संदिग्ध लेनदेन के नाम पर पूरा वेतन अकाउंट फ्रीज करना आजीविका के अधिकार का उल्लंघन: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

Amir Ahmad

26 May 2026 5:41 PM IST

  • संदिग्ध लेनदेन के नाम पर पूरा वेतन अकाउंट फ्रीज करना आजीविका के अधिकार का उल्लंघन: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कुछ संदिग्ध लेनदेन की जांच चलने के आधार पर किसी कार्यरत विशेष सशस्त्र बल कर्मी को उसके वैध वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने माना कि पूरे वेतन खाते पर रोक लगाना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले आजीविका के अधिकार का उल्लंघन है।

    जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने बैंक को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के वेतन खाते का संचालन बहाल किया जाए। हालांकि जिन लेनदेन पर संदेह है या जो जांच के दायरे में हैं, उन पर रोक जांच एजेंसी के अगले आदेश तक जारी रह सकती है।

    अदालत ने कहा,

    “बैंक जांच एजेंसी के वैध निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य है, लेकिन किसी कार्यरत सशस्त्र बल कर्मी के पूरे वेतन खाते के संचालन पर पूर्ण रोक लगाना, जबकि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सामग्री नहीं है, जिससे यह साबित हो कि खाते के सभी लेनदेन किसी आपराधिक गतिविधि से जुड़े हैं, आजीविका के मौलिक अधिकार को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।”

    मामले में याचिकाकर्ता विशेष सशस्त्र बल में कार्यरत है और उसका वेतन खाता भारतीय स्टेट बैंक में था।

    याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि साइबर सेल के कथित निर्देश के आधार पर खाते पर रोक लगा दी गई, जबकि उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला या विभागीय कार्रवाई लंबित नहीं थी।

    याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसने कई बार बैंक से खाते को बहाल करने की मांग की, लेकिन उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। खाते पर रोक लगने से उसकी और उसके परिवार की आजीविका प्रभावित हो रही थी।

    वहीं बैंक की ओर से कहा गया कि साइबर सेल और सक्षम प्राधिकारी के निर्देश पर संदिग्ध लेनदेन की जांच के कारण खाते पर रोक लगाई गई और बैंक ने केवल कानूनी दायित्वों का पालन किया।

    हाईकोर्ट ने माना कि बैंक ने जांच एजेंसी के निर्देशों के तहत कार्रवाई की, लेकिन यह भी कहा कि खाते को पूरी तरह फ्रीज कर देने से याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकार प्रभावित हुए।

    अदालत ने यह भी नोट किया कि साइबर सेल के निरीक्षक को नोटिस जारी होने के बावजूद कोई भी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, ताकि पूरे खाते को फ्रीज रखने का औचित्य साबित किया जा सके।

    इसी आधार पर हाईकोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि संदिग्ध लेनदेन को छोड़कर याचिकाकर्ता को अपने वेतन खाते के संचालन की अनुमति दी जाए।

    Next Story