इलाहाबाद हाईकोट

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारतीय कानून से ऊपर नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने X की कार्यशैली पर जताई सख्त नाराज़गी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) के असहयोगात्मक रवैये पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि बहुराष्ट्रीय डिजिटल मंच भारतीय कानून और जांच एजेंसियों के प्रति जवाबदेही से बच नहीं सकते।अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून का दायरा इतना व्यापक है कि वह किसी भी उल्लंघन तक पहुंच सकता है और दोषियों को न्याय के कटघरे में ला सकता है।यह टिप्पणी जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र समंत की खंडपीठ ने एक साइबर अपराध मामले की सुनवाई के दौरान की।अदालत ने कहा,"सोशल मीडिया मंच...

1977 में ₹300 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए थे लेखपाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 49 साल बाद भी रखी सज़ा बरकरार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते 41 साल पुरानी आपराधिक अपील खारिज की और कंसोलिडेशन लेखपाल की 1985 की सज़ा बरकरार रखी। उन्हें लगभग आधी सदी पहले ₹300 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।जस्टिस संजीव कुमार की बेंच ने उन्हें सुनाई गई 1 साल की कठोर कारावास की सज़ा बरकरार रखी। उन्हें अपनी बाकी सज़ा काटने के लिए 4 हफ़्तों के भीतर ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया गया।इस मामले में कोर्ट ने साफ़ किया कि अगर ट्रैप की कार्रवाई की पुष्टि विजिलेंस अधिकारियों और स्वतंत्र गवाहों द्वारा...

दस्तावेज का कोई पन्ना छूट जाने या गलत जगह लग जाने से फैसला समीक्षा योग्य नहीं हो जाता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल किसी दस्तावेज का कोई पन्ना छूट जाने, गलत स्थान पर लग जाने या अभिलेख के साथ संलग्न नहीं होने मात्र से अदालत का फैसला त्रुटिपूर्ण नहीं माना जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि समीक्षा तभी संभव है, जब ऐसी चूक से रिकॉर्ड पर स्पष्ट दिखाई देने वाली कानूनी त्रुटि उत्पन्न हुई हो या उससे न्याय का गंभीर हनन हुआ हो। जस्टिस करुणेश सिंह पवार ने कहा,"किसी दस्तावेज के संकलन में किसी पृष्ठ का छूट जाना, गलत स्थान पर लग जाना या संलग्न नहीं होना...

राम मंदिर चंदा विवाद: CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राम मंदिर चंदा विवाद में कथित वित्तीय अनियमितताओं की CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।अदालत ने कहा कि इसी तरह की मांग वाली एक याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ वकील मोहित अशोक द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद, सोना और चांदी के चढ़ावे के कथित गबन की CBI से स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध...

अज्ञात आय के स्रोत से मिली संपत्ति को स्वतः अपराध की कमाई नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति की संपत्ति का स्रोत अज्ञात होने भर से यह नहीं माना जा सकता कि वह किसी अनुसूचित अपराध से अर्जित 'अपराध की आय' है।अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष को यह स्पष्ट रूप से स्थापित करना होगा कि संबंधित संपत्ति किसी अनुसूचित अपराध से प्राप्त हुई।जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने यह टिप्पणी यमुना बेसिन में अवैध खनन से जुड़े धन शोधन मामले में एक आरोपी को जमानत देते हुए की।अदालत ने कहा,"किसी व्यक्ति...

ताजमहल सर्वे की मांग पर केंद्र और ASI से जवाब तलब, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ताजमहल के सर्वे की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह याचिका आगरा की अदालत द्वारा ताजमहल का सर्वे कराने के लिए वकील आयुक्त नियुक्त करने से इनकार किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता हरि शंकर जैन की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ताजमहल वास्तव में भगवान शिव को समर्पित प्राचीन...

निरीक्षण से पहले नोटिस नहीं देना प्रक्रिया में अनियमितता, अवैधता नहीं; कोई नुकसान न हो तो कार्रवाई वैध: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि स्टांप शुल्क की कमी से जुड़े मामलों में यदि जिला मजिस्ट्रेट बिना संबंधित पक्ष को पूर्व सूचना दिए स्थल निरीक्षण करते हैं, तो यह केवल प्रक्रियात्मक अनियमितता है अवैधता नहीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि इससे संबंधित पक्ष को कोई वास्तविक नुकसान या पूर्वाग्रह नहीं हुआ है तो केवल इसी आधार पर पूरी कार्रवाई रद्द नहीं की जा सकती।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश स्टांप (संपत्ति का मूल्यांकन) नियमावली, 1997 के नियम 7(3) के तहत कलेक्टर के लिए स्थल निरीक्षण...

परमानेंट लोक अदालत का यह कहना- समझौते की कोशिश की गई लेकिन नाकाम रही, कानूनी रूप से काफी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परमानेंट लोक अदालत का यह कहना कि 'समझौते की कोशिश की गई लेकिन नाकाम रही', एक सामान्य बात है। हाईकोर्ट के 'मैनेजर, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, बस्ती बनाम परमानेंट लोक अदालत, बस्ती और अन्य' मामले में दिए गए फैसले के अनुसार, यह कानूनी रूप से काफी नहीं है।'मैनेजर, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, बस्ती बनाम परमानेंट लोक अदालत, बस्ती और अन्य' मामले में कोर्ट ने कहा था कि परमानेंट लोक अदालत का काम सबसे पहले पार्टियों के बीच समझौते और निपटारे की कोशिश करना है।...

सुप्रीम कोर्ट कुछ भी कहे, पुलिस अपनी मनमर्जी करती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सतेंद्र अंतिल फैसले को नज़रअंदाज़ करने पर पुलिसकर्मी को फटकार लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ) ने गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का खुलेआम उल्लंघन करने के लिए पुलिस तंत्र की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि पुलिस अधिकारियों का कानून को "पढ़ने और समझने" से कोई लेना-देना नहीं है और वे पूरी तरह से अपनी मनमर्जी से काम करते हैं।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने नाबालिग को अवैध रूप से हिरासत में रखने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान ये मौखिक टिप्पणियां कीं। उस नाबालिग को चोरी के आरोप में जेल भेज दिया गया।इससे पहले,...

4,000 से ज़्यादा बिना सरकारी मदद वाले मदरसों की फंडिंग की UP ATS की जांच में दखल देने से हाईकोर्ट का इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य में चल रहे 4,000 से ज़्यादा बिना सरकारी मदद वाले मदरसों की फंडिंग की उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) की जांच में दखल देने से इनकार किया।जस्टिस नीरज तिवारी और जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने मदरसा मैनेजमेंट कमेटी और टीचर्स एसोसिएशन, मदरसा अरबिया की याचिका खारिज की।बता दें, याचिकाकर्ताओं ने 9 दिसंबर, 2025 का आदेश रद्द करने की मांग की थी, जिसके तहत राज्य सरकार ने ATS के ज़रिए उनके संस्थानों की फंडिंग की जांच शुरू की थी।याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि पहले भी...

CrPC की धारा 362 ज़मानत की शर्तों को बदलने में रुकावट नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 साल बाद ₹64 लाख जमा करने की कठिन शर्त हटाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि CrPC की धारा 362 (कोर्ट द्वारा फैसले में बदलाव न करना) के तहत कानूनी रोक ज़मानत आदेश में लगाई गई शर्तों में बदलाव या ढील देने पर लागू नहीं होती है।कोर्ट ने खास तौर पर कहा,"...ज़मानत देने का आदेश सिर्फ़ एक अंतरिम आदेश (interlocutory order) होता है और यह CrPC की धारा 362 में इस्तेमाल किए गए वाक्यांश 'मामले का निपटारा करने वाला फैसला या अंतिम आदेश' के दायरे में नहीं आता है। इसलिए CrPC की धारा 362 में दी गई रोक किसी आरोपी व्यक्ति को ज़मानत देने के आदेश में लगाई...

हलाला की आड़ में अपराध को व्यक्तिगत कानून का संरक्षण नहीं मिल सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगरेप मामले में FIR रद्द करने से किया इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 के कथित निकाह हलाला के दौरान नाबालिग से दुष्कर्म और 2025 में कथित 'डबल हलाला' के नाम पर सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि विवाह या व्यक्तिगत कानून की आड़ में कोई अपराध किया जाता है, तो उसे व्यक्तिगत कानून का संरक्षण नहीं मिल सकता।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि आपराधिक कानून में व्यक्तिगत कानूनों की दलील स्वीकार नहीं की जा सकती, जब तक कि स्वयं कानून ऐसा अपवाद न...

प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट सिर्फ़ धार्मिक स्वरूप बदलने पर रोक लगाता है, जनहित में सरकारी अधिग्रहण पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि 'प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप (स्पेशल प्रोविज़न्स) एक्ट, 1991' के तहत किसी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप को एक धार्मिक संप्रदाय से दूसरे धार्मिक संप्रदाय में बदलने पर ही रोक है, लेकिन यह कानून सरकार को 'धर्मनिरपेक्ष' और 'जनहित' के कामों के लिए ऐसी संपत्तियों का अधिग्रहण करने से नहीं रोकता।इसके साथ ही, जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की बेंच ने वाराणसी के दालमंडी इलाके को चौड़ा करने और उसे सुंदर बनाने के काम को रोकने की मांग वाली रिट याचिका को खारिज कर दिया। यह...

अली खमेनेई की तस्वीरें ज़बरदस्ती हटाने और शोक मनाने वालों पर FIR दर्ज करने का मामला: यूपी पुलिस के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे शिया संगठन

शिया विद्वानों के एक संगठन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) में याचिका दायर की। इसमें राज्य में पुलिस की 'मनमानी' कार्रवाई को चुनौती दी गई, जिसमें निजी संपत्तियों से धार्मिक पोस्टर ज़बरदस्ती हटाना और राज्य के शिया समुदाय के 'शांतिपूर्ण' शोक मनाने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करना शामिल है।मजलिस उलेमा-ए-हिंद ने अपने महासचिव मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी के ज़रिए यह जनहित याचिका (PIL) दायर की। याचिका में राज्य पुलिस से यह निर्देश देने की मांग की गई कि वे उन लोगों के खिलाफ कोई ज़बरदस्ती वाली कार्रवाई न...

मृत्युपूर्व बयान के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह सक्षम होने का अलग प्रमाणपत्र जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी मृत्युपूर्व बयान पर भरोसा करने के लिए डॉक्टर द्वारा यह अलग से प्रमाणित करना अनिवार्य नहीं है कि पीड़ित बयान देने के समय मानसिक रूप से पूरी तरह सक्षम था। यदि डॉक्टर ने यह प्रमाणित किया कि पीड़ित होश में था और बोलने की स्थिति में था तो यह पर्याप्त है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा,"मृतक के बयान देने के लिए मानसिक रूप से सक्षम होने संबंधी डॉक्टर का अलग प्रमाणपत्र कानून की अनिवार्य शर्त नहीं, बल्कि केवल सावधानी का एक...

स्निफर डॉग की ट्रैकिंग तभी साक्ष्य मानी जाएगी जब पंचनामा और डॉग हैंडलर की गवाही उसका समर्थन करे: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि स्निफर डॉग (खोजी कुत्ते) की ट्रैकिंग को तब तक विश्वसनीय साक्ष्य नहीं माना जा सकता, जब तक उसके ट्रैकिंग की पूरी प्रक्रिया का विवरण पंचनामा में दर्ज न हो और डॉग हैंडलर अदालत में गवाही देकर उसका समर्थन न करे। कोर्ट ने कहा कि पंचनामा और डॉग हैंडलर की गवाही में कोई विरोधाभास नहीं होना चाहिए।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी 1998 के एक हत्या मामले में चार दोषियों की आजीवन कारावास की सजा रद्द करते हुए की।मामले में अभियोजन का दावा था...

कानून की समझ अब सबसे निचले स्तर पर: हत्या के दोषी की जमानत रद्द कराने वाली जनहित याचिका खारिज, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाया 50 हजार रुपये का जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के एक दोषी को दी गई जमानत और सजा पर रोक के आदेश को वापस लेने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।अदालत ने याचिका में की गई मांगों को "चौंकाने वाली" और "बेहद अनुचित" करार दिया।जस्टिस जे. जे. मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह की प्रार्थनाएं कभी भी याचिका का हिस्सा नहीं बननी चाहिए।याचिका लालचंद यादव ने दायर की थी। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और संबंधित थाना प्रभारी को निर्देश देने...

आरोपी से मिली वकालत की फीस अपराध की आय नहीं, जब तक अधिवक्ता खुद अपराध में शामिल न हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी द्वारा अपने वकील को पेशेवर सेवाओं के बदले दी गई फीस को केवल इस आधार पर अपराध की आय नहीं माना जा सकता कि भुगतान आरोपी ने किया है। जब तक अधिवक्ता स्वयं किसी आपराधिक कृत्य में शामिल न हो तब तक उसकी पेशेवर फीस को अपराध की आय नहीं कहा जा सकता।जस्टिस जे. जे. मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की पीठ उत्तर प्रदेश पुलिस की साइबर सेल द्वारा एक वकील का पूरा बैंक खाता फ्रीज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।मामले में वकील आयुष...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नशे की हालत में मस्जिद में शराब की बोतल फेंककर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपी व्यक्ति की गिरफ्तारी पर रोक लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक व्यक्ति को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी। उस पर आरोप है कि उसने नशे की हालत में मस्जिद में शराब की बोतल फेंकी, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।सुरक्षा देते हुए जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने कहा कि पहली नज़र में ऐसा लगता है कि चूंकि याचिकाकर्ता नशे की हालत में था, इसलिए उसका धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं रहा होगा।संक्षेप में मामलाआज़मगढ़ पुलिस ने याचिकाकर्ता-आवेदक के खिलाफ BNS की धारा 298 [किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के...

बंटवारे के आदेश को लागू करने की समय-सीमा, उसे स्टाम्प पेपर पर तैयार करने से अलग: इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बंटवारे के आदेश को लागू करने की समय-सीमा, उसे स्टाम्प पेपर पर तैयार करने की प्रक्रिया से स्वतंत्र है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बंटवारे के आदेश को स्टाम्प पेपर पर तैयार करने पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी अलग है और यह आदेश को लागू करने या अपील की कार्यवाही पर लगने वाली कोर्ट फीस से अलग दायरे में काम करती है।जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र ने कहा,"स्टाम्प पेपर पर अंतिम आदेश (final decree) तैयार करने के लिए आवेदन करने का अधिकार कब पैदा होगा, इस पर कोर्ट का मानना ​​है कि चूंकि बंटवारे...