हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (25 मई, 2026 से 29 मई, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।
बंटवारा कार्यवाही में मालिकाना हक का फैसला नहीं कर सकते राजस्व अधिकारी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि राजस्व अधिकारी बंटवारा कार्यवाही के दौरान भूमि के मालिकाना हक से जुड़े विवादों का निपटारा नहीं कर सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति राजस्व अभिलेखों में भूमिस्वामी के रूप में दर्ज नहीं है, लेकिन स्वयं को भूमि का सह-स्वामी या भूमिस्वामी बताता है, उसे अपने अधिकार की घोषणा के लिए सक्षम दीवानी अदालत का दरवाजा खटखटाना होगा। जस्टिस दीपक खोत की पीठ ने यह टिप्पणी याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें राजस्व मंडल और तहसीलदार के आदेशों को चुनौती दी गई।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार के बाद प्रयागराज ADM ने मुस्लिम व्यक्ति के 'अपनी मर्ज़ी से' हिंदू धर्म अपनाने को दी मंज़ूरी
इस महीने की शुरुआत में इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद प्रयागराज के अपर ज़िला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) ने औपचारिक रूप से मुस्लिम व्यक्ति के धर्म परिवर्तन के आवेदन को मंज़ूरी दी। इस व्यक्ति ने 2022 में अपनी मर्ज़ी से सनातन धर्म/हिंदू धर्म अपना लिया था।
संबंधित अधिकारी द्वारा 14 मई को पारित आदेश का संज्ञान लेते हुए जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिवीज़न बेंच ने बुधवार को उस रिट याचिका का निपटारा किया, जिसे अनिल पंडित (पहले मोहम्मद अहसान) नामक व्यक्ति ने दायर किया था। अनिल पंडित इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के एक संस्थान में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।
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किशोरावस्था की सजा पासपोर्ट जारी करने में बाधा नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'भूल जाने के अधिकार' और 'नई शुरुआत' सिद्धांत को माना अहम
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किशोरावस्था में दर्ज दोषसिद्धि किसी व्यक्ति को पासपोर्ट जारी करने से रोकने का आधार नहीं बन सकती। अदालत ने कहा कि किशोर न्याय कानून का उद्देश्य ऐसे बच्चों को “नई शुरुआत” का अवसर देना है और उन्हें समाज में बिना किसी कलंक के दोबारा स्थापित करना है।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, लखनऊ के मार्च 2021 का आदेश रद्द किया, जिसमें मोहम्मद यूनुस अंसारी का पासपोर्ट आवेदन खारिज किया गया था।
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गंभीर जालसाज़ी के मामलों में सुरक्षा उपायों के साथ सार्वजनिक की जा सकती है Aadhaar की जानकारी: आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जालसाज़ी के गंभीर आरोपों वाले मामलों की आपराधिक जांच के लिए ज़रूरी सुरक्षा उपायों के साथ आधार से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जालसाज़ी के आरोपी व्यक्ति को अगर उसने अपराध किया तो वह अपनी निजता के अधिकार की सुरक्षा के आधार पर बच नहीं सकता।
चीफ जस्टिस लीसा गिल और जस्टिस आर. रघुनंदन राव की डिवीज़न बेंच ने कहा कि हालांकि आधार अधिनियम, 2016 की धारा 33(1) आधार की जानकारी सार्वजनिक करने पर सुरक्षा उपाय लागू करती है, लेकिन जब जांच के लिए ऐसी जानकारी की ज़रूरत होती है, तो उसे जारी करने पर कोई पूरी तरह से रोक नहीं है।
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Twisha Sharma Dowry Death Case | एमपी हाईकोर्ट ने सास गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम ज़मानत रद्द की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (27 मई) को ट्रायल कोर्ट द्वारा रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को उनकी बहू ट्विशा शर्मा की कथित दहेज हत्या के मामले में दी गई अग्रिम ज़मानत रद्द की। यह मामला 33 वर्षीय मॉडल-एक्ट्रेस त्विशा शर्मा की दुखद मौत से जुड़ा है।
त्विशा 12 मई की रात को अपने पति के घर में फंदे से लटकी मिली थीं; उनकी शादी को अभी छह महीने भी पूरे नहीं हुए थे। त्विशा के माता-पिता के अनुसार, उनके पति और सास उन्हें प्रताड़ित करते थे और दहेज के लिए परेशान करते थे।
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हुक्का बार चलाने का कोई मौलिक अधिकार नहीं, यह गतिविधि 'रेस एक्स्ट्रा कमर्शियल' के दायरे में आती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि नागरिकों के पास हुक्का बार चलाने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है, क्योंकि ऐसी गतिविधियां 'रेस एक्स्ट्रा कमर्शियम' (वाणिज्य से बाहर/परे की चीज़ें) के कानूनी सिद्धांत के अंतर्गत आती हैं।
यह टिप्पणी जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की डिवीज़न बेंच ने एम्पेरियो ग्रैंड प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर रिट याचिका की सुनवाई के दौरान की। यह कंपनी लखनऊ में होटल और रेस्टोरेंट का कारोबार करती है।
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तलाकशुदा बेटी को पारिवारिक पेंशन से वंचित करना भेदभावपूर्ण: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि तलाकशुदा बेटी को पारिवारिक पेंशन के अधिकार से बाहर नहीं रखा जा सकता। अदालत ने माना कि ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन होगा।
जस्टिस विशाल धगत की पीठ ने कहा, “यदि तलाकशुदा बेटियों को परिवार की परिभाषा में शामिल नहीं किया जाता, तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा, क्योंकि अविवाहित, विवाहित और तलाकशुदा बेटी में कोई अंतर नहीं है।”
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भरण-पोषण न देने पर पति को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण राशि की वसूली के लिए की जाने वाली गिरफ्तारी केवल पालन सुनिश्चित कराने का माध्यम है, इसे अनिश्चितकालीन दंडात्मक कारावास में नहीं बदला जा सकता।
जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने अक्टूबर 2025 से जेल में बंद एक मजदूर को रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि किसी निर्धन व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखने से भरण-पोषण कानून का उद्देश्य ही विफल हो सकता है, क्योंकि वह भविष्य में कमाकर भुगतान करने में असमर्थ हो जाता है।
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शादी टूटने या पति के छोड़ने भर से दोबारा सक्रिय नहीं हो सकती रद्द की गई दुष्कर्म FIR : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि समझौते और बाद में हुई शादी के आधार पर रद्द की गई दुष्कर्म की FIR को केवल इस वजह से दोबारा बहाल नहीं किया जा सकता कि बाद में वैवाहिक संबंध टूट गए या पति ने पत्नी को छोड़ दिया।
जस्टिस अमित महाजन की एकलपीठ ने कहा कि FIR रद्द होने के बाद उत्पन्न वैवाहिक विवाद या आरोप अपने आप में उस न्यायिक आदेश को अमान्य नहीं बना सकते, जो अंतिम रूप ले चुका हो।
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संदिग्ध लेनदेन के नाम पर पूरा वेतन अकाउंट फ्रीज करना आजीविका के अधिकार का उल्लंघन: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कुछ संदिग्ध लेनदेन की जांच चलने के आधार पर किसी कार्यरत विशेष सशस्त्र बल कर्मी को उसके वैध वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि पूरे वेतन खाते पर रोक लगाना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले आजीविका के अधिकार का उल्लंघन है।
जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने बैंक को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के वेतन खाते का संचालन बहाल किया जाए। हालांकि जिन लेनदेन पर संदेह है या जो जांच के दायरे में हैं, उन पर रोक जांच एजेंसी के अगले आदेश तक जारी रह सकती है।
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घर से वकालत करने पर व्यावसायिक बिजली दर नहीं वसूली जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि कोई वकील अपने आवास से कार्यालय संचालित करता है तो उससे व्यावसायिक दर पर बिजली शुल्क नहीं वसूला जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि वकालत को व्यावसायिक गतिविधि नहीं माना जा सकता।
जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने कहा, “यदि वकील का कार्यालय आवासीय परिसर में स्थित है, तो उसे व्यावसायिक गतिविधि नहीं कहा जा सकता। हालांकि यदि कार्यालय किसी व्यावसायिक भवन में संचालित हो रहा हो तब वह व्यावसायिक दर से छूट नहीं मांग सकता।”
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प्राइवेट स्कूलों को शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाने के लिए पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि प्राइवेट, गैर-सरकारी मदद वाले (Unaided) स्कूलों को शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाने के लिए शिक्षा निदेशालय (DoE) से पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत नहीं है, बशर्ते उन्होंने दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम की धारा 17(3) के तहत DoE के पास अपनी फीस का ब्योरा जमा कर दिया हो।
अपने 120 पन्नों के फ़ैसले में कोर्ट ने कहा कि पहले से मंज़ूरी तभी ज़रूरी होगी, जब कोई स्कूल चल रहे शैक्षणिक सत्र के दौरान, सत्र शुरू होने से पहले घोषित फीस के ढांचे से ज़्यादा फीस बढ़ाना चाहे।
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Voter ID वेरिफ़िकेशन के बिना सीएम एडवोकेट्स वेलफेयर स्कीम के तहत इंश्योरेंस के फ़ायदे नहीं मिल सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि मुख्यमंत्री एडवोकेट्स वेलफेयर स्कीम के तहत सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन करवा लेने से ही किसी वकील को इंश्योरेंस के फ़ायदे पाने का हक़ नहीं मिल जाता, जब तक कि वकील की Voter ID (EPIC) की जानकारी ठीक से वेरिफ़ाई न हो जाए।
कोर्ट ने पाया कि इस स्कीम के तहत इंश्योरेंस के फ़ायदों का दावा वहां नहीं किया जा सकता, जहां EPIC का वेरिफ़िकेशन अधूरा रह गया हो; भले ही कोर्ट के अंतरिम निर्देशों के तहत वकील को पहले एक e-card जारी कर दिया गया हो।
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किशोरावस्था के आपराधिक मामले नौकरी में बाधा नहीं बन सकते : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किशोरावस्था में किए गए अपराध में दोषसिद्धि या ऐसे मामले की लंबित सुनवाई किसी व्यक्ति को वयस्क होने पर नौकरी पाने से अयोग्य नहीं ठहरा सकती। कोर्ट ने कहा कि लंबित आपराधिक मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को रोजगार से वंचित करना उसके जीवन और आजीविका पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
जस्टिस श्री प्रकाश सिंह ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 की धारा 19 का हवाला देते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किशोरावस्था में अपराध के आरोप या दोषसिद्धि व्यक्ति के भविष्य और रोजगार के अधिकार में बाधा न बने।
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'पेमेंट ऑफ़ ग्रेच्युटी एक्ट' की शर्तें पूरी न होने तक कर्मचारी को नौकरी से निकालने पर ग्रेच्युटी अपने-आप ज़ब्त नहीं की जा सकती: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि सिर्फ़ नौकरी से निकाल देने भर से ग्रेच्युटी अपने-आप ज़ब्त नहीं हो जाती, जब तक कि एक्ट के तहत तय कानूनी शर्तें पूरी न हो जाएं। कोर्ट ने सेंट्रल एमपी ग्रामीण बैंक की तरफ़ से दायर अपील भी खारिज की।
इस अपील में बैंक ने सिंगल जज के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें बैंक को निर्देश दिया गया कि वह एक मृत कर्मचारी की विधवा को ग्रेच्युटी का भुगतान करे। उस कर्मचारी को पैसों के गबन के आरोपों के चलते नौकरी से निकाल दिया गया।