इलाहाबाद हाईकोट
मुकदमा शुरू न करना पत्नी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 21 वर्षों से लंबित क्रूरता मामले में प्रतिदिन सुनवाई का आदेश दिया
क्रूरता मामले की सुनवाई शुरू करने के लिए निचली अदालत को निर्देश देने की पत्नी की प्रार्थना पर विचार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह खेदजनक है कि FIR और आरोपपत्र दाखिल करने के दो दशक से अधिक समय बाद भी मुकदमा शुरू नहीं हुआ।जस्टिस विनोद दिवाकर ने कहा कि निचली अदालत के कार्यभार के प्रति न्यायालय सचेत है।उन्होंने कहा,“FIR दर्ज होने के दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह खेदजनक है कि निचली अदालत इस मामले में कोई प्रभावी कार्यवाही शुरू करने या संचालित करने में विफल रही है। निचली अदालत की...
NCMEI के पास शैक्षणिक संस्थानों का अल्पसंख्यक दर्जा घोषित करने का विशेष अधिकार; 1999 का सरकारी आदेश अब प्रासंगिक नहीं रहा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय को चल रही नीट काउंसलिंग में भाग लेने वाले कॉलेजों की सूची में शामिल करने के अनुरोध को खारिज कर दिया गया था। उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक (डीजीएमई) द्वारा पारित यह अस्वीकृति आदेश इस तथ्य पर आधारित था कि विश्वविद्यालय को दिया गया अल्पसंख्यक दर्जा 28 अगस्त, 1999 के सरकारी आदेश के अनुरूप नहीं था।जस्टिस पंकज भाटिया की पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय...
आरोपियों को 'एकल' जमानत पर रिहा करें; गिरफ्तारी के बिना आरोपपत्र दाखिल होने पर उन्हें हिरासत में न भेजें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी की अदालतों को निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की सभी निचली अदालतों के लिए एक समान निचली अदालती कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने, अनुच्छेद 21 के तहत संवैधानिक गारंटियों को प्रभावी बनाने और इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के बाध्यकारी निर्देशों को लागू करने हेतु व्यापक निर्देश जारी किए हैं। संविधान के अनुच्छेद 227 और धारा 528 BNSS के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए, जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने मंगलवार को निर्देश दिया कि उन सभी मामलों में जहां बिना गिरफ्तारी के आरोपपत्र दायर किया गया है, चाहे इसलिए कि जांच के...
सरकारी निगमों में हकदारी कल्चर हावी, काबिल फर्स्ट-जेनरेशन वकीलों की अनदेखी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी निगमों में वकीलों की नियुक्तियों में 'हकदारी कल्चर' (Entitlement Culture) जड़ें जमा चुका है, जिसके चलते केवल प्रभावशाली परिवारों के वकीलों को मौके मिलते हैं, जबकि मेहनती और ईमानदार फर्स्ट-जेनरेशन वकीलों को नज़रअंदाज़ किया जाता है।जस्टिस अजय भनोट ने यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) के वकील की लापरवाही और अक्षमता को लेकर नाराजगी जताई यह कहते हुए कि निगम में मेरिट आधारित और पारदर्शी तरीके से वकीलों की नियुक्ति अच्छे प्रशासन और संवैधानिक...
अनुच्छेद 243-ZE | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महानगर नियोजन समिति के चुनाव न कराने पर राज्य सरकार और चुनाव आयोग को फटकार लगाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 243-ZE के आदेश के बावजूद महानगर नियोजन समिति के चुनाव न कराने पर उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य चुनाव आयोग को फटकार लगाई।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए,"राज्य चुनाव आयुक्त को निर्देश दिया जाता है कि वे महानगर नियोजन समिति के चुनाव कराने के लिए आवश्यक जानकारी/दस्तावेज की आवश्यकता को निर्दिष्ट करते हुए दस दिनों के भीतर प्रमुख सचिव, नगर विकास, उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ को एक पत्र जारी करें।...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के कष्टप्रद मामले में अपील के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की, 2 लाख मुआवज़ा देने का आदेश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति को 2 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का आदेश दिया, जिसे दहेज हत्या के मामले में अदालत द्वारा सम्मानपूर्वक बरी किए जाने के बाद राज्य की अपील में कष्टप्रद आपराधिक अभियोजन का सामना करना पड़ा।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने कहा,"हमारा दृढ़ मत है कि बरी होने की स्थिति में यह अपील प्रस्तुत करने के लिए लोक अभियोजक को निर्देश देने से पहले राज्य ने अपनी न्यायिक समझ का प्रयोग नहीं किया। इस तथ्य पर विचार किए बिना कि अभियुक्त, जो एक आपराधिक मामले...
राज्य प्राधिकारियों द्वारा समय पर निर्णय न लेने से लंबित मामलों की संख्या बढ़ी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक कड़े आदेश में राज्य प्राधिकारियों के लापरवाह कामकाज पर गंभीर चिंता व्यक्त की। यह आदेश तब आया जब स्थायी अधिवक्ता संबंधित प्राधिकारी से निर्देश न मिलने के कारण न्यायालय की सहायता करने में विफल रहे।जस्टिस मंजू रानी चौहान की पीठ शिक्षा विभाग से भुगतान के संबंध में सुनैना नामक व्यक्ति द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी।पिछली सुनवाई (22 जुलाई) में सरकारी वकील को निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिया गया और मामले की सुनवाई 4 अगस्त के लिए निर्धारित की गई। बता...
'धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा के विरुद्ध': देवता ने 'उत्तर प्रदेश बांके बिहारी मंदिर न्यास अध्यादेश' को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया
राज्यपाल द्वारा 26 मई, 2025 को जारी उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास अध्यादेश, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई।पीठासीन देवता श्री बांके बिहारी, शबैत और हरिदासी संप्रदाय के सखी संप्रदाय के सदस्यों द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया कि यह अध्यादेश सीधे तौर पर उनके कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण करता है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g), 25, 26 और 300A का पूर्ण उल्लंघन है।इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरिंदम सिन्हा...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान और उन्हें निर्वासित करने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा। इस याचिका में राज्य में रह रहे अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान और उन्हें निर्वासित करने के लिए एक व्यापक सर्वेक्षण और सत्यापन अभियान चलाने की मांग की गई।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मनीष कुमार की खंडपीठ ने सोमवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के महानिदेशक और खुफिया ब्यूरो (IB) के महानिदेशक सहित प्रतिवादियों को चार...
'यूपी सरकार पाप कर रही है' : बांके बिहारी मंदिर अध्यादेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार (6 अगस्त) को वृंदावन (मथुरा) स्थित ऐतिहासिक बांके बिहारी मंदिर की देखरेख के लिए यूपी सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश की कड़ी आलोचना जारी रखी और कहा कि सरकार "पाप" कर रही है।यह टिप्पणी उस समय आई है जब दो दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने भी बांके बिहारी मंदिर का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के लिए अध्यादेश लाने में यूपी सरकार की "अत्यधिक जल्दी" पर सवाल उठाया था।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने आज मौखिक रूप से तीखी टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार से कहा कि वह मंदिर प्रबंधन को...
महत्वपूर्ण अधिकार न प्रभावित करने वाले PIL आदेश पर विशेष अपील नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट Rule, 1952 के Chapter VIII Rule 5 के तहत 'विशेष अपीलें', एकल न्यायाधीश द्वारा पारित नियमित आदेशों के खिलाफ सुनवाई योग्य नहीं हैं, यदि वे पक्षों के अधिकारों और दायित्वों का निर्धारण नहीं करते हैं।"नियमों के अध्याय VIII नियम 5 के तहत अपील योग्य होने के लिए एक वादकालीन आदेश को किसी पक्ष के मूल्यवान अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डालना चाहिए या एक महत्वपूर्ण पहलू तय करना चाहिए। जस्टिस शेखर बी सर्राफ और जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की खंडपीठ ने कहा कि 'अपील...
किसी व्यक्ति को न्यायालय जाने से धमकाना सबसे गंभीर आपराधिक अवमानना: इलाहाबाद हाईकोर्ट
यह देखते हुए कि कोई भी व्यक्ति किसी व्यक्ति को न्यायालय जाने से नहीं धमका सकता इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस तरह के हस्तक्षेप को न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली सबसे बड़ी बाधा बताया और इसलिए इसे सबसे गंभीर आपराधिक अवमानना माना।जस्टिस जे.जे. मुनीर की पीठ ने यह टिप्पणी अमित सिंह परिहार द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें फतेहपुर जिले के एक गांव में सरकारी पेड़ों की अवैध कटाई और चोरी का आरोप लगाया गया था।मुख्यतः 31 जुलाई, 2025 को दायर पूरक हलफनामे में याचिकाकर्ता ने...
वकीलों की हड़ताल पर मामला स्थगित करना अनुशासनात्मक कार्रवाई को आमंत्रित कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने SDM को जारी किया कारण बताओ नोटिस
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीते सप्ताह अलीगढ़ में एक उप-जिलाधिकारी (SDM) को उस समय फटकार लगाई, जब उन्होंने स्थानीय बार एसोसिएशन की हड़ताल के आह्वान के चलते मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।जस्टिस जे.जे. मुनीर की एकल पीठ ने कहा कि बार एसोसिएशन के इस प्रकार के आह्वान को स्वीकार करना न्यायिक अधिकारी के आचरण में कदाचार की श्रेणी में आ सकता है। इसके चलते उस अधिकारी को पद से हटाने तक की अनुशंसा की जा सकती है।कोर्ट ने संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा कि क्यों न उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की...
S.223 BNSS | 'शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान दर्ज किए बिना अभियुक्त को नोटिस जारी नहीं किया जा सकता': इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह स्पष्ट किया कि कोई भी मजिस्ट्रेट भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत किसी संभावित अभियुक्त को शिकायतकर्ता और गवाहों, यदि कोई हो, के बयान दर्ज किए बिना नोटिस जारी नहीं कर सकता।जस्टिस रजनीश कुमार की पीठ ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-द्वितीय, लखनऊ द्वारा इस प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए अभियुक्त (आवेदक-राकेश कुमार चतुर्वेदी) को जारी किए गए नोटिस को रद्द कर दिया।न्यायालय ने पाया कि विवादित नोटिस शिकायतकर्ता या गवाहों का शपथ पत्र दर्ज किए...
गैर-जमानती अपराध से जुड़े शिकायत मामले में केवल समन जारी होने पर अग्रिम ज़मानत याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत अग्रिम ज़मानत के दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा कि गैर-ज़मानती अपराध के आरोप से जुड़े किसी शिकायत मामले में केवल समन जारी होने पर अग्रिम ज़मानत याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती, क्योंकि ऐसे मामले में पुलिस द्वारा बिना वारंट के गिरफ़्तारी की कोई आशंका नहीं होती।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने कहा,"...जब ज़मानती वारंट जारी किया जाता है तो हालांकि अभियुक्त को ज़मानती वारंट के अनुसरण में गिरफ़्तारी का डर हो सकता है, लेकिन उसे ज़मानत...
अगर इतना काम है तो ब्रीफ स्वीकार न करें: हाईकोर्ट ने सुनवाई में गैरहाज़िरी पर सरकारी वकील को KDA पैनल से हटाने का दिया आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) के एक पैनल वकील को कोर्ट में उपस्थित न होने और मामले को अपने जूनियर को सौंपने के कारण पैनल से हटाने का निर्देश दिया।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ राजस्व मामले की सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने पाया कि संबंधित वकील ने प्रतिवादी नंबर 1 से 3 की ओर से नोटिस स्वीकार किया था लेकिन सुनवाई के दौरान स्वयं उपस्थित नहीं हुए और उनकी जगह उनका जूनियर वकील कोर्ट में मौजूद था।इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की,"वे कोर्ट में उपस्थित नहीं हैं और उनके...
मामूली वैवाहिक मुद्दों पर आवेश में दर्ज आपराधिक शिकायतें विवाह संस्था को कमजोर करती हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि विवाह एक अत्यंत सामाजिक रूप से प्रासंगिक संस्था है और जब बिना उचित विचार-विमर्श के, क्षणिक आवेश में, मामूली वैवाहिक मुद्दों पर आपराधिक शिकायतें दर्ज की जाती हैं, तो विवाह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जस्टिस विक्रम डी चौहान की पीठ ने आगे कहा कि जब ऐसी शिकायत दर्ज की जाती है, तो पक्षकार इसके निहितार्थों और परिणामों की ठीक से कल्पना नहीं कर पाते, जिससे न केवल शिकायतकर्ता, अभियुक्त और उनके निकट संबंधियों को, बल्कि एक संस्था के रूप में विवाह को भी असहनीय...
कारण बताओ नोटिस का विवरण न होने पर भी सज़ा आदेश अमान्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जब तक कोई स्पष्ट अवैधता नहीं है, सजा के आदेश को केवल इसलिए अमान्य नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि इसमें कारण बताओ नोटिस के सभी विवरण शामिल नहीं हैं।जस्टिस मंजू रानी चौहान की पीठ ने कहा, "इस न्यायालय की राय है कि सजा के आदेश को केवल इस आधार पर अमान्य नहीं ठहराया जा सकता है कि यह विशेष रूप से कारण बताओ नोटिस के विवरण या याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत लिखित उत्तर का उल्लेख नहीं करता है, यदि दोनों के सार पर विधिवत विचार किया गया है और आदेश में चर्चा की गई है। जब तक कोई...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत आदेश में नाम की गलती के कारण 17 दिन ज्यादा जेल में बंद व्यक्ति को रिहा करने का आदेश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है, जो ज़मानत आदेश में उसके नाम की वर्तनी में मामूली गलती के कारण ज़मानत मिलने के बाद भी 17 दिन अतिरिक्त जेल में रहा। संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए, जस्टिससमीर जैन की पीठ ने ज़ोर देकर कहा कि ज़मानत आदेश में अभियुक्त के नाम की वर्तनी में मामूली गलती के आधार पर उसकी स्वतंत्रता पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।एकल न्यायाधीश ने अभियुक्त द्वारा दायर एक सुधार आवेदन पर यह आदेश पारित किया, जिसमें उसने बताया कि हाईकोर्ट के 8...
आपराधिक मामला लंबित होने पर भी मृतक आश्रित को नौकरी से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल आपराधिक मामले का लंबित होना अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता है और नियुक्ति देने के लिए नियोक्ता के विवेकाधिकार का उपयोग निष्पक्ष रूप से किया जाना चाहिए।यह आगे कहा गया कि जिला मजिस्ट्रेट द्वारा दिया गया चरित्र प्रमाण पत्र अनुकंपा नियुक्ति के लिए किसी व्यक्ति के आवेदन पर विचार करने में कुछ महत्व रखता है। अवतार सिंह बनाम भारत संघ सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को ध्यान में रखते हुए, जस्टिस अजीत कुमार ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी...


















