घर से वकालत करने पर व्यावसायिक बिजली दर नहीं वसूली जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

Amir Ahmad

26 May 2026 5:35 PM IST

  • घर से वकालत करने पर व्यावसायिक बिजली दर नहीं वसूली जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि कोई वकील अपने आवास से कार्यालय संचालित करता है तो उससे व्यावसायिक दर पर बिजली शुल्क नहीं वसूला जा सकता।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि वकालत को व्यावसायिक गतिविधि नहीं माना जा सकता।

    जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने कहा,

    “यदि वकील का कार्यालय आवासीय परिसर में स्थित है, तो उसे व्यावसायिक गतिविधि नहीं कहा जा सकता। हालांकि यदि कार्यालय किसी व्यावसायिक भवन में संचालित हो रहा हो तब वह व्यावसायिक दर से छूट नहीं मांग सकता।”

    अदालत ने आगे कहा कि किसी भी स्थिति में यह नहीं माना जा सकता कि अपने घर से कार्यालय चलाने वाला वकील व्यावसायिक दर से बिजली शुल्क देने के लिए बाध्य है।

    मामला एक वकील द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। याचिका में 31 दिसंबर 2020 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनके आवासीय परिसर में संचालित कार्यालय को व्यावसायिक गतिविधि मानते हुए व्यावसायिक दर से बिजली बिल जारी करने का निर्णय लिया गया था।

    याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वकालत कोई व्यापारिक गतिविधि नहीं है। इसमें खरीद-फरोख्त जैसी कोई प्रक्रिया शामिल नहीं होती। यह व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता और पेशेवर कौशल पर आधारित पेशा है। इसलिए इसे व्यापार या वाणिज्यिक गतिविधि की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

    वहीं बिजली कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि वकील का कार्यालय गैर-घरेलू उपयोग की श्रेणी में आता है, इसलिए उस पर व्यावसायिक दर लागू होगी।

    सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने 'चेयरमैन, मध्य प्रदेश विद्युत मंडल बनाम शिव नारायण' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया।

    अदालत ने कहा कि उस फैसले में केवल परिसर के उपयोग के आधार पर घरेलू और गैर-घरेलू श्रेणी का परीक्षण किया गया था। वहां यह प्रश्न नहीं था कि क्या वकील की गतिविधि को व्यावसायिक माना जा सकता है।

    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वकील का कार्यालय आवासीय परिसर में है तो उस पर व्यावसायिक बिजली दर लागू नहीं की जा सकती।

    इसी आधार पर अदालत ने माना कि बिजली कंपनी द्वारा व्यावसायिक दर से बिल वसूलना कानूनन गलत था। अदालत ने बिजली विभाग को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को आवासीय दर के अनुसार ही बिजली बिल जारी किए जाएं।

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