पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पहली पत्नी की मृत्यु के बाद हुई शादी, फिर भी 'दूसरी पत्नी' बताकर आधी पेंशन नहीं रोकी जा सकती: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फैमिली पेंशन से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के समय केवल एक ही विधवा जीवित है और पहली पत्नी से कोई पात्र आश्रित मौजूद नहीं है, तो जीवित विधवा को पूरी यानी 100 प्रतिशत फैमिली पेंशन मिलेगी। केवल उसे दूसरी पत्नी बताकर पेंशन का आधा हिस्सा रोका नहीं जा सकता।जस्टिस नमित कुमार ने कहा कि पेंशन के बंटवारे का नियम तभी लागू होता है, जब एक ही समय में एक से अधिक पात्र दावेदार मौजूद हों। यदि केवल एक ही पात्र व्यक्ति है तो राज्य सरकार...

स्वास्थ्य का अधिकार जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा, मेडिकल प्रतिपूर्ति नीतियों पर पुनर्विचार जरूरी: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति से जुड़े मामलों में मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने का संकेत दिया।जस्टिस संदीप मौद्गिल ने मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति से जुड़े कई मामलों का निस्तारण करते हुए कहा कि सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं की व्याख्या...

पेशेवर रूप से सक्रिय पत्नी की यात्रा न कर पाने की दलील पर भरोसा नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तलाक का केस ट्रांसफर करने से इनकार किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक पत्नी की ट्रांसफर याचिका खारिज की। पत्नी ने अपने पति द्वारा दायर तलाक के केस को अमृतसर से होशियारपुर ट्रांसफर करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसा ट्रांसफर करने के लिए कोई ठोस आधार या वास्तविक कठिनाई नहीं दिखाई दी।जस्टिस निधि गुप्ता ने कहा,"इसके अलावा, रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी, जिसमें प्रतिवादी नंबर 1 द्वारा लगाई गई तस्वीरें भी शामिल हैं, उससे पता चलता है कि याचिकाकर्ता-पत्नी पेशेवर रूप से सक्रिय है। इसलिए पहली नज़र में यह दलील कि वह अमृतसर की यात्रा करने में...

पूर्व IAS अधिकारी अशोक खेमका को 'एम्पैनल्ड एडिशनल सेक्रेटरी' माना जाए, नियुक्ति न करने के फैसले को मनमाना: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रिटायर्ड IAS अधिकारी अशोक खेमका की याचिका को मंज़ूरी दी। कोर्ट ने कहा कि भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव/सचिव के पद के लिए एम्पैनलमेंट (सूचीबद्ध करने) से इनकार करना - जबकि अन्य अधिकारियों को ऐसी ही छूट दी गई - भेदभावपूर्ण है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की डिवीज़न बेंच सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। CAT ने खेमका के एम्पैनलमेंट के दावे को इस...

बिल्डर की लापरवाही का खामियाजा नहीं भुगतेंगे खरीदार: हाईकोर्ट ने 500 से अधिक परिवारों को अस्थायी बिजली देने का दिया आदेश
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जीरकपुर स्थित सुषमा वेलेंसिया अपार्टमेंट परियोजना में रहने वाले 500 से अधिक परिवारों को बड़ी राहत देते हुए अस्थायी बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने का आदेश दिया।हाईकोर्ट ने कहा कि भीषण गर्मी के बीच लोगों को केवल तकनीकी औपचारिकताओं के कारण बुनियादी सुविधा से वंचित नहीं रखा जा सकता।मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस संजय वशिष्ठ ने कहा,"देश के नागरिक एक कल्याणकारी राज्य में रहते हैं और उन्हें व्यवस्था या प्रशासन की विफलता के कारण बेसहारा नहीं छोड़ा जा सकता। भीषण गर्मी में छोटे...

NDPS Act| गाड़ियां कबाड़ बन जाती हैं, कीमत खत्म हो जाती है: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दिया ज़ब्त गाड़ियों को छोड़ने का आदेश
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने NDPS मामले में ज़ब्त किए गए एक ट्रक को फाइनेंशियल बॉन्ड पर छोड़ने का आदेश दिया। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि गाड़ियों को लंबे समय तक बेकार खड़ा रखने से वे खराब हो जाती हैं, आर्थिक नुकसान होता है और इससे कोई फायदा नहीं होता।जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर ने कहा,"...जब ज़ब्त की गई किसी गाड़ी को पार्किंग में खड़ा करके इस्तेमाल नहीं किया जाता तो इसका कोई मकसद पूरा नहीं होता। आखिरकार, यह गाड़ी सड़क पर चलने लायक नहीं रह जाती और इसे तोड़कर कबाड़ बनाना पड़ता...

पति/पत्नी का अपने पुराने पार्टनर से एक बार मिलना ही अकेले व्यभिचार नहीं माना जाएगा: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था कि पति या पत्नी का अपने पुराने पार्टनर से सिर्फ़ एक बार मिलना अपने आपमें व्यभिचार नहीं माना जा सकता।साथ ही कोर्ट ने दोहराया कि पति या पत्नी और उनके परिवार वालों पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाना मानसिक क्रूरता मानी जाएगी, जिसके आधार पर तलाक़ दिया जा सकता है।जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस रमेश कुमार ने कहा,"ट्रायल कोर्ट ने अपने सही विवेक से यह भी पाया कि 11.01.2023 को पत्नी का अकेले ही दूसरे व्यक्ति (रेस्पोंडेंट...

PM Modi से जुड़े कथित वीडियो मामले में मधु किश्वर को अग्रिम जमानत से राहत नहीं, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने लेखिका और सोशल एक्टिविस्ट मधु किश्वर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े कथित वीडियो को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर साझा करने के मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार किया। हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं का खुलासा होना बाकी है।जस्टिस अमन चौधरी ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित वीडियो भले ही पहले अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाला गया, लेकिन याचिकाकर्ता द्वारा अपनी टिप्पणियों के साथ उसे साझा किए जाने के बाद उसे लगभग 1.74 लाख...

मुकदमेबाज़ वकील पर दोष मढ़कर सालों की देरी के बाद खत्म हो चुकी कार्यवाही को दोबारा शुरू नहीं कर सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (criminal revision petition) को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज करने वाला आदेश वापस लेने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने यह माना कि किसी मुकदमेबाज़ को बार-बार मौके दिए जाने के बाद भी केवल अपने वकील की गलतियों का आरोप लगाकर लंबे समय से लंबित कार्यवाही को दोबारा शुरू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।जस्टिस नीरजा के. कालसन ने कहा,"रिकॉर्ड से जो आचरण सामने आया, वह किसी एक तारीख के किसी एक काम तक ही सीमित नहीं है। बल्कि, इस कोर्ट द्वारा बार-बार मौके...

सरकारी कर्मचारी द्वारा किसी समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों का सामाजिक प्रभाव ज़्यादा होता है: हाईकोर्ट ने अग्रिम ज़मानत से किया इनकार
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (UHBVNL) के अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) गीतू राम तंवर द्वारा दायर अग्रिम ज़मानत की दूसरी याचिका खारिज की। यह याचिका एक FIR के संबंध में दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने एक वीडियो प्रसारित किया था, जिसमें विशेष समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां थीं।जस्टिस सुमीत गोयल ने टिप्पणी की,"जांच के दौरान इकट्ठा की गई सामग्री से पहली नज़र में यह पता चलता है कि बातचीत के दौरान एक विशेष समुदाय को निशाना बनाते...

कुछ दिव्यांग कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का फ़ायदा हटाना उचित: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के उस फ़ैसले को सही ठहराया, जिसमें उसने अपने सर्विस नियमों में बदलाव करके कुछ खास कैटेगरी के दिव्यांग कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का फ़ायदा वापस ले लिया था। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों की अलग-अलग कैटेगरी के लिए रिटायरमेंट की अलग-अलग उम्र तय करना कोई गैर-कानूनी भेदभाव नहीं है।जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर ने कहा,"यह बात पूरी तरह से तय है कि एम्प्लॉयर (नियोक्ता) के पास यह पूरा अधिकार है कि वह काम की प्रकृति और जनसेवा की...

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश: आग में जले दस्तावेज दोबारा तैयार कराने के लिए उम्रकैद कैदी को पैरोल
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उम्रकैद कैदी को आग की घटना में नष्ट हुए जरूरी दस्तावेज दोबारा तैयार कराने के लिए 8 सप्ताह की पैरोल देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि केवल शांति भंग होने की आशंका के आधार पर पैरोल से इनकार करना कानूनन सही नहीं माना जा सकता।जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा,“मामले के तथ्यों से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता की समाज में गहरी जड़ें हैं और अपने भाई से मिलने तथा आग में जल चुके दस्तावेज दोबारा तैयार कराने के लिए पैरोल मांगने का उसका कारण उचित...

जुर्माना न भरने पर जेल की सज़ा, बकाया रकम के अनुपात में होनी चाहिए: NI Act मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामले में दोषी की सज़ा घटाकर उतनी की, जितनी वह पहले ही काट चुका है, जबकि शिकायतकर्ता को दी जाने वाली मुआवज़े की रकम बढ़ा दी। कोर्ट ने इस सिद्धांत पर ज़ोर दिया कि जब पैसे के बकाया का भुगतान न करने पर जेल की सज़ा दी जाती है तो "आज़ादी की कीमत भी अनुपात में होनी चाहिए।"जस्टिस अनूप चितकारा ने कहा,"आपराधिक न्यायशास्त्र में एक मुख्य सैद्धांतिक चिंता के तौर पर जो मूल सिद्धांत उभरा है, वह यह है कि जुर्माना/मुआवज़े की रकम न भरने के कारण जेल में बंद होने से अपनी...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मरीज़ों को लुभाने के लिए 'जानबूझकर' पैकेज रेट कम करने वाले पैनल में शामिल अस्पतालों पर सख्ती की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक को आदेश दिया कि वे पैनल में शामिल सभी अस्पतालों के पैकेज रेट की जाँच करें और पॉलिसी के उल्लंघन के मामलों में सख्त कार्रवाई करें, जिसमें लाइसेंस रद्द करना भी शामिल है।कोर्ट ने अस्पतालों की उस प्रथा के खिलाफ भी चेतावनी दी, जिसमें वे मरीज़ों को लुभाने के लिए जानबूझकर कम पैकेज रेट देते हैं। बाद में ज़रूरी प्रक्रियाओं के लिए अलग से पैसे वसूलते हैं; कोर्ट ने कहा कि ऐसे आचरण की अनुमति नहीं दी जा सकती।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 24 साल पुराने 'घोषित अपराधी' का आदेश रद्द किया, कहा - आरोपी को कार्यवाही की जानकारी नहीं थी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को 'घोषित अपराधी' करार देने वाला 24 साल पुराना आदेश रद्द किया। कोर्ट ने पाया कि ट्रायल की कार्यवाही से उसकी गैरमौजूदगी जानबूझकर नहीं थी, बल्कि उसे इस बारे में जानकारी ही नहीं थी।जस्टिस राजेश भारद्वाज ने कहा कि याचिकाकर्ता आदेशों के बावजूद गैरमौजूद रहा, क्योंकि उसे चल रही कार्यवाही के बारे में पता ही नहीं था। इसकी वजह यह थी कि वह गुजरात में रह रहा था। लेकिन अब याचिकाकर्ता कार्यवाही में शामिल होने और ट्रायल का सामना करने के लिए उत्सुक और तैयार है।कोर्ट एक...

अफीम की खेती में कोई 'व्यावसायिक मात्रा' नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने NDPS के तहत 20 साल की सज़ा को 'स्पष्ट रूप से अवैध' बताया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक ट्रायल कोर्ट ने अफीम के पौधों की खेती से जुड़े एक मामले में NDPS Act की धारा 18(b) के तहत एक आरोपी को 20 साल की कठोर कारावास की सज़ा देकर "स्पष्ट रूप से अवैध" काम किया। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि अफीम के पौधों की खेती को "व्यावसायिक मात्रा" से जुड़ा मामला नहीं माना जा सकता।बता दें, धारा 18(b) अफीम के पौधों और अफीम से जुड़े उल्लंघन के लिए सज़ा का प्रावधान करती है। यदि उल्लंघन में व्यावसायिक मात्रा शामिल हो तो इसके लिए कम-से-कम दस साल की...

डॉक्टरों के बिना अस्पताल सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत, स्वास्थ्य सेवाएं कागजी आश्वासन नहीं हो सकतीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में आयुष विभाग के डॉक्टरों की असमान तैनाती पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं केवल कागजी आश्वासन बनकर नहीं रह सकतीं। अदालत ने कहा कि डॉक्टरों के बिना अस्पताल केवल ईंट-पत्थर की इमारत बनकर रह जाते हैं, जो नागरिकों के जीवन के अधिकार की रक्षा नहीं कर सकते।जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा,“संवैधानिक मूल्यों से संचालित कल्याणकारी राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं केवल आंकड़ों या कागजी दावों तक सीमित नहीं रह सकतीं। यह जमीनी स्तर पर डॉक्टरों और कार्यरत...

PCPNDT Act में रिकॉर्ड रखने में लापरवाही गंभीर अपराध, इसे मामूली गलती नहीं माना जा सकता: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बरनाला की क्लीनिक संचालिका की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि PCPNDT Act के तहत अनिवार्य रिकॉर्ड, विशेषकर फॉर्म एफ का सही रखरखाव नहीं करना गंभीर कानूनी उल्लंघन है और इसे केवल तकनीकी या प्रक्रियात्मक चूक नहीं माना जा सकता।जस्टिस रमेश चंदर दिमरी ने 80 वर्षीय डॉ. पुष्प लता मित्तल की याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।डॉ. मित्तल को गर्भाधान पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 की धारा 29 के उल्लंघन का दोषी ठहराया गया, जिसके लिए धारा 23 के...

नेशनल हाईवेज़ अधिग्रहण | पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बढ़ी हुई मुआवज़े की रकम पर ज़्यादा ब्याज़ देने का फ़ैसला सुनाया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि जिन ज़मीन मालिकों की ज़मीन नेशनल हाईवेज़ एक्ट के तहत अधिग्रहित की जाती है, वे 'भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवज़े और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' के ज़्यादा फ़ायदेमंद प्रावधानों के तहत ब्याज़ पाने के हकदार हैं, न कि सिर्फ़ 1956 के एक्ट के सीमित दायरे के तहत।ज़मीन मालिकों की तरफ़ से दायर याचिका को मंज़ूर करते हुए जस्टिस हरकेश मनुजा ने "एक आर्बिट्रल अवार्ड में बदलाव करते हुए 2013 के एक्ट की धारा 72 के मुताबिक ज़मीन पर...

जितना गंभीर अपराध, उतने मजबूत सबूत जरूरी: दुष्कर्म साजिश मामले में महिला को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने किया बरी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्ष 2002 के दुष्कर्म मामले में आपराधिक साजिश के आरोप में दोषी ठहराई गई महिला को बरी करते हुए कहा कि केवल शक या सीमित भूमिका के आधार पर किसी व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस रूपिंदरजीत चहल ने कहा,“अपराध कितना भी गंभीर या विचलित करने वाला क्यों न हो, केवल संदेह कानूनी सबूत का स्थान नहीं ले सकता। आपराधिक न्याय व्यवस्था का स्थापित सिद्धांत है 'जितना गंभीर अपराध, उतने मजबूत सबूत।' इसलिए कानून स्पष्ट रूप से कहता है...
