हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (27 जुलाई, 2026 से 31 जुलाई, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।
NDPS Act की धारा 52A के तहत ज़ब्त नशीले पदार्थों पर मजिस्ट्रेट का सिर्फ़ "देखा गया" लिखना नियमों का पूरी तरह पालन नहीं माना जाएगा: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि ज़ब्त किए गए नशीले पदार्थों की इन्वेंट्री (सूची) पर मजिस्ट्रेट का सिर्फ़ "seen" (देखा गया) लिखना, NDPS Act, 1985 की धारा 52A और NDPS (ज़ब्ती, भंडारण, नमूनाकरण और निपटान) नियम, 2022 के नियम 8 के तहत सर्टिफ़िकेशन की ज़रूरी शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि नियमों का ऐसा पालन न करना, साथ ही लंबे समय तक जेल में रहना और ट्रायल में कोई प्रगति न होना, ज़मानत अर्ज़ी पर फ़ैसला करते समय ध्यान में रखने वाली अहम बातें हैं।
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लंच ब्रेक के दौरान कार्यस्थल पर हुआ हादसा भी नौकरी का हिस्सा, कर्मचारी मुआवजे का हकदार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी के साथ कार्यस्थल पर लंच ब्रेक के दौरान दुर्घटना होती है तो उसे भी नौकरी के दौरान हुई दुर्घटना माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि केवल भोजन के लिए लिया गया अस्थायी विराम कर्मचारी और उसके रोजगार के बीच संबंध समाप्त नहीं करता। ऐसे मामलों में कर्मचारी कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत मुआवजे का हकदार रहेगा।
जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने यह टिप्पणी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील खारिज करते हुए की। बीमा कंपनी ने उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें वर्ष 2010 में दिल्ली के एक निर्माण स्थल पर हादसे में अपना बायां पैर गंवाने वाले एक सुपरवाइजर को 7.86 लाख रुपये मुआवजा और उस पर ब्याज देने का निर्देश दिया गया।
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ग्राम पंचायत की आबादी का निर्धारण पिछली प्रकाशित जनगणना के आधार पर होना चाहिए, न कि उस तारीख पर असल में रहने वाले लोगों की गिनती के आधार पर: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 11-F में "आबादी" शब्द का मतलब उसकी कानूनी परिभाषा के अनुसार समझा जाना चाहिए, यानी पिछली प्रकाशित जनगणना में दर्ज आंकड़ा, न कि उस समय उस इलाके में असल में रहने वाले लोगों की संख्या।
कोर्ट ने कहा कि अगर किसी ग्राम पंचायत के इलाके का कुछ हिस्सा नगरपालिका में शामिल होने के बाद उसकी जनगणना वाली आबादी 1,000 से कम हो जाती है तो वह मौजूदा समय में ज़्यादा लोगों की गिनती का हवाला देकर अपनी अलग पहचान बनाए रखने का दावा नहीं कर सकती।
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जजों के वेतन का ब्योरा RTI Act से बाहर नहीं, नागरिकों को जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि जजों के वेतनमान और वेतन संबंधी जानकारी सूचना का अधिकार (RTI Act) अधिनियम की धारा 8 के तहत गोपनीय जानकारी नहीं है। चूंकि जजों का वेतन भारत की संचित निधि से दिया जाता है, इसलिए नागरिकों को इसकी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।
जस्टिस एम. धंडपानी ने कहा, "जजों का वेतन भारत की संचित निधि से दिया जाता है। यह सार्वजनिक धन है, इसलिए भारत का कोई भी नागरिक उनके वेतन संबंधी जानकारी जानने से वंचित नहीं किया जा सकता। यह RTI Act की धारा 8 के तहत अपवाद की श्रेणी में नहीं आता।"
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सुप्रीम कोर्ट का राजद्रोह के आरोप को रोके रखने का निर्देश IPC, UAPA के तहत अन्य अपराधों पर ट्रायल जारी रखने से नहीं रोकता: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि एस.जी. वोम्बटकेरे बनाम भारत संघ [W.P.(Civil) 682/2021] मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जिसमें IPC की धारा 124A के तहत आरोपों को मामले के लंबित रहने तक रोके रखा गया, UAPA या IPC के तहत अन्य संबंधित अपराधों के लिए मुकदमा चलाने से पूरी छूट नहीं देता है। [2026 LiveLaw (MP) 302]
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दिल्ली दंगा: IB कर्मचारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद
वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दिल्ली कोर्ट ने पूर्व आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज जस्टिस प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन के अलावा जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को भी उम्रकैद की सजा सुनाई। दिल्ली पुलिस ने सभी दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।
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POCSO | पीड़िता के योनि के मुहाने पर वाइब्रेटिंग मशीन रखना 'अंदरूनी यौन हमला' और बलात्कार के बराबर: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि पीड़िता की योनि के मुहाने पर वाइब्रेटिंग मशीन रखना POCSO Act के तहत सज़ा-योग्य 'पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट' (अंदरूनी यौन हमला) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत सज़ा-योग्य रेप के बराबर है। [2026 LiveLaw (Ker) 416]
जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने POCSO Act [बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम] की धारा 3 का हवाला दिया, जो पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट को परिभाषित करती है, और IPC की धारा 375 का भी ज़िक्र किया।
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मरने से पहले WhatsApp मैसेज में आरोपियों का नाम लेना शुरुआती तौर पर 'मरते समय दिया गया बयान' माना जाएगा: एमपी हाई कोर्ट ने ज़मानत देने से इनकार किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आत्महत्या करने से पहले मृतक द्वारा अपने पिता को भेजे गए WhatsApp मैसेज को, जिसमें आरोपी व्यक्तियों के नाम हैं, शुरुआती तौर पर 'मरते समय दिया गया बयान' (dying declaration) माना है। [2026 LiveLaw (MP) 304]
जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी तीन लोगों को ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया था।
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दुष्कर्म पीड़िता पत्नी का साथ न देना और पहली शादी रहते दूसरी शादी करना क्रूरता व परित्याग: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पत्नी के साथ दुष्कर्म होने के बाद उसका साथ न देना और पहली शादी के रहते दूसरी शादी करना, दोनों ही वैवाहिक क्रूरता और परित्याग की श्रेणी में आते हैं। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने परिवार न्यायालय द्वारा दिए गए तलाक के फैसले को बरकरार रखते हुए पति की अपील खारिज की।
अदालत ने कहा, "पहली शादी विधिक रूप से कायम रहते दूसरी महिला से विवाह करना, जैसा कि स्वयं अपीलकर्ता ने स्वीकार किया है, क्रूरता और परित्याग दोनों माना जाएगा। इसलिए परिवार न्यायालय ने परित्याग के आधार को स्वीकार नहीं कर त्रुटि की।"
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महिला के लिए आरक्षित रहा सरपंच पद अगले कार्यकाल में सामान्य श्रेणी को मिलेगा: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि यदि किसी ग्राम पंचायत में सरपंच का पद पिछले कार्यकाल (2020-2025) में महिला श्रेणी के लिए आरक्षित था, तो अगले कार्यकाल (2025-2030) में सामान्यतः उसे ओपन (सामान्य) श्रेणी के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि यह महाराष्ट्र ग्राम पंचायत (सरपंच एवं उप-सरपंच) निर्वाचन नियम, 1964 में निर्धारित रोटेशन (चक्रानुक्रम) सिद्धांत के अनुरूप है।
जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की खंडपीठ दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें उप-विभागीय अधिकारियों (SDO) द्वारा संबंधित ग्राम पंचायतों में 2025-2030 कार्यकाल के लिए सरपंच पद को फिर से महिला श्रेणी के लिए आरक्षित किए जाने को चुनौती दी गई थी।
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लिव-इन संबंध का दावा किए बिना भरण-पोषण नहीं मिल सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई महिला दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की मांग करती है तो वह केवल लिव-इन संबंधों को मिलने वाले कानूनी संरक्षण का लाभ नहीं ले सकती, जब तक कि उसने ऐसे संबंध का स्पष्ट दावा न किया हो और उसे साबित भी न किया हो। अदालत ने कहा कि यह सिद्धांत विशेष रूप से तब लागू होगा जब संबंधित पुरुष ने किसी भी प्रकार के संबंध से साफ इनकार किया हो।
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फोन पर दी गई जातिसूचक गालियां SC/ST Act के तहत अपराध नहीं, यदि घटना 'सार्वजनिक दृश्य' में न हो: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने फोन पर कथित रूप से जातिसूचक गालियां दी हैं, तो मात्र इस आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) की धाराएं लागू नहीं होंगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन धाराओं के तहत अपराध तभी बनता है, जब कथित घटना पब्लिक व्यू में घटित हुई हो।
जस्टिस आलोक जैन ने ट्रायल कोर्ट का वह आदेश बरकरार रखा, जिसमें आरोपी को SC/ST Act की धारा 3(1)(र) और 3(1)(स) के आरोपों से आरोपमुक्त कर दिया गया।
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प्रॉपर्टी का इस्तेमाल करने के अधिकार में किसी खास सरकारी सड़क या हाईवे रूट से ज़मीन तक पहुँचने का अधिकार शामिल नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान के आर्टिकल 300A के तहत प्रॉपर्टी का इस्तेमाल करने के अधिकार में सरकारी सड़क या हाईवे का हिस्सा रहे रूट से ज़मीन तक पहुंचने का कोई पक्का अधिकार शामिल नहीं है।
जस्टिस संजीव नरूला ने कहा, "संविधान के आर्टिकल 300A के तहत प्रॉपर्टी रखने और उसका इस्तेमाल करने के अधिकार के साथ सरकार की किसी खास आस-पास की ज़मीन या सड़क से गाड़ियों के आने-जाने का रास्ता पाने का कोई स्वाभाविक या पक्का अधिकार नहीं मिलता है।"
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S. 8 UP Anti-Conversion Law | डीएम को दिया गया आवेदन 'शेड्यूल-I' फ़ॉर्मेट में धर्म-परिवर्तन से पहले की घोषणा का विकल्प नहीं हो सकता: हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ़ किया कि यूपी एंटी-कन्वर्ज़न लॉ (धर्म-परिवर्तन विरोधी कानून) के तहत धर्म बदलने के इच्छुक व्यक्ति के लिए धारा 8 के तहत तय 'शेड्यूल-I' फ़ॉर्मेट में धर्म-परिवर्तन से पहले की घोषणा जमा करना ज़रूरी है, और ज़िला मजिस्ट्रेट (DM) को दिया गया सामान्य आवेदन इसका विकल्प नहीं हो सकता।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने उस महिला की रिट याचिका खारिज की, जिसने डीएम को अपनी उस अर्ज़ी पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की, जिसे उसने कथित तौर पर 'उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्म-परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021' की धारा 8 के तहत जमा किया।
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उचित मूल्य की दुकान की डीलरशिप | शादीशुदा बेटी को सिर्फ़ शादीशुदा होने के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से मना नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यूपी ज़रूरी वस्तु (बिक्री और वितरण नियंत्रण का नियमन) आदेश, 2016 के तहत "परिवार" की परिभाषा में शादीशुदा बेटी भी शामिल है। इसलिए उसे सिर्फ़ शादीशुदा होने के आधार पर उचित मूल्य की दुकान के डीलर के तौर पर नियुक्ति देने से मना नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि अगर वह बाकी ज़रूरी शर्तें पूरी करती है तो उस पर विचार किया जाना चाहिए। इन शर्तों में स्थानीय निवासी होना और परिवार के दूसरे बालिग सदस्यों से 'कोई आपत्ति नहीं' (NOC) का प्रमाण पत्र मिलना शामिल है।
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सहमति से शादी करने वाले बालिगों के मामले में पुलिस को दखल का अधिकार नहीं, अपराध की जांच करे, विवाह की नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बालिग महिला के कथित अपहरण के मामले में दर्ज FIR रद्द करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि दो बालिग व्यक्तियों के आपसी सहमति से किए गए विवाह की जांच करना पुलिस का काम नहीं है। पुलिस का दायित्व अपराधों की जांच करना है, न कि वयस्कों के विवाह में दखल देना।
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने दंपति की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि इस मामले में जांच जारी रखना न केवल आपराधिक कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का भी गंभीर उल्लंघन है।
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बालिग़ बच्चे द्वारा घर में रखे गए प्रतिबंधित सामान के लिए माता-पिता ज़िम्मेदार नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता को उनके बालिग़ बच्चे द्वारा रखे गए कथित प्रतिबंधित सामान के लिए सिर्फ़ इसलिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि वह सामान उनके घर से बरामद हुआ था।
जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा: “जांच एजेंसी ने प्रतिबंधित सामान वाले लिफ़ाफ़े पर सह-आरोपी प्रतिभा उर्फ़ प्रीति का नाम देखने के बाद ही यह निष्कर्ष निकाल लिया था कि वह सामान सह-आरोपी प्रतिभा उर्फ़ प्रीति का था। ज़ाहिर है, अगर बच्चे ने कोई प्रतिबंधित सामान रखा है, तो उसके लिए माता-पिता को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।”
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भरण-पोषण नहीं देना आर्थिक उत्पीड़न, यह भी घरेलू हिंसा में आता है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पति द्वारा पत्नी और बच्चे का भरण-पोषण नहीं करना आर्थिक उत्पीड़न है और यह महिलाओं का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत घरेलू हिंसा की श्रेणी में आता है। जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने यह टिप्पणी उस आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें एक पति ने पत्नी और नाबालिग बेटी को भरण-पोषण देने संबंधी निचली अदालतों के आदेश को चुनौती दी थी।
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आवंटन पत्र जारी होने से पहले नीलामी राशि पर ब्याज नहीं वसूल सकता DLA: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) किसी भूखंड के सफल बोलीदाता से आवंटन पत्र जारी होने से पहले नीलामी राशि पर ब्याज नहीं वसूल सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नीलामी की शर्तों के अनुसार किस्तों का भुगतान आवंटन पत्र जारी होने के बाद ही देय होता है, इसलिए उससे पहले ब्याज या दंडात्मक ब्याज लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
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S.125 CrPC | पति की पहले से मौजूद शादी की बात छिपाकर दूसरी शादी करने पर महिला गुज़ारा-भत्ता पाने की हकदार: इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जिस महिला को पति की पहले से मौजूद शादी की बात छिपाकर शादी के लिए राजी किया गया, वह CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा-भत्ता पाने की हकदार है, भले ही दोनों के बीच हुई शादी कानूनी रूप से अमान्य (void) हो।
जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि पति को अपनी ही गलती का फायदा उठाने और उस महिला को गुज़ारा-भत्ता देने से इनकार करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती, जिसने पति की पहले से मौजूद शादी के बारे में जाने बिना उससे शादी की थी।