधि में छूट दे सकती है।

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

पति के जीवित रहते मंगलसूत्र हटाना मानसिक क्रूरता, तलाक का आदेश बरकरार: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि पति के जीवित रहते हिंदू पत्नी द्वारा थाली (मंगलसूत्र) हटाना पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। जस्टिस पी. वडामलाई ने पति को दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखते हुए पत्नी की दूसरी अपील खारिज कर दी।

मामला 1977 में विवाह करने वाले एक दंपति से जुड़ा था। पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी लगातार उस पर अन्य महिलाओं से अवैध संबंध रखने के आरोप लगाती रही, उसके वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें भेजती रही और बाद में ईसाई धर्म भी अपना लिया।

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

लोक अदालतें तलाक़ नहीं दे सकतीं, उनके पास फ़ैसला सुनाने का अधिकार क्षेत्र नहीं है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी लोक अदालत या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के पास तलाक़ का आदेश देने की कोई कानूनी क्षमता या अधिकार क्षेत्र नहीं है, क्योंकि यह अधिकार पूरी तरह से नियमित सिविल और फ़ैमिली कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है।

अपने 11 पन्नों के आदेश में जस्टिस शेखर बी सराफ़ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने DLSA, उन्नाव की कड़ी आलोचना की। बेंच ने DLSA पर फ़ैमिली कोर्ट के तलाक़ देने के अधिकार पर 'कब्ज़ा करने' का आरोप लगाया। DLSA ने कुछ ऐसे 'अस्पष्ट' आदेश पारित किए, जिनकी वजह से एक पति ने मध्यस्थता समझौते को ही वैध तलाक़ मान लिया था।

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

संशोधित वेतन नियम | जान-बूझकर प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर इसे छोड़ने से जुड़ा 'नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस' नहीं मांग सकते: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने उस आदेश को रद्द किया, जिसमें राज्य सरकार को उन मेडिकल अधिकारियों का वेतन बढ़ाने का निर्देश दिया गया था, जिन्होंने 'नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस' (NPA) का विकल्प नहीं चुना था, ताकि उनका वेतन उन जूनियर अधिकारियों के बराबर हो सके, जिन्होंने NPA का विकल्प चुना था।

बता दें, कानून में यह प्रावधान है कि उन मेडिकल अधिकारियों को NPA (मूल वेतन का 20% की दर से गणना की जाती है) का भुगतान किया जाए, जो कोई भी प्राइवेट प्रैक्टिस न करने का विकल्प चुनते हैं; किसी भी उल्लंघन के मामले में उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, जो मेडिकल अधिकारी अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस जारी रखने का विकल्प चुनते हैं, वे NPA के हकदार नहीं होते।

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Tags:    

Similar News