पेनल्टी के आधार पर पुरानी रिक्तियों के लिए पदोन्नति नहीं रोकी जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट

  • पेनल्टी के आधार पर पुरानी रिक्तियों के लिए पदोन्नति नहीं रोकी जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट

    राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी की पदोन्नति पर विचार करते समय पिछले सात वर्षों के सेवा रिकॉर्ड की गणना संबंधित पद की रिक्ति उत्पन्न होने की तिथि से की जाएगी, न कि उस घटना की तिथि से जिसके आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई हो।

    जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने कहा कि किसी कर्मचारी पर लगाई गई दंडात्मक कार्रवाई (Penalty) का प्रभाव पदोन्नति पर पड़ सकता है, लेकिन यह प्रभाव केवल उन पदोन्नतियों पर लागू होगा जो दंड आदेश जारी होने के बाद दी जानी हैं। जिन पदोन्नतियों के लिए रिक्तियां दंड आदेश से पहले उत्पन्न हो चुकी थीं, उन पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

    मामले में संबंधित कर्मचारी पर जुलाई 2024 में दंड लगाया गया था। इसके बाद विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) ने वर्ष 2023-24 की रिक्तियों के लिए पदोन्नति पर विचार किया, लेकिन जुलाई 2024 की दंडात्मक कार्रवाई के आधार पर उसकी उम्मीदवारी खारिज कर दी गई।

    राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय न्यायाधिकरण ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला देते हुए राज्य सरकार को उसे पात्र पाए जाने पर पदोन्नति देने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

    हाईकोर्ट ने माना कि वर्ष 2023-24 की रिक्तियां दंड आदेश से पहले की थीं। इसलिए कर्मचारी के पिछले सात वर्षों के रिकॉर्ड का मूल्यांकन रिक्तियों के निर्धारण की तिथि के आधार पर किया जाना चाहिए था। अदालत ने राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए न्यायाधिकरण के आदेश को बरकरार रखा।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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