सुप्रीम कोर्ट

बार और बेंच न्याय के रथ के दो पहिए, आपसी टकराव से न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ सकता है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट यतीन ओझा के खिलाफ अवमानना कार्यवाही बंद करते हुए कहा कि बार और बेंच “न्याय के रथ के दो पहिए” हैं और इनके बीच टकराव न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकता है।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदूरकर की खंडपीठ ने कहा कि वकालत पेशा और न्यायपालिका न्याय व्यवस्था के दो मूल स्तंभ हैं और दोनों को परस्पर सम्मान व संयम बनाए रखना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह मामला बार और बेंच के बीच “दुर्भाग्यपूर्ण टकराव” का उदाहरण है।मामला वर्ष 2020 का है, जब कोविड-19...

कथित जातिगत गाली-गलौज किसी निजी घर के अंदर किए जाने पर SC/ST Act के तहत कोई अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (11 मई) को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मामला रद्द किया। इस व्यक्ति पर आरोप था कि उसने एक घर की चारदीवारी के अंदर, अनुसूचित जाति श्रेणी से ताल्लुक रखने वाले शिकायतकर्ता के साथ जाति-आधारित गाली-गलौज की थी।चूंकि FIR में यह ज़िक्र नहीं था कि अपीलकर्ता नंबर 1 और अन्य अपीलकर्ताओं द्वारा गाली-गलौज और धमकाने की कथित घटना किसी ऐसी जगह पर हुई, जहां आम लोगों की नज़र पड़ सकती हो, इसलिए कोर्ट ने यह माना कि SC/ST...

Order XII Rule 6 CPC | आपराधिक मामले में की गई स्वीकारोक्ति का इस्तेमाल सिविल कार्यवाही में किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश XII नियम 6 के तहत स्वीकारोक्ति पर आधारित फैसला, उन स्वीकारोक्तियों पर भी आधारित हो सकता है, जो लिखित दलीलों (Pleadings) के बाहर की गई हों।ट्रायल कोर्ट, पहली अपीलीय अदालत और हाईकोर्ट के एक जैसे फैसलों में दखल देने से इनकार करते हुए जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने प्रतिवादी (Defendant) की याचिका खारिज की। इस प्रतिवादी को आपराधिक कार्यवाही के दौरान की गई स्वीकारोक्तियों के आधार पर विवादित जगह खाली करने का...

यतिन ओझा को सुप्रीम कोर्ट की 'अंतिम माफी', अवमानना दोषसिद्धि और सजा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट यतिन ओझा को बड़ी राहत देते हुए गुजरात हाईकोर्ट द्वारा 2020 के आपराधिक अवमानना मामले में दी गई दोषसिद्धि और सजा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित (In Abeyance) कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि उन्होंने इसी तरह का कोई आचरण दोहराया, तो गुजरात हाईकोर्ट की सजा और दोषसिद्धि फिर से प्रभावी की जा सकती है।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। मामला कोविड-19 अवधि के दौरान गुजरात हाईकोर्ट प्रशासन के खिलाफ यतिन ओझा...

पत्नी को जानवर की तरह नहीं रख सकता पति, उसे सम्मान के साथ जीने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा के आरोपी एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि पति अपनी पत्नी के साथ जानवरों जैसा व्यवहार नहीं कर सकता और उसे सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की खंडपीठ आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है।मामले में आरोप है कि आरोपी ने शराब के नशे में अपनी पहली पत्नी के साथ मारपीट की। शिकायत के अनुसार, उसने पत्नी को जमीन पर फेंक दिया,...

जमानत याचिकाओं के जल्द निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाइकोर्ट्स को दिए अहम सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाइकोर्ट्स में लंबित जमानत याचिकाओं पर चिंता जताते हुए उनके त्वरित निपटारे के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। अदालत ने कहा कि जमानत मामलों की सुनवाई और सूचीबद्ध करने में हो रही देरी गंभीर चिंता का विषय है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें पहले देश के सभी हाइकोर्टों से लंबित जमानत याचिकाओं का ब्योरा मांगा गया था।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिकांश हाइकोर्ट्स ने समय पर जानकारी उपलब्ध कराई और जमानत मामलों के...

असफल उम्मीदवारों के अंकों को प्रकाशित न करने से यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि वे परीक्षा में पास हो गए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि जहां भर्ती नियमों या विज्ञापन में उम्मीदवारों के अंकों को सार्वजनिक करने या प्रकाशित करने का प्रावधान नहीं है, वहां जिस उम्मीदवार का नाम मेरिट लिस्ट में नहीं है, वह केवल इस आधार पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता कि उसके अंक सार्वजनिक नहीं किए गए।जस्टिस पामिदिघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने दुर्गापुर स्टील प्लांट द्वारा दायर अपील पर सुनवाई की। इस अपील में कलकत्ता हाईकोर्ट के उस निर्देश को चुनौती दी गई, जिसमें प्रतिवादियों को 'प्लांट अटेंडेंट'...

Order VII Rule 11 CPC | यह देखने के लिए कि क्या कानूनी रोक को चालाकी भरी ड्राफ़्टिंग से छिपाया गया, वाद-पत्र को ध्यान से पढ़ा जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
CPC के आदेश VII नियम 11 के दायरे पर महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट को वाद-पत्र की "ध्यान से और पूरी तरह" जांच करनी चाहिए ताकि यह देखा जा सके कि क्या किसी कानूनी रोक को चालाकी भरी ड्राफ़्टिंग के ज़रिए छिपाया गया।कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर तथ्यों को जान-बूझकर छिपाया गया हो तो वाद-पत्र को खारिज किया जा सकता है।कोर्ट ने कहा,"ट्रायल कोर्ट को ऐसे बेतुके मुकदमों को रोकना चाहिए, जो कानून द्वारा वर्जित हैं। साथ ही ऐसे मामलों को भी, जहां कार्रवाई का कारण (Cause of Action) केवल एक...

S. 25 Hindu Succession Act | हत्या का आरोपी, मारे गए व्यक्ति की संपत्ति पर उत्तराधिकार का दावा नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक वादी को किसी मृतक द्वारा बनाई गई वसीयत के आधार पर संपत्ति का उत्तराधिकार पाने से अयोग्य घोषित किया। कोर्ट ने यह पाया कि वह वादी, उस मृतक की हत्या के मामले में आरोपी के तौर पर नामजद है।कोर्ट ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (Hindu Succession Act) की धारा 25 के तहत मिली शक्ति का इस्तेमाल करते हुए वादी को अयोग्य घोषित किया। यह धारा यह प्रावधान करती है कि जो व्यक्ति किसी की हत्या करता है, या हत्या करने में किसी की मदद करता है, वह मारे गए व्यक्ति की संपत्ति का...

UAPA-NDPS मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतें स्थापित हों: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने UAPA, NDPS जैसे विशेष कानूनों के तहत लंबित मामलों के समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्यों को विशेष अदालतें स्थापित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि NIA Act की धारा 11 के तहत विशेष अदालतें बनाई जाएं, जहां केवल ऐसे मामलों की सुनवाई हो और कोई अन्य मुकदमा न सौंपा जाए।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें विशेष कानूनों के तहत मामलों के लिए एक्सक्लूसिव कोर्ट स्थापित करने का मुद्दा उठाया...

बेनामी लेन-देन में खरीदी गई संपत्ति पर असली मालिक, बेनामीदार द्वारा बनाई गई वसीयत के आधार पर दावा नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि कोई भी व्यक्ति बेनामी लेन-देन में खरीदी गई संपत्ति पर, केवल उसके नाममात्र के मालिक (Ostensible Owner) द्वारा बनाई गई वसीयत के आधार पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की वसीयत संबंधी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल 'बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध अधिनियम, 1988' केतहत मौजूद कानूनी रोक को खत्म करने के लिए नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने शुक्रवार (8 मई) को यह भी फैसला दिया कि किसी व्यावसायिक अनुबंध के तहत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दिए गए...

रेलवे, बिजली अधिनियम के तहत 'उपभोक्ता', 'डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी' नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (8 मई) को फैसला सुनाया कि रेलवे, बिजली अधिनियम, 2003 के अर्थ के तहत एक 'उपभोक्ता' है। इस फैसले के साथ ही रेलवे का वह दावा खारिज हो गया, जिसमें वह 'डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी' (माना गया वितरण लाइसेंसी) का दर्जा मांग रहा था, ताकि वह वितरण कंपनियों को क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज और अतिरिक्त सरचार्ज का भुगतान करने से बच सके।कोर्ट ने कहा कि भारतीय रेलवे एक बंद और आत्मनिर्भर बिजली नेटवर्क चलाता है, जिसका एकमात्र उद्देश्य उसकी अपनी आंतरिक परिचालन ज़रूरतों को पूरा करना है—जिसमें...

उपभोक्ताओं से उस अवधि के लिए मूल्यह्रास नहीं वसूला जा सकता, जिस दौरान उन्हें बिजली की सप्लाई न की गई: सुप्रीम कोर्ट
बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (7 मई) को यह टिप्पणी की कि बिजली उपभोक्ताओं पर उस पावर प्लांट के डेप्रिसिएशन की लागत चुकाने का बोझ नहीं डाला जा सकता, जिससे उन्हें अब बिजली की सप्लाई नहीं मिल रही है; भले ही उस एसेट (संपत्ति) की तकनीकी उपयोगिता अवधि अभी बाकी हो।जस्टिस पामिदिघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने टिप्पणी की,"...यह स्वीकार्य है कि मार्च 2018 के बाद उपभोक्ताओं को बिजली की सप्लाई नहीं की गई। उपभोक्ताओं से ऐसी सेवा के लिए भुगतान करने की...

S.294 CrPC | आरोपी चार्जशीट का हिस्सा बन चुके दस्तावेज़ों को बिना हस्ताक्षर के औपचारिक सबूत के भी पेश कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि जब कोई आरोपी बचाव पक्ष की ओर से कुछ ऐसे दस्तावेज़ पेश करना चाहता है, जो पहले से ही चार्जशीट और अभियोजन पक्ष के रिकॉर्ड का हिस्सा हैं, तो उन्हें औपचारिक रूप से साबित करने की ज़रूरत नहीं होती। ऐसे दस्तावेज़ों को उन पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर साबित किए बिना भी सबूत के तौर पर पढ़ा जा सकता है।कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 294(3) का हवाला दिया। इस धारा के अनुसार, यदि किसी दस्तावेज़ की प्रामाणिकता पर कोई विवाद नहीं है तो उसे सबूत के तौर...

पैरा-टीचर्स का रेगुलराइज़ेशन का दावा राज्य द्वारा तय किए गए शैक्षिक मानकों के अधीन: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए टीचर सिर्फ़ अपनी लंबी सेवा के आधार पर किसी न्यायिक आदेश के ज़रिए रेगुलराइज़ेशन का दावा अपने अधिकार के तौर पर नहीं कर सकते; क्योंकि इससे वैधानिक नियमों के बाहर सार्वजनिक भर्ती का एक समानांतर तरीका बन जाता है।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस SVN भट्टी की बेंच ने कहा कि जहां एक तरफ़ एड-हॉक टीचर का सरकारी टीचर बनने की "इच्छा" रखना उचित है, वहीं दूसरी तरफ़ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए उम्मीदवारों की "उपयुक्तता" का आकलन करना भी राज्य का कर्तव्य...

संजय कपूर की संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया
सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर और पत्नी प्रिया कपूर ने रानी कपूर फैमिली एस्टेट विवाद को मध्यस्थता (Mediation) के जरिए सुलझाने पर सहमति जताई है। इस पारिवारिक विवाद में पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने दोनों पक्षों की सहमति के बाद मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। कोर्ट ने पक्षकारों से खुले मन से मध्यस्थता प्रक्रिया में भाग लेने और सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर...

'राजस्व रिकॉर्ड से मालिकाना हक साबित नहीं होता': सुप्रीम कोर्ट ने भूमि स्वामित्व पर कानूनी सिद्धांत स्पष्ट किए
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (6 मई) को कहा कि राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Entries) केवल कब्जे का प्रमाण हो सकते हैं, लेकिन वैध स्वामित्व दस्तावेजों के अभाव में उन्हें जमीन के मालिकाना हक का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि केवल जमाबंदी, पहानी या अन्य राजस्व प्रविष्टियों के आधार पर भूमि पर मालिकाना दावा नहीं किया जा सकता, जब तक कि प्राथमिक शीर्षक दस्तावेज (Title Documents) पेश न किए...

अनुशासनात्मक प्राधिकारी बिना नए कारण बताओ नोटिस के कर्मचारी को ऐसे आरोप के लिए दंडित नहीं कर सकता, जो मूल रूप से तय नहीं किया गया: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (6 मई) को फैसला सुनाया कि कोई भी दोषी कर्मचारी, जिसने अपने ऊपर लगे आरोप का सफलतापूर्वक बचाव किया, उसे किसी ऐसे नए आरोप के आधार पर सेवामुक्त नहीं किया जा सकता, जिसके बचाव का उसे अवसर ही न दिया गया हो।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने रिटायर बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा दायर अपील पर सुनवाई की। इस विशेषज्ञ को, पटना मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के निरीक्षण के दौरान जमा किए गए एक घोषणा पत्र में यह जानकारी छिपाने के कारण तीन महीने के लिए...

S.28 Specific Relief Act | खरीदार की चूक के कारण बिक्री समझौता रद्द करने के लिए अलग से आवेदन की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (6 मई) को यह टिप्पणी की कि यदि कोई डिक्री-धारक (जिसके पक्ष में फैसला आया हो) तय समय सीमा के भीतर बिक्री की शेष राशि जमा करने में विफल रहता है तो बिक्री समझौते के 'विशिष्ट पालन' (specific performance) के लिए जारी डिक्री को लागू नहीं किया जा सकता, जिसके परिणामस्वरूप वह अनुबंध (contract) रद्द हो जाता है।कोर्ट ने यह फैसला दिया कि खरीदार की चूक के कारण अनुबंध रद्द करने के लिए 'निर्णय-ऋणी' (जिसके खिलाफ फैसला आया हो) द्वारा अलग से आवेदन देना अनिवार्य नहीं है।जस्टिस पंकज मित्तल...

ट्रायल में देरी के आधार पर 22 किलो गांजा रखने के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (5 मई) को लगभग 22 किलोग्राम गांजा रखने के आरोपी एक व्यक्ति को नियमित जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि आरोपी एक वर्ष से अधिक समय से जेल में है और अब तक ट्रायल में एक भी गवाह का परीक्षण नहीं हुआ है, जिससे मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं दिखती।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने आरोपी को विवेकाधीन राहत देते हुए जमानत प्रदान की। आरोपी के खिलाफ NDPS Act की धारा 8(c), 20(b)(ii)(c) और 29(1) के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले में वाणिज्यिक मात्रा...
