सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने ज़िला कलेक्टरों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू करने का अधिकार दिया, जारी किए दिशा-निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत वैधानिक शक्तियाँ सौंपकर, पूरे देश के ज़िला कलेक्टरों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 लागू करने का अधिकार दिया।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की खंडपीठ ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) को निर्देश दिया कि वह पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 23 के तहत एक अधिसूचना जारी करे, जिसमें धारा 5 के तहत शक्तियाँ एक वर्ष की अवधि के लिए ज़िला कलेक्टरों को सौंपी जाएं। इन शक्तियों में बाध्यकारी निर्देश जारी करने...

सुनिश्चित करें कि सामान्य कट-ऑफ से ज़्यादा स्कोर करने वाले दिव्यांग व्यक्तियों को अनारक्षित रिक्तियों में शामिल किया जाए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से आग्रह किया कि वे 'बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों' (PwBD) के लिए "ऊपरी गति" (upward movement) की नीति लागू करें। इस नीति के तहत, जो PwBD अपनी योग्यता के आधार पर सामान्य कट-ऑफ से ज़्यादा स्कोर करते हैं, उन्हें अनारक्षित रिक्तियों के मुकाबले विचार किया जाएगा।यह देखते हुए कि केंद्र सरकार ने PwBD की नियुक्ति और पदोन्नति उनकी अपनी योग्यता के आधार पर सुनिश्चित करने के लिए पहले ही कार्यकारी निर्देश जारी कर दिए, कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस नीति का पूरी तरह से...

मंदिर पर सिर्फ़ निगरानी की भूमिका निभाने और पुजारियों की नियुक्ति करने से ही मालिकाना हक़ नहीं मिल जाता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि सिर्फ़ इस बात से कि किसी समूह ने मंदिर पर प्रबंधकीय या निगरानी का नियंत्रण रखा है, उसे अपने-आप मंदिर का मालिकाना हक़ नहीं मिल जाता।कोर्ट ने कहा,"सिर्फ़ इस बात से कि किसी संस्था ने मंदिर पर कुछ निगरानी या प्रबंधकीय काम किए, या 'पुजारियों' की नियुक्ति में हिस्सा लिया है, उसे अपने-आप मालिकाना हक़ नहीं मिल जाता।" जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राजस्थान हाईकोर्ट का फ़ैसला रद्द किया। हाईकोर्ट ने राजस्थान के कोटा में स्थित मंदिर 'मूर्ति स्वरूप श्री...

राजस्थान APO परीक्षा 2024: आवेदन के समय लॉ डिग्री न होने पर उम्मीदवार अयोग्य—सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 मई) को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राजस्थान असिस्टेंट प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर (APO) परीक्षा 2024 के उन उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर दिया, जिनके पास आवेदन जमा करने की तिथि पर आवश्यक विधि (लॉ) डिग्री नहीं थी।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने Rajasthan Public Service Commission (राजस्थान लोक सेवा आयोग) की अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी।क्या था मामला?7 मार्च...

'दोनों पक्ष 4 साल तक खुशी-खुशी साथ रहे, बाद में रिश्ते में खटास आ गई': सुप्रीम कोर्ट ने शादी के झूठे वादे पर रेप का मामला रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में शादी के झूठे वादे पर रेप के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने पाया कि यह रिश्ता कई सालों तक आपसी सहमति से बना था और शादी के झूठे वादे के कारण शुरू नहीं हुआ, क्योंकि जब यह रिश्ता शुरू हुआ था, तब दोनों पक्ष पहले से ही किसी और से शादीशुदा थे।कोर्ट ने कहा,"तथ्यों को देखते हुए दोनों पक्षकारों को पता था कि वे पहले से ही किसी और से शादीशुदा हैं। यह भी माना हुआ तथ्य है कि तलाक मिलने से पहले ही, शिकायतकर्ता (महिला) ने शादी के लिए विज्ञापन दे...

'CrPC की धारा 156(3) और 200 के लिए मापदंड अलग-अलग': दूसरी बार धारा 156(3) के तहत याचिका की अनुमति देने वाला आदेश रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) की धारा 156(3) और 200 को लागू करने वाले मापदंड अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें मजिस्ट्रेट के उस निर्देश को सही ठहराया गया था कि CrPC की धारा 156(3) के तहत दूसरी अर्जी पर FIR दर्ज की जाए।CrPC की धारा 156(3) के तहत यह दूसरी अर्जी शिकायतकर्ता ने हाई कोर्ट द्वारा दी गई उस छूट (liberty) के आधार पर दायर की थी, जिसमें उसे पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ CrPC की धारा 200 के तहत...

हेट स्पीच मामलों में स्वतः FIR न दर्ज करना अवमानना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हेट स्पीच के मामलों में पुलिस द्वारा स्वतः (suo motu) FIR दर्ज न करना अपने-आप में अदालत की अवमानना नहीं माना जाएगा। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता ने पहले पुलिस या संबंधित प्राधिकरण के पास शिकायत ही नहीं की, तो अवमानना कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी शिकायत या साक्ष्य के यह मान लेना कि पुलिस ने जानबूझकर आदेशों की अवहेलना की है, उचित नहीं है।पीठ ने कहा कि 21 अक्टूबर...

'तटस्थ रहने वालों' को तीसरे पक्ष के अधिकार पक्के हो जाने के बाद वरिष्ठता विवाद उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 मई) को कहा कि 'तटस्थ रहने वालों' (fence-sitters)—यानी ऐसे लोग जो किसी मुकदमे को बिना दखल दिए किनारे से देखते रहते हैं—को मामला खत्म हो जाने के बाद वरिष्ठता और उसके आधार पर मिलने वाले प्रमोशन से जुड़े विवाद उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा,"यह एक स्थापित कानून है कि तटस्थ रहने वालों को मामला खत्म हो जाने के बाद वरिष्ठता और उसके आधार पर मिलने वाले प्रमोशन से जुड़ा कोई विवाद उठाने या किसी आदेश की वैधता को...

मृत वादी के कानूनी प्रतिनिधियों को 'मुकदमा करने के अधिकार' का हस्तांतरण: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किए सिद्धांत
हाल के एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने किसी पक्ष की मृत्यु के बाद उसके कानूनी प्रतिनिधियों को मुकदमा करने का अधिकार जारी रहने से जुड़े सिद्धांतों को संक्षेप में बताया।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक कहावत 'एक्टियो पर्सनैलिस मोरिटुर कम पर्सोना' (व्यक्तिगत कार्रवाई व्यक्ति की मृत्यु के साथ ही समाप्त हो जाती है) भारत में पूर्ण नहीं है। इसे 'घातक दुर्घटना अधिनियम, 1855', 'कानूनी प्रतिनिधियों के मुकदमे का अधिनियम, 1855' और 'भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925' जैसे कानूनों द्वारा संशोधित किया गया।किसी...

एसिड हमले के पीड़ितों की परिभाषा का दायरा बढ़ाया: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण फैसले में अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए कहा कि जबरन एसिड पिलाए गए लोग और वे पीड़ित जिनके शरीर पर बाहरी विकृति नहीं दिखती लेकिन आंतरिक चोटें हैं, उन्हें भी 'एसिड अटैक पीड़ित' माना जाएगा।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि यह व्याख्या वर्ष 2016 से प्रभावी मानी जाएगी।कानून में कमी को किया दूरअदालत ने कहा कि Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 (दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016) में 'एसिड अटैक पीड़ित' की...

दलित-आदिवासी आरोपियों से थाने साफ करवाने की जमानत शर्तें 'अमानवीय', सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ओडिशा की अदालतों द्वारा जमानत देते समय लगाई गई उन शर्तों पर कड़ी आपत्ति जताई, जिनमें दलित और आदिवासी आरोपियों को दो महीने तक पुलिस स्टेशन साफ करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने इन शर्तों को “आपत्तिजनक (obnoxious)” और जातिगत पक्षपात से प्रेरित बताया।चीफ़ जस्टिस और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह की शर्तें न केवल अपमानजनक और अमानवीय हैं, बल्कि मानवाधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन भी हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी शर्तें न्याय के उद्देश्य को...

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत मेडिकल लापरवाही के लिए डॉक्टर के कानूनी वारिस भी जवाबदेह: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 मई) को फैसला सुनाया कि किसी डॉक्टर की मृत्यु होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत चल रही कार्यवाही में उसके कानूनी वारिसों को उसकी जगह शामिल किया जा सकता है। हालांकि, डॉक्टर की कथित लापरवाही से होने वाले नुकसान के लिए मुआवजे की उनकी जवाबदेही, मृतक से विरासत में मिली संपत्ति तक ही सीमित होगी।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने कहा,"पिछली चर्चा और 1986 के अधिनियम के साथ-साथ 2019 के अधिनियम में दिए गए कानूनी ढांचे को देखते हुए हम इस निष्कर्ष...

कानूनी उपायों का लाभ उठाए बिना FIR दर्ज करवाने के लिए अनुच्छेद 226 का सहारा नहीं लिया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 मई) को यह टिप्पणी की कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल पहली बार में FIR दर्ज करवाने का निर्देश मांगने के लिए नहीं किया जा सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने टिप्पणी की,"अगर किसी व्यक्ति को यह शिकायत है कि पुलिस ने उसकी FIR दर्ज नहीं की, या दर्ज होने के बाद भी ठीक से जांच नहीं की जा रही है तो आमतौर पर इसका समाधान पहली बार में रिट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल करने में नहीं, बल्कि कानूनी ढांचे के तहत उपलब्ध उपायों का...

दहेज से होने वाली मौतों पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित: यूपी, बिहार और कर्नाटक राज्यों का नाम लेकर जताई आपत्ति
दहेज से जुड़ी हिंसा के लगातार बढ़ते खतरे की कड़ी आलोचना करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दहेज से होने वाली मौतें "समाज के कुछ वर्गों में एक गंभीर समस्या" बनी हुई हैं, खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक राज्यों में। कोर्ट ने ये टिप्पणियाँ दहेज से जुड़ी एक मौत के मामले में पति को दी गई ज़मानत रद्द करते हुए कीं।कोर्ट ने ये टिप्पणियां तब कीं, जब उसने एक मृत महिला के पिता द्वारा दायर अपील स्वीकार की। इस अपील में इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द करने की मांग की गई, जिसमें आरोपी पति को ज़मानत दी गई। यह...

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 227 के तहत अधिकार क्षेत्र के इस्तेमाल के लिए सिद्धांत बताए
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि हाईकोर्ट संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत निगरानी वाली रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए उन मुद्दों पर फिर से विचार नहीं कर सकते ताकि ट्रायल कोर्ट के फैसले की जगह अपना फैसला दे सकें।कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट किसी याचिका पर उसके गुण-दोष के आधार पर फैसला देने के लिए अपीलीय अदालत की तरह काम नहीं कर सकता; बल्कि उसकी जांच सिर्फ़ यह तय करने तक सीमित होनी चाहिए कि क्या ट्रायल कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया, या उसका फैसला इतना गलत है कि कोई भी समझदार व्यक्ति...

Order XIII-A CPC | सुप्रीम कोर्ट ने कॉमर्शियल मुकदमों में 'समरी जजमेंट' के लिए गाइडलाइंस तय कीं
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल प्रोसीजर कोड के ऑर्डर XIII-A के तहत कमर्शियल मुकदमों में 'समरी जजमेंट' (संक्षिप्त फैसला) देने के लिए गाइडलाइंस तय कीं।सिविल प्रोसीजर कोड के ऑर्डर XIII-A की व्याख्या करते हुए कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि 'समरी जजमेंट' अहम प्रक्रियात्मक तरीका है, जिसका मकसद कमर्शियल विवादों में काम की गति बढ़ाना और गैर-ज़रूरी मुकदमों को रोकना है।कोर्ट ने साफ किया कि 'समरी जजमेंट' तभी दिया जाना चाहिए, जब बचाव पक्ष की दलीलें सिर्फ़ अटकलों पर आधारित हों या उनके सफल होने की कोई ठोस गुंजाइश न...

ISRO कर्मचारियों को स्थायी नौकरी न देने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, कहा—सरकार को आदर्श नियोक्ता बनना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने ISRO की इकाई में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी “गैंग लेबरर्स” के नियमितीकरण में देरी पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने पहले दिए गए न्यायिक निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया और 2012 की योजना के जरिए उन्हें कमजोर कर दिया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए “Gang Labourers (Employment for Sporadic Types of Work) Scheme, 2012” के उन हिस्सों को भी खारिज कर दिया, जो स्थायी नियुक्ति के बजाय केवल...

हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा—संविधान की आत्मा 'बंधुत्व' को बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच (घृणा भाषण) के मुद्दे पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी भाषा संविधान के मूल मूल्य 'बंधुत्व' (Fraternity) के खिलाफ है और समाज की नैतिक संरचना को कमजोर करती है। हालांकि, कोर्ट ने इस विषय पर कोई सामान्य दिशा-निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया और कहा कि नए अपराध बनाना विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि संविधान केवल संस्थाओं या कानूनों से नहीं चलता, बल्कि नागरिकों की उसके मूल्यों के...

'JAO, IT री-असेसमेंट नोटिस जारी नहीं कर सकते': सुप्रीम कोर्ट ने Finance Act 2026 के आधार पर रद्द किए हाईकोर्ट के फ़ैसले
एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने Income-tax Act, 1961 के तहत री-असेसमेंट नोटिस जारी करने के अधिकार से जुड़े मुद्दे पर नए सिरे से विचार करने के लिए हज़ारों टैक्स अपीलों को संबंधित हाईकोर्ट्स को वापस भेज दिया। Finance Act, 2026 द्वारा किए गए संशोधन पर ध्यान देते हुए—जो यह साफ़ करता है कि ऐसे अधिकार Jurisdictional Assessing Officers (JAO) के पास होते हैं, न कि फ़ेसलेस यूनिट्स के पास—कोर्ट ने इस मामले पर मेरिट के आधार पर फ़ैसला न करने का फ़ैसला किया। इसके बजाय High Courts को निर्देश दिया कि वे...

हेड-ऑन टक्कर में बिना गहन जांच के एक ड्राइवर को अकेले दोषी नहीं ठहराया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि हेड-ऑन (आमने-सामने) टक्कर के मामलों में बिना सभी परिस्थितियों और पक्षों के आचरण की गहन जांच किए, किसी एक ड्राइवर पर पूरा दोष नहीं डाला जा सकता।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसलों को रद्द कर दिया। दोनों ने मृत कार चालक को दुर्घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया था।सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि निचली अदालतों ने 'सह-लापरवाही'...
