इलाहाबाद हाईकोट
न्यायिक आदेश के बावजूद कर्मचारी का वेतन और पेंशन रोका गया: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर 1 लाख का जुर्माना लगाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य सरकार पर 1 लाख का जुर्माना लगाया। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के अंतिम होने के बावजूद याचिकाकर्ता की मां को सेवा में बने रहने की अनुमति न देकर समन्वय पीठ के आदेशों की अवहेलना की।याचिकाकर्ता की मां ने पहले हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की, जिसमें उनकी जन्मतिथि संबंधी मुद्दे का निपटारा किया गया और उन्हें सेवा में बने रहने का निर्देश दिया गया। चूंकि उनकी मृत्यु के बाद रिटायरमेंट के बाद के देय भुगतान का भुगतान नहीं किया जा रहा था, इसलिए याचिकाकर्ता ने...
इलाहाबाद हाईकोर्ट उपमुख्यमंत्री को लिखे वकील के पत्र के आधार पर पट्टा रद्द करने पर हैरान, आदेश रद्द, पट्टा बहाल किया
सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि चार व्यक्तियों (याचिकाकर्ताओं) के पक्ष में दिया गया वैध पट्टा केवल वकील द्वारा राज्य के उपमुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र के आधार पर रद्द कर दिया गया।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने पट्टा रद्द करने के आदेश रद्द कर दिए और याचिकाकर्ताओं (राकेश और तीन अन्य) के पक्ष में पट्टा बहाल कर दिया।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि भूमि प्रबंधन समिति द्वारा इस आशय का प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद उन्हें 2013 में पट्टा प्रदान किया...
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद, यूपी सरकार ने पुलिस को विचाराधीन मामलों में पक्षकारों और वकीलों से सीधे संपर्क करने से रोकने वाला सर्कुलर जारी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायिक मामलों में पुलिस के हस्तक्षेप को रोकने के लिए एक व्यापक, राज्यव्यापी दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये दिशानिर्देश पुलिसकर्मियों को बिना किसी वैध प्राधिकार और सक्षम अधिकारी या न्यायालय की पूर्व अनुमति के न्यायिक मामलों से संबंधित याचिकाकर्ताओं या उनके वकीलों से संपर्क करने से सख्ती से रोकते हैं।यह घटनाक्रम इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित एक जनहित याचिका (पीआईएल) के मद्देनजर सामने आया है, जिसमें जौनपुर के एक 90 वर्षीय याचिकाकर्ता शामिल...
'अंतरिम निषेधाज्ञा का दावा 27 साल बाद उठा': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने A&C Act की धारा 37 के तहत अपील खारिज की, अत्यधिक देरी का हवाला दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के तहत मेसर्स लॉ पब्लिशर्स और फर्म के एक भागीदार द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है। यह अपील वाणिज्यिक न्यायालय द्वारा अधिनियम की धारा 9 के तहत आवेदन को खारिज करने के खिलाफ दायर की गई थी। अपीलकर्ता ने इस आधार पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था कि अपीलकर्ता ने 27 साल बाद यह अपील दायर की थी।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने कहा,“जबकि यह रिकॉर्ड में स्थापित नहीं हो पाया है कि 1996 के बाद से 27...
यूपी पुलिस नियम: अपील खारिज होने के बाद दोबारा मेडिकल टेस्ट का नियम नहीं – इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल सेवा नियम, 2015 के तहत डिवीजनल मेडिकल बोर्ड द्वारा अपील खारिज करने के बाद पुन: मेडिकल टेस्ट का कोई प्रावधान नहीं है।जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने कहा,"सेवा नियमों के तहत, इसमें कोई संदेह नहीं है कि एक उम्मीदवार को लिखित परीक्षा पास करने के बाद मेडिकल बोर्ड द्वारा मेडिकल जांच से गुजरना पड़ता है, हालांकि, डिवीजनल मेडिकल बोर्ड के समक्ष अपील खारिज होने के बाद फिर से परीक्षा का कोई...
'धर्म के क्षेत्र में राज्य को प्रवेश की अनुमति नहीं': हाईकोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश पर राज्य सरकार से किया सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश 2025' लाने पर कड़ी मौखिक टिप्पणियां कीं, जिसमें वृंदावन (मथुरा) स्थित ऐतिहासिक बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन के लिए एक वैधानिक ट्रस्ट का प्रस्ताव है।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने धार्मिक क्षेत्र में प्रवेश करने के राज्य सरकार के संवैधानिक औचित्य पर सवाल उठाया।पीठ ने मौखिक रूप से इस प्रकार टिप्पणी की:हम राज्य को धर्म में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देंगे। मैं सरकार से पूछूंगा कि...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछली अस्वीकृति छुपाकर बार बार अनुकंपा नियुक्ति याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया
पिछले हफ़्ते इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक वादी पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जो अनुकंपा नियुक्ति के लिए अपने आवेदन पर विचार के लिए बार-बार हाईकोर्ट का रुख कर रहा था, जबकि उसका दावा 2011 में खारिज कर दिया गया था और 2011 के आदेश को चुनौती नहीं दी गई थी।याचिकाकर्ता के पिता की 2007 में सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो जाने के बाद उसने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। 2011 में उसका दावा खारिज कर दिया गया। फिर भी याचिकाकर्ता ने 2011 के आदेश का खुलासा किए बिना 2016 में अपने दावे पर विचार के लिए हाईकोर्ट...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 वर्षीय पीड़िता को स्वास्थ्य जोखिम के बावजूद 31 सप्ताह की प्रेग्नेंसी टर्मिनेट कराने की अनुमति दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साढ़े 17 वर्षीय बलात्कार पीड़िता को 31 सप्ताह का गर्भ गिराने की अनुमति देते हुए कहा कि गर्भवती महिला की इच्छा और सहमति सर्वोपरि है। हालांकि गर्भ गिराने में मां और बच्चे की जान को खतरा था।मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी की याचिका को स्वीकार करते हुए जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने कहा,“इस मामले में पूरे परामर्श सत्र के बावजूद याचिकाकर्ता और उसके माता-पिता गर्भ को पूरी अवधि तक ले जाने के लिए सहमत नहीं हुए। ऐसा सामाजिक कलंक और घोर गरीबी...
मध्यस्थता समझौते में केवल 'स्थान' का उल्लेख है तो विपरीत संकेत के अभाव में स्थल को ही सीट माना जाएगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब मध्यस्थता समझौते में केवल एक ही स्थान का उल्लेख है। उसे स्थान कहा गया तो उसे स्थान भी माना जाएगा, जब तक कि समझौते में कुछ विपरीत उल्लेख न किया गया हो।जस्टिस जसप्रीत सिंह ने कहा,"यदि मध्यस्थता समझौते में केवल एक ही स्थान का उल्लेख है। भले ही उसे 'स्थान' कहा गया हो, तो जब तक कि कोई विपरीत संकेत न हो, 'स्थान' को 'स्थान' माना जाएगा।"आवेदक ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम 1996 की धारा 11(6) के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट में मध्यस्थ की नियुक्ति के लिए आवेदन दायर किया। प्रतिवादी...
'मृतका ने खुद को बचाया, इसके संकेत नहीं': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खाना पकाने की आग की थ्योरी खारिज की, दहेज हत्या मामले में पति की दोषसिद्धि बरकरार रखी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह 1991 के दहेज हत्या के एक मामले में मृतक महिला के दुर्घटनावश आग पकड़ने के आरोपी के दावे को खारिज करते हुए एक व्यक्ति की दोषसिद्धि को बरकरार रखा। जस्टिस रजनीश कुमार की पीठ ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी और 498-ए के तहत दोषी ठहराया गया था और अपनी पत्नी की दहेज हत्या के लिए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।न्यायालय ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी के सभी तत्व स्पष्ट रूप से सिद्ध हैं, और...
'इसमें कोई नैतिक पतन शामिल नहीं': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोहत्या के आरोपों पर ग्राम प्रधान को हटाने का आदेश रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें गोहत्या के एक मामले में आरोपी 'ग्राम प्रधान' को पद से हटा दिया गया था। न्यायालय ने कहा कि केवल आरोप लगाने के आधार पर, विशेष रूप से नियामक प्रावधान के तहत, नैतिक पतन या पद के दुरुपयोग को दर्शाने वाले पर्याप्त साक्ष्य के बिना ऐसी 'कड़ी सजा' को उचित नहीं ठहराया जा सकता। इसके साथ ही, जस्टिस पंकज भाटिया की पीठ ने याचिकाकर्ता (राज किशोर यादव) की याचिका स्वीकार कर ली, जिसमें उन्होंने 28 जून को उत्तर प्रदेश पंचायत...
कर्मचारी की मृत्यु पर विभागीय अपील स्वतः समाप्त नहीं होती, रिटायरमेंट के बाद के लाभों से इनकार करने पर उत्तराधिकारियों पर प्रभाव पड़ता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारी की मृत्यु पर विभागीय अपील स्वतः समाप्त नहीं होती, क्योंकि ऐसी कार्यवाही में आदेश के गंभीर दीवानी परिणाम होते हैं। मृतक कर्मचारी के कानूनी उत्तराधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद के लाभों पर प्रभाव पड़ता है।यह देखते हुए कि नियोक्ता-कर्मचारी संबंध कर्मचारी की रिटायरमेंट/मृत्यु के साथ समाप्त हो जाता है जस्टिस अजीत कुमार ने कहा,"ऐसी परिस्थितियों में यदि कोई कर्मचारी किसी ऐसे प्रतिष्ठान में कार्यरत है, जो पेंशन योग्य प्रतिष्ठान हो सकता है और जहां पारिवारिक पेंशन के...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'लगातार डिफॉल्टर' की लीज बहाल करने से इनकार किया, कहा- राहत देने से भविष्य के आवंटियों के लिए गलत उदाहरण स्थापित होगा
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि रिट क्षेत्राधिकार में दी जाने वाली न्यायिक सहानुभूति (Equity) का लाभ उन व्यक्तियों को नहीं दिया जा सकता, जो अपने दायित्वों को लगातार निभाने में विफल रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में लीज की पुनर्बहाली भविष्य के आवंटियों को भुगतान कार्यक्रमों और अन्य दायित्वों की अनदेखी करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने कहा,“दीर्घकालिक चूक के बाद लीज की बहाली की नीति भविष्य के आवंटियों के लिए नकारात्मक उदाहरण...
'यूपी में कैसे फल-फूल रही हैं फर्जी आर्य समाज संस्थाएं?': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्मांतरण विरोधी कानून के खिलाफ 'अवैध' शादियों की जांच के निर्देश दिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह गृह सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वे आर्य समाज समितियों के कामकाज की जांच करें, जो कथित तौर पर राज्य भर में नाबालिग लड़कियों सहित अन्य 'अवैध' विवाहों को अंजाम दे रही हैं, बिना उम्र की पुष्टि किए या राज्य के धर्मांतरण विरोधी कानून का पालन किए। जस्टिस प्रशांत कुमार की पीठ ने ऐसे मामलों की जांच पुलिस उपायुक्त से नीचे के पद के अधिकारी द्वारा करने का निर्देश दिया।इस प्रकार, न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम के तहत एक मामले में समन आदेश और पूरी कार्यवाही को...
वकीलों को अदालत की कार्यवाही में सहयोग करना चाहिए, व्यवधान नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुवक्किल की ज़मानत खारिज होने के बाद हंगामा करने वाले वकील को फटकार लगाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस सप्ताह की शुरुआत में एक वकील के आचरण की कड़ी निंदा की, जिसने अपने मुवक्किल की दूसरी ज़मानत याचिका खारिज होने के बाद अदालत कक्ष में हंगामा किया और कार्यवाही में बाधा डाली।जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ ने न्यायालय में वकीलों की दोहरी ज़िम्मेदारियों पर ज़ोर दियाअदालत कक्ष में एक सम्मानजनक और अनुकूल माहौल बनाए रखना और साथ ही अपने मुवक्किलों के हितों का पूरी लगन से प्रतिनिधित्व करना।न्यायालय ने आगे कहा कि वकीलों को अदालत की कार्यवाही में व्यवधान डालने के बजाय उसकी सहायता करनी चाहिए...
बलिया एसपी ने खेद व्यक्त किया, सुधारात्मक कदम उठाए; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा अदालत आदेश को FIR मानने का अध्याय बंद किया
हाईकोर्ट के आदेश की हूबहू नकल करके लिखित FIR दर्ज करने से जुड़े विवाद का पटाक्षेप करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 जुलाई को अपने पूर्व निर्देशों का पर्याप्त अनुपालन पाया और मामले के इस हिस्से को स्थगित करने का फैसला किया।बता दें, मामला एक स्कूल कर्मचारी की नियुक्ति में कथित हेराफेरी और मूल सेवा पुस्तिका के संदिग्ध गायब होने से संबंधित था। बलिया पुलिस ने कानून के अनुसार कार्यवाही करने के बजाय सीधे तौर पर अदालत के 29 मई के आदेश को ही लिखित प्राथमिकी मान लिया।इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने 3 जुलाई...
अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र उम्मीदवार को अन्य आश्रितों की वित्तीय जरूरतों का ध्यान रखना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र उम्मीदवार को मृतक के अन्य आश्रितों की वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु हलफनामे पर एक अपरिवर्तनीय वचन देना होगा। अनुकंपा नियुक्ति की मांग कर रहे मृतक कर्मचारी की मां और पत्नी के बीच मतभेद के मामले में जस्टिस अजय भनोट ने कहा,“अनुकंपा के आधार पर नियुक्त परिवार का सदस्य मृतक के स्थान पर आता है, और मृतक के दायित्वों को निभाने तथा अन्य आश्रित सदस्यों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए उत्तरदायी होता है। पात्र आवेदक द्वारा...
'सुप्रीम कोर्ट के 'तहसीन पूनावाला' संबंधी निर्देश राज्य और केंद्र पर बाध्यकारी, जनहित याचिका में मॉब लिंचिंग की घटनाओं की निगरानी नहीं की जा सकती': इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा दायर आपराधिक जनहित याचिका (PIL) का निपटारा किया, जिसमें तहसीन एस. पूनावाला बनाम भारत संघ (2018) मामले में मॉब लिंचिंग और भीड़ हिंसा की घटनाओं को रोकने और उनसे निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों का अनुपालन करने की मांग की गई थी।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि मॉब लिंचिंग/भीड़ हिंसा की प्रत्येक घटना एक अलग घटना है और जनहित याचिका में इसकी निगरानी नहीं की जा सकती।खंडपीठ ने यह भी कहा कि...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेडिकल लापरवाही मामले में डॉक्टर को राहत देने से किया इनकार, कहा- 'प्राइवेट हॉस्पिटल पैसे ऐंठने के लिए मरीजों को ATM की तरह इस्तेमाल करते हैं'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि निजी अस्पताल/नर्सिंग होम मरीजों को 'गिनी पिग/ATM' की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि उनसे पैसे ऐंठ सकें, गुरुवार को डॉक्टर द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में कथित तौर पर सर्जरी में देरी के कारण भ्रूण की मौत के संबंध में उसके खिलाफ 2008 में दर्ज एक मामले को रद्द करने की मांग की गई थी।जस्टिस प्रशांत कुमार की पीठ ने कहा कि आवेदक (डॉ. अशोक कुमार राय) सर्जरी के लिए सहमति प्राप्त करने और ऑपरेशन करने के बीच 4-5 घंटे की देरी को उचित ठहराने में विफल रहे, जिसके...
'बुजुर्ग माता-पिता के प्रति उपेक्षा और क्रूरता अनुच्छेद 21 का उल्लंघन': सरकार द्वारा पिता को मुआवज़ा दिए जाने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेटों के आचरण की निंदा की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में बुजुर्ग माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि वृद्ध माता-पिता के प्रति क्रूरता, उपेक्षा या परित्याग संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानपूर्वक जीवन जीने के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बच्चों के लिए अपने वृद्ध माता-पिता की गरिमा, कल्याण और देखभाल की रक्षा करना एक पवित्र नैतिक कर्तव्य और वैधानिक दायित्व दोनों है।खंडपीठ ने आगे कहा कि जैसे-जैसे उनकी शारीरिक...



















