इलाहाबाद हाईकोट

अनंतिम टैरिफ के अधिक/कम निर्धारण पर 6% प्रति वर्ष साधारण ब्याज तय करना विद्युत अधिनियम के विरुद्ध: इलाहाबाद हाइकोर्ट
अनंतिम टैरिफ के अधिक/कम निर्धारण पर 6% प्रति वर्ष साधारण ब्याज तय करना विद्युत अधिनियम के विरुद्ध: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (टैरिफ की शर्तें और नियम) (पहला संशोधन), विनियम 2006 के विनियमन 5A को इस सीमा तक रद्द कर दिया कि यह अनंतिम टैरिफ के अधिक/कम निर्धारण पर 6% प्रति वर्ष साधारण ब्याज प्रदान करता है, जो विद्युत अधिनियम 2003 (Electricity Act, 2003) की धारा 62(6) के विरुद्ध है।विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 62 में वह तरीका बताया गया, जिसके तहत उपयुक्त आयोग टैरिफ निर्धारित करेगा। धारा 62(6) में प्रावधान है कि यदि कोई लाइसेंसधारी या उत्पादक कंपनी इस धारा के तहत निर्धारित...

धारा 125 सीआरपीसी के तहत गुजारा भत्ता आदेश धारा 127 के तहत वापस लिया जा सकता है, धारा 362 सीआरपीसी के तहत रोक ऐसे मामलों में लागू नहीं होती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
धारा 125 सीआरपीसी के तहत गुजारा भत्ता आदेश धारा 127 के तहत वापस लिया जा सकता है, धारा 362 सीआरपीसी के तहत रोक ऐसे मामलों में लागू नहीं होती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि धारा 125 सीआरपीसी के तहत पारित आदेश अंतिम या अंतरिम हो सकता है और धारा 127 सीआरपीसी के तहत वापस लिया या बदला जा सकता है। इसलिए धारा 362 सीआरपीसी के तहत रोक ऐसे मामलों में लागू नहीं होती।धारा 362 सीआरपीसी के अधिदेश का अवलोकन करते हुए जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने कहा कि यदि सीआरपीसी के तहत कोई प्रावधान प्रदान किया गया, जो निर्णय या अंतिम आदेश को वापस लेने या बदलने की अनुमति देता है तो धारा 362 सीआरपीसी के तहत प्रतिबंध उन प्रावधानों पर लागू नहीं होगा जैसा...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या की सरयू नदी में प्रदूषण के लिए यूपी सरकार को फटकार लगाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या की 'सरयू' नदी में प्रदूषण के लिए यूपी सरकार को फटकार लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या में सरयू नदी में प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने में 'उदासीनता' के रूप में राज्य सरकार को फटकार लगाई।2014 में पवन शास्त्री द्वारा दायर जनहित याचिका में सरयू नदी की सफाई के लिए पर्याप्त बजट द्वारा समर्थित समयबद्ध कार्य योजना की मांग की गई। इसके अतिरिक्त, इसमें पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण अधिनियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई, जिससे सीवरेज और अन्य जहरीले रसायनों को बिना उपचार के सरयू नदी में न छोड़ा...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के कामकाज पर निलंबन के बाद UP REAT में रिक्तियों को लेकर स्वत: संज्ञान जनहित याचिका शुरू की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के कामकाज पर 'निलंबन' के बाद UP REAT में रिक्तियों को लेकर स्वत: संज्ञान जनहित याचिका शुरू की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ स्थित रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण में सदस्यों की नियुक्ति तथा सामान्य रूप से न्यायाधिकरणों के कामकाज, जिसमें रिक्तियों को भरना भी शामिल है, के संबंध में स्वप्रेरणा से एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (पीआईएल) शुरू की है। इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह निर्णय रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा हाल ही में (15 मई) न्यायिक कामकाज को निलंबित करने के कदम के बाद आया है।UP REAT का यह निर्णय प्रशासनिक/तकनीकी सदस्य की कमी के कारण लिया गया, जिससे राज्य में रियल एस्टेट विवादों से संबंधित...

मामले पर विचार की आवश्यकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवध बार एसोसिएशन के खातों के वार्षिक ऑडिट के लिए जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया
'मामले पर विचार की आवश्यकता': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवध बार एसोसिएशन के खातों के वार्षिक ऑडिट के लिए जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवध बार एसोसिएशन हाईकोर्ट, लखनऊ को एक जनहित याचिका (पीआईएल) में नोटिस जारी किया है, जिसमें एसोसिएशन के खातों का सुचारू और पारदर्शी वार्षिक ऑडिट करने के लिए एक मैके‌निज्म की मांग की गई है। यह देखते हुए कि मामले पर विचार करने की आवश्यकता है, जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई जुलाई के पहले सप्ताह में तय की।एसोसिएशन के दो अधिवक्ता-सदस्यों द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि अवध बार एसोसिएशन में विभिन्न माध्यमों से...

एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देते समय मजिस्ट्रेट डाकघर की तरह काम कर रहे हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिशा-निर्देश जारी किए
एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देते समय मजिस्ट्रेट डाकघर की तरह काम कर रहे हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिशा-निर्देश जारी किए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में टिप्पणी की कि ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देते समय मजिस्ट्रेट "डाकघर" की तरह काम कर रहे हैं। यह देखते हुए कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में विभिन्न याचिकाएं दायर की जा रही हैं, जिनमें लोगों के खिलाफ धारा 406, 420, 467 और 471 आईपीसी के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की जा रही है, जबकि वास्तविक विवाद दीवानी प्रकृति का था, जस्टिस अरविंद सिंह सांगवान और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल से पहले की शराब की दुकान के लाइसेंस के नवीनीकरण से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल से पहले की शराब की दुकान के लाइसेंस के नवीनीकरण से इनकार किया

हाल ही में, एलकेजी के एक छात्र द्वारा दायर जनहित याचिका पर विचार करते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक देशी शराब की दुकान के लाइसेंस का नवीनीकरण करने से इनकार कर दिया, क्योंकि यह एक स्कूल के बहुत करीब स्थित थी, जबकि शराब की दुकान स्कूल से बहुत पुरानी थी। चीफ ज‌स्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस विकास बधवार की पीठ ने कहा, "केवल यह तथ्य कि दुकान का इस्तेमाल स्कूल के अस्तित्व में आने से पहले के वित्तीय वर्ष में शराब की दुकान के रूप में किया गया है, लाइसेंस देने के उद्देश्य से प्रावधान को लागू करने के लिए...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी हलाल सर्टिफिकेट जारी करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपी 4 लोगों को जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी हलाल सर्टिफिकेट जारी करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपी 4 लोगों को जमानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया' (HCI) के चार पदाधिकारियों को जमानत दे दी है। यह संगठन कानूनी अधिकार के बिना फर्जी हलाल प्रमाणपत्र जारी करने और इस तरह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोपी है। जमानत पाने वालों में हबीब यूसुफ पटेल (काउंसिल के अध्यक्ष), मुइदशीर सपड़िया (उपाध्यक्ष), मोहम्मद ताहिर जाकिर हुसैन चौहान (महासचिव) और मोहम्मद अनवर (कोषाध्यक्ष) शामिल हैं। इन चारों पर धारा 120-बी, 153-ए, 298, 384, 420, 467, 468, 471, 504 आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज है।जस्टिस पंकज भाटिया की...

दहेज के झूठे आरोपों से बचने के लिए दुल्हन और दूल्हे को शादी में मिले उपहारों की सूची रखनी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
दहेज के झूठे आरोपों से बचने के लिए दुल्हन और दूल्हे को शादी में मिले उपहारों की सूची रखनी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3(2) के तहत विवाह के समय दुल्हन या दूल्हे द्वारा प्राप्त उपहारों की सूची बनाए रखना बाद के विवादों के समय दहेज के झूठे आरोपों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। जस्टिस विक्रम डी चौहान ने कहा, "सूची बनाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है ताकि विवाह के दोनों पक्ष और उनके परिवार के सदस्य बाद में विवाह में दहेज लेने या देने का झूठा आरोप न लगा सकें। दहेज निषेध अधिनियम द्वारा की गई व्यवस्था बाद में पक्षों के बीच मुकदमेबाजी में भी इस निष्कर्ष पर पहुंचने...

देरी से नाराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में यौन पीड़िताओं के लंबित मुआवजे के आवेदनों के शीघ्र निपटारे का निर्देश दिया
देरी से नाराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में यौन पीड़िताओं के लंबित मुआवजे के आवेदनों के शीघ्र निपटारे का निर्देश दिया

उत्तर प्रदेश में यौन उत्पीड़न पीड़ितों को मुआवजा देने में हो रही देरी पर गंभीर नाराजगी जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य भर के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) को ऐसे लंबित आवेदनों का शीघ्रता से निपटारा करने के लिए सभी प्रयास करने का निर्देश दिया है। जस्टिस विवेक कुमार बिड़ला और ज‌िस्टस सैयद कमर हसन रिजवी की पीठ ने यह निर्देश इस बात पर गौर करते हुए जारी किया कि राज्य के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के समक्ष 1129 आवेदन लंबित हैं और लगभग 968 आवेदनों के निपटारे में देरी हो रही है।खंडपीठ...

सीआरपीसी की धारा 438 में यूपी संशोधन आईपीसी की धारा 376(3) के तहत आरोपी को अग्रिम जमानत देने पर रोक नहीं लगाता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 438 में यूपी संशोधन आईपीसी की धारा 376(3) के तहत आरोपी को अग्रिम जमानत देने पर रोक नहीं लगाता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि दंड प्रक्रिया संहिता (उत्तर प्रदेश संशोधन) अधिनियम, 2018, जिसने राज्य में अग्रिम जमानत (धारा 438 सीआरपीसी) के प्रावधान को पुनर्जीवित किया (6 जून, 2019 से प्रभावी), धारा 376 आईपीसी की उपधारा (3) के तहत अपराध में दर्ज मामले आरोपी को गिरफ्तारी से पहले जमानत देने पर रोक नहीं लगाता है। जस्टिस शेखर कुमार यादव की पीठ ने 17.5 वर्षीय एक लड़के को अग्रिम जमानत देते हुए यह टिप्पणी की, जिस पर 16 वर्षीय लड़की से छेड़छाड़ का आरोप है।अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, अक्टूबर 2022...

तेलुगु फिल्म के हिंदी डब वर्जन में बिहार के लोगों पर किए गए अपमानजनक डायलॉग, हाईकोर्ट ने सेंसर सर्टिफिकेट रद्द करने की याचिका पर नोटिस जारी
तेलुगु फिल्म के हिंदी डब वर्जन में बिहार के लोगों पर किए गए अपमानजनक डायलॉग, हाईकोर्ट ने सेंसर सर्टिफिकेट रद्द करने की याचिका पर नोटिस जारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने 2015 की बिहार के लोगों के खिलाफ कथित संवाद के लिए तेलुगु फिल्म 'धी अंते धी' (ताकतवार पुलिसवाला) के डब हिंदी वर्जन के सेंसर प्रमाणपत्र रद्द करने की मांग वाली जनहित याचिका में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को नोटिस जारी किया।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने नोटिस जारी कर CBFC से फिल्मों को सेंसर प्रमाणपत्र देने की पूरी प्रक्रिया का विवरण देते हुए जवाब मांगा। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होगी।लखनऊ निवासी दीपांकर कुमार द्वारा दायर जनहित...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वादियों की पिटाई के आरोप में दस वकीलों के कोर्ट परिसर में प्रवेश पर रोक लगाई, आपराधिक अवमानना नोटिस जारी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वादियों की पिटाई के आरोप में दस वकीलों के कोर्ट परिसर में प्रवेश पर रोक लगाई, आपराधिक अवमानना नोटिस जारी किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रयागराज जिला अदालत परिसर में वादियों के साथ मारपीट के आरोपी दस वकीलों को आपराधिक अवमानना नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उन्हें प्रयागराज में जिला जज के परिसर में प्रवेश करने से भी रोक दिया। खंडपीठ कहा, 'इस मामले में घटना को पूरी गंभीरता से देखा जाना चाहिए. यह न्यायालय न्यायालय की कार्यवाही को इस तरह से बाधित करने की अनुमति नहीं दे सकता है कि वादियों को अदालत कक्ष में बेरहमी से पीटा जाए और पीठासीन अधिकारी को अपनी सुरक्षा के लिए अपने कक्ष में भागना पड़े।...

UP Land Ceiling Act की धारा 9 (2) के तहत मृत व्यक्ति के नाम पर जारी नोटिस के आधार पर कार्यवाही जारी नहीं रह सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
UP Land Ceiling Act की धारा 9 (2) के तहत मृत व्यक्ति के नाम पर जारी नोटिस के आधार पर कार्यवाही जारी नहीं रह सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश भूमि जोत पर सीलिंग अधिनियम, 1960 के तहत कोई कार्यवाही जारी नहीं रह सकती है, जो किसी मृत व्यक्ति के नाम पर धारा 9 (2) के तहत जारी नोटिस पर आधारित है।संदर्भ के लिए, धारा 9 (2) नोटिस जारी करने (10 अक्टूबर, 1975 के बाद किसी भी समय) से संबंधित है, जो उक्त तारीख को उसके लिए लागू सीलिंग क्षेत्र से अधिक भूमि धारण करने वाले टेन्योर-धारक को इस तरह के नोटिस के 30 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने के लिए, इस तरह के रूप में उसकी सभी होल्डिंग्स के संबंध में एक बयान और...

लेबर कोर्ट के समक्ष किए गए दावे के शीर्षक में कुछ धाराओं का उल्लेख मात्र से उसके अधिकार क्षेत्र का निर्धारण नहीं होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
लेबर कोर्ट के समक्ष किए गए दावे के शीर्षक में कुछ धाराओं का उल्लेख मात्र से उसके अधिकार क्षेत्र का निर्धारण नहीं होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

सिंगल जज के आदेश के खिलाफ जागरण प्रकाशन द्वारा दायर विशेष अपील को खारिज करते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना है कि दावे के शीर्षक में कुछ धाराओं का उल्लेख और लेबर कोर्ट में किए गए संदर्भ से न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का निर्धारण नहीं होगा। कोर्ट ने माना कि क्षेत्राधिकार का निर्धारण इस तरह के दावे और संदर्भ में किए गए तर्कों और कथनों के सार से किया जा सकता है।चीफ़ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस विकास बुधवार की खंडपीठ ने कहा कि "यह अच्छी तरह से तय है कि एक आवेदन/दावे का शीर्षक और उसमें किया गया...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वसीयत के पंजीकरण को अनिवार्य करने वाले UPZALR अधिनियम की धारा 169(3) में 2004 के संशोधन को रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वसीयत के पंजीकरण को अनिवार्य करने वाले UPZALR अधिनियम की धारा 169(3) में 2004 के संशोधन को रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 169(3) में 2004 के संशोधन को उस सीमा तक रद्द कर दिया है, जहां तक यह वसीयत के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है। न्यायालय ने माना कि वसीयत पंजीकृत करने का आदेश भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 40 सहपठित धारा 17 के विरुद्ध है। धारा 169(3) उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950 को इस प्रकार संशोधित किया गया कि "उपधारा (1) के प्रावधानों के तहत बनाई गई प्रत्येक वसीयत, किसी भी कानून, प्रथा या...

दहेज हत्या | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पांच साल जेल में रहने के बाद सास को बरी किया, कहा- कोई प्रत्यक्ष संलिप्तता नहीं
दहेज हत्या | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पांच साल जेल में रहने के बाद सास को बरी किया, कहा- कोई प्रत्यक्ष संलिप्तता नहीं

इलाहबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह दहेज हत्या के एक मामले का निस्तारण किया, जिसमें उन्होंने मृतक की सास को इसलिए बरी कर दिया क्योंकि उन्होंने पाया कि सितंबर, 2015 में अपराध के समय वह अपने बेटे और उसकी पत्नी (मृतक) से अलग रह रही थी। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस मो अज़हर हुसैन इदरीसी ने कहा कि सास के खिलाफ विशिष्ट आरोपों का अभाव था और वह पीड़िता की मृत्यु से पहले ही परिवार से अलग हो गई थी, जो यह दर्शाता है कि दहेज की कथित मांगों में उसकी कोई प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं थी।हालांकि, खंडपीठ ने...

ग्रेच्युटी का हक रिटायरमेंट की उम्र पर नहीं, बल्कि सेवा के वर्षों की नंबर पर निर्भर करता है: इलाहाबाद हाइकोर्ट
ग्रेच्युटी का हक रिटायरमेंट की उम्र पर नहीं, बल्कि सेवा के वर्षों की नंबर पर निर्भर करता है: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने माना कि सरकारी कर्मचारी को ग्रेच्युटी उसकी सेवा के वर्षों के आधार पर देय होगी न कि जिस उम्र में वह रिटायर होता है।जस्टिस जे.जे. मुनीर ने कहा,"साठ साल की उम्र में रिटायरमेंट कोई ऐसा अधिकार नहीं है, जिससे कर्मचारी को ग्रेच्युटी प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त हो जो उसके पास नहीं है। कर्मचारी को ग्रेच्युटी का अधिकार उसके द्वारा सेवा किए गए वर्षों की नंबर के अनुसार मिलता है।"याचिकाकर्ता एक सहायता प्राप्त इंटरमीडिएट संस्थान में शिक्षक था, जिसने 57 वर्ष की आयु में स्वेच्छा से...