हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

Update: 2026-07-25 19:30 GMT

देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (20 जुलाई, 2026 से 25 जुलाई, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

सरकारी लोन के लिए केंद्रीय आवास मंत्रालय की सिफ़ारिश से मोबाइल वेंडर की कैटेगरी 'फिक्स्ड वेंडर' में नहीं बदल सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की ओर से किसी स्ट्रीट वेंडर को सरकारी स्कीम के तहत लोन दिलाने के लिए जारी की गई सिफ़ारिश, मोबाइल वेंडर को 'फिक्स्ड वेंडर' (एक जगह पर सामान बेचने वाला) में नहीं बदल सकती और न ही वेंडर के 'सर्टिफिकेट ऑफ़ वेंडिंग' (CoV) में बताई गई कैटेगरी को बदल सकती है। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की बेंच ने कहा कि वेंडिंग की कैटेगरी पूरी तरह से दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा जारी CoV से तय होती है।

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अगर पहली शादी कायम है तो स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत मुस्लिम व्यक्ति की दूसरी शादी मान्य नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत की गई शादी, अगर पहले से कोई शादी कायम है तो वह शुरू से ही अमान्य (void ab initio) होती है, भले ही संबंधित पक्ष ऐसे पर्सनल लॉ (व्यक्तिगत कानून) के दायरे में आते हों, जो एक से ज़्यादा शादियों की इजाज़त देता हो। [2026 LiveLaw (Kar) 265] जस्टिस सचिन शंकर मगदुम की सिंगल जज बेंच ने कहा कि ऐसी शादी दूसरी पत्नी को कानूनी रूप से विवाहित पत्नी का दर्जा नहीं देती है।

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एक-तरफ़ा गुज़ारा-भत्ता आदेश जारी करने से पहले WhatsApp/ईमेल सर्विस का वेरिफ़िकेशन ज़रूरी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि फ़ैमिली कोर्ट WhatsApp और ईमेल जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भेजे गए नोटिस की डिलीवरी की पुष्टि किए बिना एक-तरफ़ा (ex-parte) आदेश पारित नहीं कर सकता। [2026 LiveLaw (MP) 295]

इलेक्ट्रॉनिक सर्विस के वेरिफ़िकेशन में विफलता को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन मानते हुए जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने एक-तरफ़ा गुज़ारा-भत्ता आदेश रद्द किया।

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विचाराधीन कैदी भी बेच सकता है अपनी संपत्ति, जेल से पावर ऑफ अटॉर्नी करना वैध: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी विचाराधीन कैदी को जेल में रहने मात्र से अपनी संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं छिन जाता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा व्यक्ति जेल से विधिवत पंजीकृत सामान्य या विशेष पावर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित कर सकता है और उसके अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से संपत्ति की बिक्री भी कानूनी रूप से की जा सकती है।

जस्टिस अनूप कुमार ढांढ की एकलपीठ ने कहा, "कानून पूरी तरह स्पष्ट है कि विचाराधीन कैदी अपनी संपत्ति के हस्तांतरण के अधिकार से वंचित नहीं होता। वह जेल अधीक्षक के माध्यम से जेल से सामान्य या विशेष पावर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित कर सकता है और उसका अधिकृत प्रतिनिधि कानूनी रूप से संपत्ति बेच सकता है। इसके लिए केवल यह आवश्यक है कि सत्यापन, पंजीकरण और संपत्ति पर किसी अदालत का कुर्की आदेश न होने जैसी सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाए।"

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मृत व्यक्ति के नाम जारी पुनर्मूल्यांकन नोटिस को Income Tax At की धारा 159 से वैध नहीं ठहराया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी मृत करदाता के नाम पर जारी पुनर्मूल्यांकन नोटिस को आयकर अधिनियम (Income Tax At) की धारा 159 के आधार पर वैध नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि करदाता की मृत्यु के बाद नोटिस जारी किया गया है तो आयकर विभाग को निर्धारित समयसीमा के भीतर उसके विधिक उत्तराधिकारियों के नाम नया नोटिस जारी करना होगा।

जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि धारा 159 तभी लागू होती है, जब करदाता के जीवित रहते उसके खिलाफ वैध रूप से कार्यवाही शुरू की गई हो। यदि प्रारंभिक नोटिस ही मृत व्यक्ति के नाम जारी किया गया तो उसे धारा 159 के सहारे वैध नहीं बनाया जा सकता।

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सिर्फ़ दूसरे बैंक के कहने पर बैंक अकाउंट फ़्रीज़ नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि किसी दूसरे बैंक से मिले उस मैसेज या सूचना के आधार पर बैंक अकाउंट फ़्रीज़ नहीं किया जा सकता, जिसमें गलती से पैसे ट्रांसफर होने का आरोप लगाया गया हो। कोर्ट ने कहा कि जब तक कोई सक्षम मजिस्ट्रेट या जांच करने वाली अथॉरिटी आदेश न दे, तब तक बैंक के पास ग्राहक का अकाउंट फ़्रीज़ करने का कानूनी अधिकार नहीं है और ऐसी कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता।

जस्टिस आलोक महरा एक क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें कोटक महिंद्रा बैंक, हरिद्वार में मौजूद याचिकाकर्ता का अकाउंट डी-फ़्रीज़ (फिर से चालू) करने की मांग की गई। याचिकाकर्ता का कहना था कि कोटक महिंद्रा बैंक को यस बैंक से एक सूचना मिलने के बाद उसका अकाउंट फ़्रीज़ कर दिया गया। यस बैंक ने बताया था कि उसके अकाउंट में गलती से ₹44 लाख ट्रांसफर हो गए। दलील दी गई कि अकाउंट फ़्रीज़ करना गैर-कानूनी था, क्योंकि इसके लिए किसी सक्षम मजिस्ट्रेट का कोई आदेश नहीं है।

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SHO की रिपोर्ट पर भी जारी हो सकता है गुण्डा एक्ट का नोटिस, यदि वह SP के माध्यम से भेजी गई हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण एक्ट 1970 की धारा 3(1) के तहत कार्यवाही शुरू करने के लिए यदि थानाध्यक्ष (SHO) की रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक (SP) के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट को भेजी गई है तो उसके आधार पर कारण बताओ नोटिस जारी करना पूरी तरह वैध है। अदालत ने कहा कि यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण नियमावली, 1970 के नियम 3(1) की भावना और प्रावधानों के अनुरूप है।

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प्राइवेट ऑफिस में बिना 'सार्वजनिक दृष्टि' के जातिसूचक टिप्पणी SC/ST Act के तहत अपराध नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी प्राइवेट ऑफिस रूम में आम लोगों या किसी स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी के बिना कथित जातिसूचक टिप्पणी की जाती है तो वह अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act ) के तहत अपराध नहीं मानी जाएगी।

जस्टिस मधु जैन ने कहा कि अधिनियम की धारा 3(1)(x) के तहत अपराध बनने के लिए यह आवश्यक है कि कथित अपमान या धमकी सार्वजनिक दृष्टि में आने वाले स्थान पर हुई हो। यह इस अपराध का अनिवार्य तत्व है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच के लिए धारा 17ए की पूर्व मंजूरी जरूरी नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच शुरू करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए के तहत सक्षम प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी आवश्यक नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के आरोप किसी लोकसेवक द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान दी गई सिफारिश या लिए गए निर्णय से संबंधित नहीं होते। जस्टिस मृदुल कुमार कलिता ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के रिटायर डिप्टी चीफ इंजीनियर रंजीत दास की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

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पति से अधिक कमाने वाली पत्नी 'विदेश में रहने का खर्चा अधिक' होने का दावा कर भरण-पोषण नहीं मांग सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट

एक महिला जो अपने पति से 'काफी हद तक' अधिक कमाती है और विदेश में रहती है, वह केवल इस आधार पर उससे गुजारा भत्ता नहीं मांग सकती कि विदेश में रहने की लागत 'अत्यधिक' है, हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अमेरिका में रहने वाली एक महिला की उस याचिका को खारिज किया, जिसमें उसने अपने पति से 1 लाख रुपये मासिक गुजारा भत्ता की मांग की।

जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने महिला के अंतरिम आवेदन खारिज की, जिसके द्वारा उसने फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिसके द्वारा अदालत ने जोड़े की शादी को भंग करते हुए पति को केवल मुकदमे की लागत के लिए 25,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। अदालत ने बड़े बेटे की कस्टडी पति को दे दी थी और छोटे बेटे को पत्नी के पास रहना था।

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फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर मिली आरक्षित नौकरी शुरू से ही अवैध, बर्खास्तगी से पहले विभागीय जांच जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी व्यक्ति ने फर्जी और जाली जाति प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षित श्रेणी की सरकारी नौकरी हासिल की है, तो उसकी नियुक्ति शुरू से ही (Void Ab Initio) अवैध मानी जाएगी। ऐसी स्थिति में कर्मचारी को सेवा से हटाने से पहले विभागीय अनुशासनात्मक जांच (Departmental Inquiry) या आरोपपत्र (Charge-sheet) जारी करना आवश्यक नहीं है। केवल कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) देना पर्याप्त होगा।

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आधार कार्ड निवास का अंतिम प्रमाण नहीं, लेकिन कब्जे का प्रथमदृष्टया साक्ष्य, बिना नोटिस तोड़फोड़ और बेदखली गैरकानूनी: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि आधार कार्ड किसी संपत्ति पर स्वामित्व या स्थायी निवास का अंतिम प्रमाण नहीं है लेकिन यह किसी व्यक्ति के कब्जे का प्रथमदृष्टया साक्ष्य अवश्य है। ऐसे में सार्वजनिक परिसर से किसी व्यक्ति को बेदखल करने या मकान गिराने से पहले लोक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम 1971 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य की खंडपीठ ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट (पूर्व में कलकत्ता पोर्ट ट्रस्ट) को निर्देश दिया कि वह कोलकाता के गार्डन रीच स्थित सीडीएलबी और सीपीटी आवासों में रहने वाले लोगों को बिना वैधानिक नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए न तो बेदखल करे और न ही मकानों को ध्वस्त करे।

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अपनी पहली शादी छिपाने वाली महिला दूसरे पति से गुज़ारा-भत्ता पाने की हकदार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जो महिला अपनी पहली शादी छिपाकर दूसरी शादी कर लेती है (जबकि पहली शादी अभी भी कायम है), वह CrPC की धारा 125 के तहत अपने दूसरे पति से गुज़ारा-भत्ता नहीं मांग सकती।

सिंगल-जज जस्टिस मिलिंद साथये ने 16 जुलाई को एक आदेश में उस महिला की अपील खारिज की, जिसने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसके 'दूसरे पति' को उनकी अमान्य शादी से हुए बेटे के लिए केवल 1,000 रुपये का मासिक गुज़ारा-भत्ता देने का निर्देश दिया गया, लेकिन महिला के लिए कोई अलग भत्ता नहीं दिया गया।

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घरेलू हिंसा कानून के तहत बालिग अविवाहित बेटी पोस्ट-ग्रेजुएशन के लिए पढ़ाई का खर्च मांग सकती है: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि 'महिलाओं को घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005' के तहत, पिता अपनी बालिग हो चुकी अविवाहित बेटी की पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए बाध्य है। कोर्ट ने माना कि बच्चे के बालिग होने पर माता-पिता की शिक्षा देने की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। [2026 LiveLaw (Kar) 258]

जस्टिस एच.पी. संदेश की सिंगल जज बेंच ने पिता की वह रिवीजन याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट और डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें उन्हें अपनी बेटी के एमडी डर्मेटोलॉजी कोर्स की फीस के तौर पर ₹16 लाख देने का निर्देश दिया गया था।

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जिला कलेक्टर पुलिस को क्लोजर रिपोर्ट वापस लेने या दोबारा जांच के आदेश नहीं दे सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि जिला कलेक्टर को किसी आपराधिक मामले में पुलिस को क्लोजर रिपोर्ट वापस लेने या जांच दोबारा शुरू करने का आदेश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना मजिस्ट्रेट के न्यायिक अधिकारों में कार्यपालिका के हस्तक्षेप के समान होगा, जो विधि के शासन के विपरीत है।

जस्टिस जय कुमार पिल्लई की सिंगल बेंच ने यह टिप्पणी सितंबर 2025 में जिला कलेक्टर द्वारा जारी उन आदेशों को रद्द करते हुए की, जिनमें कोतवाली थाना प्रभारी को क्लोजर रिपोर्ट वापस लेकर मामले की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया गया था।

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संयुक्त हिंदू परिवार का सदस्य अपने पैसे से अलग संपत्ति खरीद सकता है; दूसरे सह-उत्तराधिकारी उस पर अपना हक नहीं जता सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ संयुक्त हिंदू परिवार होने से यह नहीं माना जा सकता कि कोई खास ज़मीन संयुक्त परिवार की संपत्ति है। कोर्ट ने कहा कि संयुक्त हिंदू परिवार का कोई सदस्य अपने नाम पर अलग से संपत्ति खरीद और रख सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे सदस्य को ज़मीन पर सह-स्वामित्व का अधिकार तब तक नहीं दिया जा सकता, जब तक वे यह साबित न कर दें कि वह ज़मीन संयुक्त परिवार के फंड से खरीदी गई।

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