इलाहाबाद हाईकोट

महिलाओं के अश्लील वीडियो इक्कठा करना और प्रसारित करना समाज में गंभीर खतरा बनता जा रहा है: इलाहाबाद हाइकोर्ट
महिलाओं के अश्लील वीडियो इक्कठा करना और प्रसारित करना समाज में गंभीर खतरा बनता जा रहा है: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने महिलाओं के अश्लील वीडियो संग्रहीत और प्रसारित करने के बढ़ते मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई। इसे समाज के लिए एक गंभीर खतरा माना।जस्टिस अजय भनोट की पीठ ने यह भी कहा कि IT से संबंधित अपराधों और साइबर अपराधों की जांच की खराब गुणवत्ता जांच के कामकाज में एक बड़ी गलती बन रही है।कोर्ट ने मांगे उर्फ ​​रविन्द्र को जमानत देने से इनकार करते हुए ये टिप्पणियां कीं, जिस पर धारा 376डी, 506 आईपीसी और POCSO Act की धारा 5जी/6 के तहत मामला दर्ज किया गया। वह नवंबर 2023 से जेल में है।यह देखते हुए कि...

फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट मामले में आजम खान की सजा पर रोक, पत्नी-बेटे को मिली जमानत
फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट मामले में आजम खान की सजा पर रोक, पत्नी-बेटे को मिली जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाजवादी पार्टी (SP) के सीनियर नेता और यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को मिली सात साल की सजा पर रोक लगा दी। हालांकि, कोर्ट ने खान की पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम की सजाओं पर रोक नहीं लगाई गई। कोर्ट इन तीनों को जमानत दे दी।आजम खान ने बेटे अब्दुल्ला आजम के दो बर्थ सर्टिफिकेट बनवाए जाने और उनका दुरुपयोग किए जाने के मामले में रामपुर की स्पेशल कोर्ट से मिली सात 7 साल की सजा को आजम खान पत्नी और बेटे ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। ख़ान परिवार की याचिकाओं...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हरियाणा SHO को लापता 13 वर्षीय लड़के का पता लगाने के लिए हरसंभव प्रयास करने का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हरियाणा SHO को लापता 13 वर्षीय लड़के का पता लगाने के लिए हरसंभव प्रयास करने का निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को हरियाणा के पानीपत के चांदनी बाग के स्टेशन हाउस ऑफिसर को लापता 13 वर्षीय लड़के का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास करने का निर्देश दिया, जो मूल रूप से राज्य के यूपी के बहराईच जिले का रहने वाला है।जस्टिस मोहम्मद की पीठ फैज़ आलम खान ने दस्तावेजी साक्ष्य सहित लापता बच्चे को खोजने के लिए सभी कार्रवाइयों की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी। आदेश की कॉपी अनुपालन के लिए राज्य के डीजीपी को भेजी गई।एकल न्यायाधीश ने यह आदेश लापता बच्चे (बीरू) की मां (वीणा देवी) द्वारा दायर बंदी...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विधवा की संपत्ति हड़पने के लिए राजस्व प्राधिकरण के समक्ष झूठे हलफनामे दाखिल करने पर पार्टी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विधवा की संपत्ति हड़पने के लिए राजस्व प्राधिकरण के समक्ष झूठे हलफनामे दाखिल करने पर पार्टी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विभिन्न अर्ध-न्यायिक अधिकारियों के समक्ष झूठा हलफनामा दाखिल करके विधवा की जमीन हड़पने की कोशिश करने वाले एक पक्ष पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।न्यायालय ने माना कि याचिकाकर्ताओं ने जानबूझकर अधिकारियों को धोखा देकर कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है। न्यायालय ने किशोर समरीते बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य पर भरोसा किया, जहां सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि जो मुकदमेबाज अदालतों में धोखा देने या गुमराह करने के इरादे से आते हैं, उन्हें नकार दिया जाता है।सर्वोच्च न्यायालय...

लापरवाही भरी जांच से नाराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के मामलों की जांच में कौशल बढ़ाने के लिए जांच अधिकारी को विशेष प्रशिक्षण देने का आदेश दिया
लापरवाही भरी जांच से नाराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के मामलों की जांच में कौशल बढ़ाने के लिए जांच अधिकारी को विशेष प्रशिक्षण देने का आदेश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक जांच अधिकारी को धारा 302 आईपीसी के तहत आरोप हटाने के बाद जल्दबाजी में धारा 306 आईपीसी के तहत आरोप पत्र दाखिल करने के लिए फटकार लगाई, जिसका उल्लेख प्राथमिकी में किया गया था।ज‌स्टिस मंजू रानी चौहान की पीठ ने आगरा के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे विशेष रूप से धारा 302 आईपीसी के तहत अपराधों की जांच के लिए जांच अधिकारी को विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजें। अदालत ने आगे निर्देश दिया कि उनके प्रशिक्षण पूरा होने तक उन्हें किसी भी जांच का जिम्मा नहीं सौंपा जाना चाहिए।यह...

जज के लिए यह अनुचित; उन्होंने अपनी गरिमा नीलाम कर दी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सीजेएम द्वारा दर्ज झूठी एफआईआर को खारिज किया
'जज के लिए यह अनुचित; उन्होंने अपनी गरिमा नीलाम कर दी': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सीजेएम द्वारा दर्ज 'झूठी' एफआईआर को खारिज किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य के विद्युत विभाग के कार्यरत अधिकारियों के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बांदा द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को खारिज करते हुए न्यायिक अधिकारी के आचरण पर कड़ी टिप्पणी की। जस्टिस राहुल चतुर्वेदी और जस्टिस मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी की पीठ ने कहा कि सीजेएम बांदा भगवान दास गुप्ता ने अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, दस्तावेजों के निर्माण और धन उगाही के "बेबुनियाद और मनगढ़ंत" आरोप लगाए हैं, ताकि उन्हें "कड़ा सबक सिखाया जा सके" और उन्हें "सीजेएम की शक्ति और...

अनुशासनात्मक प्राधिकारी/पूर्ण न्यायालय को अभ्यावेदन खारिज करने का कारण बताने की बाध्यता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला जज की बर्खास्तगी को बरकरार रखा
अनुशासनात्मक प्राधिकारी/पूर्ण न्यायालय को अभ्यावेदन खारिज करने का कारण बताने की बाध्यता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला जज की बर्खास्तगी को बरकरार रखा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज की मांग करने तथा अपनी पत्नी द्वारा दायर मामले में अपने अधीनस्थ को प्रभावित करने के आरोप में न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी को बरकरार रखते हुए कहा कि अनुशासनात्मक प्राधिकारी हाईकोर्ट का पूर्ण न्यायालय होने के नाते दोषी न्यायिक अधिकारी द्वारा जांच रिपोर्ट पर की गई टिप्पणियों को खारिज करने के लिए कारण बताने के लिए बाध्य नहीं है। राम कुमार बनाम हरियाणा राज्य और बोलोराम बोरदोलोई बनाम लखीमी गौलिया बैंक एवं अन्य में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों तथा माधव प्रसाद बनाम उप निदेशक में...

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने ट्रांस महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले व्यक्ति को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने ट्रांस महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले व्यक्ति को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया

व्यक्तियों के अपने जीवन को स्वतंत्र रूप से जीने के अधिकार की पुष्टि करते हुए, जिसमें अपने साथी को चुनना भी शामिल है, इलाहाबाद हाइकोर्ट ने हाल ही में ट्रांस महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले व्यक्ति को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया।अपने आदेश में जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस डोनाडी रमेश की पीठ ने जोर देकर कहा कि अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहना जीवन का ऐसा क्षेत्र है, जहां संवैधानिक न्यायालय किसी भी सामाजिक पूर्वाग्रह को नकारने और नियंत्रित करने के लिए संवैधानिक कानून के...

तेलुगु फिल्म में बिहार के लोगों पर आपत्तिजनक डायलॉग विवाद: हाईकोर्ट ने OTT/Social Media प्लेटफार्मों पर प्रदर्शित फिल्मों के लिए प्रमाणन सिस्टम पर जवाब मांगा
तेलुगु फिल्म में बिहार के लोगों पर आपत्तिजनक डायलॉग विवाद: हाईकोर्ट ने OTT/Social Media प्लेटफार्मों पर प्रदर्शित फिल्मों के लिए प्रमाणन सिस्टम पर जवाब मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारत सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन प्राइम जैसे ओवर-द-टॉप (ओटीटी) आदि और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित फिल्मों के प्रमाणन के लिए स्थापित सिस्टम के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करने को कहा है।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने 2015 की तेलुगु फिल्म 'धी अंते धी' ('ताकतवार पुलिसवाला') के डब हिंदी वर्जन को जारी किए गए सेंसर सर्टिफिकेट को रद्द करने की मांग करने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर विवरण मांगा। उक्त फिल्म...

एससी/एसटी अधिनियम के तहत जानबूझकर अपमान का कथित कृत्य तब तक अपराध नहीं, जब तक कि वह सार्वजनिक रूप से न किया गया हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
एससी/एसटी अधिनियम के तहत 'जानबूझकर अपमान' का कथित कृत्य तब तक अपराध नहीं, जब तक कि वह सार्वजनिक रूप से न किया गया हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि जानबूझकर अपमान या धमकी देने का कथित कृत्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (एससी/एसटी अधिनियम) की धारा 3(1)(आर) के तहत अपराध तभी माना जाएगा, जब यह सार्वजनिक रूप से किया गया हो। जस्टिस विक्रम डी चौहान की पीठ ने एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1)(आर) के तहत अपराध के संबंध में तीन व्यक्तियों (आवेदकों) के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।दरअसल, आवेदकों के खिलाफ नवंबर 2017 में धारा 147, 452, 323, 504, 506...

धारा 33-जी यूपी माध्यमिक शिक्षा (सेवा चयन बोर्ड) अधिनियम दशकों से सेवारत शिक्षकों को नियमित करने के लिए एक लाभकारी प्रावधान: इलाहाबाद हाईकोर्ट
धारा 33-जी यूपी माध्यमिक शिक्षा (सेवा चयन बोर्ड) अधिनियम दशकों से सेवारत शिक्षकों को नियमित करने के लिए एक लाभकारी प्रावधान: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा (सेवा चयन बोर्ड) अधिनियम, 1982 की धारा 33-जी, जिसे 2016 में संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया था, उन शिक्षकों के लिए एक लाभार्थी योजना थी, जिन्होंने दशकों तक शिक्षक के रूप में सेवा की है। यह प्रावधान प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक के पदों के अलावा अन्य पदों पर शिक्षकों की मौलिक नियुक्तियों को नियंत्रित करता है। इसकी उपधारा (ए) में प्रधानाचार्य या प्रधानाध्यापक के अलावा अन्य शिक्षक के नियमितीकरण का प्रावधान है, जिन्हें सात अगस्त 1993 को या उसके...

धारा 2(ई) यूपीवैट | कारोबार बंद होने के बाद बेचे गए प्लांट, मशीनरी पूंजीगत सामान, इन्हें कर से बाहर रखा गया है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
धारा 2(ई) यूपीवैट | कारोबार बंद होने के बाद बेचे गए प्लांट, मशीनरी पूंजीगत सामान, इन्हें कर से बाहर रखा गया है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि कारोबार बंद होने के बाद बेचे गए संयंत्र और मशीनरी उत्तर प्रदेश मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2008 की धारा 2(एफ) के तहत पूंजीगत सामान हैं और अधिनियम की धारा 2(ई) के तहत 'कारोबार' की संशोधित परिभाषा के तहत कर के दायरे से बाहर हैं।उत्तर प्रदेश मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2008 की धारा 2(ई)(iv) के तहत 'कारोबार' की परिभाषा को 2014 में संशोधित किया गया था, ताकि कारोबार बंद होने के बाद भी कोई भी लेन-देन इसमें शामिल हो, अगर यह कारोबार की अवधि के दौरान अर्जित माल की बिक्री से संबंधित...

पारिवारिक भूमि विवादों में सबूत पेश करने का प्रारंभिक दायित्व उन पर, जिन्होंने दावा किया कि संपत्ति संयुक्त हिंदू संपत्ति है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पारिवारिक भूमि विवादों में सबूत पेश करने का प्रारंभिक दायित्व उन पर, जिन्होंने दावा किया कि संपत्ति संयुक्त हिंदू संपत्ति है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया कि हिंदू परिवार भूमि विवादों में, जिस व्यक्ति ने विचाराधीन संपत्ति को संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्ति होने का दावा किया है, उसे इसे साबित करने के लिए प्रारंभिक प्रमाण का भार उठाना होगा। न्यायालय ने कुंज बिहारी बनाम गंगा सहाय पांडे के मामले पर भरोसा किया, जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि "इससे जो कानूनी प्रस्ताव उभरता है, वह यह है कि प्रारंभिक भार उस व्यक्ति पर है जो दावा करता है कि यह संयुक्त परिवार की संपत्ति है, लेकिन प्रारंभिक भार के निर्वहन के बाद, भार उस पक्ष...

दहेज की मांग दंडनीय है, मगर कम दहेज देने पर ताना देना अपने आप में दंडनीय अपराध नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
दहेज की मांग दंडनीय है, मगर कम दहेज देने पर ताना देना अपने आप में दंडनीय अपराध नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

पति के रिश्तेदारों के खिलाफ आपराधिक शिकायतों को खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यद्यपि दहेज की मांग दंडनीय अपराध है, लेकिन कम दहेज देने के लिए ताना देना अपने आप में एक दंडनीय अपराध नहीं है।न्यायालय ने माना कि परिवार के सदस्यों के खिलाफ आरोप स्पष्ट होने चाहिए, जिसमें आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए प्रत्येक सदस्य द्वारा निभाई गई विशिष्ट भूमिकाओं पर प्रकाश डाला जाए।जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने कहा,“क़ानून दहेज की मांग को दंडनीय मानता है। हालांकि, कम उपहार देने के लिए ताना मारना कोई दंडनीय...

व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए SC/ST Act का दुरुपयोग: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारी द्वारा जोड़े के खिलाफ दर्ज की गई काउंटरब्लास्ट एफआईआर रद्द की
'व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए SC/ST Act का दुरुपयोग': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारी द्वारा जोड़े के खिलाफ दर्ज की गई 'काउंटरब्लास्ट' एफआईआर रद्द की

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के दुरुपयोग के संबंध में अपनी चिंता व्यक्त करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में सरकारी कर्मचारी के इशारे पर कथित तौर पर शुरू की गई दंपति के खिलाफ एफआईआर के साथ-साथ पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।जस्टिस प्रशांत कुमार की पीठ ने अलका सेठी और उनके पति (ध्रुव सेठी) द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए कहा,“अगर इस तरह की गतिविधियों को किसी और के द्वारा नहीं बल्कि सरकारी कर्मचारी के द्वारा यूपी राज्य में होने की अनुमति दी गई तो...

यूपी में इलेक्ट्रो-होम्योपैथी की प्रैक्टिस पर प्रतिबंध नहीं, लेकिन ऐसे डॉक्टर उपसर्ग का उपयोग नहीं कर सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
यूपी में इलेक्ट्रो-होम्योपैथी की प्रैक्टिस पर प्रतिबंध नहीं, लेकिन ऐसे 'डॉक्टर' उपसर्ग का उपयोग नहीं कर सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि उत्तर प्रदेश राज्य में इलेक्ट्रो होम्योपैथी की प्रैक्टिस पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इलेक्ट्रो होम्योपैथी के ऐसे डॉक्टर अपने नाम के आगे 'डॉक्टर' उपसर्ग का उपयोग नहीं कर सकते।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने आगे कहा कि यह प्रथा सरकारी आदेश दिनांक 25.11.2003 द्वारा शासित होगी।यह कहा गया,“हालांकि कोई भी संस्थान इलेक्ट्रो होम्योपैथी में डिप्लोमा या डिग्री प्रदान नहीं कर सकता है। हालांकि, चूंकि कोई प्रतिबंध नहीं है, याचिकाकर्ता हमेशा दिनांक...

अपॉइंटिंग हाईकोर्ट के पास धारा 29ए के तहत मध्यस्थ के आदेश को बढ़ाने की शक्ति: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी पीठ द्वारा मुद्दे पर निर्णय लेने तक अपनी स्थिति को दोहराया
अपॉइंटिंग हाईकोर्ट के पास धारा 29ए के तहत मध्यस्थ के आदेश को बढ़ाने की शक्ति: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी पीठ द्वारा मुद्दे पर निर्णय लेने तक अपनी स्थिति को दोहराया

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस शेखर बी. सराफ की एकल पीठ ने कहा कि यदि हाईकोर्ट मध्यस्थता अधिनियम की धारा 11 के तहत मध्यस्थ की नियुक्ति करता है तो उसके पास मध्यस्थ के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने के लिए धारा 29ए के आवेदन पर विचार करने का अधिकार क्षेत्र है।यह स्वीकार करते हुए कि धारा 29ए आवेदनों के लिए उपयुक्त न्यायालय का मुद्दा बड़ी पीठ के समक्ष लंबित था, हाईकोर्ट ने माना कि वर्तमान स्थिति भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड बनाम मनीष इंजीनियरिंग एंटरप्राइजेज जैसे पिछले निर्णयों द्वारा शासित होती...

[Indian Stamp Act] कलेक्टर अर्ध-न्यायिक प्राधिकारी, आदेश की समीक्षा करने/वापस लेने की कोई वैधानिक शक्ति नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
[Indian Stamp Act] कलेक्टर अर्ध-न्यायिक प्राधिकारी, आदेश की समीक्षा करने/वापस लेने की कोई वैधानिक शक्ति नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना है कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत कार्यवाही प्रकृति में अर्ध-न्यायिक है और जब तक क़ानून विशेष रूप से प्रदान नहीं करता है, कलेक्टर (स्टाम्प) के पास अपने आदेश की समीक्षा करने या वापस लेने की कोई शक्ति नहीं है।कोर्ट ने कहा कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम के तहत कलेक्टर (स्टाम्प) को अपने आदेश की समीक्षा/वापस लेने की कोई वैधानिक शक्ति नहीं दी गई है। जस्टिस शेखर बी. सराफ ने कहा "कलेक्टर (स्टाम्प) अपने स्वयं के आदेश को वापस नहीं ले सकता है और / या समीक्षा नहीं कर सकता है...

कानूनी मुद्दा पहली बार अपील कार्यवाही में उठाया जाना तथ्यों पर निर्भर करता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
कानूनी मुद्दा पहली बार अपील कार्यवाही में उठाया जाना तथ्यों पर निर्भर करता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि हालांकि मामले की जड़ तक जाने वाला कोई कानूनी मुद्दा अपीलीय कार्यवाही में पहली बार उठाया जा सकता है, लेकिन यह मामले के तथ्यों पर निर्भर है।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस विकास बुधवार की खंडपीठ ने फैसला सुनाया,“कानून के इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं है कि मामले की जड़ में जाने वाला कोई कानूनी मुद्दा अपीलीय कार्यवाही में पहली बार उठाया जा सकता है। हालांकि, प्रश्न किसी विशेष मामले के तथ्यों पर निर्भर है।न्यायालय ने माना कि चूंकि स्वीकारोक्ति सबसे अच्छा साक्ष्य है और...

इलाहाबाद हाइकोर्ट में जनहित याचिका में केंद्र/राज्य के खजाने से गबन किए गए धन, संपत्तियों की वसूली के लिए न्यायिक समिति की मांग की गई
इलाहाबाद हाइकोर्ट में जनहित याचिका में केंद्र/राज्य के खजाने से गबन किए गए धन, संपत्तियों की वसूली के लिए न्यायिक समिति की मांग की गई

हाल ही में इलाहाबाद हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। उक्त याचिका में केंद्र और राज्य के खजाने से गबन और लूट किए गए धन और संपत्तियों की वसूली के लिए सुप्रीम कोर्ट या हाइकोर्ट के रिटायर न्यायाधीशों की न्यायिक समिति के गठन की मांग की गई।प्रतीक शुक्ला नामक व्यक्ति ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया कि भारत की स्वतंत्रता के बाद से नौकरशाहों, राजनेताओं, व्यक्तियों और व्यापारियों द्वारा 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक का गबन किया गया है।याचिकाकर्ता ने दलील दी कि यद्यपि उन्होंने घोटालों के बारे में...