Twisha Sharma Dowry Death Case | एमपी हाईकोर्ट ने सास गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम ज़मानत रद्द की

Shahadat

28 May 2026 12:25 PM IST

  • Twisha Sharma Dowry Death Case | एमपी हाईकोर्ट ने सास गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम ज़मानत रद्द की

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (27 मई) को ट्रायल कोर्ट द्वारा रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को उनकी बहू ट्विशा शर्मा की कथित दहेज हत्या के मामले में दी गई अग्रिम ज़मानत रद्द की।

    यह मामला 33 वर्षीय मॉडल-एक्ट्रेस त्विशा शर्मा की दुखद मौत से जुड़ा है। त्विशा 12 मई की रात को अपने पति के घर में फंदे से लटकी मिली थीं; उनकी शादी को अभी छह महीने भी पूरे नहीं हुए थे। त्विशा के माता-पिता के अनुसार, उनके पति और सास उन्हें प्रताड़ित करते थे और दहेज के लिए परेशान करते थे।

    त्विशा के पति पेशे से वकील हैं। उसने भी अग्रिम ज़मानत के लिए अर्जी दी थी, लेकिन उनकी अर्जी खारिज कर दी गई। बाद में उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करने की अनुमति लेकर अपनी याचिका वापस ले ली।

    सास को 15 मई को अग्रिम ज़मानत दी गई थी। इसके पीछे यह तर्क दिया गया था कि FIR और WhatsApp चैट में लगाए गए आरोप सीधे तौर पर उनके बेटे के खिलाफ थे। इससे असंतुष्ट होकर राज्य सरकार और त्विशा के माता-पिता दोनों ने हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर कीं।

    जस्टिस देवनारायण मिश्रा की बेंच ने सबूतों की जांच करने के बाद यह टिप्पणी की:

    "प्रतिवादी (सास) और उनके बेटे के खिलाफ स्पष्ट आरोप हैं। WhatsApp चैट से भी यह नहीं कहा जा सकता कि आरोप केवल समर्थ सिंह के खिलाफ हैं; लेकिन ट्रायल कोर्ट ने इन सभी तथ्यों पर विचार नहीं किया।"

    कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने WhatsApp चैट के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला था कि आरोप पति के खिलाफ हैं, न कि प्रतिवादी (सास) के खिलाफ।

    हालांकि, केस डायरी की जांच करने पर बेंच ने पाया कि मौत 'एंटीमॉर्टम हैंगिंग' (लटकने से पहले ही लगी चोटों) के कारण हुई थी, और शरीर पर छह अन्य चोटें भी थीं। बेंच ने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि 'ये चोटें शरीर को फंदे से उतारते समय या अस्पताल ले जाते समय नहीं लगी थीं।'

    कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयानों में यह साफ तौर पर कहा गया कि प्रतिवादी (सास) और उनके बेटे मृतका को परेशान करते थे और उन पर गर्भपात करवाने का दबाव डाल रहे थे। इसके अलावा, बेंच ने यह भी पाया कि बयानों में सास के खिलाफ भी स्पष्ट आरोप दर्ज थे।

    अतः, बेंच ने यह निर्देश दिया:

    "मामले के उपरोक्त तथ्यात्मक पहलुओं और प्रतिवादी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों के आलोक में दिनांक 15.05.2026 का अग्रिम ज़मानत आदेश... जो BNS, 2023 की धारा 80(2), 85, 3(5) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए था, उसे एतद्द्वारा रद्द किया जाता है।"

    मामले का शीर्षक: State v Giribala Singh, MCRC 24475 of 2026; Navnidhi Sharma v State of MP, MCRC 24405 of 2026

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