इलाहाबाद हाईकोट
सीआरपीसी की धारा 195(1)(b)(ii) उन मामलों में एफआईआर दर्ज करने पर रोक नहीं लगाती, जहां दस्तावेजों में कथित जालसाजी अदालत के बाहर हुई हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 195 (1)(b)(ii) ऐसे मामले में एफआईआर दर्ज करने पर रोक नहीं लगाती, जहां अदालत के बाहर दस्तावेज़ में कथित जालसाजी की गई हो। उसके बाद किसी न्यायालय में लंबित मामले की न्यायिक कार्यवाही में कथित जाली दस्तावेज़ दायर किया गया हो।संदर्भ के लिए सीआरपीसी की धारा 195(1)(b)(ii) में प्रावधान है कि कोई भी अदालत जालसाजी आदि के अपराधों का संज्ञान नहीं लेगी, जब ऐसा अपराध किसी कार्यवाही में प्रस्तुत या साक्ष्य के रूप में दिए गए दस्तावेज़ के संबंध में किया गया हो।जस्टिस...
एडिशनल चीफ मेडिकल ऑफिसर को PCPNDT Act के तहत किसी भी अपराध के लिए शिकायत दर्ज करने का कोई अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि एडिशनल चीफ मेडिकल ऑफिसर उपयुक्त प्राधिकारी नहीं है और उसके पास गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन पर प्रतिबंध) अधिनियम, 1994 के प्रावधानों के तहत किए गए किसी भी कथित अपराध के लिए शिकायत दर्ज करने का कोई अधिकार नहीं है।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने 1994 के अधिनियम की धारा 28 और धारा 17 (1) और (2) के आदेश पर विचार करते हुए यह बात कही। संदर्भ के लिए, धारा 28 अदालतों को उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा की गई शिकायत को छोड़कर अधिनियम के तहत किसी अपराध का...
लखनऊ में वकीलों द्वारा हड़पने की कथित घटना की जांच पुलिस आयुक्त करेंगे: इलाहाबाद हाईकोर्ट का संयुक्त सचिव को निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था), पुलिस आयुक्तालय, लखनऊ को 50-60 वकीलों द्वारा संपत्ति हड़पने के आरोपों की जांच करने और अदालत में सीलबंद कवर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ ने पुष्कल यादव द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें दावा किया गया कि उनकी संपत्ति 50-60 लोगों द्वारा हड़प ली गई, जो वकील की वर्दी पहनकर आए थे।अपने आदेश में न्यायालय ने निर्देश दिया कि संयुक्त पुलिस...
अनुकंपा नियुक्ति | भारत में बहू को बेटी की तरह माना जाता है, परिवार का अभिन्न अंग: इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने बहू को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की, क्योंकि मृतक का बेटा 75% दिव्यांगता से पीड़ित है। न्यायालय ने माना कि बहू परिवार का अभिन्न अंग है और उसे बेटी की तरह माना जाना चाहिए।जस्टिस विवेक कुमार बिड़ला और जस्टिस डोनाडी रमेश की पीठ ने कहा,“भारतीय समाज की प्रथा के अनुसार बहू को भी बेटी की तरह माना जाना चाहिए, क्योंकि वह भी परिवार का अभिन्न अंग है। मृतक सरकारी कर्मचारी के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ देने का मुख्य उद्देश्य परिवार के एकमात्र कमाने वाले की मृत्यु के कारण परिवार को...
Limitation Act | लंबे विलंब शामिल नहीं, केवल अपवादात्मक मामलों में ही क्षमादान दिया जा सकता है: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने धारा 37 के तहत दायर याचिका खारिज की
जस्टिस शेखर बी. सराफ की इलाहाबाद हाइकोर्ट की एकल पीठ ने कहा कि परिसीमा अधिनियम (Limitation Act ) की धारा 5 में लंबे विलंब शामिल नहीं हैं तथा केवल अपवादात्मक मामलों में ही क्षमादान दिया जा सकता है, जहां अपीलकर्ता ने लापरवाही से नही बल्कि सद्भावनापूर्वक कार्य किया हो। पीठ ने चार वर्ष की देरी के बाद दायर अपील खारिज कर दी।मामलाअपीलकर्ता ने मध्यस्थता और सुलह अधिनियम 1996 (Arbitration and Conciliation Act 1996) की धारा 37 के तहत अपील दायर की, जो मध्यस्थता अधिनियम की धारा 34 के तहत जारी आदेश से उत्पन्न...
BREAKING | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'UP Board Of Madarsa Education Act 2004' को असंवैधानिक घोषित किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने 'यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004' (UP Board Of Madarsa Education Act 2004) को धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करने वाला असंवैधानिक घोषित कर दिया है।कानून को अल्ट्रा वायर्स घोषित करते हुए जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को योजना बनाने का भी निर्देश दिया, जिससे वर्तमान में मदरसों में पढ़ रहे छात्रों को औपचारिक शिक्षा प्रणाली में समायोजित किया जा सके।यह फैसला राज्य सरकार द्वारा राज्य में इस्लामी शिक्षा...
कर्मचारी को अनुसूचित जनजाति कोटे का लाभ गलत तरीके से दिए जाने पर उसे उसकी ओर से किसी गलत बयानी के अभाव में बर्खास्त नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक कर्मचारी की बर्खास्तगी रद्द करने का फैसला बरकरार रखा है, क्योंकि उसका 30 साल का बेदाग सेवा रिकॉर्ड है।याचिकाकर्ता को 1990 में सहायक उप नियंत्रक जूनियर स्केल के पदों पर अनुसूचित जनजाति श्रेणी में नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्हें सहायक उप नियंत्रक, सीनियर स्केल के पद पर पदोन्नत किया गया। अंततः 31-07-2013 को उप नियंत्रक के पद पर पदोन्नत किया गया।याचिकाकर्ता को सेवा में शामिल होने के लगभग 30 साल बाद 2019 में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया कि एसटी होने का दावा करते हुए गलत लाभ...
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने 4 बुज़ुर्ग आरोपियों को अंतरिम ज़मानत पर रिहा किया, जिनमें से 2 100% अंधे हैं
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने मंगलवार को 4 बुज़ुर्ग हत्या के आरोपियों को अल्पकालिक ज़मानत दी, जिनमें से दो 100% अंधे हैं। उक्त कोर्ट ने जमानत तब तक के लिए दी, जब तक कि राज्य सरकार के समक्ष लंबित उनके समयपूर्व रिहाई के मामले पर फ़ैसला नहीं हो जाता।जस्टिस अरविंद सिंह सांगवान और जस्टिस शिव शंकर प्रसाद की खंडपीठ ने यह आदेश हाइकोर्ट के 10 जनवरी 2024 के आदेश [गणेश बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (आपराधिक अपील नंबर 165/2016) के मामले में पारित] के अनुरूप पारित किया।संदर्भ के लिए गणेश मामले (सुप्रा) में हाईकोर्ट की...
सरकारी अधिकारियों की लालफीताशाही का क्लासिक उदाहरण: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने मंदिरों को बकाया राशि का भुगतान न करने पर यूपी सरकार को फटकार लगाई
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने बुधवार को एक बार फिर राज्य सरकार को पिछले चार वर्षों से वृंदावन में ठाकुर रंगजी महाराज विराजमान मंदिर और आठ अन्य मंदिरों की वार्षिकी रोके रखने के लिए फटकार लगाई। न्यायालय ने इसे सरकारी अधिकारियों की लालफीताशाही का क्लासिक उदाहरण भी कहा। यह टिप्पणी एकल न्यायाधीश ने वृंदावन में ठाकुर रंगजी महाराज विराजमान मंदिर द्वारा दायर याचिका पर विचार करते हुए की, जिसमें मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट और उसके वरिष्ठ कोषागार अधिकारी से यूपी जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 99 के...
नजूल भूमि नीति पर यूपी सरकार के हालिया अध्यादेश को लेकर इलाहाबाद हाइकोर्ट में चुनौती दायर
नजूल भूमि नीति के संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार के हालिया अध्यादेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाइकोर्ट में याचिका दायर की गई। पिछले सप्ताह मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने राज्य के वकीलों को मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिया।उल्लेखनीय है कि 7 मार्च 2024 को उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश नजूल संपत्ति (सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए प्रबंधन और उपयोग) अध्यादेश 2024 को अधिसूचित किया, जिसके अनुसार अध्यादेश के लागू होने के बाद किसी भी नजूल भूमि को किसी भी निजी व्यक्ति या निजी...
'व्यक्तिगत लाभ को कायम रखने के लिए सत्ता का बेशर्म दुरुपयोग': 'जौहर यूनिवर्सिटी' मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के पूर्व मंत्री आजम खान को फटकार लगाई
प्रदेश के रामपुर जिले में मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन का पट्टा रद्द करने को दी गई चुनौती खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने पद का दुरुपयोग करने के लिए तत्कालीन कैबिनेट मंत्री और सीनियर समाजवादी पार्टी नेता आजम खान के कृत्यों की कड़ी आलोचना की।जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ द्वारा पारित फैसले में इस बात पर जोर दिया गया कि जौहर ट्रस्ट को सरकारी भूमि का पट्टा देना तत्कालीन कैबिनेट मंत्री द्वारा "सत्ता के दुरुपयोग और बिना किसी संशय के दुरुपयोग"...
Hathras 'Conspiracy' | गिरफ्तारी के 41 महीने बाद UAPA मामले में सिद्दीकी कप्पन के सह-आरोपी मसूद को मिली जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2020 के हाथरस 'साजिश' मामले में स्टूडेंट लीडर मसूद अहमद को जमानत दे दी। उक्त मामले में मसूद और पत्रकार सिद्दीकी कप्पन सहित 4 लोगों पर यूपी पुलिस ने सख्त गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA Act) के तहत मामला दर्ज किया था।जस्टिस अताउ रहमान मसूदी और जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव-I की खंडपीठ ने यह आदेश पारित करते समय इस तथ्य को ध्यान में रखा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सह-अभियुक्त कप्पन को जमानत दे दी है और अन्य सह-अभियुक्तों को इस न्यायालय की समन्वय पीठ जमानत पर रिहा कर दिया...
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने मंदिर में भारत विरोधी नारे लगाने के आरोपी लोगों के खिलाफ आरोप पत्र रद्द करने से इनकार किया
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने पिछले सप्ताह मंदिर में भारत विरोधी नारे लगाने के उनके कथित कृत्य से संबंधित मामले में तीन व्यक्तियों के खिलाफ समन आदेश के साथ-साथ आरोप पत्र रद्द करने से इनकार कर दिया, जबकि वहां एक धार्मिक उपदेश चल रहा था।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने उन्हें राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि उनके खिलाफ दूसरे देश की प्रशंसा करने और हमारे देश के खिलाफ नारे लगाने और धार्मिक उपदेश में उपस्थित लोगों को गाली देने और धमकी देने के आरोप हैं, जो स्पष्ट रूप से मुकदमे का मामला बनता है।अदालत ने कहा...
BREAKING | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमीन का पट्टा रद्द करने को चुनौती देने वाली जौहर यूनिवर्सिटी की याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य के रामपुर जिले में मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की भूमि के पट्टे को रद्द करने को दी गई चुनौती खारिज कर दी। यूनिवर्सिटी ट्रस्ट की रिट याचिका में यूनिवर्सिटी से जुड़े लीज डीड रद्द करके जमीन जब्त करने के उत्तर प्रदेश सरकार के कदम को चुनौती दी गई।राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान के नेतृत्व वाले मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को पट्टे की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए 3.24 एकड़ भूमि का पट्टा रद्द कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया कि मूल रूप से एक...
क्या अभियोजन के अभाव में NI Act की धारा 138 के तहत शिकायत खारिज करना सीआरपीसी की धारा 256(1) के तहत दोषमुक्ति के समान है? : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी पीठ को भेजा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस सवाल को एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया है कि क्या अभियोजन के अभाव में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत शिकायत को खारिज करना सीआरपीसी की धारा 256 (1) के तहत बरी करने के समान होगा, और ऐसा सीआरपीसी की धारा 378(4) के तहत अपील में चुनौती में किया जा सकता है या क्या वह आदेश सीआरपीसी की धारा 397 के तहत संशोधित किया जा सकता है?जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने विनय कुमार बनाम मामले में समन्वय पीठ के आदेश से असहमति जताते हुए यूपी राज्य 2007 मामले को...
SSB Recruitment | मेडिकल बोर्ड की राय लिमिटेड की न्यायिक पुनर्विचार में उम्मीदवार के ऑपरेशन के अधिकार की मान्यता शामिल नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि मेडिकल जांच के दौरान पाई गई मेडिकल स्थिति के आधार पर उम्मीदवारी को अस्वीकार करने में न्यायिक पुनर्विचार का दायरा सीमित है। कोर्ट ने कहा कि जब तक मेडिकल बोर्ड या विभाग ने परीक्षा आयोजित करने के लिए जारी किसी दिशानिर्देश का उल्लंघन नहीं किया है, तब तक कोर्ट का हस्तक्षेप उचित नहीं है।जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस सैयद क़मर हसन रिज़वी की खंडपीठ ने कहा,“मेडिकल बोर्ड द्वारा जिस सीमित मुद्दे की जांच की जानी है वह यह है कि क्या मेडिकल परीक्षा की तारीख पर उम्मीदवार...
केवल बुरे चरित्र का आरोप किसी व्यक्ति को लाभ का दावा करने से वंचित नहीं कर देता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि केवल 'खराब चरित्र' होने का आरोप किसी व्यक्ति को उत्तर प्रदेश लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम 2016 [UP Fighters Of Democracy Honor Act 2016] के तहत लाभ का दावा करने से वंचित नहीं करता।उत्तर प्रदेश लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम 2016 की धारा 2 (ए) के तहत "लोकतंत्र सेनानियों" को उत्तर प्रदेश राज्य के निवासियों के रूप में परिभाषित किया गया, जिन्होंने 25.06.1975 से 21.03.1977 तक आपातकालीन अवधि के दौरान सक्रिय रूप से लड़ाई लड़ी और हिरासत में लिया गया। ऐसी गतिविधियों में...
सीआरपीसी की धारा 125 के तहत कार्यवाही में समझौता करके हिंदुओं के बीच विवाह को समाप्त नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की कार्यवाही के समय किए गए समझौते के माध्यम से दो हिंदुओं के बीच कानूनी विवाह को समाप्त नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने माना कि ऐसा कोई भी विवाह केवल हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत सक्षम न्यायालय द्वारा पारित डिक्री द्वारा ही भंग किया जा सकता है।जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी की पीठ ने फैसला सुनाया,चूंकि पक्षकारों के बीच विवाह हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के प्रावधानों द्वारा शासित होते हैं, ऐसे विवाह को...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ्यूचर समूह के सीईओ किशोर बियानी के खिलाफ कामर्सियल लेनदेन से संबंधित आपराधिक शिकायत खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ्यूचर समूह के संस्थापक और समूह सीईओ किशोर बियाणी को राहत देते हुए मंगलवार को उनके खिलाफ एक वाणिज्यिक लेनदेन से संबंधित मामले में जारी समन आदेश और गैर-जमानती वारंट सहित आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। जस्टिस मयंक कुमार जैन की पीठ ने यह आदेश सीआरपीसी की धारा 482 के तहत बियानी के आवेदन पर पारित किया, जिसमें गोरखपुर अदालत द्वारा उनके खिलाफ धारा 120 बी, 463, 406, 420, 504 और 506 आईपीसी के तहत दायर आपराधिक शिकायत में पारित एनबीडब्ल्यू जारी करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। ...
वकील ने तैयार किया झूठा शपथ पत्र? इलाहाबाद हाइकोर्ट ने डिपोनेंट्स की उपस्थिति के संबंध में ओथ कमिश्नर के रजिस्टर से वेरिफिकेशन मांगा
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने सोमवार को यह वेरीफाई करने के बाद न्यायालय के सीनियर रजिस्ट्रार से रिपोर्ट मांगी कि क्या याचिकाकर्ता शपथ आयुक्त के समक्ष उपस्थित था, जब कथित हलफनामे में शपथ ली गई थी कि वह परिसर खाली कर देगा।हाइकोर्ट के समक्ष अलग कार्यवाही में याचिकाकर्ता के तत्कालीन वकील ने वचन पत्र प्रस्तुत किया। उक्त वचन पत्र में कहा गया कि याचिकाकर्ता विवादित परिसर को खाली कर देगा।याचिकाकर्ता ने उस आदेश के ख़िलाफ़ रिकॉल आवेदन दायर किया, जो कथित तौर पर जाली उपक्रम पर आधारित है। इस बीच प्रतिवादियों की ओर से...




















